Sunday, 4 February 2018

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-16
सुनील उपाध्याय परिवारको नर्मदे हर करके सुबह पांच बजे हमारी दो डिब्बोंकी विनोबा एक्सप्रेस चल पडी।आज मौसम खराब है।रिमझिम रिमझिम बरसात हो रही है,रास्ता हायवे है।इसलिये चलना सुखद है।मानेगांव,गुंदरई,सुरवारीमे एक टपरीवाले संतोषकुमारने नर्मदे हर किया।उसका छोटासा टायर पंक्चर निकालनेका और गॅरेज है,चायकी भी दुकान है।कुछ दिन वो मुंबईमें रहा था इसलिये हमसे मराठी बोल रहा था।चाय दिया।
नर्मदे हर!देखो!मैयाके भक्त बच्चोंका मैयाके प्रति,परिक्रमावासीओंके प्रतिका भक्तिभाव।हम संतोषकुमारको नर्मदे हर करके आगे चल रहे थे,पिछेसे किसीने थकानभरे आवाजमे पुकारा,माताजी नर्मदे हर!देखा तो सुशील उपाध्याय के मामाजी पंडीत तिवारीजी सायकलसे उतर रहे थे।नर्मदे हर! आप?हां!सुशील ने कहा,आप जल्दी चले गये,प्रणाम करना,दक्षिणा देना रह गया इसलिये आ गया।हमसे उमरमे बड़े सत्तर सालकी उमरवाले पंडीतजी हमारे पैर छुने लगे,ये क्या कर रहे हो भाईसाब हम छोटे है आपसे पैर तो हम छुएंगे आपके।नही नही आप मैया हो,पैदल परिक्रमा कर रही हो,प्रणाम करना,दक्षिणा देना हमारा फर्ज है।नर्मदे हर!इस श्रद्धाके आगे हम नतमस्तक है।
आगे दुर्गाप्रसाद कोतवाल गॅरेजवाले बंधुने नर्मदे हर करके चाय दिया,नही चाहिये ऐसा भी नही कह सकते।
बेलखेडी शेर गावके आगे शेरमैयाका ब्रिज है।बाजुमेही लुडकानाबाबा मंदिर है।छोटासा सुंदर बगिचा,हॅण्डपंप है।शेरमैया,किनारेलगत के हरेभरे पहाड सुंदर नजारा। परिक्रमावासी रूक सकते है।
बोहरीपार,यहॉ हनुमानमंदिर है।छोटीसी धरमशाला भी है।सुबह के बादल भाग गये थे,सुरज चाचू आग बरसने लगे थे।टोलनाका आया,बैठ गये।केवल पटेलने चाय दिया।आज आठ दस बार चाय हो गया,हरबन्स पटेलने दक्षिणा दे दी।नरसिंहपुर फ्लायओव्हरके बाजुमे हनुमानदादा मंदिरमे दर्शन करके आगे चले। धूपने बेहाल किया था।पैर अक्षरशः खीचते चल रहे थे।एक ढाबेपर दाल-चावल,दही भोजनप्रसाद लिया।
हायवे छोडके नरसिंहपुर शहरमे जाने लगे।रेल्वेक्रॉसिंगसे शहरमे प्रवेश किया।डिस्ट्रिकप्लेस है।रेल्वेस्टेशनके सामनेका कचरा?रास्तेमे कचरा या कचरेमे रास्ता समझमे नही आ रहा था। बहुतही गंदा शहर है।बाजाररोडसे चलने लगे,बहुत थक गये थे।अब रूकना जरूरी था,एक चौराहेपर मेरी नजर एक हॉस्पिटलके बोर्डपर गयी।डॉक्टर चांदोरकर।नामसे वो महाराष्ट्रीय होगे ऐसा लगा,गये अंदर।हमारा परिचय दिया और निवासभिक्षा मांगी।मराठीमे बात करते उन्होने सहर्ष स्वागत किया।नर्मदे हर!
. क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-17
चांदोरकर 1927 मे महाराष्ट्रसे आके नरसिंहपुरमे स्थायिक हुए है ।डॉक्टर संजीव चांदोरकर के दादाजी बॅरिस्टर थे,पिताजी डॉक्टर थे और डॉक्टर संजीव चांदोरकर काड्रिऑलॉजिस्ट है।बेटा बहू भी डॉक्टर है।सौ.स्वाती संजीव चांदोरकर पी.एच.डी.है।एक एन.जी.ओ.चलाती है। दोनो पती पत्नी भा.ज.पा.के नेता है।
हॉस्पिटल के साथही डॉक्टर भाईसाब को ऑरगॅनिक खेती करना पसंद है।बंगलेके पिछे सब्जी,फल फूल है।सोलर प्लांट है।रेन वॉटर हार्वेस्टिंग किया है।पहले एक गाय थी अब उससे पांच हो गयी है।दूध दही घी की रेलचेल है।गोबरगॅस प्लांट है।दुसरी खेती भी है।सिर्फ नमक बाजारसे खरीदना पडता है।बडे उत्साह से हमको सब दिखाया।निगर्वी व्यक्तिमत्व है।बोले,आपके आनेसे कोई अपने गांवसे रिश्तेदार आ गए ऐसा लगा।वहिनी(भाभी)भी बहुत प्यारी है।बोली,अपना महाराष्ट्रीयन स्वयंपाक करती हूँ।बहुत दिनसे वैसा भोजन नही किया होगा नं?सच वहिनी पिठलं-भात बनाओ।महाराजपुरमे साठे वहिनीने बनाए पोहे के बाद आज महाराष्ट्रीयन भोजन करेंगे।वैसे मध्यप्रदेशका भोजन भी अच्छाही होता है,मगर तिखा बहुत होता है,अपने खानदेश जैसा।फिर क्या मज़ा आया।
गाडासराईमे डॉक्टर चौरासिया,महाराजपुरमे रितेश राय और शरद साठे,और अब नरसिंहपुरमे डॉक्टर चांदोरकर,और भी सारे मेरे रिश्तेदार है मेरे अपने।मेरा मायका मध्यप्रदेश!
सुबह स्नान पुजा होतेही भाईसाबने खुद ताजे दुधका चाय बनाया।नर्मदे हर।रहो दो-चार दिन,परिक्रमा होती रहेगी,पैर ठीक होने दो बादमे जाना।कह रहे थे।अगली बार रहेंगे।आज जाने दो।नर्मदे हर।
भावपुर्ण अलविदा करके चल पडे तब घड़ी छे बजे दिखा रही थी।शहरसे जाते जाते जिसके नामसे शहर जाना जाता है वो नरसिंह मंदिर आया,दर्शन करके निकले।यहॉं पासमे एक धर्मशाला है,परिक्रमावासी रहते भी है मगर स्वछता नामकी कोई चीज होती है ये मालूमही नही ऐसी है।नर्मदे हर।बहुतही गंदा शहर।
खैरीगांव आया,यहॉंसे छोटा बरमान घाट जा सकते है।मगर प्रशांत आनेको राज़ी नही।चलो आगे!देवलीकलॉं,टेकरीपर बसा छोटासा गांव।श्री.राजकुमार की माताजी ने बुलाया।चाय दिया,रहनेके लिये बहुत आग्रह किया मगर हम नही रहे नर्मदे हर! कठौतियागाव नर्मदामैयाका सुंदर मंदिर है।पाससे सक्करमैया बहती है।ब्रिज है।लिंगारोडसे रेल्वेक्रॉसिंग पाससे पगदंडीसे दुसरे रेल्वे क्रॉसिंग गेटपार करके रेल्वे लाइनके बाजूसे पगदंडीसे रेल्वे कॉलनी पार करके विद्यासागर द्वारसे करेली शहरमे प्रवेश किया।बाजारपेठमेसे श्रीराम मंदिरमे आ गये ।बडा मंदिर है।दर्शन करके बगिचामे बैठे,धूप कड़ी हो रही थी हम बहुत थक गये थे।मगर ये मंदिर अब ट्रस्टके हाथसे सरकारने अपने हाथ लिया है,बारा बजे बंद होता है।किसीको रूकने नही देते,धर्मशाला,बरामदा है।मगर परिक्रमावासी रूक नही सकते।नर्मदे हर।बारा बजतेही हमे निकाल दिया,बडा गेट बंद किया मानो रामजीको बंधक बना लिया हो।नर्मदे हर! खानपानकी दुकानवाला बाजार हम पिछे छोड आये थे।आगे सब हार्डवेअर,गॅरेज ऐसा बाजार था।धूपसे बेहाल हो रहे थे।एक इमलीवाला वर्कशॉप था एक बडे बरगदका पेड भी था।सरदारजीको पुछके बेंचपर बैठ गये।वर्कशॉप था मशिनकी आवाज बहुत थी कैसे बैठ सकते?निकले मैया!बहुत भूक लगी है,थक गए है,क्या तेरे सेवाभावी बच्चे सिर्फ छोटे गांवमेही होते है?मैया बोली,तुमभी ना ऐसी हो थोडी भी तकलिफ नही चाहिये ऐसाभी क्या?परेशान करती हो।लो,देखो!मेरे सेवाभावी बच्चे हर जगह होते है,वो देखो बुला रहा है,चलो।सचमे मेडिकल स्टोअर से एक भैया बुला रहा था।नर्मदे हर!मैया मुझे क्षमा करना,धूप,भूक पैरोंके ब्लिस्टर सबसे परेशान हो गयी हूँ,इसलिये नही तो आपपर पुरा भरोसा है।
संजय गोविंद नेमा बुला रहा था।मैयासे पंधरा मिनीटभी मेरी तकलिफ देखी नही गयी थी।बडे प्यारसे हमे बिठाया,फॅन चालू किया,थंडा पानी दिया।थोडीही देरमें गरम गरम खिचडी उपर बहुतसारा घी,रोटी सब्जी मुरंबा,कढ़ी बडे थाट का भोजनप्रसाद। आराम के बाद थकान तो छुमंतर हो गयी।मैया!तेरी कृपा अगाध है।
निकलते समय संजयजीने दक्षिणा भी दे दी और आज नही रह रहे हो मगर अगली बार रहना पडेगा ऐसा कहा।नर्मदे हर!
चौराहेपर एक भाईसाबने नर्मदेहर कहा और हाथमे बहुत सारे केले थमा दिये।नाम था हमीदखान।मुझे काश्मीर के हमीद भाईकी याद आयी,मैने कहा मेरा काश्मीरमे भाई है हमीद।तो ये बोला अब एम.पी.मे भी आपका भाई है हमीद।नर्मदे हर!
आगे मदनसिंग गुर्जर मिले उन्होने भी केले दिये।और गाडरवाडामे उनके घर बुलाया।नर्मदे हर!इतने केले क्या करे?वजन भारी हो जाता है,चला नही जाता।प्रिंस हॉटेलवाले हरिओम रघुवंशीजीने चाय दिया।नर्मदे हर!कुछ बच्चे मिले उनको केले दे दिये,बच्चोंकी मिठी हँसी देखके लगा लाखो पाए।
करेली चिनी-इथेनॉल कारखाना पिछे छोडके बटेसरा,उसके बाद बंदेसर।करपगांव पहुँचते पहुँचते शामके पावणे छे बज चुके थे।रास्तेपरही हनुमानमंदिर था।कुछ लोग बैठे थे,बोले मंदिरमे रहो,मंदिर एकदम खुला और रास्तेपर था,कैसे रहते?मैने पंडीतजीका घर पुछा,पंडीत अवधेश शर्माजी वही बैठे थे,बोले चलो।गये उनके घर।माताजीने बडे प्यारसे स्वागत किया।अच्छा घर है।आरतीके बाद भोजनप्रसाद लिया।बहुत थक गये आज,टेरेसपर अब आराम।नर्मदे हर!
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-18
पंडीतजी और माताजी को प्रणाम करके हम चले हमारी मंज़िल की तरफ तब घड़ी दिखा रही थी समय सुबहके साडेचार बजेका।नर्मदे हर!
मालनवाडा,नारगी,पनारी,पुरगवॉं,ब्रम्होरी,पार करके मनकवारा रेल्वेक्रॉसिंगके गेट पहुँचे तब साडेसात बजे थे और हम पंधरा कि.मि.चल चुके थे।गेट बंद था इसलिये टपरीपर उबले चनेका नास्ता किया,रास्तेमे बहुत बार चाय पिना पडता है यहॉं दूध मिल रहा था इसलिये दूध लिया।गेट खुलतेही चले नर्मदे हर।
बरॉंस के बाद बोहानीमे धर्मालालजीने बुलाया पोहे-चाय लेनाही पडा बडे प्रेमसे देते है ना नही कह सकते नर्मदे हर।थोडे आगे जातेही एक छोटीसी टेकरीपर सुंदर नया मंदिर देखा,गये उपर।राधाकृष्णजी का मंदिर है।पिछे स्वच्छ सुंदर बडा तालाब है।घाट है।पुजारी महाराज जमनाप्रसाद भार्गवजी बडे बुजुर्ग है।उनको पुछके वहॉं स्नान करके कपडे धोके सुखाने डाल दिये।आरती कर रहे थे तब गाडरवाडाके कल मिले मदन गुर्जर आ गये वो करेली जा रहे थे काम के लिये बोले बहुत फास्ट चलते हो।ऐसा नही अगर हायवेसे चलना होता है तब हम जल्दी निकलते है।ठीक है गाडरवाडा पहुँचे की फोन करो आपको लेने आएंगे नर्मदे हर अपना कार्ड देके चले गये।आज समय था अभी थोडा इसलिये थोडी पैरोंकी सेवा की।ब्लिस्टरका ड्रेसिंग किया,प्रशांत स्टिकींग प्लॅस्टर लगानेकोभी डरता है।लेफ्टको मै खुद आसानीसे लगाती हूँ मगर राइट के ब्लिस्टर पिछेकी तरफ है इसलिये थोडा कठीन होता है पट्टी लगाना।बॅंडेज बांध लिया।मैया आपही मेरी डॉक्टर हो जल्दी ठीक करा दो,अभी ओंकारेश्वर बहुत दूर है।
भगवानको भोग लगने के बाद हमने भोजन प्रसाद पा लिया।विश्राम करके 2-30को पुजारी बाबाजीको नर्मदे हर किया।हायवेसे चल रहे थे।कड़ी धूप परेशान कर रही थी।कौडियामे जगदीश चौकसेजीने नर्मदे हर करके चाय दिया।शक्ति शुगर मिल गाडरवाडाके आगे गाडरवाडा-पलोहा रोड चौराहा,सक्करमैयाके ब्रिजके पास पहुँचे तब शामके पांच बजे थे।मदन गुर्जरजीको फोन किया,वो किसीको भेजता हूँ बोले।बैठे रहे।एक घंटे बाद राजू गुर्जर आया मोटरसायकल लेके।हम पैदल आते है बोला तो उनका घर दूर है इसलिये गाडीपर चलो,मगर एक गाडीपर सॅक लेके तीन लोग नही बैठ सकते,राजुने एक मित्रको बुलाया।नर्मदे हर!
उनका घर गाडरवाडामे था ही नही,12कि.मि.अंदर पलोहाबडामे था।पहले मालुम होता तो न जाते,अब नर्मदे हर! रास्ता छोडके गावकी तरफ मुडे और,अरे बाप रे!इतने बडे बडे गड्डे!रास्तेमे गड्डे नही गड्डोंमेसे रास्ता निकल रहा था।ऐसेमे ये दो बहाद्दर ऐसी गाडी चला रहे थे जैसे मॅरेथानमे चला रहे है।हम अपनी जान मानो मुठ्ठीमे पकडकर बैठे थे।लग रहा था शायद उतरनेके बाद एक एक हड्डी गिनके लेनी पडेगी।नर्मदे हर!मध्यप्रदेश की ऐसी भी प्रगती देखने मिली। गांव तो इतना गंदा की पुछो मत।
राजूका घर बहुत सुंदर है।घरके पिछे कमलके फुलोंसे भरा सुंदर तालाब है।राजू नर्मदाभक्त है,हर मंगलवार को मैयाकिनारे जाके स्नान पुजा करनेका उसका परिपाठ है।मैया यहॉंसे दस कि.मि.दूर है।नर्मदे हर!अब कल आगे कैसे जाना ये आपहीको मालूम मैया,सुंदर भोजनप्रसाद पाया है, हम तो अब हमारी हड्डीओंका हिसाब करते करते सो जाते है।नर्मदे हर!

