तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-16
सुनील उपाध्याय परिवारको नर्मदे हर करके सुबह पांच बजे हमारी दो डिब्बोंकी विनोबा एक्सप्रेस चल पडी।आज मौसम खराब है।रिमझिम रिमझिम बरसात हो रही है,रास्ता हायवे है।इसलिये चलना सुखद है।मानेगांव,गुंदरई,सुरवारीमे एक टपरीवाले संतोषकुमारने नर्मदे हर किया।उसका छोटासा टायर पंक्चर निकालनेका और गॅरेज है,चायकी भी दुकान है।कुछ दिन वो मुंबईमें रहा था इसलिये हमसे मराठी बोल रहा था।चाय दिया।
नर्मदे हर!देखो!मैयाके भक्त बच्चोंका मैयाके प्रति,परिक्रमावासीओंके प्रतिका भक्तिभाव।हम संतोषकुमारको नर्मदे हर करके आगे चल रहे थे,पिछेसे किसीने थकानभरे आवाजमे पुकारा,माताजी नर्मदे हर!देखा तो सुशील उपाध्याय के मामाजी पंडीत तिवारीजी सायकलसे उतर रहे थे।नर्मदे हर! आप?हां!सुशील ने कहा,आप जल्दी चले गये,प्रणाम करना,दक्षिणा देना रह गया इसलिये आ गया।हमसे उमरमे बड़े सत्तर सालकी उमरवाले पंडीतजी हमारे पैर छुने लगे,ये क्या कर रहे हो भाईसाब हम छोटे है आपसे पैर तो हम छुएंगे आपके।नही नही आप मैया हो,पैदल परिक्रमा कर रही हो,प्रणाम करना,दक्षिणा देना हमारा फर्ज है।नर्मदे हर!इस श्रद्धाके आगे हम नतमस्तक है।
आगे दुर्गाप्रसाद कोतवाल गॅरेजवाले बंधुने नर्मदे हर करके चाय दिया,नही चाहिये ऐसा भी नही कह सकते।
बेलखेडी शेर गावके आगे शेरमैयाका ब्रिज है।बाजुमेही लुडकानाबाबा मंदिर है।छोटासा सुंदर बगिचा,हॅण्डपंप है।शेरमैया,किनारेलगत के हरेभरे पहाड सुंदर नजारा। परिक्रमावासी रूक सकते है।
बोहरीपार,यहॉ हनुमानमंदिर है।छोटीसी धरमशाला भी है।सुबह के बादल भाग गये थे,सुरज चाचू आग बरसने लगे थे।टोलनाका आया,बैठ गये।केवल पटेलने चाय दिया।आज आठ दस बार चाय हो गया,हरबन्स पटेलने दक्षिणा दे दी।नरसिंहपुर फ्लायओव्हरके बाजुमे हनुमानदादा मंदिरमे दर्शन करके आगे चले। धूपने बेहाल किया था।पैर अक्षरशः खीचते चल रहे थे।एक ढाबेपर दाल-चावल,दही भोजनप्रसाद लिया।
हायवे छोडके नरसिंहपुर शहरमे जाने लगे।रेल्वेक्रॉसिंगसे शहरमे प्रवेश किया।डिस्ट्रिकप्लेस है।रेल्वेस्टेशनके सामनेका कचरा?रास्तेमे कचरा या कचरेमे रास्ता समझमे नही आ रहा था। बहुतही गंदा शहर है।बाजाररोडसे चलने लगे,बहुत थक गये थे।अब रूकना जरूरी था,एक चौराहेपर मेरी नजर एक हॉस्पिटलके बोर्डपर गयी।डॉक्टर चांदोरकर।नामसे वो महाराष्ट्रीय होगे ऐसा लगा,गये अंदर।हमारा परिचय दिया और निवासभिक्षा मांगी।मराठीमे बात करते उन्होने सहर्ष स्वागत किया।नर्मदे हर!
. क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-17
चांदोरकर 1927 मे महाराष्ट्रसे आके नरसिंहपुरमे स्थायिक हुए है ।डॉक्टर संजीव चांदोरकर के दादाजी बॅरिस्टर थे,पिताजी डॉक्टर थे और डॉक्टर संजीव चांदोरकर काड्रिऑलॉजिस्ट है।बेटा बहू भी डॉक्टर है।सौ.स्वाती संजीव चांदोरकर पी.एच.डी.है।एक एन.जी.ओ.चलाती है। दोनो पती पत्नी भा.ज.पा.के नेता है।
हॉस्पिटल के साथही डॉक्टर भाईसाब को ऑरगॅनिक खेती करना पसंद है।बंगलेके पिछे सब्जी,फल फूल है।सोलर प्लांट है।रेन वॉटर हार्वेस्टिंग किया है।पहले एक गाय थी अब उससे पांच हो गयी है।दूध दही घी की रेलचेल है।गोबरगॅस प्लांट है।दुसरी खेती भी है।सिर्फ नमक बाजारसे खरीदना पडता है।बडे उत्साह से हमको सब दिखाया।निगर्वी व्यक्तिमत्व है।बोले,आपके आनेसे कोई अपने गांवसे रिश्तेदार आ गए ऐसा लगा।वहिनी(भाभी)भी बहुत प्यारी है।बोली,अपना महाराष्ट्रीयन स्वयंपाक करती हूँ।बहुत दिनसे वैसा भोजन नही किया होगा नं?सच वहिनी पिठलं-भात बनाओ।महाराजपुरमे साठे वहिनीने बनाए पोहे के बाद आज महाराष्ट्रीयन भोजन करेंगे।वैसे मध्यप्रदेशका भोजन भी अच्छाही होता है,मगर तिखा बहुत होता है,अपने खानदेश जैसा।फिर क्या मज़ा आया।
गाडासराईमे डॉक्टर चौरासिया,महाराजपुरमे रितेश राय और शरद साठे,और अब नरसिंहपुरमे डॉक्टर चांदोरकर,और भी सारे मेरे रिश्तेदार है मेरे अपने।मेरा मायका मध्यप्रदेश!
सुबह स्नान पुजा होतेही भाईसाबने खुद ताजे दुधका चाय बनाया।नर्मदे हर।रहो दो-चार दिन,परिक्रमा होती रहेगी,पैर ठीक होने दो बादमे जाना।कह रहे थे।अगली बार रहेंगे।आज जाने दो।नर्मदे हर।
भावपुर्ण अलविदा करके चल पडे तब घड़ी छे बजे दिखा रही थी।शहरसे जाते जाते जिसके नामसे शहर जाना जाता है वो नरसिंह मंदिर आया,दर्शन करके निकले।यहॉं पासमे एक धर्मशाला है,परिक्रमावासी रहते भी है मगर स्वछता नामकी कोई चीज होती है ये मालूमही नही ऐसी है।नर्मदे हर।बहुतही गंदा शहर।
खैरीगांव आया,यहॉंसे छोटा बरमान घाट जा सकते है।मगर प्रशांत आनेको राज़ी नही।चलो आगे!देवलीकलॉं,टेकरीपर बसा छोटासा गांव।श्री.राजकुमार की माताजी ने बुलाया।चाय दिया,रहनेके लिये बहुत आग्रह किया मगर हम नही रहे नर्मदे हर! कठौतियागाव नर्मदामैयाका सुंदर मंदिर है।पाससे सक्करमैया बहती है।ब्रिज है।लिंगारोडसे रेल्वेक्रॉसिंग पाससे पगदंडीसे दुसरे रेल्वे क्रॉसिंग गेटपार करके रेल्वे लाइनके बाजूसे पगदंडीसे रेल्वे कॉलनी पार करके विद्यासागर द्वारसे करेली शहरमे प्रवेश किया।बाजारपेठमेसे श्रीराम मंदिरमे आ गये ।बडा मंदिर है।दर्शन करके बगिचामे बैठे,धूप कड़ी हो रही थी हम बहुत थक गये थे।मगर ये मंदिर अब ट्रस्टके हाथसे सरकारने अपने हाथ लिया है,बारा बजे बंद होता है।