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-19
सुबह स्नान पुजारती के बाद चाय लेके राजूके फॅमिली को नर्मदे हर करके दो मोटर सायकल से सौ पचास गड्डोंमेसे उछलते मदन गुर्जर के घर पहुँचे।
मदन गुर्जर की जॉइंट फॅमिली है।शिरा(हलवा),फेण्या(चावल के पापड),दूध ऐसा भरपेट?ओव्हर फ्लो नास्ता हो गया। मदनजी बोले हम आपको गाडरवाडातक छोडते है आगेसे आप पैदल जाना।हां मे गर्दन हिलाने के सिवा हम कर भी क्या सकते थे।पैदल जानेका सोचते तो कल शामतक भी गाडरवाडा पहुँचना असंभव होता।
गांव ऐसा क्युं है पुछा तो,सरपंच राखीवमेसे है गांवके लिये कुछ नही करता।ऐसा जवाब मिला नर्मदे हर!
जान मुठ्ठीमे पकडके बैठ गये मोटरसायकलपर।धडाम धुडुम उपर नीचे उछलते कैसे तो आ गये गाडरवाडा चौराहेपर।सक्करमैया ब्रिजसे क्रॉस करके एक पेट्रोलपंप के पास मोटरसायकल्स रूक गयी।उतर गये।नर्मदे हर!
राजू और मदन को कहा,आप चलो आपको काम है हम जाएंगे,नर्मदे हर!अब हायवेसेही चलना था।दोनो चले गये और हम वही बैठ गये।बाप रे बाप!मैया!कैसा ये गांव?कब होगी प्रगति? सरपंच और बाकी समाज सेवक गांवके प्रति अपना कर्तव्य कब समझेंगे?
थोडे रिलॅक्स होतेही विनोबा एक्सप्रेस को फास्टट्रॅकपर डाल दिया।रास्तेके दुतर्फा वृक्ष है और आज धूपभी नही है इसलिये और आज भोजनकी भी जरूरत नही थी।चलते गये।
गोविंदनगर के बाद पालिपिपरियामे भाऊसाहेब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास पहुँचे।ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघकी निवासी आश्रमशाला है।
भाऊसाहेब भुस्कुटे,और स्वयंसेवक संघ,चलो अंदर।घनी वृक्षराजी,सामनेही एक इमारत थी कोई तो होगाही,गये।नर्मदे हर! एक सफेद लुंगी-बनियान पहने स्वयंसेवक बाहर आ गये,हमारा परिचय दिया,सहर्ष स्वागत हुआ।
बरामदेमें बैठे,प्रथम थंडा जलपान बादमे गरम चाय और बिस्कीट आ गये।हमारा खानपान होनेतक एक रूम मेरे लिये खाली करवाके तैयार किया गया,मेरी सॅक अंदर रख दी।प्रशांतको एक शिक्षक उनके रूममे लेके गये।सारा काम चुपचाप शिस्तबद्ध तरिकेसे।ये है सघ!
श्री.अनिल अग्रवाल पर्यवेक्षक है।श्री.पावन दुबे,श्री.रामगोपाल दुबे,श्री.रामवीर कौरव ये शिक्षक व्यवस्थापक है।
बारावी तक स्कूल है।लडके निवासी है,लडकियॉं सिर्फ स्कूलमे आती है।इको फ्रेंडली गणेश मुर्ति,शिल्पकारीभी सिखाते है।जैविक खाद बनाते है।पशु खाद्य परिक्षण किया जाता है।अमरूद,आम,अनार के बगिचे है।ऐसा बड़ा सुंदर काम चल रहा है।
शादी के बाद आज पहिली बार मैने शाखामे गीत गानेमे भाग लिया-नमस्ते सदा वत्सले मातृभुमे!बहुत बहुत अच्छा लगा।बचपन की याद आयी,हमारी कन्या शाखा थी।लाठी,जंबिया,तलवार चलाना सिखाते थे एम.जी.जोशीमास्तर।मैदानी खेल,मलखांब भी सिखा था।
रातको साधा मगर पौष्टिक भोजन हुआ।सोते समय गायका दूध।नर्मदे हर!बहुत बडा बहुत अच्छा देशकार्य चल रहा है।भारत माता की नयी पिढ़ी तैयार हो रही है।नर्मदे हर!
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-20
सुबह 4-30को ही आगे प्रस्थान किया।हायवेसेही चलना है,जल्दी निकलते है तो धूप ज्यादा होनेके पहले 15-20कि.मि.चलना हो जाता है,और फिर दोपहर के बाद और 10-15कि.मि.हो जाता है।ॐकारेश्वर अभी और कमसे कम 400कि.मि. है।जितना ज्यादा चल सकेंगे उतना अच्छा रहेगा।
ठैनी मे श्री.हक्केलालजी के टपरीपर चाय लेके आगे चले।नयाखेडा रेल्वे क्रॉसिंग,बनखेडी,बाचाबानी यहॉ दूध लेके आगे चले।मनोज पटेलने चाय दिया। अंजनीमैया ब्रिजसे पार करके बॉंसाखेडा रेल्वे क्रॉसिंग पार करके आगे रामपुरमे बाबा जय गुरूदेव संत उमाकांतजी आश्रम पहुँचे तब सुबहके 10-30बजे थे और 20कि.मि.हो गये थे,धूपभी कड़ी होने लगी थी,विश्राम करना आवश्यक था।आश्रममे गये,बडा हॉल है।एक कोनेमे बाबा जय गुरूदेव की मुर्ति है।कुछ भक्त अपना सर पुरा ढकके ध्यान कर रहे थे।हम दर्शन करके बैठ गये।
दोपहरको भोजनप्रसाद पाया।पैरके ब्लिस्टरके ड्रेसिंग करके 2-30को आगे चल दिये।
पिपरिया चौराहा पर आ गये।श्री.राजू वर्माने चाय दिया और कहा,पिपरिया गांवमे जानेकी जरूरत नही सामनेके रास्तेसेही परिक्रमा का मार्ग है।आगे थोडी दुरीपर हथवासामे सिताराम आश्रममे परिक्रमावासी रहते है,वहॉं भोजनादि सब सुविधा है।मुझे याद आया,पुनाके सुप्रसिद्ध परिक्रमावासी जिनकी नर्मदे हर हर नर्मदे ये पुस्तक प्रसिद्ध है वो श्री.सुहास लिमयेजी भी इसी आश्रममे रूके थे,मैने डायरी देखी,आश्रम की नोंद थी,लिमयेकाका यही रूके थे।नर्मदे हर!हम आश्रम पहुँचे तब शामके छे बजे थे।
व्यवस्थापकजीने एक खोली दे दी।फ्रेश होकर निचे गये।वहॉं होशंगाबाद के बुजुर्ग पती-पत्नी श्री.एन.पी.दुबे और सौ.सावित्री दुबे मिले।आश्रममे अपना वानप्रस्थ गुजारते है। कितना सुंदर!सारी जिम्मेदारिया पुर्ण हो गयी,अब शांतिसे जीवन बसर करना प्रभुके सानिध्यमे।नर्मदे हर!
श्री.कल्याणसिंग गुर्जरने हमे बड़ी सहायता की।नर्मदे हर!
कर्मशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-21
सुबह पांच बजे नित्यकर्म निपटके श्रीसितारामजीके दर्शन करके आगे चल दिये।टोलनाकेपर कल हमे मदत करनेवाले कल्याणसिंग गुर्जर मिले,नर्मदे हर!उन्होने चायपान करवाया।
रानी पिपरिया,टायरकी दुकानमेंसे नर्मदाप्रसाद कुशवाहजीने बुलाया अभी 3किमि पहले चाय लिया था मगर मैयाके भक्तको ना नही बोल सकते चाय तो लेना पडता है,नर्मदे हर!
शोभापुर,बरिबानी,राधास्वामी सत्संग न्यास सुंदर बगिचा है,बैठे थोडी देर थंडा पानी पिया,चलो आगे।करणपुर,सोहागपुर पहुँचे तब बारा बज चुके थे।बडा गांव है,बाजारपेठ है,भोजनके लिये कोई हॉटेल देख रहे थे,एक भाईसाबने बावडीवाले मंदिर बताया,पिछेकी तरफही था,गये।बडादिंडी दरवाजा है अंदर तीन तरफ बरामदे है बहुत पुराना इतिहासकालिन मंदिर होगा।सॅक रख दी दर्शन नही हो सका,रामजी विश्राम कर रहे थे पडदा लगा हुआ था चार बजे खुलेगा।भोजनकी कुछ व्यवस्था नही थी,महाराजभी विश्राम कर रहे थे।एक सेवेकरी था उसको पुछके सॅक वही रखके बाहर जाके हॉटेलमे गये,दाल चावल या रोटी ऐसा कुछ नही था,प्रशांतने समोसे खा लिये मुझे वो पसंद नही मैने बिस्कीट लिये हो गया भोजन नर्मदे हर!वापस मंदिरमे गये।अगर किसी परिक्रमावासी रूकना हो तो रूकने जैसी जगह है।बडी बावडी है,पिछे पलकमती नदी मैया है मगर गांववालोंने उसको गंदगीभरा नाला बना दिया है।2-30 हो गये हम निकलने लगे सेवेकरी को नर्मदे हर कहा,शायद हमारी आवाज सुनी महाराज उठकर बाहर आ गये,बडे बुजुर्ग महात्मा है।प्रणाम किया,बैठो!चाय ले लो,नर्मदे हर!
तीन बजे आगे।पलकमतीमैया ब्रिजसे पार।गावके बाहर दुर्गामंदिर,शिवमंदिर है परिक्रमावासी रह सकते है ऐसा लगा,बगिचा है।बहुत धूप है,पानी पी पी के पेट भरा है चलना मुश्किल हो रहा है।मैया!नर्मदे हर!
बोदीफाटा,लांघानदी मैया पासमे बाबा बालकदास त्यागी आश्रम,चायपान।लांघा ब्रम्होरी,मढई टायगर रिसॉर्ट फाटा,सेमरी हरचंद शामके सात बजे थे,अंधेरा हो गया था।एक बाबाजी बैठे थे,बोले चलो मेरे साथ,बाजारके बिचमे एक देवी मंदिर था रूकने को कहा और खुद चले गये पंधराएक मिनीटके बाद आये,शायद घरवालोने मना किया होगा बोले,मंदिरके पिछेकी इस जगह रहो,हम देखतेही रह गये,बहुत गंदगी भरी अंधेरी ग्रिल लगी जगह थी,वहॉं रहना मुश्कीलही नही नामुमकीन था।हमने उनको नही बोलके सोचही रहे थे अब क्या करे?सारी दुकानेही थी,हाय वे था बाबाजीके चक्करमे गांव पिछे रह गया था,आगे का गांव कितना दूर होगा मालूम नही।दुकाने बंद होने लगी थी।नर्मदे हर!मैया!कठीण घडी है,आ जाओ!नर्मदे हर! और मैयाने केवल मालवीय को भेजा।उन्होने हमे देखा,आ गये।हमने बताया की यहॉं हम नही रह सकते,बोले चलो हमारे घर।अंधेरे समझ नही आया एक गलीमेसे वो हमे उनके ताऊजी रूपराम मालवीय के घर लेके गये,परिचय करवाया और बोले आप फ्रेश हो जाओ मै भोजनके लिये लेने आता हूँ।नर्मदे हर!
एक बडे हॉलमे उनके बेटेने दरी बिछायी,हमने आसन लगाया,फ्रेश होके आरती की। बैठे आज 35कि.मि.चलना हुआ।सिर्फ चाय और बिस्किट पर।
केवल भाईसाब बुलाने आ गये,थोडी दुरीपर उनका घर है।घरका काम चल रहा है रिन्युएशन का।सुंदर भोजनप्रसाद पाया।दिनभरकी भूक मिट गयी।अन्नदाता सुखी भव!
नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-22
सुबह 4-30को नित्यकर्म,आरती करके चाय लेके विनोबा एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायि।
ब्रम्होरीकलॉं,गडारिया,बुधवाडा से बाबई पहुँचे तब सुबह के 9 बजे थे और पंधरा कि.मि.हो गये थे।बाबई गांव बडा है,बजारमेंसेही रास्ता जा रहा था,दुकाने खुलने लगी थी,राजहंस भोजनालय खुला था इसलिये गये पुछा तो पराठे मिलेंगे दस पंधरा मिनीटमे। कलका अनुभव ध्यानमें लेके पेटपुजा कर लेनेमेही समझदारी है सोचके बैठ गये ऑर्डर देके नर्मदे हर!
पराठे-दालका पेटभर भोजनप्रसाद पाके चल दिये आगे।दस बज गये थे,धूप अपना कड़ा रूख अपनाने लग गयी थी।एक पिपलपारतले भगवान बजरंगबली बिराजमान थे,जयमातादी मंदिर था,दर्शन करके पिपलकी थंडी छॉंवमे विश्राम करनेका मोह त्याग न सके। 1बजे आगे चल दिए।मठमाता महाकालि बाबई फार्म,जगदीशप्रसाद यादवजी ने चायपान करवाया।नर्मदे हर!
25 कि.मि.आजका चलनेका कोटा पुरा हुआ था,ऑंचलखेडा गांव आया था।हमारे पास एक नाम था,रघुनंदन यदुवंशी।गये गांवमे,पुछते पुछते सारे गांवका चक्कर लगाते हायवेपर आ गये वहॉं उनका बडासा घर था,जहॉंसे हमने गांवमे प्रवेश किया था वहॉंसे सिर्फ सौ-पचास कदम दुरीपर,और हमने कितना लंबा चक्कर काटा था,नर्मदे हर! हमेशा की तरह बडे उल्हास के साथ स्वागत हुआ।आंगनमेही हॅण्डपंप था,कपडे धो डाले।आरतीके बाद सुग्रास भोजनप्रसाद पा लिया। नर्मदे हर!
सुबह पांच बजे चल दिये,आज सिर्फ पंधरा कि.मि.चलना था होशंगाबाद के लिये। दो कि.मि.पर जयस्वाल ढाबेपर चाय लिया।यहॉ मानो जैसा ट्रक टर्मिनसही है इतने ट्रक रातमे रूके थे।थोडे आगे जातेही तवामैयाका लंबा ब्रिज आया।विशाल रूप है,नर्मदामैयासे बडा।वैसे जीवनमे ऐसा बहुतबार देखनेमे आता है की एकही मॉं के दो बच्चोंमे बडा बच्चा छोटेसे कद-वजन के हिसाबसे छोटा होता है।वैसेही नर्मदामैया तवामैयासे छोटी लगती है।असलमे तवामैया पर डॅम है।बॅकवॉटरसे इतना विशाल स्वरूप है।
अरूणोदय हो रहा था,निशा बडी शरमाती उषाकी लाल गुलाबी सोनेरी शाल ओढ़के छिपे जा रही थी।जललहरे रंगीन होती जलचरोंको जगा रही है,उठो!सुरजचाचू आ रहे है,देखो पंछी प्रभातगान गा रहे है,पेड पौधे पत्तोके हाथोंसे तालियॉं बजाबजाके उनको साथ दे रहे है।
सुंदर सुप्रसन्न बहरती सुबह,हम ब्रिजपे खडे खडे ये नजारा ऑंखोंके संपुटमे बंद करके रखना चाह रहे थे।
पुरी पुरी सुबह हो गयी,अब चलो आगे।देवलाखेडी,निमसांडिया,जैसलपुरमे श्री.अंबिका रामदासजी राजपूतजीने मिठा हलवा नास्तेमे दिया,चायपानी हो गया।नर्मदे हर!थोडे आगे होशंगाबादमे प्रवेश करतेही साईकृपासे अखिलेश गौरने नर्मदे हर बोला,चाय-पान कराया।पावणे ग्यारह बजे मंगलवारा घाटके पास लोकनाथतीर्थस्वामी आश्रममे आ गये। ये आश्रम हमारे गुरू नारायणकाका ढेकणेजीने स्थापन किया है।आप महाराष्ट्र सरकारके इरिगेशन डिपार्टमेंट के एक्झीक्युटीव्ह इंजिनिअर थे।आप बालब्रम्हचारी थे।बडे योगी महापुरूष थे हमारे काका!
स्नान पुजा दर्शन के बाद थोडा विश्राम करके शामको शेठानी घाट देखने गये।कितना भव्य है।कल भी यही रहना है श्रीगुरू सानिध्यमे।नर्मदे हर!