किसीको रूकने नही देते,धर्मशाला,बरामदा है।मगर परिक्रमावासी रूक नही सकते।नर्मदे हर।बारा बजतेही हमे निकाल दिया,बडा गेट बंद किया मानो रामजीको बंधक बना लिया हो।नर्मदे हर! खानपानकी दुकानवाला बाजार हम पिछे छोड आये थे।आगे सब हार्डवेअर,गॅरेज ऐसा बाजार था।धूपसे बेहाल हो रहे थे।एक इमलीवाला वर्कशॉप था एक बडे बरगदका पेड भी था।सरदारजीको पुछके बेंचपर बैठ गये।वर्कशॉप था मशिनकी आवाज बहुत थी कैसे बैठ सकते?निकले मैया!बहुत भूक लगी है,थक गए है,क्या तेरे सेवाभावी बच्चे सिर्फ छोटे गांवमेही होते है?मैया बोली,तुमभी ना ऐसी हो थोडी भी तकलिफ नही चाहिये ऐसाभी क्या?परेशान करती हो।लो,देखो!मेरे सेवाभावी बच्चे हर जगह होते है,वो देखो बुला रहा है,चलो।सचमे मेडिकल स्टोअर से एक भैया बुला रहा था।नर्मदे हर!मैया मुझे क्षमा करना,धूप,भूक पैरोंके ब्लिस्टर सबसे परेशान हो गयी हूँ,इसलिये नही तो आपपर पुरा भरोसा है।
संजय गोविंद नेमा बुला रहा था।मैयासे पंधरा मिनीटभी मेरी तकलिफ देखी नही गयी थी।बडे प्यारसे हमे बिठाया,फॅन चालू किया,थंडा पानी दिया।थोडीही देरमें गरम गरम खिचडी उपर बहुतसारा घी,रोटी सब्जी मुरंबा,कढ़ी बडे थाट का भोजनप्रसाद। आराम के बाद थकान तो छुमंतर हो गयी।मैया!तेरी कृपा अगाध है।
निकलते समय संजयजीने दक्षिणा भी दे दी और आज नही रह रहे हो मगर अगली बार रहना पडेगा ऐसा कहा।नर्मदे हर!
चौराहेपर एक भाईसाबने नर्मदेहर कहा और हाथमे बहुत सारे केले थमा दिये।नाम था हमीदखान।मुझे काश्मीर के हमीद भाईकी याद आयी,मैने कहा मेरा काश्मीरमे भाई है हमीद।तो ये बोला अब एम.पी.मे भी आपका भाई है हमीद।नर्मदे हर!
आगे मदनसिंग गुर्जर मिले उन्होने भी केले दिये।और गाडरवाडामे उनके घर बुलाया।नर्मदे हर!इतने केले क्या करे?वजन भारी हो जाता है,चला नही जाता।प्रिंस हॉटेलवाले हरिओम रघुवंशीजीने चाय दिया।नर्मदे हर!कुछ बच्चे मिले उनको केले दे दिये,बच्चोंकी मिठी हँसी देखके लगा लाखो पाए।
करेली चिनी-इथेनॉल कारखाना पिछे छोडके बटेसरा,उसके बाद बंदेसर।करपगांव पहुँचते पहुँचते शामके पावणे छे बज चुके थे।रास्तेपरही हनुमानमंदिर था।कुछ लोग बैठे थे,बोले मंदिरमे रहो,मंदिर एकदम खुला और रास्तेपर था,कैसे रहते?मैने पंडीतजीका घर पुछा,पंडीत अवधेश शर्माजी वही बैठे थे,बोले चलो।गये उनके घर।माताजीने बडे प्यारसे स्वागत किया।अच्छा घर है।आरतीके बाद भोजनप्रसाद लिया।बहुत थक गये आज,टेरेसपर अब आराम।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-18
पंडीतजी और माताजी को प्रणाम करके हम चले हमारी मंज़िल की तरफ तब घड़ी दिखा रही थी समय सुबहके साडेचार बजेका।नर्मदे हर!