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-23
सुबह मंगलवारा घाट जाके नर्मदास्नान किया,बहुत दिनो बाद ऐसा लगा मॉंके गले लग गये है।मॉं बडे प्यारसे सरपर हाथ फेरते पुछ रही है।कैसी हो बेटा?चलते चलते थक जाती हो ना?पैरोंके छालोंको अपने गुनगुने पानीसे धोते धोते बोल रही है अभी ठीक हो जाएंगे,बहाद्दुर बेटी हो ना मेरी?बहुत देर तक बैठे रहे मैयाके पास।फिर भगवान सुर्यनारायण को अर्घ्य प्रदान करके वापस आश्रम आ गये।पुजा आरती करके नास्ता चाय लिया।यहॉंके सेवाव्रती व्यवस्थापक धर्माधिकारीभाऊ गांव गये थे,अभी पुणेकर श्री.और सौ.घोसपुरकर सेवाव्रती थे।दोनो बहुत अच्छे है।
शामको जयदीप पाटणकर आये,उनके साथ उनके घर गये।पाटणकर ये महाराष्ट्रीय फॅमिली सालोंसे यहॉं रहती है।शिक्षक है।अच्छे लोग है।मुझे मराठी दुर्गा सप्तशती पुस्तक दिया।नर्मदे हर!
आश्रमके गॅलरीमेसे सामने मैया दिखती है।निले निले अंबर तले नीलश्यामल नर्मदा,विशाल जलस्वरूप।वर्णनातीत सौंदर्यशालिनी।नर्मदे हर!
सुबह जल्दी नित्यकर्म स्नान आरती करके बाहर आ गये,पुर्वा लालगुलाबी सुनहरे रंग बिखरती सबको कह रही थी,उठो!देखो!निराशाकी काली अंधियारी रात अस्त हो गयी,आशाकी किरने बिखेरती नयी चेतना देने उषा दस्तक दे रही है।
लोकनाथतीर्थस्वामी,सद्गुरू नारायणकाका ढेकणे गुरूजीका दर्शन करके चाय लेके घोसपुरकर दादा-वहिनी को नर्मदे हर कहा और आगे परिक्रमा शुरू की।
गांवके रास्ते खैराघाट पहुँचे।शिवमंदिर है,दर्शन किया।सामने बुधनीघाट दिख रहा था।यहॉं महाराष्ट्रीय संत गुळवणी महाराज स्थापित आश्रम है।गर्द वृक्षराजि मंडीत शांत स्थान है।अभी श्री.स्वामी नर्मदामणी और दत्तानंदस्वामी यहॉकी व्यवस्था देखते है।चायपानके बाद दत्तानंदस्वामी हमारे साथ आये और दत्तमंदिर,गुळवणीमहाराजका स्थानके दर्शन करवाये।सफरचंदप्रसाद दिया।और आगे थोडी दुरीपर मैयाकिनारेसे आगेका शॉर्टकट दिखाया नर्मदे हर!
मैया किनारे रेतमे चलना मुश्कील था,कांटे भी बहुत थे।इसलिये रेल्वेब्रिजके पाससे उपर चढ़े,रेल्वेकी जगहमे हिंगलाजमाता मंदिर है।सुंदर वृक्षराजि,बगिचा,निसर्गरम्य स्थान है।दर्शन करके कच्चेरास्तेसे रेल्वेगेट पार करके कच्चे रास्तेसे भोपाल हायवेपर आ गये।एक रास्ता मैयाकिनारेसे रंढाल होते हुए कोकसर जाता है।मगर चलनेमे परेशानि होती है इसलिये हमने हायवेसे जानाही मुनासिफ समझा और चल दिये।रेल्वे ब्रिजके पास सिढ़ियॉं उतरके हरदा रोडपर आ गये।इस सबमे छे-सात कि.मि.का चक्कर पडा था।थक चुके वो अलग।नर्मदे हर!
प्रथम हॉटेलमे पोहे-चाय नास्ता किया,फिर आगे चल दिये।धूपने परेशान करना शुरू कर दिया था।फेफरताल,वटकेश्वर महादेव,खेडला बसस्टॉप के पास टपरीपर दूध लिया।रोहना,यहॉंसे कोकसर गौरीशंकर महाराज समाधिस्थल जा सकते है।हम अभी नही गये।मगर बादमे गाडीसे परिक्रमा करते समय हम गये। रोहनामे अविनाश यादव के आंगनमे जलपान करके थोडा विश्राम किया।आगे रोहनागांवमे एक हॉटेलमे बैठे,आज भोजन मिलनेवाला नही ऐसा लगता है।कचोरी मंगवायी जो मुझे बिलकुल पसंद नही।वहॉं समोसेका नया प्रकार देखा,मिठा समोसा।मंगवाया,अच्छा लगा।नर्मदे हर!
शाम होनेको है,पांच बजे है।पच्चीस कि.मि.से ज्यादाही चलना हो गया है।सॉंवलखेडागांव आ गया,यहॉंके देवीसिंग पटेल का नाम हमारे पास था,गये उनके घर।नर्मदे हर!
सहर्ष स्वागत हुआ।बडे जमीनदार है,आंगनमे तीन ट्रॅक्टर खडे थे,एक जीप,चार मोटर सायकल थी।देवीसिंगजी बुजुर्ग है।अच्छे लोग है।
स्नान कपडे धोना कार्यक्रम किया।आरतीमे माताजी सामिल हो गयी,लोकगीत भजन सुनाया।बहुत अच्छा लगा।गरम गरम चुल्हेपर बनायि भाकरी,बैंगनभरता,बटरा-तूर हुरडा सब्जी,पापड ऐसा सुंदर चविष्ट भोजनप्रसाद बडे आग्रहसे खिलाया।अब विश्राम,नर्मदे हर!

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-24
नर्मदे हर!आज सुबह जल्दी 4-30को विनोबा एक्सप्रेस चल पड़ी।बमुरिया,मुंगवारा,आमपुरा 6-15को पहुँचे चाय लेके आगे चल दिये।मुसरोद फाटा,रतवाडा,सोनखेडी 8-45am पोहोपसिंग तोमरजीने चायपान करवाया,नर्मदे हर!बघवाडामे राज हॉटेलमे दिलीप और संदीप लहुवंशीने कचोरी नास्तेके लिये दिलवायि तो दिपक दुकानवालेने बिस्किट-चाय दिया।धूप बहुत है,चलनेमे बहुत परेशानि हो रही है।मैया!कड़ी परिक्षा ले रही हो।धर्मकुंडी,रेल्वेक्रॉसिंगपर अशोक यदुवंशी का ढाबा है,कचोरी,समोसे थे।मैने कहा,दाल-चावल मिल जाते तो अच्छा होता।अशोकजीने सिर्फ हमारेलिये दाल-चावल बनाए।नर्मदे हर!विश्राम करके आगे चल पडे।
भीलटदेव बहुत सुंदर मंदिर है।सामने मध्यप्रदेश इको टुरिझम सेंटर है,सुंदर रिसॉर्ट,बाग-बगिचा है।भीलटदेव के पास धर्मशाला है कुछ लोगोने बोला रूक जाओ,मगर हम नही रूके,और इसका भुगतान हमे आगे जाके करना पड़ा।सिवनी-मालवा पहुँचे तब शामके छे बजे थे,आज रहनेका कोई ठिकाना नही मिल रहा था,भीलटदेव मे हमने नही माना तो अब सजा मिलनीही थी।अखेर दुर्गा लॉज मे कमरे लिये,बस रात निकालनी थी,आप समझ लिजिये कैसे होगा वो लॉज।आज रातको पुरा थंडा फराळ,लॉजवाली बहनजीने पानीतक नही पुछा।नर्मदे हर!

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-25
नर्मदे हर!रात कैसी तो कट गयी,4-15amनिकल पडे आगे।भरलाय,धामनियामे चाय-टोस्ट लेके आगे रावणपिपला,यहॉं गांवमे एक पिपलका पेड है उसके निचे बैठकर रावणने तपस्या की थी ऐसी कहानी सुननेको मिली।आगे बावडियाभाऊ,पगढाल,छिंदवाडामे शिवनारायण राजपुतजी के घर आगमन आज सिर्फ बीस कि.मि.चले है मगर थक गये इसलिये आज यही रहना चाहते थे,और शिवरामजीने सहर्ष स्वागत किया नर्मदे हर!
सुबह स्नान आरती करके चाय लेके राजपुत फॅमिली को नर्मदे हर किया।टीमरनी,यहॉं भुस्कुटे पेट्रोलपंप है।चाय लेके आगे चल दिये।चारखेडा,ऊॅदा,खिडकीवाडा,हरदा-यहॉं महाराष्ट्रीय संत गोंदोवलेकर महाराजजीने स्थापन किया हुआ पट्टाभिराम मंदिर है।आजका चलनेका कोटा पुरा हुआ था इसलिये मुक्काम।
यहॉं श्रीयुत गोडबोले व्यवस्थापक है।सारा वातावरण घर जैसा है।स्नान कपडे धोना सारे काम बढ़िया हो गये।सुंदर महाराष्ट्रीय भोजनप्रसाद मिला,अंतरात्मा तृप्त हुआ।सौ.अनिता गोडबोले मंडलेश्वरके श्रीराममंदिरके व्यवस्थापक श्री.मोडकजी की बेटी है।मै शादीके पहले गोडबोलेही थी इसलिये ये हरदामें मेरा मायकाही हुआ,अनिताभाभीने अपने इस ननदकी खातीरदारीमें कुछ कमी नही छोडी।जेष्ठ गोडबोले काका काकूभी बहुत अच्छे है।इतनी उमर होनेके बावजुद मंदिरके सारे कार्य करते है।नर्मदे हर!

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-26
परिक्रमामे चलनेके लिये हम आधिकतर हायवेका उपयोग कर रहे है इसलिये हंडिया हमारे मार्गमे आनेवाला नही है और वो देखना था।गोडबोले काका बोले,आप बससे जाके दर्शन करके आना और कल आगे जाना,इसमे परिक्रमाके किसी नियमका उल्लंघन नही होता।तो स्नान आरतीके बाद नास्ता करके हम बससे हंडिया के लिये निकल पडे।आज अमावास्या है,अमरकंटक से खंबायत तक मैयाके दोनो किनारोंपर स्नान,दर्शनके लिये लोगोंका सैलाब उमडता है।
हंडिया पहुँचे,सुंदर मैया।किनारेपर है पुरातन रिद्धनाथ मंदिर,प्रवाहमे है नाभिकुंड।परिक्रमावासी वहॉ नही जा सकते।सामने दिखता है नेमावरका घाट,सिद्धनाथ मंदिर।हंडिया-नेमावर जोडनेवाला ब्रिज।सारा नज़ारा देखतेही बनता था। खुबसुरत नर्मदा।सुबह स्नान हुआ था फिरभी हमने स्नान किया क्योंकी आगे कब मैया दर्शन होगा मालूम नही था।रिद्धनाथ दर्शन करके,एक आश्रममे गये,महाराजको प्रणाम करके चायपान लेके वापस हरदा आ गये।
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-8
नर्मदे हर!तबियत ठीक नही थी।बुखार के कारण थकावट थी,पैर भी दुख रहा था इसलिए प्रितीजी,रितेशजीने हमे आगे जाने नही दिया,दो दिन आराम किया। कल शामको हर्रा स्कूल टीचर श्री.सारदा गोप के घर भोजन प्रसादके लिए गये थे।
सुबह स्नान आरतीके बाद टेरेसमे जाके दूर दिखनेवाली नर्मदामैया का दर्शन करके प्रणाम किया,सुखरूप रखो,चलनेके लिए ताकद दो ऐसी प्रार्थना की,चाय पिके राय फॅमिली को नर्मदे हर करके चल पडे।बाहर आतेही सारदा गोप मिले।वो हमारे साथ श्री.शरद साठे,सो.शोभा साठे के घर तक आके फिर स्कूल जानेवाले है।साठे तथा गोळवलकर महाराष्ट्रीय कुटुंब है। हम चल ही रहे थे,पिछेसे रितेश राय शॉर्टकट दिखाने आ गये।उनको हमने साठेजी के घर जा रहे है ऐसा बताया।ठीक है,वो चले गये।हम साठेजींके घर गये।नर्मदे हर कहके सारदा गोप भी अपने स्कूलके लिए गये।शुभदाताई,शरद भाऊजीने बडे प्यारसे स्वागत किया।नास्तेके लिए पोहे बनाये,चाय दिया।एक रिश्तेदारी हो गयी।नर्मदे हर!
मानादेही के बाद आया घुंगरूवाले बाबाका रेवासंतकुटी आश्रम।दर्शन लिया,बाबा बहुत वृद्ध है शायद 100के उपर आयु होगी।चाय लेके आगे चले।सहस्त्रधारा दर्शन हो रहा था,पानी नही था जब बर्गीडॅमसे पानी छोडते है तब धाराए दिखती है ऐसा बताया किसीने।
शॉर्टकटसे मैया किनारेसे सुरंगदेवरी गावके देवबाप्पा माऊलीधाम सेवाश्रमे आ गये।ये आश्रम हमारे त्र्यंबकेश्वरके फरशीवाले बाबाजींका है।बाबाके शिष्य सत्चितानंद महाराज यहॉंके व्यवस्थापक है।तो क्या अपने घर जैसाही लगा,मराठीमे बातचित होने लगी।स्वयंपाक होने तक महाराजजीने सारा परिसर दिखाया,बहुत सुंदर बाग-बगिचा,थोडी खेती,केले,पपिता,आम के पेड,यज्ञशाला,मंदिर,सामने सुंदर नीलश्यामल नर्मदामैया पवित्र शांत वातावरण।महाराज बोले रहो आज कल जाना आगे।इतनी सुंदर मैया कलसे थोडे दिन नजरसे ओझल होनेवाली थी,यहॉंसे जानेको मनभी नही कह रहा था सो आसन लगाया बरामदेमे।
सुबह सव्वा छे बजे स्नान पुजा आरती करके चाय लेके मैय्याको ऑंखोमे भरके साश्रू नयनोंसे आगे चलने लगे।सिलपुरा-मॉं रेवाश्रममे श्री.सुंदरदास महाराज-चित्रकुट गादी तथा सौ.मुन्निबाई ने स्वागत किया।छोटीसि कुटिया,सामने छोटासा सुंदर बगिचा प्यारीसी वृद्ध जोडी अपना वानप्रस्थाश्रमी जिंदगी बडे सुखसे राम नामस्मरणमे मग्न रहकर बसर कर रहे थे।देखके बहुत अच्छा लगा।क्या कभी हम ऐसा रह पाएंगे?
सिलपुरा,रथटोला,सुनपुरी,भैसादाहके बाद घागा आयुष औषधालयके प्रांगणमे जलपान करके थोडा विश्राम करके आगे डॉक्टर साब ने बोला घागागांवमे जानेकी जरूरत नही सामनेसे जाके थोडी दुरीपर तालाबके बाजुसे अहमदपुर सिर्फ चार कि.मि.पडता है,इसलिए वैसे चलने लगे।
आज सुबहसेही मौसम थोडा खराब था,बादल आ रहे थे जा रहे थे।तालाब बडा था,पानी स्वच्छ था,आजुबाजुमे गंदगी नही थी।शहरवासी लोगोंने गांववालोंसे कुछ सिखना चाहिये। तालाबके बाजूसे कच्चा रास्ता था,मगर सिर्फ थोडा।अब खेतके बांधपरसे चलना था।और मौसम ज्यादाही खराब होने लगा बारिश कभिभी जमके बरसने लगेगी।हम जल्दी जल्दी चलने लगे।जैसे तैसे अहमदपुरगांवमे प्रवेश किया। समाजमंच के पास एक टपरीपर कुछ लोग खडे थे।आज गांवमे कृषिमेला हुआ था।बादल कभिभी बरसने लगेंगे चार बजे थे आगेका गांव कितना दूर था,रास्ता कैसा है मालूम नही था।आज इसी गांवमे रहना उचित था।हमने गांववालोंको पुछा,वो बोलले मंचपर रहो,सदाव्रत ले लो।नर्मदे हर!हमने बारिशमे मंचपर खुलेमे रहना और सदाव्रत लेकर भोजन बनानेमें हमारी असमर्थता जतायी।और किसीके घरमे व्यवस्था होगी क्या ये पुछा।श्री.बाबुराव यादवने नर्मदे हर करके बोले मैया हमारे घर आ रही है ना कैसे कहे?चलिए हमारे घर।और हम पासमेंही उनके घर गये।हमने घरमे जैसेही प्रवेश किया,बारिश जोरसे शुरू हो गयी।नर्मदे हर!
बाबुराव का कुटुंब सेवाभावी है।पैर धोनेके लिए गरम पानी,भोजनमे पुरी-सब्जी,चावल,खीर बड़ा थाट था।नर्मदे हर!
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-9
बाबुराम की बहन पेट दुखनेसे परेशान थी मुझे राइट युरेटेरीक कॉलिक लग रहा था,सोनोग्राफी के बिना कुछ बताना ठीक न होता और मै यहॉं व्हिलेजमे कर भी क्या सकती थी,मेरे पास कुछ गोली थी,दे दी और सुबह महाराजपुर मंडला ले जानेको बोला।नर्मदे हर।
सुबह जल्दी घरके सामनेके हॅण्डपंपके पानीसे स्नान करके पुजा आरती करके चाय लेके विनोबाएक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायी।बाबुराम दूरतक हमारे साथ आये थे।नर्मदे हर।
. सुरजपुरा,ठाडा,साल्हेदंडामे नौजिलाल तिलगाम आग्रह करके अपने घर लेके गये बहुत अच्छे लोग है।बर्गीडॅम घर गांव डब गया,अच्छी उपजाऊ जमीन गयी और यहॉं पहाडमे पुनर्वसित होना पडा है। फिर भी आनंदी है।चाय-नास्ता करके आगे बढे।नर्मदे हर!
रंगमंचके सामनेसे पगदंडीके रास्ते बंधारा क्रॉस करके कच्चे रास्तेपर आये।दोनो तरफ घना जंगल है।बारिशके दिन अभी अभी ही गुजरे है इसलिए पहाड हरियालीसे भरेपुरे है।नदीनालोंमे स्वच्छ जल भरा है।बडे बडे पेडोंमेसे नीचे जमीन पर आनेमे सुर्यकिरनोंको बडी मुश्कीले झेलनी पड रही है।और कच्चा रास्ता गायब हो गया पगदंडी दायें बायें दोनो तरफ जा रही थी,किस तरफ जाना समझ नही आ रहा था।नर्मदे हर!नर्मदे हर!नर्मदे हर! हमारा पुकारना मैयाजी तुरंत सुनती है,एक आदमी पिछेसे आया बाए तरफसे चलो नर्मदे हर कहके आगे निकल गया।हम भी उसके पिछे हो लिये मगर वो इतने जल्दी गया की देखतेही हमारी नजरसे ओझल हो गया। आगे एक पेडपर परिक्रमापथ बोर्ड लगाया था।चलो आगे।
एक नाला आ गया पानी था मगर पत्थर डालके पगदंडी बनायी थी,आसानीसे पार हो गये। अब सुरू हो गयी खडी चढाई,बडे बडे पत्थरोंमेसे चलते चलते पहाडकी चोटीपर आ गये।जंगल समाप्त हो गया अब नीचे उतरना था,रास्ता नही था पगदंडीसे उतरकर भूमकागांवमे आ गये।स्कूलके पास विश्वकर्माजीके घर आंगनमे नर्मदे हर करके बैठ गये।बडी खुशीसे भाभीजीने स्वागत किया।थक गये थे,जलपान चायपान किया विश्वकर्माजीके आंगनमे हमने एक अलग तरह का चुल्हा देखा। वैसेभी हमे कहॉं मिलता है मिट्टीका चुल्हा देखनेको।नर्मदे हर। आगे चले थोडी दुरीपर डॉक्टर जसवंत यादवने बुलाया मलेरिया इन्स्पेक्टर है।नर्मदे हर!चाय को मना किया तो लड्डू लेके आए।मैया क्या कहे इस प्यारको?आपके प्रति ये आस्था,भक्ति,प्यार देखके हम सिर्फ इतनाही कह सकते है नर्मदे हर!
आगे भुमकागांवमे अंदर अहमदपुरके बाबुराम यादवके पत्नीका मायका था,वृंदावन यादव के घर।हमे कपडे धोने थे,यादवजी को बाबुरामभाईने फोन किया था इसलिए वो हमारी राह देख रहे थे।सहर्ष स्वागत हुआ।कड़ी धूप थी।माताजीने पंप चालू किया,तीन तरफ कृष्णकमल के फुलोंकी बेल बांबुपर चढाकर दिवारसी बनायि थी और परदेका दरवाजा,इस अनोखे बाथरूम मे नयी सोपडिश,कपडे धोनेकेलिएभी बारसोप भरपूर पानी,मनसोक्त स्नान हुआ,कपडे धोये।दिल खुश हुआ।भोजन का क्या बतांए? दाल-चावल,पुरी,फ्लॉवर टोमॅटोरस्सा,पकोडे,पापड,बिजौरी,और खीर ऐसा आगत-स्वागत मैया शब्द नही मेरे पास।
विश्राम के बाद आगे चलो।अब अच्छा रास्ता था।केवलारी,कुकराके बाद बादल आ गये,जोरकी हवा चलने लगी शायद कल जैसी बारीश के आसार दिख रहे थे।हम जल्दी जल्दी चलने लगे।केदारपुरमे प्रवेश किया।चौराहेपर दांए बाजू एक दुकान था हमारेपास केशव सोनी ये एक नाम था,सोचा दुकानमे पुछेंगे और बरसात थमनेके बाद उनके घर जाएंगे।नर्मदे हर! मैयाकी बडी कृपा है।वो दुकान केशव सोनीजीकीही थी।
दुकानके पिछेही घर था।सहर्ष स्वागत हुआ।केशवजी की माताजी,पत्नी,बेटा,बेटी सब बहुत अच्छे है।बारिश हो रही थी,पांच कबके बज चुके थे।माताजीने हमे आज यही रहनेको कहा,इसलिए आज मुक्काम।नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-11
अरूणोदय समयी सव्वापांच बजे हमारी दो डिब्बोंकी विनोबा एक्सप्रेसने साल्हेपानी स्टेशन छोडा।छोटीसी घाटी चढके उपरके साल्हेपानीमे आ गये।मगर अंधेरा लालबावटा लेके खडा था,आगे शायद रास्ता नही था,पैरोंतले कुछ नही दिख रहा था।सूरज चाचू के सिग्नलका इंतजार करनेमेही समझदारी थी।सो एक घरके बाहर बैठ गये।नर्मदे हर!
पावणेछे बजे थोडासा धुंदला धुंदलासा दिखने लगा चलो मिल गया सिग्नल।उबड खाबड पगदंडी थी,एक जगह वो भी तूटी थी।जंप मारके खाईमे उतरे थोडा इधर उधर देखा कहॉंसे उपर चढनेमे आसानी होगी,फिर थोडा बांएकी तरफ जगह मिली पहले सॅक मैयाकी क्षमा मांगके उपर फेंकी सॅकमे शिशीमे मैया थी फेकनेसे उसको लगनेवाला था। फिर हायजंप मारके हम उपर कैसे तो गये सफेद ड्रेस लाल हो गया,मिट्टी लाल जो थी।प्रशांतकी लुंगी थोडी फट गयी,जाने दो चलता है।नर्मदे हर!
वापस जहॉं रस्ता टुटा था उधरतक कांटोमेसे कैसे तो आ गये।चढाई शुरू।आज कलसे बहुतही बेहतर रास्ता था।बडे बडे पत्थर कम थे।ये सारा प्रांत पुनर्वसित है,सारी व्यवस्था होनेमे समय तो लगेगा ही।
चढाई खतम डांबर रोड शुरू।घाटमाथा आया।एकही घर था।विजय यादवजी का।उन्होने देखतेही नर्मदे हर कहके बुलाया।नर्मदे हर!
बहू मालती,बेटा सुशीलने बैठनेको चटाई बिछायी,चाय बनाती हूँ मगर दूध नही है,काली चाय चलेगी? क्युं नही चलेगी?अरे भाई दौडेगी।चाय नही,काली महारानी होती है।इतने दिनोमे हम दूध की चाय मानो भुलही गये थे।अदरक तुलसीवाली चाय बहुत अच्छी लगती है।सिर्फ चिनी कम डालो ये बताना पडता है,बहुत मिठी चाय पिते है इधरके लोग।
चाय पिके उन्हीके खेतमेंसे पगदंडीके शॉर्टकटसे हम बिछुआगांव पहुँचे।छोटेलाल धर्मकजीने नर्मदे हर किया।आओ मैया तनिक बैठो।इतने प्यारभरे बुलावे को टालही नही सकते।नर्मदे हर।बैठे,इस गांवमे सारे धर्मकही है।यहॉं तो माताजी पोहे लेके आयी नास्तेके लिये,बडी डिश भरके पोहे बादमे दूधवाला स्पेशल चाय कम चिनीवाला,बोली,हमको मालूम है आप लोग कम मिठी चाय पिते हो।मुझे हसी आयी,तो बोली क्या सही बोला ना मैने?नर्मदे हर!
आगे परासपानीगावके स्कूलके पाससे कच्चे रास्तेसे दुर्जनपुर। कड़ी धूप लगने लगी थी,कही भी एकभी पेड नही था। हमारे पास एक नाम था गोंटिया। पुछते पुछते गये।पंडीतजी का घर है,बडा घर है।गांवभी बडा है।नल-पानी योजना है।पानी आया हुआ था।हमारा स्नान होना बाकी था,कपडेभी बहुत गंदे हुए थे।सो पुछा,माताजी हां बोली,वो अभी अभी बिमारीसे बाहर आयी है।बुढी अम्मा ब्रेन स्ट्रोक हुआ था।स्नान,कपडे हो गये,मैया की पुजा आरती करके निकलेंगे ऐसा सोचा उतनेमे बडे पंडीतजीबाबा आ गये,हमारा स्तोत्र पठन सुनके पुछा पंडीत हो?मैने कहा,नही ब्राह्मण है।बाबा बोले ब्राह्मणही तो पंडीत होते है।अच्छा!हमारे यहॉ सिर्फ विद्वान,शास्त्रीओंको पंडीत कहते है बाकी सिर्फ ब्राह्मण।बाबा हसने लगे बोले संस्कृत अच्छा बोलती हो,बचपनके संस्कार है।
कपडे घडी करके सॅक पॅक कर दी और पंडीतजीको प्रणाम करके बोला चलते है।अरे?भोजन पा लिया?नही रहने दो,माताजी बिमार है हमने नास्ता किया है अभी भूक नही है।अरे वा!ऐसे कैसे चलेगा?बहू!! दमदार आवाज।हमे आके इतनी देर हो गयी थी,हमने किसीको नही देखा सिवाय माताजीके और एक लडकेके,वो लडका भी बादमे घरके अंदर गायब हुआ था।
और बडी बहू थाली परोसके लेके आयी,आपने देखा नही था परिक्रमावासी आए है?बाबाजी।बहू बिना जवाब दिये अंदर चली गयी।दुसरी बहू मिठाई लेके आयी।मुझे बोली,दिदी मै पुछनेवालीही थी,मेरे सरदर्द था,सोचा आपका स्नान होनेके बाद पुछुंगी।कोई बात नही बेटा।कुछ गोली वगैरे ली की नही?मै दे दू? मैने पुछा।बाम लगाया है कहके अंदर चली गयी।नर्मदे हर!
भोजन के बाद हमने सोचा इतने बुजुर्ग ब्राह्मण पती-पत्नी पंडीत है पुजन करना चाहिए।सो हमने दोनोंको बिठाकर प्रणाम करके दक्षिणा प्रदान की,उन्होने आशिर्वाद दिया।माताजी रोने लग गयी,मै बिमार क्या हो गयी...देखा तुमने क्या हो गया।मै क्या बोलती? नर्मदे हर।
पंडीतबाबाजी रहनेको कह रहे थे,हमने नर्मदे हर कहा।प्रणाम करके प्रस्थान किया।जंगलमे रहनेवाले गरीब आदिवासी तेरे बच्चे मैया सचमे बहुत बहुत धनवान है।
मेन रोडपर आनेके बाद एक टपरीपर चाय लिया।एक बच्चेने खेतमेसे जानेवाला शॉर्टकट दिखाया। पनारझीरगांवमे पहुँचे।अब स्टेट हायवेसे चलना था।जम्होरी,जम्होरीखुर्द,दिवारामार्गे दिवारीगांव पहुँचे शामके छे बजनेवाले थे।आज गांवका बाजार था। सरपंचका घर पिछे दिवारामे था,हमे कल यहींसे आगे जाना था।पंडीत श्री.जवाहरलाल दुबेजी का घर पासमेही था।गये उनके घर।सहर्ष स्वागत हुआ।सौ.पद्मा और दो बेटियॉं,बडा प्यारा परिवार है।हमने कन्यापुजन किया।आरतीके बाद पद्माने गरम गरम दाल-चावल,पुरी-सब्जी,पापड,खीर सुंदर भोजन प्रसाद परोसा।भोजनके बाद कहानी सुनानेके बाद अब विश्राम।
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-12
भोर होतेही स्नान,पुजा आरती करके पद्माने दिया चाय पिके उनको नर्मदे हर किया,बच्चीयॉं भी हमे टाटा करने के लिये इतनी जल्दी उठी थी।पंडीतजींके साथ हमे निरोप देने दुरतक आयी।हम निकले तब पांच बजे थे।
शिकाराफाटा,नहरतला,सुरजपुरा,कलकुही के बाद आया पायलीफाटा,यहॉंसे इको फ्रेंडली पर्यटन क्षेत्र है।गेटका परिसर इतना सुंदर है तो अंदर कितना सुंदर होगा? अंदर रिसॉर्ट है।ऑन लाइन बुकींग होता है।अभी परिक्रमामे है,बादमे कभी आ जाएंगे।
यहॉंसे घाट उतरना चालू हुआ।सुंदर जंगल,बिच बिच मे छोटे छोटे वॉटरफॉल थे।रास्ताभी अच्छा था।गढ़गोरखपुर फाटा,बीमाफाटा,सालिवाडा,सालिवाडा तुनिया आया।ओ हो!मैया!दुरवर सुंदरमैया दर्शन हुआ।सहस्त्रधारासे घागातक मैयाका दर्शन हो रहा था उसके बाद आज दर्शन हुआ था,मन उत्साहित हो गया,थकावट भाग गयी। संकटमोचनधाम हनुमानमंदिर था।ज्ञानलालनाथ महाराज थे।दर्शन करने अंदर गये।सुंदर बाग,तुलसीबन था।दर्शन लिया मराठी मारूतिस्त्रोत्र भीमरूपी महारूद्रा बोला।महाराजने तुलसीके पत्ते,अदरक डालके चाय बनायी,कालिमहारानी बहूत बढ़िया। दस मिनिटं विश्राम करके चले,नर्मदे हर!
घुल्लापाठ,यहॉ पहाडमे दादामहाराजका स्थान है।भाद्रपद अमावस को मेला लगता है।गागनदागांवके शुरूमें एक खेतमें सितारामबाबा और सौ.शामबाई वानप्रस्थी दंपतीने नर्मदे हर करके बुलाया,जलपान कराया नर्मदे हर।
गागनदा गांवमे रघुवीरसिंह लोधीजींके घर आए,सहर्ष स्वागत हुआ।घरके पिछेही बर्गीडॅम है।इसलिये सुपीक ज़मीन,बारमाही अनेकोप्रकारकी फ़सल होती है। सारा पुराना गागनदा बर्गीडॅममे डुब गया है,यहॉ उनका पुनर्वसन हुआ है।माताजींनी दूरवर पानीमें एक टीला दिखाया वहॉं था उनका पहला गागनदा।दिखाते समय माताजीके ऑंखोंमे पानी था,यहॉं सब है फिरभी गांव तो गांव था,वहॉ छोटीसी उमरमे नवीनवेली दुल्हन बनके आयी थी,संसार फला-फुला था।माताजी एकदमसे रोने लगी।
सही है!कुछ अच्छा पानेके लिये कितना बहुत कुछ अच्छा खोना पडता है।नर्मदे हर!हमारी भी ऑंख भर आयी थी।
कपडे धो लिये।भोजनप्रसाद के बाद लोधी पटेलजी की परपोती राधिकाके साथ थोडी देर खेलनेबाद बर्गीकॉलनी जानेके लिये प्रस्थान किया।
घाट रास्ता था,दाहिनेहाथ विशाल सुंदर रेवामैया साथमें चल रही थी।कह रही थी,जीवन चलनेका नाम चलते रहो सुबह शाम!
कॉलनीके गणेशमंदिरमे आ गये।मंदिर सुंदर है।आरतीमे सहभाग लिया।सुंदर गोबीके पराठे-अचार भोजनप्रसाद मिला।
वहॉंकी गाय बछडेको छोडके कही गयी थी,वो रो रहा था मॉं को बुला रहा था मैने उसको घॉंस खिलानेका प्रयत्न किया मगर शायद उसको घॉंस खाना नही आता था।बहुत देर रात गाय आ गयी तब कही जाके बछडा शांत हो गया और भी सो सके।नर्मदे हर!