मालनवाडा,नारगी,पनारी,पुरगवॉं,ब्रम्होरी,पार करके मनकवारा रेल्वेक्रॉसिंगके गेट पहुँचे तब साडेसात बजे थे और हम पंधरा कि.मि.चल चुके थे।गेट बंद था इसलिये टपरीपर उबले चनेका नास्ता किया,रास्तेमे बहुत बार चाय पिना पडता है यहॉं दूध मिल रहा था इसलिये दूध लिया।गेट खुलतेही चले नर्मदे हर।
बरॉंस के बाद बोहानीमे धर्मालालजीने बुलाया पोहे-चाय लेनाही पडा बडे प्रेमसे देते है ना नही कह सकते नर्मदे हर।थोडे आगे जातेही एक छोटीसी टेकरीपर सुंदर नया मंदिर देखा,गये उपर।राधाकृष्णजी का मंदिर है।पिछे स्वच्छ सुंदर बडा तालाब है।घाट है।पुजारी महाराज जमनाप्रसाद भार्गवजी बडे बुजुर्ग है।उनको पुछके वहॉं स्नान करके कपडे धोके सुखाने डाल दिये।आरती कर रहे थे तब गाडरवाडाके कल मिले मदन गुर्जर आ गये वो करेली जा रहे थे काम के लिये बोले बहुत फास्ट चलते हो।ऐसा नही अगर हायवेसे चलना होता है तब हम जल्दी निकलते है।ठीक है गाडरवाडा पहुँचे की फोन करो आपको लेने आएंगे नर्मदे हर अपना कार्ड देके चले गये।आज समय था अभी थोडा इसलिये थोडी पैरोंकी सेवा की।ब्लिस्टरका ड्रेसिंग किया,प्रशांत स्टिकींग प्लॅस्टर लगानेकोभी डरता है।लेफ्टको मै खुद आसानीसे लगाती हूँ मगर राइट के ब्लिस्टर पिछेकी तरफ है इसलिये थोडा कठीन होता है पट्टी लगाना।बॅंडेज बांध लिया।मैया आपही मेरी डॉक्टर हो जल्दी ठीक करा दो,अभी ओंकारेश्वर बहुत दूर है।
भगवानको भोग लगने के बाद हमने भोजन प्रसाद पा लिया।विश्राम करके 2-30को पुजारी बाबाजीको नर्मदे हर किया।हायवेसे चल रहे थे।कड़ी धूप परेशान कर रही थी।कौडियामे जगदीश चौकसेजीने नर्मदे हर करके चाय दिया।शक्ति शुगर मिल गाडरवाडाके आगे गाडरवाडा-पलोहा रोड चौराहा,सक्करमैयाके ब्रिजके पास पहुँचे तब शामके पांच बजे थे।मदन गुर्जरजीको फोन किया,वो किसीको भेजता हूँ बोले।बैठे रहे।एक घंटे बाद राजू गुर्जर आया मोटरसायकल लेके।हम पैदल आते है बोला तो उनका घर दूर है इसलिये गाडीपर चलो,मगर एक गाडीपर सॅक लेके तीन लोग नही बैठ सकते,राजुने एक मित्रको बुलाया।नर्मदे हर!
उनका घर गाडरवाडामे था ही नही,12कि.मि.अंदर पलोहाबडामे था।पहले मालुम होता तो न जाते,अब नर्मदे हर! रास्ता छोडके गावकी तरफ मुडे और,अरे बाप रे!इतने बडे बडे गड्डे!रास्तेमे गड्डे नही गड्डोंमेसे रास्ता निकल रहा था।ऐसेमे ये दो बहाद्दर ऐसी गाडी चला रहे थे जैसे मॅरेथानमे चला रहे है।हम अपनी जान मानो मुठ्ठीमे पकडकर बैठे थे।लग रहा था शायद उतरनेके बाद एक एक हड्डी गिनके लेनी पडेगी।नर्मदे हर!मध्यप्रदेश की ऐसी भी प्रगती देखने मिली। गांव तो इतना गंदा की पुछो मत।
राजूका घर बहुत सुंदर है।घरके पिछे कमलके फुलोंसे भरा सुंदर तालाब है।राजू नर्मदाभक्त है,हर मंगलवार को मैयाकिनारे जाके स्नान पुजा करनेका उसका परिपाठ है।मैया यहॉंसे दस कि.मि.दूर है।नर्मदे हर!अब कल आगे कैसे जाना ये आपहीको मालूम मैया,सुंदर भोजनप्रसाद पाया है, हम तो अब हमारी हड्डीओंका हिसाब करते करते सो जाते है।नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-19
सुबह स्नान पुजारती के बाद चाय लेके राजूके फॅमिली को नर्मदे हर करके दो मोटर सायकल से सौ पचास गड्डोंमेसे उछलते मदन गुर्जर के घर पहुँचे।
मदन गुर्जर की जॉइंट फॅमिली है।शिरा(हलवा),फेण्या(चावल के पापड),दूध ऐसा भरपेट?ओव्हर फ्लो नास्ता हो गया। मदनजी बोले हम आपको गाडरवाडातक छोडते है आगेसे आप पैदल जाना।हां मे गर्दन हिलाने के सिवा हम कर भी क्या सकते थे।पैदल जानेका सोचते तो कल शामतक भी गाडरवाडा पहुँचना असंभव होता।
गांव ऐसा क्युं है पुछा तो,सरपंच राखीवमेसे है गांवके लिये कुछ नही करता।ऐसा जवाब मिला नर्मदे हर!