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-13
आज बहुत जल्दी साडेचार बजे गणेशभगवानके दर्शन करके,बछड़ेको लाडप्यार किया और निकल पडे।मगर एक घंटा हुआ,कॉलनीके बाहर जानेका रास्ताही नही मिल रहा था क्या करे कहॉंसे जाए?मैया!नर्मदे हर!
मैया हमारी गंमत कर रही थी,मनही मनमे हँस रही थी।कैसा भुलभुलैया है?घुम फिर के वही पहले जगह ही आ गये थे।और फिर मैयाने संध्या नायक और उसकी मॉं को भेजा।उन्होने हमे बर्गीगांव जानेवाले रास्तेपर लाया।नर्मदे हर!
सुरजपुरी वनचेक नाका था मगर बंद कोई वॉचमन,सिक्युरिटी नही थी।नर्मदे हर!
सुरजपुरीसे बर्गीडॅमका प्रकाशमय नजारा देखतेही बनता था।लाइटका नजारा,पानीमे पडा प्रतिबिंब।सुंदर।वर्णनातीत।
चौराई,रास्तेके बाजूमे हनुमान-साई मंदिर था।दर्शन करके महाराजने दिया कालिमहारानी चायपान किया।उनको प्रणाम करके आगे।
टेमरमैया ब्रिजपरसे पार करके बर्गीगांव पहुँचे।स्टेटहायवे है,जबलपुर जानेवाला।आज मेरा चतुर्थीका व्रत है।प्रशांतने नास्ता किया,मैने सिर्फ चाय लिया।वहॉं लोगोने बताया घाटपिपरिया रोडसे जाना,थोडा आगे जाके लेफ्टको घाटपिपरिया रोडसे आगे चल पडे।रेल्वे क्रॉसिंग पार करके चल रहे थे। अब धूप बढने लगी थी।रास्तेमे जबलपुर मेडिकल कॉलेजके डॉक्टर अश्विनी पाठकजीके निर्माणाधिन फॉर्महाऊसके वॉचमन श्री.पंचमलाल यादवजी को पुछा और बैठे।सुंदर वृक्षराजी,एक बड़ासा कुवॉं।फल-फुलोंके पेडपौधे।सुंदर स्थान।पंचमलालजीने चायपान करवाया।नर्मदे हर!चलो आगे।
महरपाठा गांव आया।एक बसस्टॉप दुकान था बच्चे बसकेलिये रूके थे।हम भी रूक गये विश्राम के लिये।पिछेही सुखवतीबाई गौड का घर था,उन्होने बुलाया।सुखवतीबाई स्कूलमे भोजन बनाती है।प्रशांतको रोटी-सब्जी और मेरे लिये भूनि मुंगफली चाय बडे प्यार आदरसे दिया।उनके परसमे टोमॅटो लगे थे मैने कच्चे टोमॅटोकी चटनी बनानेकी विधी बतायि तो सरस्वतीने तुरंत बनायी,उनको बहुत पसंदभी आयी।नर्मदे हर!
आगे पुरानापानीमे रास्तेमे बडादेव(महादेव)मंदिर,धरमशाला है।सामने एक नदीमैया बह रही थी।यहॉं श्रीरामजी साधुमहाराज है।कपडे सुखाने डालकर विश्राम करने पेडके निचे आसन लगाया।
थोडी धूप कम हो गयी,महाराजने चायपान करवाया।प्रणाम करके नर्मदे हर!जमुनिया,घाटपिपरियामे सौ.कल्लुबाई गंगाराम पटेल के घर निवासभिक्षा मांगी,उन्होने सहर्ष दे दी।आसन लगाया।शामको आरतीमे घरके सभी सदस्य शामिल हुए।बढ़िया भोजन,कढ़ी-पकोडे,पुरी-सब्जी,चावल,खीर।अब निद्रादेवीकी आराधना।नर्मदे हर!
. क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-14
जल्दी सुबह साडेचार बजे पटेल माताजी को नर्मदे हर करके निकल पडे,चंदेरी तक अच्छा रास्ता था बादमे कच्चा जंगलका रास्ता शुरू हुआ।थानामे सुखदेव ठाकूर के यहॉ जलपान करके जंगलघाटसे नीचीगांवमे पहुँचे।अशोककुमार पटेलने चायपान कराया।नर्मदे हर! बजरंग मंदिरके सामनेसे खेतकी पगदंडीसे हिरापुर,फिर एकबार जंगलमार्ग,एक नाला पार करनेके लिये पत्थर डाले थे।आगे जाके डांबररोड आया।घुगरी पहुँचे।बसस्टॉप-धुर्वे जलपान गृहमे बैठे।प्रथम समोसा-चायका नास्ता किया।धूप कड़ी थी,वही एक बडासा लकडीका पलंग था आरामसे बैठ गयी।प्रशांत निचे चटईपर सो गया।थोडी देर बाद हॉटेल मालिक श्री.शिवराज धुर्वे और सौ.यशोदा धुर्वे हमारे लिये घरसे पुरी-सब्जी लेके आए,नर्मदे हर।हॉटेल के पिछे एक घर था,मै उधर गयी और पुछा,क्या हम आपके यहॉं स्नान करके कपडे धो सकते है?त्रिवेणा ठाकूर ने खुशी खुशी संमती दे दी।इतनाही नही मेरे ड्रेस को नील भी दे दी।ये लडकी यशोदा-शिवराजजीकी बेटी है।तीन बजे आगे प्रस्थान किया।आज आंध्र ओरिसा के किनारपट्टीपर हुद हुद नाम का तुफान आनेवाला था शायद उसिकी वजह धूपने ज्यादा परेशान नही किया था।बढैयाखेडा के बाद चरगवॉं आ गया।बडा गांव है।बूटमें इनरसोल डलवा लिये क्योंकि मेरे पैरोंके ब्लिस्टर बढ़ रहे थे और अभी बहुत लंबा सफर तय करना था।भडरी जानेका सोच रहे थे।दिलीप सेन ने चायपान करवाया,रहनेका आग्रह कर रहा था मगर हम नर्मदेहर करके आगे चल पडे।दोएक कि.मि.आगे आये एक मंदिर था,बाजुमें एक रूमभी थी।मगर रहने लायक नही लगी। पिछेही श्री.राजकुमार राजपूत का घर था,उन्होने बताया की भडरी बहुत दूर है,पहुँचते रात होगी इसलिए आप आज यही रहो।नर्मदे हर!मैयाने आज यहॉं हमारा निवास तय किया था।बडा घर,बडे दिलवाले लोग।सुंदर आदर सत्कार हुआ। नर्मदे हर!
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-15
सुबह साडेचार बजे पुजा आरती चाय होनेके बाद राजपूत फॅमिलीको नर्मदे हर करके हम यमनपुरसे आगे चल पडे।आज हायवेसे चलना था।सेमरीमैयाके ब्रिजपर एक ट्रक बंद पडा था।आजूबाजुका सारा परिसर जंगल है,ऐसे सुनसान जगहपर ड्रायव्हर-क्लीनर रातभर अकेले रहे थे।कमाल है।
चलो आगे। संपुर्ण घाट रस्ता,दोनो तरफ जंगल और चलनेवाले सिर्फ हम बहनभाई। भरडीगांव आया,रास्ते पासही लालसिंग राजपुतजी का घर है,माताजीने नर्मदे हर कहा,आओ दूध ले लो।नर्मदे हर! गरम दुध,मैयाका प्रसाद लेके बहुत अच्छा लगा।आधा घंटा विश्राम करके आगे चल पडे।
आजभी हुदहुद तुफानके कारण आकाश बादलोंसे भरा है,कभिभी बारीश शुरू होगी ऐसा लग रहा था।कुकलाह के बाद सिमरिया रेल्वे क्रॉसिंगपर एक मंदिरमे दर्शन करके बैठ गये।बाजुमे चायकी टपरी थी,विजयसिंगने चाय दिया।नर्मदे हर! आगे निकलही रहे थे की बारिश शुरू हो गयी।एक घंटा रूकना पडा।आगे चलने लगे,रास्ता बहुत खराब सारे रास्तेमे खडी डाली थी,रास्ता बन रहा था।चलना बहुत मुश्किल हो रहा था।बगलाई तक ऐसाही था।
गोटेगांव आ गया।पंतप्रधान नरेंद्र मोदीके स्वच्छता अभियान का मानो मज़ाक उडाने वाला भयानक गंदगी भरा शहर,एक सांसदके बंगलेके गेटके बाहरही गंदे कचरेका बडा ढेर था।और स्मशान नया बन रहा था,बगिचेकाभी काम चल रहा था।
नरसिंहपुर-जबलपुर हायवेपर आ गये।हॉटेलके बाहर रखे बेंचपर बैठे।पहलेसे गंदगी थी ही उपरसे बारीश हो गयी थी, भुक लगी थी नास्ता करना जरूरी था,न चाहते भी बैठे रहे।नास्ता करके महाकाली मंदिरमे आ गये।दर्शन करके वही विश्राम किया।यहॉंसे सांकल घाट जाके मैया किनारेसे जा सकते है मगर वो थोडा कठीण होता है,इसलिये हमने हायवेसेही नरसिंहपुर जाना निश्चित किया।
कुम्हडाखेडा,रेल्वे क्रॉसिंग,बोचर,कमती के बाद उमन मैया ब्रिजसे क्रॉस करके इमालियागांव आ गये।शाम हो गयी थी आज यही रहना जरूरी था।पुछताछ करनेपर सुनील उपाध्याय पंडीतजी का पता मिल गया।पासमेंही घर था।निवास भिक्षा मांगी,बडे आदरसे सहर्ष स्वागत हुआ।प्रशस्त घर है,खेती-बाडी है,सुनीलजी एल.आय.सी.एजंट है।बहुत अच्छे,सेवाव्रती लोग है।नर्मदे हर!