जान मुठ्ठीमे पकडके बैठ गये मोटरसायकलपर।धडाम धुडुम उपर नीचे उछलते कैसे तो आ गये गाडरवाडा चौराहेपर।सक्करमैया ब्रिजसे क्रॉस करके एक पेट्रोलपंप के पास मोटरसायकल्स रूक गयी।उतर गये।नर्मदे हर!
राजू और मदन को कहा,आप चलो आपको काम है हम जाएंगे,नर्मदे हर!अब हायवेसेही चलना था।दोनो चले गये और हम वही बैठ गये।बाप रे बाप!मैया!कैसा ये गांव?कब होगी प्रगति? सरपंच और बाकी समाज सेवक गांवके प्रति अपना कर्तव्य कब समझेंगे?
थोडे रिलॅक्स होतेही विनोबा एक्सप्रेस को फास्टट्रॅकपर डाल दिया।रास्तेके दुतर्फा वृक्ष है और आज धूपभी नही है इसलिये और आज भोजनकी भी जरूरत नही थी।चलते गये।
गोविंदनगर के बाद पालिपिपरियामे भाऊसाहेब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास पहुँचे।ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघकी निवासी आश्रमशाला है।
भाऊसाहेब भुस्कुटे,और स्वयंसेवक संघ,चलो अंदर।घनी वृक्षराजी,सामनेही एक इमारत थी कोई तो होगाही,गये।नर्मदे हर! एक सफेद लुंगी-बनियान पहने स्वयंसेवक बाहर आ गये,हमारा परिचय दिया,सहर्ष स्वागत हुआ।
बरामदेमें बैठे,प्रथम थंडा जलपान बादमे गरम चाय और बिस्कीट आ गये।हमारा खानपान होनेतक एक रूम मेरे लिये खाली करवाके तैयार किया गया,मेरी सॅक अंदर रख दी।प्रशांतको एक शिक्षक उनके रूममे लेके गये।सारा काम चुपचाप शिस्तबद्ध तरिकेसे।ये है सघ!
श्री.अनिल अग्रवाल पर्यवेक्षक है।श्री.पावन दुबे,श्री.रामगोपाल दुबे,श्री.रामवीर कौरव ये शिक्षक व्यवस्थापक है।
बारावी तक स्कूल है।लडके निवासी है,लडकियॉं सिर्फ स्कूलमे आती है।इको फ्रेंडली गणेश मुर्ति,शिल्पकारीभी सिखाते है।जैविक खाद बनाते है।पशु खाद्य परिक्षण किया जाता है।अमरूद,आम,अनार के बगिचे है।ऐसा बड़ा सुंदर काम चल रहा है।
शादी के बाद आज पहिली बार मैने शाखामे गीत गानेमे भाग लिया-नमस्ते सदा वत्सले मातृभुमे!बहुत बहुत अच्छा लगा।बचपन की याद आयी,हमारी कन्या शाखा थी।लाठी,जंबिया,तलवार चलाना सिखाते थे एम.जी.जोशीमास्तर।मैदानी खेल,मलखांब भी सिखा था।
रातको साधा मगर पौष्टिक भोजन हुआ।सोते समय गायका दूध।नर्मदे हर!बहुत बडा बहुत अच्छा देशकार्य चल रहा है।भारत माता की नयी पिढ़ी तैयार हो रही है।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-20
सुबह 4-30को ही आगे प्रस्थान किया।हायवेसेही चलना है,जल्दी निकलते है तो धूप ज्यादा होनेके पहले 15-20कि.मि.चलना हो जाता है,और फिर दोपहर के बाद और 10-15कि.मि.हो जाता है।ॐकारेश्वर अभी और कमसे कम 400कि.मि. है।जितना ज्यादा चल सकेंगे उतना अच्छा रहेगा।
ठैनी मे श्री.हक्केलालजी के टपरीपर चाय लेके आगे चले।नयाखेडा रेल्वे क्रॉसिंग,बनखेडी,बाचाबानी यहॉ दूध लेके आगे चले।मनोज पटेलने चाय दिया। अंजनीमैया ब्रिजसे पार करके बॉंसाखेडा रेल्वे क्रॉसिंग पार करके आगे रामपुरमे बाबा जय गुरूदेव संत उमाकांतजी आश्रम पहुँचे तब सुबहके 10-30बजे थे और 20कि.मि.हो गये थे,धूपभी कड़ी होने लगी थी,विश्राम करना आवश्यक था।आश्रममे गये,बडा हॉल है।एक कोनेमे बाबा जय गुरूदेव की मुर्ति है।कुछ भक्त अपना सर पुरा ढकके ध्यान कर रहे थे।हम दर्शन करके बैठ गये।
दोपहरको भोजनप्रसाद पाया।पैरके ब्लिस्टरके ड्रेसिंग करके 2-30को आगे चल दिये।
पिपरिया चौराहा पर आ गये।श्री.राजू वर्माने चाय दिया और कहा,पिपरिया गांवमे जानेकी जरूरत नही सामनेके रास्तेसेही परिक्रमा का मार्ग है।आगे थोडी दुरीपर हथवासामे सिताराम आश्रममे परिक्रमावासी रहते है,वहॉं भोजनादि सब सुविधा है।मुझे याद आया,पुनाके सुप्रसिद्ध परिक्रमावासी जिनकी नर्मदे हर हर नर्मदे ये पुस्तक प्रसिद्ध है वो श्री.सुहास लिमयेजी भी इसी आश्रममे रूके थे,मैने डायरी देखी,आश्रम की नोंद थी,लिमयेकाका यही रूके थे।नर्मदे हर!हम आश्रम पहुँचे तब शामके छे बजे थे।
व्यवस्थापकजीने एक खोली दे दी।फ्रेश होकर निचे गये।वहॉं होशंगाबाद के बुजुर्ग पती-पत्नी श्री.एन.पी.दुबे और सौ.सावित्री दुबे मिले।आश्रममे अपना वानप्रस्थ गुजारते है। कितना सुंदर!सारी जिम्मेदारिया पुर्ण हो गयी,अब शांतिसे जीवन बसर करना प्रभुके सानिध्यमे।नर्मदे हर!
श्री.कल्याणसिंग गुर्जरने हमे बड़ी सहायता की।नर्मदे हर!
कर्मशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-21
सुबह पांच बजे नित्यकर्म निपटके श्रीसितारामजीके दर्शन करके आगे चल दिये।टोलनाकेपर कल हमे मदत करनेवाले कल्याणसिंग गुर्जर मिले,नर्मदे हर!उन्होने चायपान करवाया।
रानी पिपरिया,टायरकी दुकानमेंसे नर्मदाप्रसाद कुशवाहजीने बुलाया अभी 3किमि पहले चाय लिया था मगर मैयाके भक्तको ना नही बोल सकते चाय तो लेना पडता है,नर्मदे हर!
शोभापुर,बरिबानी,राधास्वामी सत्संग न्यास सुंदर बगिचा है,बैठे थोडी देर थंडा पानी पिया,चलो आगे।करणपुर,सोहागपुर पहुँचे तब बारा बज चुके थे।बडा गांव है,बाजारपेठ है,भोजनके लिये कोई हॉटेल देख रहे थे,एक भाईसाबने बावडीवाले मंदिर बताया,पिछेकी तरफही था,गये।बडादिंडी दरवाजा है अंदर तीन तरफ बरामदे है बहुत पुराना इतिहासकालिन मंदिर होगा।सॅक रख दी दर्शन नही हो सका,रामजी विश्राम कर रहे थे पडदा लगा हुआ था चार बजे खुलेगा।भोजनकी कुछ व्यवस्था नही थी,महाराजभी विश्राम कर रहे थे।एक सेवेकरी था उसको पुछके सॅक वही रखके बाहर जाके हॉटेलमे गये,दाल चावल या रोटी ऐसा कुछ नही था,प्रशांतने समोसे खा लिये मुझे वो पसंद नही मैने बिस्कीट लिये हो गया भोजन नर्मदे हर!वापस मंदिरमे गये।अगर किसी परिक्रमावासी रूकना हो तो रूकने जैसी जगह है।बडी बावडी है,पिछे पलकमती नदी मैया है मगर गांववालोंने उसको गंदगीभरा नाला बना दिया है।2-30 हो गये हम निकलने लगे सेवेकरी को नर्मदे हर कहा,शायद हमारी आवाज सुनी महाराज उठकर बाहर आ गये,बडे बुजुर्ग महात्मा है।प्रणाम किया,बैठो!चाय ले लो,नर्मदे हर!