।।तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा।। भाग-1
आज दशहरा है।मेरी गाडी विलासपुर स्टेशनपर राइटटाइम पहुँची।कटनी पॅसिंजर सुबह छे बजे थी,वेटिंग रूममे बैठ गयी।वहॉ गोंदियामे बॅंकमे काम करनेवाला,अमरकंटकका रहनेवाला राम नामका लडका मिला,अच्छी सोबत मिल गयी।उसने मेरा भी पेड्रारोडका तिकीट लिया।
गाडी पहाडी जंगलसे गुजर रही थी।बहुत सुंदर घना जंगल है।थंडी हवा चल रही थी।पहाड के पिछेसे पेडोंकी आडसे सुरजचाचू आ गये।मैया!कितना प्यारा है देश तुम्हारा।
सुबह 9बजे गाडी पेड्रारोड पहुँची। बोलेरो खडी थी।मै और राम बैठ गये।गाडीवाले भाईसाब को कल्याण आश्रम के सामनेके निवासी स्कूलमे जाना था,उधरतक छोडुंगा ठीक है।
सुंदर निसर्ग दर्शन कराती घाटोंसे गुजरती बोलेरो मुझे मेरी मैयाके पास ले जा रही थी।ज्वालेश्वर,अमरेश्वर,दुर्गाधारा होते हुए अमरकंटक पहुँची।राम का घर बसस्टॅंडके पास था,वो उतर गया।मुझे कल्याण आश्रमके सामने उतार दिया।हडबडीमे मेरी काठी गाडीमें रह गयी।
मृत्युंजय आश्रममे रूम ले ली।स्नान पुजापाठ करके महाराजके दर्शन किये।भोजनप्रसाद ग्रहण करके थोडा आराम किया।
शामको मंदिर समुह,नर्मदाकुंडके दर्शन करने गयी।पुजारी धर्मेंद्र द्विवेदीसे मिलके कल मैयाकी परिक्रमा के बारेमे पुछा,उन्होने संकल्पपुजा और कढाईके 351रू.बताये नाम,पता,गोत्र,फोन नंबर,आश्रमका रूम नंबर सब लिख लिया और सुबह 8-30बजे आनेको बोला। पैसे देके,पुनः दर्शन करके मै वापस आश्रम आ गयी।
शामको मैयाके घाटपर रावणदहन का कार्यक्रम हुआ। मैने पहिली बार ऐसा कार्यक्रम प्रत्यक्ष देखा।
कलसे मैयाके साथसाथ परिक्रमामे चलना है।मगर मेरे पास तो काठी नही है कठीण रास्तेपे कैसे चलूँ?आश्रमके एक बंधुको पुछा,उन्होने एक बडा दंडा दिया बहूत भारी था कैसे चलुंगी?नर्मदे हर!मैया देख लेगी।
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-2
सुबह जल्दी स्नान पुजापाठ करके (आजसे थंडे पानीसे नहानेकी आदत डालनी है)आश्रममे चायप्रसाद लेके,महाराजको प्रणाम करके रूम छोडके मंदिर मे गयी। आज एकादशी दर्शनकेलिये भीड होने लगी थी।पुजारीजी श्री.धर्मेंद्र द्विवेजीसे मिली तो उन्होने मुझे पहचानाही नही,संकल्पका बताने के बाद एक दुसरे गुरूजी को बताया,वो गुरूजीने कुण्डसे नर्मदाजल लानेको कहा,कुण्डका जल बहुतही प्रदुषित था मगर क्या करती इस मानवी अपराध के लिए मैयासे क्षमा याचना करके जल कुपीमे भरके मंदिरमे आ गयी,शिवजीके मंदिरमे वो गुरूजी बहुतही अशुद्ध मंत्र बोलते संकल्प बताने लगे जो संकल्पमंत्र न होके शिव पंचाक्षरी स्तोत्र था।उनको लगा इसको क्या समझेगा,मै पंडीत की बेटी हूँ बचपनसे स्तोत्र मंत्र पठण करती आयी हूँ।ऐसे खडे खडे संकल्प नही किया जाता।मगर क्या करती ये परिस्थिती भारतके हर बडे तीर्थक्षेत्रकी है।पंडे भक्तोंको ठगाते है।मैयासे क्षमा याचना करके खुदने संकल्पमंत्र बोले और गुरूजीके हाथमे 101रू.दक्षिणा देके उनको प्रणाम किया।पंडीतजी मेरी तरफ देखते रह गये।वापस द्विवेदीके पास आकर कढाईप्रसाद के बारेमे पुछा,वो बोले हम करेंगे कढाई।क्या बोलती?मैयाको चढानेके लिए लायी साडी भगवान आषुतोषजी की शाल-धोती उनके हाथमे दे दी।वो देखने के बाद गुरूजी एकदमसे बदल गये।फिर उस गुरूजीको बुलाकर मुझे ऑफिससे परिक्रमा प्रमाणपत्र दिलवाकर दक्षिणद्वारसे विदा करवानेको कहा।नर्मदे हर!
सील लेके गुरूजीको नर्मदेहर किया और आगे चल पडी।
बाहर आके चाय पिया वही मैयाका प्रसाद समझा। 1,2कि.मि.कच्चे जंगल रास्तेसे चलकर हायवेपर आ गयी तब घडीमे सुबह के दस बज रहे थे।
सात कि.मि.कबीरचबुतरा पहुँचकर टपरीपर चाय लिया खानेकेलिए वहॉं समोसे,चिप्स वगैरे था,वो मै नही खा सकती थी।आगे चली रास्ता अच्छा था,दोनो तरफ घना जंगल,सुंदर पंछी,खेलते कुदते बंदर और मनमे ॐनमो नर्मदा माई रेवा पार्वतीवल्लभ सदाशिवा धूनमें दंग मै।बहुत अच्छा लग रहा था।
हाथमे लीहुयी काठी भारी थी,मेरे हाथमे नही समा रही थी।मगर क्या करती?अपनी बेटीकी तकलीफ मैया कैसी देख सकती?उन्होने रूंजा नामके आदिवासी बंधूको भेजा,वो मेरे पास आकर बोले मैया इतनी मोटी लाठी लेके कैसे चलोगी?थक जाओगी,ये मेरी लाठी आप लेओ और आपकी मुझे दे दो।नर्मदे हर!
जगतपुर आ गया उधरके सुंदरलाल बघेल का नाम मेरे पास था मगर उनका घर बंद था।फिर वही आंगनबाडीके बरामदेमे बैठी।राय नामकी आंगनबाडी सेविका थी,उन्होने पानी दिया बच्चोंका भोजन हो गया था इसलिए वो भोजन देनेको असमर्थ थी,इसलिये वो बारबार खेद जता रही थी।वो करंजिया की रहनेवाली थी उन्होने उनके घर बुलाया और वो बससे आगे गयी। एक घंटा आराम करके मेरी विनोबा भावे एक्सप्रेस आगे चली।बोंदर के बाद करमंडलमे एक टपरीपर चाय लिया।
रास्तेमे एक कार रूक गयी मेरी पुछताछ करके मै पैदल परिक्रमा कर रही हूँ ये देखकर अचंबित होकर आदरसे मेरे पैर छुने लगे।मेरे समझमे नही आ रहा था की मै क्या करूँ?नर्मदे हर।
शामके पांच बजे मै करंजिया पहुंची।कोई आश्रम या राय मॅडमका घर पुछनेही वाली थी,एक थ्री व्हिलर मे बैठे भाईसाबने नर्मदे हर किया और उनके घर आनेका आमंत्रण दिया।वो थे रिटायर मलेरिया इंस्पेक्टर श्रीयुत प्रेमकुमार बुनकर।बुनकर भाईसाब एक पैरसे दिव्यांग है फिर भी ये मेरे हिम्मतबहाद्दर भैयाने पत्नीके साथ इस थ्रीव्हिलरसे पाटी-बोखराटा के कठीण कच्चे जंगलमार्गसे परिक्रमा की है।
घर फोन करना था मगर मेरे फोन को रेंज नही थी,शिफा मेडिकलके नसीम भाईने उनके फोनसे मेरी घर बात करवायी और मैयाके प्रति श्रद्धा रखनेमे धर्म आडे नही आता इसकी प्रचिती दे दी।
बुनकर भैयाके घर मुझे मायके जैसा ही लगा ।
क्रमश:

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-3
स्नान पुजाआरती के बाद भाभीने दिया चाय लेकर आगे प्रस्थान किया।तरेरा,रामनगरमे एक नालेके पास ब्रिजके पास श्री.लल्लूदास सौ.चंपाबाई ने अपने वानप्रस्थ कुटी मे बुलाया,तुलसीके पत्ते,गुड डाला हुआ काला चाय दिया।मैने ऐसा चाय इसके पहिले कभी पिया नही था इसलिए वो काला चाय पिनेकेलिये थोडा हिचकिचाई,थोडाही देनेको बोला।डर डर के एक घुंट पिया,और बहुत बढिया लगा,और थोडा दे दू?माताजीने पुछा।जी,चलेगा और चाय पिया,एकदम रिफ्रेश हो गयी।चलो आगे।
अमलदिह,बरबजपुर,रूसा गांव आया।स्कुलके सामने राय भोजनालयमे गयी।भुक लगी थी मगर वहॉं सिर्फ समोसे थे,मुझे समोसा बिलकुल पसंद नही क्या करू सोचमे पड गयी।सौ.कमलेश दिनेश राय आयी,भोजनालय उन्हीकाही है।मै परिक्रमा वासी हूँ ये जानने के बाद मुझे घरमे लेके गयी और पुरा भोजन करवाया,रहनेका बहुत आग्रह किया,बहुत अच्छे सेवाभावी लोग है,एक कुटुंब मेरे रिश्तेदार बन गया। विश्रांति लेके आगे चल पडी।
पाटणगड मे सिवनीमैया ब्रिजपरसे क्रॉस की।शाम को पाच बजे गोरखपुर पहुँची।मेरे पास सिर्फ एक नाम था जिनके घर मेरी सहेलियाँ परिक्रमामे रही थी।एक दुकानमे पुछा,सतीश शर्मा कहाँ रहते है?वो दुकान उन्हीकी थी।भारती ठाकुर का संदर्भ दिया,बहुत सहर्ष स्वागत हुआ।सतीश,पत्नी सतकिर्ति,माताजी,बेटा हम ऐसे घुलमिल गये मानो एकही घरके सदस्य है।
सुबह गरम पानीसे स्नान,पुजाके बाद चाय-नास्ता करके माताजी का आशिर्वाद लेके आगे चली सतीश सतकिर्ति दो-तीन कि.मि.मेरे साथ आए।हनुमान मंदिर मे दर्शन करके वो घर गये और एक रिश्तेदारी झोलीमे समेटे मै आगे बढ गयी।
चंदना,मोहतरा,पिंजराहटोला,डोंगरीटोला,रामनगर,कनकधारा यहॉं सुरेंद्र चायकी दुकानमे चाय लेके आगे चली।मोहतरा रत्ना यहॉ एक सिद्ध बाबा मंदिर है,देखा तो महाराष्ट्रके शेगाव के संत गजाननमहाराज का मंदिर था।उनको इधर सिद्धबाबा कहते है।आज गाडासराईमे सतीश शर्माने बताए डॉक्टर विजय चौरासिया के घर जाना था।
गाडासराईका घाट पार करके फॉरेस्ट ऑफिसके प्रांगणमे थोडी देर विश्रांती लेके आगे चली।कुकडाटोला के बाद आया गाडासराई। एक भाईसाबको डॉक्टर चौरासिया के बारेमें पुछा तो वो मुझे बडी अदबसे उनके हॉस्पिटल ले गया।
डॉक्टरसाब बाहरही खडे थे कही बाहर जानेकी तैयारीमे लग रहे थे।मैने मेरा परिचय दिया।बोले मै और आपकी भाभी जबलपुर जा रहे है रातको वापस आएंगे।आप आज यही अपने घर रहना,मेरा बेटा नवीन,बहू सविता है।पोता अर्पित और पोति अंशिका भी है ।विना संकोच रहो।
नवीनने मेरी बॅग उपर घरमे भिजवायी।बच्चे दौडके मुझे लेने निचे आ गये।और फिर ऐसे चिपक गये जैसे मानो हमारा जनम जनम का रिश्ता है।
क्रमशः