तीन बजे आगे।पलकमतीमैया ब्रिजसे पार।गावके बाहर दुर्गामंदिर,शिवमंदिर है परिक्रमावासी रह सकते है ऐसा लगा,बगिचा है।बहुत धूप है,पानी पी पी के पेट भरा है चलना मुश्किल हो रहा है।मैया!नर्मदे हर!
बोदीफाटा,लांघानदी मैया पासमे बाबा बालकदास त्यागी आश्रम,चायपान।लांघा ब्रम्होरी,मढई टायगर रिसॉर्ट फाटा,सेमरी हरचंद शामके सात बजे थे,अंधेरा हो गया था।एक बाबाजी बैठे थे,बोले चलो मेरे साथ,बाजारके बिचमे एक देवी मंदिर था रूकने को कहा और खुद चले गये पंधराएक मिनीटके बाद आये,शायद घरवालोने मना किया होगा बोले,मंदिरके पिछेकी इस जगह रहो,हम देखतेही रह गये,बहुत गंदगी भरी अंधेरी ग्रिल लगी जगह थी,वहॉं रहना मुश्कीलही नही नामुमकीन था।हमने उनको नही बोलके सोचही रहे थे अब क्या करे?सारी दुकानेही थी,हाय वे था बाबाजीके चक्करमे गांव पिछे रह गया था,आगे का गांव कितना दूर होगा मालूम नही।दुकाने बंद होने लगी थी।नर्मदे हर!मैया!कठीण घडी है,आ जाओ!नर्मदे हर! और मैयाने केवल मालवीय को भेजा।उन्होने हमे देखा,आ गये।हमने बताया की यहॉं हम नही रह सकते,बोले चलो हमारे घर।अंधेरे समझ नही आया एक गलीमेसे वो हमे उनके ताऊजी रूपराम मालवीय के घर लेके गये,परिचय करवाया और बोले आप फ्रेश हो जाओ मै भोजनके लिये लेने आता हूँ।नर्मदे हर!
एक बडे हॉलमे उनके बेटेने दरी बिछायी,हमने आसन लगाया,फ्रेश होके आरती की। बैठे आज 35कि.मि.चलना हुआ।सिर्फ चाय और बिस्किट पर।
केवल भाईसाब बुलाने आ गये,थोडी दुरीपर उनका घर है।घरका काम चल रहा है रिन्युएशन का।सुंदर भोजनप्रसाद पाया।दिनभरकी भूक मिट गयी।अन्नदाता सुखी भव!
नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-22
सुबह 4-30को नित्यकर्म,आरती करके चाय लेके विनोबा एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायि।
ब्रम्होरीकलॉं,गडारिया,बुधवाडा से बाबई पहुँचे तब सुबह के 9 बजे थे और पंधरा कि.मि.हो गये थे।बाबई गांव बडा है,बजारमेंसेही रास्ता जा रहा था,दुकाने खुलने लगी थी,राजहंस भोजनालय खुला था इसलिये गये पुछा तो पराठे मिलेंगे दस पंधरा मिनीटमे। कलका अनुभव ध्यानमें लेके पेटपुजा कर लेनेमेही समझदारी है सोचके बैठ गये ऑर्डर देके नर्मदे हर!
पराठे-दालका पेटभर भोजनप्रसाद पाके चल दिये आगे।दस बज गये थे,धूप अपना कड़ा रूख अपनाने लग गयी थी।एक पिपलपारतले भगवान बजरंगबली बिराजमान थे,जयमातादी मंदिर था,दर्शन करके पिपलकी थंडी छॉंवमे विश्राम करनेका मोह त्याग न सके। 1बजे आगे चल दिए।मठमाता महाकालि बाबई फार्म,जगदीशप्रसाद यादवजी ने चायपान करवाया।नर्मदे हर!