तीर्थ जननी नर्मदा परिक्रमा भाग4
डॉक्टर साब बडे भाग्यशाली है,इतना प्यारा परिवार है।बहू ने बहुत बढिया भोजन प्रसाद खिलाया।नवीन भी बार बार दुकानसे फुरसत निकालकर ऊपर आकर मेरी पुछताछ करता रहा।बच्चे तो इतने घुलमिल गये थे,उनके दादाजी ने लिखी पुस्तके ,उनको मिले प्राइज सब मुझे दिखाया,अपने स्कूलके बारेमे,दोस्तोंके बारेमे बताते रहे,शामको टेरेसपे जाके हम तिनो खेल भी खेले।बच्चोंको ये महाराष्ट्रीय दादी बहुत पसंद आयी,रातको कहानी सुनते सुनते मेरेपासही सो गये।
डॉक्टरभाईसाब और भाभि बहुत देर रात वापस आए।
सुबह जल्दी ही मैने सब को अलविदा किया क्योकी बच्चे उठ जाते तो मेरा निकलना असंभव हो जाता।नर्मदे हर!
सुबह का सुहाना मौसम था,रास्तेके दोनो तरफ के खेत लहराती हसी के साथ मेरे चलनेका हौसला बढा रहे थे।जैसे कह रहे थे,पैदल धीरे धीरे चलो मुखसे जय मैया बोलो।
तीनएक कि.मि.सागरटोला गांव तक आयी थी,पिछेसे गाडीका हॉर्न बजा एक गाडी मेरे पास रूक गयी और दरवाजा खोलके अंशिका अर्पित दोनो बच्चे मुझसे ऐसे लिपट गये मानो जैसे मै उनको छोडके कही भाग रही थी।मुखसे रट लगा रखी थी,घर वापस चलो आपने कही नही जाना हमारे साथही रहना।
बच्चोंका प्यार देखकर मेरे ऑंखोंसे बहते आंसू थमने नाम नही ले रहे थे,मैया किस जनम का नाता है हमारा?एकही दिनमें इतना प्यारा लगाव हुआ।
नवीन बोला,निंद खुलतेही मेरे बारेमे पुछा और मै चली गयी ये समझने पर रो रो के हंगामा खडा कर दिया आखिर ज्यादा दूर नही गयी होगी ऐसा सोचकर बच्चोंको लेकर आ गया था।
परिक्रमामे वापस पिछे नही जा सकते,परिक्रमा पुरी होनेके बाद आऊंगी,बर्थ डे को आऊंगी गॉड प्रॉमिस पक्का आऊंगी ऐसा वैसा बहुत समझाने के बाद रोते रोते कैसे तो गाडीमे बैठ गये।मै भी आंखोंमे आंसू लिये नर्मदे हर करते आगे चल पडी।
आगे सिद्धार्थ यादव की टपरी पर चाय लिया उसने पैसे नही लिये।बोंदर हर्रा के बाद कारोपानि यहॉं से थोडी दुरीपर कृष्णमृग अभयारण्य है।वहॉं जाना मुमकिन नही था सो आगे निकली,डॉक्टर भाईसाबने स॑जीव मरकाम का नाम बताया था गिधागाव के बॉर्डरपर उनका बंगला है।अंदर गयी मगर वो कही गाव जानेवाले थे।चाय पिके आगे नर्मदे हर'
गोमती मैया के किनारे महेंद्रसिंग का हॉटेल है।उनके बेटे को बचपनमे मॅनेनजायटीस हुआ था।नानीने बच्चा ठीक होने दो उसको लेके परिक्रमा करूंगी ऐसी मैयासे मन्नत मांगी,बेटा ठीक हुआ तो दस सालके बेटेको लेके नानीने पैदल परिक्रमा की।नर्मदे हर। शाम को गिधा गांव मे श्री.फुलसिंग राठौर के घर आसन लगाया।बहुत सेवाव्रती परिवार है।पुजा पाठ भोजनप्रसाद लेके अब विश्रांती ।
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-5
आज सुबह पाच बजे फुलसिंग राठौरजी को नर्मदे हर करके निकल पडे,गोमतीके किनारे स्नान करके महेंद्रसिंग के ढाबेमे बैठकर मैयाकी आराधना पुजा आरती की,महेंद्रजीने पोहे-चाय नास्ता दिया।नर्मदे हर!
कुडा,बिछिया,महावीर टोला,सिमरिया फाटा,घानाघाट पार करके दिंडोरी पहुंचे।अमरकंटक के बाद मैयाका दर्शन नही हुआ था इसलिए मैयाके घाटपर गये।मगर अफसोस!सारा परिसर गंदगीसे भरा पडा था।मन बहुत नाराज हुआ।किनारेसे नही जा सकते ऐसा लोगोने बताया इसलिए वापस मंडला रोडसेही जाना ठीक समझा।
मेरे पैरोंमे ब्लिस्टर आये है,मडिकल स्टोअर से बॅण्डेड और कुछ ऍन्टिबायोटीक खरीदे,मुझे डायबेटीस है प्रिकॉशन लेना जरूरी है।
किरहाटोला,जमुनिया,रहंगी,रयपुरा पिछे छोडके इमलयको स्कूलके आगे पिपलका पेड है वहॉ बैठे।स्कुलके सर बोले बच्चोंका भोजन होने बाद आपको भोजन कराएंगे।नर्मदे हर!दो बजे दाल-चावलका भोजनप्रसाद लेके विनोबा एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायी।
दिंडोरी डिस्ट्रिक ये सारा प्रदेश रूक्ष है।पेडपौधे बिलकूल नही।दिंडोरी शहरका शायद कचराडंपिंग झोन है,कचरेके पहाड बन गये है।मैया इधरसे पाच कि.मि.दूरीपर है फिरभी सारा प्रांत उजडा हुआ क्युं है पता नही। कडी धूप थी,घाटका रास्ता था पानी पानी हो रहा था प्याससे,अपने पासका पानी खतम?सॉरी एक महाराजने बोला था,खतम नही बोलना पुरा हो गया बोलनेका,तो हमारा पानी पुरा हुआ था।रैपुरा पिछे छोडके हम छपरी आगये थे।रास्तेपास एक घर था।नर्मदे हर।मैया!पानी मिलेगा? जरूर मिलेगा।मैयाने बैठक बिछायी,थंडगार पानी कांसेके लोटेमे दिया साथमे एक प्लेटमे गुडभी दिया बोली सिर्फ पानी नही पिना पहले गुड खाओ बादमे पानी पिना।नर्मदे हर मैया!कितने आतित्थ्यशील है आपके बच्चे।माताजी का नाम था रनियाबाई।जुल्दानिया फाटा,तलैया तक घाट चढाई थी बादमे उतरना था।तलैयामे चायटपरीमे चाय लिया।पासमे एक मंदिर था मगर रहने सुविधा नही थी।आगे जानाही पडेगा।वापस एक छोटा घाट चढके किसलपुरी गांव आया।एक स्कूल,हॅण्डपंप के पास सौ.भानुमती थानिलाल गर्ग का घर था।शामके छे बजनेवाले थे आज गिधा से किसलपुरीतक 25-30कि.मि.चले थे,बहुत थक गये थे इसलिये माताजी के पास निवासभिक्षा मांगी,वो उन्होने सहर्ष दे दी।घरमे एक नया कमरा बनाया था उसमे हमे ठहराया।
22/09/16, 7:38:18 PM: ‪+91 94236 38659: भानुमतीजीके पुत्र प्रमोद गर्ग बहू कामिनी,बच्चे प्रिया,प्रफुल्ल,दुसरा पुत्र विरेंद्र बहू अल्पना बच्चे हर्षिता,सत्यम तिसरा पुत्र राघवेंद्र।पिंजराटोलामे जिस हरीप्रसाद तिवारी और गयाप्रसाद तिवारी के यहॉ हमने चायपान किया था,अल्पना उन्ही की बेटी है।परिक्रमावासियोंके प्रति इतना आदर,अपनेपास जो सर्वोत्तम है वह उनको देनेकी आस ये देखके मन भर आता है।मैया ये आपका प्यार।बोलनेको शब्द नही है।
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-6
भोर समयी पाच बजे गर्ग फॅमिली को अलविदा करके हमारी विनोबा एक्सप्रेस छुटी।सक्का,कचनारी,बरगा घाट चढाई शुरू।रास्तेके दुतर्फा पहाडपर घनदाट जंगल है फिरभी चलनेवाले को छांव नही मिलती क्योंकी जंगल पर्वतीय ढलानपर है।राई गांव आया दुर्गामंदिर के सामने अनिलसाहू के हॉटेलमे नास्ता किया उन्होने चायके पैसे नही लिये।अब घाट उतरना था।
मुझे बुखार आया है,पैरके ब्लिस्टर चलने नही दे रहे।एक जगह मॉं वनदेवी मंदिर है,वहॉके महाराजने हलवाप्रसाद दिया। 2014मे यहॉ एक जलस्त्रोत का उद्गम हुआ,एक पंचमुखी नागदेवताने दर्शन दिया ऐसा महाराजने बताया।वो बोले नर्मदामैया प्रकट हो गयी है कुण्ड भी बनाया है।
हर्राटोला के बाद हर्रा गांव आया स्कूलके शिक्षक श्री सारदा गोप आये हमे बुलाया,बोले आज उनके पत्नीने ज्यादा डबा दिया था और बोली आज आपको माताजींको खिलाना है।नर्मदे हर!मैया तेरी लिला अगाध है।
थोडी चढाई के बाद अब घाट उतरना था।गिधलौंडी,एक नदी किनारे गर्द झाडीमें एक हनुमानमंदिर और एक कुटी थी काशिगिरी महाराजने बगिचासे तोडके अमरूद दिये मधुर अमरूद।अंतरात्मा तृप्त हुआ।
कोयलीघॉंस,अंडियामाल के बाद चाबी गाव आ गया मेरे पास रूसा के कमलेश रायने बताया माया बघेल शिक्षिका ये एक सिर्फ नाम था।बुखार से बेहाल हो गयी थी।आगे चल पडे ।एक माताजी अपने घरके बाहर बैठी थी जोरजोरसे मुँहसे आवाज करते हातोंसे इशारा करके हमको बुलाने लगी पास जातेही मेरा हाथ पकडके अपने पासकी खुर्सीपर बिठाया,मेरे सरपर,गलेपर हाथ लगाकर इशारेसे बुखार आया है,पैर दुख रहा है,आज इधर हमारे घरही रहो ऐसा कहती रही। उनके घरके सदस्य भी आ गये और बडा आग्रह करने लगे हम मान गये।मैयाने आज अपने इस पुत्रके घर हमारी व्यवस्था तय की थी।ये घर था गप्पू खडगडे का।
खडगडे कुटुंब बैतुल जिल्हा आमला जो मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र सीमापर है वहॉंके रहनेवाले है।बहूँए महाराष्ट्रके छिंदवाडा की है।फिर क्या हम उनके मायकेवाले,मराठीमें बाते,महाराष्ट्रीय भोजन।गरमपानीमे नमक डालके पैर सेंकना।बहुत आराम मिला।
तबियत ठीक नही मगर चलना तो पडेगाही।साडेपांच बजे विनोबाएक्सप्रेस को ग्रिन सिग्नल दिया।खैरी के बाद गिठौरीमे श्री शर्मणकुमार झारिया के चायटपरीपर चाय लिया उन्होने पैसे नही लिये मैया कितने सेवाव्रती है आपके बच्चे।नर्मदे हर।
खाल्हेगिठौरी,अंडियादर,मोहगांव रैयत,मोहगांव नाकेपर गोविंद बैरागी के हॉटेलमे उडददालके वडे-चाय नास्ता किया,दवा कॅप्सुल लेली।बैरागीजीने पैसे लेनेसे इन्कार कियाउपरसे तबियत ठीक नही इसलिए आज यही रहो कहने लगे।आगे जाना जरूरी था इसलिए नर्मदे हर।
धूप कड़ी हो रही थी,पैर बहुत दुख रहा था,बुखार बढ रहा था।इंद्रागाव आया,सोनादास माणिकपुरी इस कबीरपंथी गृहस्थके घर ॐभवति भिक्षां दे हि किया उन्होने सहर्ष घरमे बुलाया,भोजनप्रसादके बाद दवा लेके विश्राम किया।
दो बजे आगे चल पडे।बुखार है,सर भी फटा जा रहा था,पैर चलनेसे मना कर रहा था।देवगांव पहुँचे तब पाच बज चुके थे।सौ.लिलाबाई संतकुमार झारिया,उनकी बेटी श्रीमती लक्ष्मी के घर निवास भिक्षा मांगी,मैयाके बच्चे आतिथी देवो भव ये उनका परम धर्म है ना बोलने का सवालही नही था।झारियाजी के दो जवान बेटे किसी कारणवश भगवानको प्यारे हो गये थे ये क्या कम था लक्ष्मी के पतीको भी देवाज्ञा हो गयी थी।लक्ष्मी के दो बच्चे सोमनाथ और कविता बहुत स्कॉलर है।
एक छोटासा दुकान निर्वाहका साधन है।संतकुमार रोज सुबह-शाम मैया को दुध-अगरबत्ती चढाए बिना अन्न ग्रहण नही करते।नर्मदे हर!
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-7
लक्ष्मी के बच्चे स्कॉलर है,परिक्रमामे रहते उनके लिए ज्यादा कुछ करना संभव नही था इसलिए स्कूलको लगनेवाले मटेरिअल के लिए कुछ पैसे दे दिये वो नही ले रहे थे हमने कहा ये कन्या पुजन है तब जाके स्वीकार किया।परिक्रमा पुर्ति के बाद हमने उनके लिए और मदत भेज दी।
पावणे छे बजे प्रस्थान किया।नर्मदा-बुढनेर संगममे स्नान किया जल बहुत सुहाना गुनगुना था।बुखार होने के बावजूद स्नान के बाद मुझे बहुत बढ़िया महसूस हो रहा था।मंदीरमे दर्शन करके घाटपर बैठकर मैया की आरती करके बुढी माई पार करनी थी,पानी ज्यादा गहरा नही था मगर फिसलन का डर लग रहा था,मोहित नंद नामके छोटे नर्मदापुत्र ने मेरा हाथ पकडकर मुझे वो बडी चौडी बुढीमाई पार करवा दी।नर्मदे हर।
नदीकी दरड चढकर उपर आए,परिक्रमापथ ऐसा बोर्ड था थोडा तेढा था आगे चल पडे कुडोपानि गांवमे पहुँचे।गलती हुई थी,बोर्डके बाजूसे जाना चाहिए था अब सफर लंबा होना था।जंगलतक पहुँचते पहुँचते मेरी दमछाक हो गयी।घाट चढना मुझे नामुमकिन लग रहा था।मै वही बैठ गयी। वहॉ कुछ बच्चे जंगलमे महुआ के फूल इकठ्ठा कर रहे थे। उनको मदतके लिए बिनती की हिमांशु वरकडे नामके बच्चेने मेरी सॅक उठायी और हम घाट चढने लगे,घनदाट जंगल बडेबडे पत्थरोंके बिचमेसे चलते घाट चढके उतरकर रास्तेपर आ गये।थोडीदेर विश्राम करके सामनेही के खेतमेसे पगदंडी से बिलगांव पहुँचे।मुझे बुखार आया था पैर भी बहुत दुख रहा था।गावमे डॉक्टर विनोद शुक्ल,डॉक्टर अरविंद शुक्ल की डिस्पेंसरी थी,उधर गये मुझे 102बुखार था।डॉक्टर बोले रामनगर दूर है आज आप हमारे घरही रहो,मेडिसिन लेके आराम करना अगर ठीक लगा तो कल आगे बढ़ना नही तो दो-तीन दिन यही रहना।हम रूक गये।आज सिर्फ दस कि.मि.चलना हुआ था।
दुसरे दिन सुबह छे बजे प्रस्थान किया।आजका रास्ता सिधा था।सालिवाडा,चंदवारा फाटा पिछे छोडके रेवाखण्डे सेकंडरी स्कूल पलेहरा बोर्ड पाससे दाहिने बाजूसे पलेहरा गांवमेसे सिमेंटका रास्ता खतम होतेही सामनेके पगदंडीसे खेतोंके बांधोंपरसे चलते झिना गांवमे आ गये।
अब डांबर रोड आ गया।चौगान गावमे मध्यप्रदेश सरकारका पर्यटन रेस्टहाऊस है।यहॉं रहके रामनगर किला,मोतिमहल,काला पहाड वगैरे पर्यटन स्थल देख सकते है।एक टपरीपर चाय लेके आगे चल पडे।
चौगान की मढ़िया ये एक ऐतिहासिक वास्तू देखनेको मिली।रामनगर बड़ा गांव है।ऐतिहासिक धरोहर है मध्यप्रदेश की।रामभक्तकी गढ़ी,राममंदिर,मोतीमहल,मैयाका घाट है।हमारेलिए अभिमानास्पद बाब,यहॉं बॅंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा है।नास्ता करके दवा लेके आगे चले।नर्मदे हर।
मुगली गाव,यहॉसे कालापहाड जा सकते है।काला पहाडमे नैसर्गिक बने अष्टकोनी,षटकोनी पिलर्स बने है।एक गुंफामे शिवपिंडी है,पहाडमे मिट्टी बिलकूलभी नही फिरभी बडे बडे वृक्ष है।ऐसा हमे बताया गया मगर समय नही था,फिर कभी आएंगे।अब चलो आगे।
कुरिया टोला का घाट चढके मधुपुरी पहुँचे।ॐशिवमंदिर,यहॉ परिक्रमावासीओंको भोजनप्रसादकी सुविधा मिलती है।नर्मदे हर!गीताबाई होलकर पटेल सेवाव्रती है।सहर्ष स्वागत हुआ।भोजनप्रसाद के बाद थोडा विश्राम करके आगे प्रस्थान।
घुघरागांवके बाद एक तलावके आगेसे दाहिने तरफ कॅनॉल रोडसे शॉर्टकटसे चल रहे थे।कड़ी धूप थी मगर कॅनॉलके पानीके उपरसे चलनीवाली थंडी हवा सुकून दे रही थी।आमगमा गांव पिछे छोडके खडदेवरा गांवके शासकीय प्रार्थमिक स्कूलके पाससे सुंदर मैया दर्शन हुआ।बहुत खुशी हुई।स्कूल शिक्षक श्री.मनोज तिवारी,जितेंद्र ठाकूर,चाय-पानी होनेके बाद नर्मदे हर।
खडदेवरीमे कॅनॉल क्रॉस करके स्कूलके पाससे पगदंडीसे आगे निकले थोडी दुरीपर रोड मिल गया।दाहिने बाजूसे सुरजकुण्ड के दर्शन करने गए।सुंदर मंदिर परिसर,मैया किनारे कुण्ड।कुछ लोग इधर रहो बोल रहे थे मगर हमने महाराजपुर जाना मुनासिफ समझा नर्मदे हर।
पुरवा चौराहा,चाय पिके बंजर-नर्मदा संगमपर आए।बंजरमैयापर कच्चा छोटा ब्रिज है मराठीमे हम उसको सांडूवा या सेतू कहते है।
बडे शहरोंमे नदियोंका जो हाल होता है वही हाल यहॉं भी था,सारे शहरका कुड़ा-कचरा शायद यहॉं लाकर पटक दिया था। उसी गंदगीमेसे आवागमन चल रहा था।हम भी गये महाराजपुर।कही रहनेका इंतजाम न हो सका तो गाडीसे परिक्रमा करनेवाले जिस रमा-रमण लॉज मे ठहरते है वहॉं जानेके लिए चले लॉज के बाजूमेही भा.ज.पा.पार्षद रितेश राय,सौ.प्रिती राय का घर था गये अंदरग,निवास भिक्षा मांगी,उन्होने सहर्ष दे दी।बहुत बढ़िया आदर सत्कार किया हमारा।नर्मदे हर।
क्रमशः

Tuesday, 28 February 2017

पायी अष्टविनायक दर्शन यात्रा-३

१०जानेवारी- स्नान करुन नुकत्याच काढलेल्या ताज्या दुधाचा छान चहा घेऊन आमची तीन डब्यांची विनोबा एक्सप्रेस निघाली पुढच्या प्रवासाला.कानसळ,पेडली येथे चहा-बिस्किटे खाऊन पुढे वाटचाल सुरु केली.भौमसुल,तिवरे,अंबामैयाच्या पुलावर फोटो काढले. किती शांत सुंदर दिसत होती अंबामैया आज.आणि पावसाळ्यात अशी कृद्ध होऊन एखाद्या चवताळलेल्या नागिणी सारखी फोफावत धावते,वाटेत येणारी प्रत्येक चीज गिळंकृत करत सुसाट निघते,कालिमाताच जणू नाव आहेच अंबा.सृजनांची माता दुर्जनांची काली.
        खुरावला फाटा येथे नरेंद्र मोरे यानी चहा दिला.चिवे फाटा येथे जवळच्या लाडू वड्या खाऊन नास्ता केला.मजरेफाटा,वावे,घोड्याचा डोह,येथे शिवाजी महाराजांच्या घोड्याना पाणी पाजत असत.इथुन जवळच सुधागड किल्ला आहे.रासळ,आम्बोले,पाली.आली माझ्या मोरयाचे पाली.
         अकरा वाजले होते.प्रदीप मेहतांच्या दुकानात गेलो,हेच नांदगावला आमची निवास व्यवस्था करणार आहेत.त्यांची पत्नी अर्चना जांभुळपाड्याच्या डॉक्टर भिडे यांची मुलगी माझ्या घरचीच होती एकप्रकारे प्रदीप आमचे जावईच होते.अर्चनाला मला पाहुन खुप आनंद झाला.ती मोठी झाल्यानंतर आमची प्रथमच भेट होत होती.नर्मदे हर. प्रदीपजी नांदगावला राहात नाहीत पण तिथे काम करणारी मुलगी कुटुंबासह तिथेच राहते,ती सर्व करेल व मीही येतोच असे प्रदीपजींनी सांगितले.नर्मदे हर.
        प्रथेप्रमाणे आधी धुंडीविनायकाचे दर्शन घेतले.हा बल्लाळविनायकाचा मोठा भाऊ म्हणून प्रथम दर्शन..नंतर बल्लाळेश्वराला उजवी घालुन आधी अक्का{माझी मोठी बहीण}च्या घरी गेलो.प्रसन्न{अक्काचा नातू}वाटच बघत होता.सॅक ठेवुन मैयाजलाची कुपी,मैय्याजलात मिळालेला बल्लाळेश्वरा सारखाच असलेला मोरया नर्मदा गणपती आणि संकल्पाचा नारळ घेऊन मंदिरात गेलो.नर्मदे हर.
      हा माझा मोरया.माझा लाडका,ज्याच्या जवळ मी माझे मन मोकळे करते,सुखःदुख सांगते,अडचणीत मदत मागते आणि तो ती लगेच देतो.वेळप्रसंगी मी त्याच्याशी कडकडून भांडते,कट्टी सुद्धा घेते पण फारवेळ नाही धरता येत मला अबोला.कसा धरणार?दुसरं आहेच कोंण मला याच्याशिवाय.हां आता काही वर्षापासुन मैयाही मिळाली आहे याच्या जोडीला.पण मोरया अगदी जन्मा पासून माझा असलेला एकमेव देव-सखा-मित्र-हितचिंतक सबकुछ.नर्मदे हर.
       समोर सेवातत्पर असलेल्या उंदीरमामांच्या कानात मी आल्याचा मोरयासाठी निरोप सांगितला आणि गाभार्यात गेलो.मोरयाने मोठ्या मायेने जवळ घेतले हा माझा वैयक्तिक अनुभव आहे.मी नमस्कार केला,अश्रू भरल्या डोळ्याना सगळे धुसर दिसत होते.गुरुजींच्या हातात मैयाजलाची कुपी दिली आणि त्यातील थोडे जल मोरयावर घालायला सांगितले,बहीण-भावाची ती गळाभेट साश्रू नयनानी डोळ्यात साठवून ठेवली.मोरयाचे तीर्थ कुपीतिल मैयाजलात मिसळले.मैयाजलात मला मिळालेल्या मोरयाचा प्रत्यक्ष मोरयाला गुरुजींच्या हस्ते स्पर्श करवून स्पंदने ग्रहीत करवून घेतली.नमस्कार करुन मोरयाला पाठ न दाखवता गाभार्यातून बाहेर आलो.अथर्वशीर्ष म्हणत मंदिरा बाहेरुन प्रदक्षिणा घातली.नर्मदे हर.
        अक्काच्या घरी गेलो.प्रसन्नला आम्हाला काय आणि किती सांगू असे झाले होते.नुसता चिवचिवाट चालला होता त्याचा.तो लहान मुलगा नाही बरं नुकतीच पी.एच. डी.केली आहे त्याने.माझा भाचा राजाभाऊ जास्त लहान नाही माझ्यापेक्षा तोही सेवानिवृत्त आहे.आता पौराहित्य करतो.मी आणलेले लाडू प्रसन्नला खाऊ म्हणून दिले.तेवढ्यात राजा आला,नमस्कार करुन म्हणाला,मावशी! कमाल आहे तुमची चालत करत आहात अष्टविनायक दर्शन.माझे तर गुढगे दुखतात.अरे!चालत नाहीस म्हणून गुढगे दुखतात.चालाल तर स्वस्थ राहाल हे लक्षात ठेवले पाहिजे.नर्मदे हर! प्रसादालयात जाऊन भोजनप्रसाद ग्रहण करुन पुन्हा घरी आलो,सॅक उचलून पुढे जायला सज्ज झालो तेव्हा दुपारचा एक वाजला होता.
        बाहेरुन पुन्हा मोरयाचे आणि कळसाचे दर्शन घेऊन पुढे निघालो.नेहेमीप्रमाणे राजा रडवेला झाला होता आणि माझीही अवस्था काही वेगळी नव्हती.आम्ही फक्त मावशी आणि भाचाच नाही तर बालमित्रही आहोत.अक्का माझी मोठी बहीणच नव्हती तर जणू माझी आईच होती.नर्मदे हर!
        झापफाटा,वावळोली,उन्हाचा तडाखा भयानक होता.तहानेने जीव व्याकुळ झाला होता,सौ.ज्योति गडगे हिच्या टपरीत बसलो,थंडगारपाणी पिवून खूप बरे वाटले,पाण्याला जीवन असे म्हटलेले अगदी सार्थ आहे.नर्मदे हर.सिद्धेश्वर-डोंगरावरील मंदिर बंद होते.पुढे एकवीसगणपती मंदिर आहे तेही बंदच होते.अदसुळ येथे एका झाडाखाली बसून पांच मिनिटे विश्रांति घेतली पण जास्त बसून चालणार नव्हते पालिहुन फक्त पाचच कि.मि. आलो होतो आणि अजुन पांच कि.मि. जायचे होते.आणि रस्ता घाटाचा होता.नर्मदे हर!
       शरदवाडीफाटा,पाच्छापुरफाटा,आता जंगल सुरु झाले होते आणि खडी चढणही दमून थांबलो.निघणार इतक्यात प्रदीप मेहताजी आले,नांदगावलाच निघाले होते,त्यानी आमच्या सॅक गाडीतून पुढे नेल्या,ओझे हलके झाले.थोड्याच वेळात घाट उतरणे सुरु झाले. गोगुलवाडी,पोटलस,नांदगाव आले तेव्हा संध्याकाळचे पांच वाजले होते.नर्मदे हर!
       प्रदीप मेहतांच्या घरी आलो.प्रथम दुकानात बसलो पाणि वगैरे पिवून मागेच असलेल्या त्यांच्या घरात गेलो.इथे राहणारी सौ. दक्षता आणि मुले गॅदरिंगसाठी शाळेत गेली होती,इथे अंथरूण-पांघरूण फारसे दिसत नव्हते,आमची पथारी उलगडली आणि दमला देह अक्षरशः तिच्यावर सांडला.सात वाजता दक्षता आणि मुलगी दिव्या मुलगा विनायक आले.मोठी गोड आहेत मुलं.मोरया मैया सुखी ठेवो त्याना.रात्री छान भोजनप्रसाद मिळाला.प्रदीपही थांबले होते भोजनासाठी मग गेले घरी पालीला.आता विश्रांति.नर्मदे हर!









Tuesday, 21 February 2017

अष्टविनायक पदयात्रा.

नर्मदे हर हर. पायी अष्टविनायक यात्रा. ८ जानेवारी २०१७ - पहाटे तीन वाजता उठलो,स्नान पुजा होईपर्यंत यांचा मित्र अरविंद देशपांडे गाडी घेउन आला.रवि पवारच्या घरी गेलो तिथून नाशिकरोड स्टेशनवर गेलो.आमची गाडी भुसावळ-पुणे हुतात्मा एक्सप्रेस नेहेमीप्रमाणे लेट आली,५-३०ला सुटली.१०-३०ला कर्जतला पोहोचलो.लगेच १०-५०ची खोपोली लोकल मिळाली,११-३०ला खोपोली येथे पोहोचलो.बसस्टॅण्डवर गेलो पनवेल बस लगेच मिळाली,महड फाट्यावर उतरुन रिक्षाने वरदविनायक मंदिराजवळ गेलो.भक्तनिवासाच्या नुतनिकरणाचे काम चालु होते,म्हणुनच गेला महिनाभर आम्ही फोन करत होतो पण लागत नव्हता.अर्थात रुम मिळाली नाही.आम्ही मागे आलो असताना ज्या विश्वशांति लॉज मध्ये उतरलो होतो तिथे गेलो पण रुम मिळाली नाही.मोरया! मैया! प्रथम ग्रासे मक्षिका पातः असे नको होऊ देऊ अशी प्रार्थना करुन बाहेरुनच वरदविनायकाचे दर्शन घेतले कारण गर्दी खुप होती.माझ्या माहेरचे पनवेलचे तट्टू गुरुजींचा पत्ता विचारुन त्यांच्या घरी गेलो.माझ्या वडिलांचे मित्र असलेले गुरुजी अपेक्षेप्रमाणे हयात नव्हते पण त्यांचे बंधु आणि पुतणे आणि कुटुंबीय आहेत. अशोक गुरुजींनी श्रीकृपा लॉजला फोन करुन आम्हाला रुम देण्यास सांगितले.व उद्या संकल्प पुजा सांगण्याचे कबुल केले.फक्त नारळ आणायला सांगितले,दक्षिणा यथाशक्ति द्या म्हणाले.नर्मदे हर.श्रीकृपा लॉजमधे गेेेलो रुम घेतली.आज रविवार असल्याने खुप गर्दी होती दर्शन होणे दुरापस्त होते.म्हणुन कळस दर्शन घेतले.संध्याकाळी तलावपाळीवर जाऊन विठ्ठल-रखुमाई,श्रीदत्त दर्शन घेतले.थोडे फोटो काढले.भोजन करुन आता विश्रांति.नर्मदे हर. भाग दुसरा९ जानेवारी २०१७- पहाटे उठून सर्व आवरुन देवळात गेलो.वरदविनायकाचे प्रसन्न झाले. आमची पायी अष्टविनायक दर्शन यात्रा निर्विघ्नपणे होऊ दे अशी प्रार्थना केली आणि प्रदक्षिणा घातली. तोवर अशोक गुरुजी आले.त्यांनी संकल्पपुजा सांगितली आणि विश्वशांति साथी आम्ही ही पायी अष्टविनायक दर्शनयात्रा करण्याचा संकल्प करत आहोत असा संकल्प सांगुन नारळाचा श्रींच्या पायाला स्पर्श करुन आम्हाला दिला आणि प्रत्येक गणेशाचा त्याला पदस्पर्श करवुन तोच नारळ महडला परत आणायला सांगितले.आमच्या मनात असलेला संकल्प आम्ही त्याना न सांगताही त्यानी आमच्याकडून करवून घेतला. मोरयाला उजवी घालुन प्रथम गुरुजींच्या घरी गेलो.तिथूनच आमचा पुढचा मार्ग होता.वहिनींनी दिलेला चहा घेउन,मोठ्या काकाना नमस्कार करुन मार्गक्रमणा सुरु केली.नर्मदे हर. ताकई,या गावाला धाकटी पंढरी म्हणतात.तिथे पुंडलिकाचे मंदिर आहे.साजगाव,येथे जुन्या मुंबई-पुणे हायवेला आलो.डावीकडे पुणेआणि उजवीकडे मुंबई होते.पाली फाट्यावर जाण्यासाठी आम्ही उजवीकडे वळलो.तिथे भेटलेल्या आशिष कदम याने आमचा फोटो काढला.भर रस्त्यात आम्हाला नमस्कार केला.नर्मदे हर!सारसन येथे टपरीवर चहा घेतला.तिथे असलेल्या लोकांनी आम्हाला शुभेच्छा दिल्या.पुढे एक्सप्रेस वे आला तो क्रॉस करुन पाली फाट्यावर आलो.डावीकडे खोपोली उजवीकडे पेण आणि समोरचा रस्ता पालीला जाणारा,आम्ही समोर चालू लागलो. देवन्हावे येथे नितिन चौधरी यांनी घरात बोलावले,सर्वानी नमस्कार केला,चहा बिस्किटे दिली. आज मुक्काम करा उद्या पुढे जा असा आग्रह करत होते.त्यांच्या घरी निवासव्यवस्था होईल कितिही माणसे असली तरी.नर्मदे हर. पुढे ठाणेन्हावे,सांदडा,मिरगुटवाडी,मग आला सांगडी घाट.थोडं दमायला झालं,कोकणतडका हॉटेलमध्ये बसलो,चहा घेतला. चला पुढे इतक्यातच दमून कसे चालेल? हो ना?उंबरे,उंबरखिंड येथे महाकाली,हनुमान मंदिराच्या प्रांगणात बसलो.येथेही मुक्काम करता येईल.शेवंताबाई साळुंके यांनी पाणी दिले ओली हळकुंडेही दिली.नर्मदे हर! तुकसई,दुरशेत,सुरांडा,नानोसे,दुधानेवाडी,कासारवाडीफाटा,परळी नंतर आला जांभुळपाडा.दुपारचे साडेतीन वाजले होते आणि पंचवीस कि.मि.चालणेही झाले होते.म्हणून आज येथेच मुक्काम करणार होतो.स्वामीसमर्थ,साईबाबा मंदिर आहे.तेथे प्रकाश श्रीधर भागवत राहतात,ते पौराहित्य करतात आणि पर्यटकांच्या भोजनाचीही व्यवस्था करतात. माझ्या भावाचे घर आणि यशवंत कृषीपर्यटन केंद्रही येथेच आहे.म्हणुन आम्ही त्याच्याच घरी गेलो.बाबा{माझा मोठा भाऊ} आता नाही पण वहिनी आणि मुले सुना नातवंडे आहेत.खूप वर्षानी मला पाहुन वहिनीला खुपच आनंद झाला.म्हणाली,वन्स!अगदी आहात तशाच आहात अगदी शाळाकॉलेजात असताना होतात तशाच.वहिनी!तू सुद्धा अगदी तशीच आहेस मुलं लहान असताना होतीस तशीच सुंदर चवळीची शेंग.पंचाहत्तरी गाठलेली माझी वहिनी इतकी सुंदर लाजली की पुछो मत.मग लाडक्या नणंदेचं,मेहुण्यांचं स्वागत कसं करु आणि किती करु असं तिला झालं.छान भोजन झालं.आज खुप दमलो होतो,पहिलाच दिवस होता ना.यशवंत कृषिपर्यटनगृहाच्या सेल्फकन्टेंट रुम मधे आता विश्रांति.नर्मदे हर.