25 कि.मि.आजका चलनेका कोटा पुरा हुआ था,ऑंचलखेडा गांव आया था।हमारे पास एक नाम था,रघुनंदन यदुवंशी।गये गांवमे,पुछते पुछते सारे गांवका चक्कर लगाते हायवेपर आ गये वहॉं उनका बडासा घर था,जहॉंसे हमने गांवमे प्रवेश किया था वहॉंसे सिर्फ सौ-पचास कदम दुरीपर,और हमने कितना लंबा चक्कर काटा था,नर्मदे हर! हमेशा की तरह बडे उल्हास के साथ स्वागत हुआ।आंगनमेही हॅण्डपंप था,कपडे धो डाले।आरतीके बाद सुग्रास भोजनप्रसाद पा लिया। नर्मदे हर!
सुबह पांच बजे चल दिये,आज सिर्फ पंधरा कि.मि.चलना था होशंगाबाद के लिये। दो कि.मि.पर जयस्वाल ढाबेपर चाय लिया।यहॉ मानो जैसा ट्रक टर्मिनसही है इतने ट्रक रातमे रूके थे।थोडे आगे जातेही तवामैयाका लंबा ब्रिज आया।विशाल रूप है,नर्मदामैयासे बडा।वैसे जीवनमे ऐसा बहुतबार देखनेमे आता है की एकही मॉं के दो बच्चोंमे बडा बच्चा छोटेसे कद-वजन के हिसाबसे छोटा होता है।वैसेही नर्मदामैया तवामैयासे छोटी लगती है।असलमे तवामैया पर डॅम है।बॅकवॉटरसे इतना विशाल स्वरूप है।
अरूणोदय हो रहा था,निशा बडी शरमाती उषाकी लाल गुलाबी सोनेरी शाल ओढ़के छिपे जा रही थी।जललहरे रंगीन होती जलचरोंको जगा रही है,उठो!सुरजचाचू आ रहे है,देखो पंछी प्रभातगान गा रहे है,पेड पौधे पत्तोके हाथोंसे तालियॉं बजाबजाके उनको साथ दे रहे है।
सुंदर सुप्रसन्न बहरती सुबह,हम ब्रिजपे खडे खडे ये नजारा ऑंखोंके संपुटमे बंद करके रखना चाह रहे थे।
पुरी पुरी सुबह हो गयी,अब चलो आगे।देवलाखेडी,निमसांडिया,जैसलपुरमे श्री.अंबिका रामदासजी राजपूतजीने मिठा हलवा नास्तेमे दिया,चायपानी हो गया।नर्मदे हर!थोडे आगे होशंगाबादमे प्रवेश करतेही साईकृपासे अखिलेश गौरने नर्मदे हर बोला,चाय-पान कराया।पावणे ग्यारह बजे मंगलवारा घाटके पास लोकनाथतीर्थस्वामी आश्रममे आ गये। ये आश्रम हमारे गुरू नारायणकाका ढेकणेजीने स्थापन किया है।आप महाराष्ट्र सरकारके इरिगेशन डिपार्टमेंट के एक्झीक्युटीव्ह इंजिनिअर थे।आप बालब्रम्हचारी थे।बडे योगी महापुरूष थे हमारे काका!
स्नान पुजा दर्शन के बाद थोडा विश्राम करके शामको शेठानी घाट देखने गये।कितना भव्य है।कल भी यही रहना है श्रीगुरू सानिध्यमे।नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-23
सुबह मंगलवारा घाट जाके नर्मदास्नान किया,बहुत दिनो बाद ऐसा लगा मॉंके गले लग गये है।मॉं बडे प्यारसे सरपर हाथ फेरते पुछ रही है।कैसी हो बेटा?चलते चलते थक जाती हो ना?पैरोंके छालोंको अपने गुनगुने पानीसे धोते धोते बोल रही है अभी ठीक हो जाएंगे,बहाद्दुर बेटी हो ना मेरी?बहुत देर तक बैठे रहे मैयाके पास।फिर भगवान सुर्यनारायण को अर्घ्य प्रदान करके वापस आश्रम आ गये।पुजा आरती करके नास्ता चाय लिया।यहॉंके सेवाव्रती व्यवस्थापक धर्माधिकारीभाऊ गांव गये थे,अभी पुणेकर श्री.और सौ.घोसपुरकर सेवाव्रती थे।दोनो बहुत अच्छे है।
शामको जयदीप पाटणकर आये,उनके साथ उनके घर गये।पाटणकर ये महाराष्ट्रीय फॅमिली सालोंसे यहॉं रहती है।शिक्षक है।अच्छे लोग है।मुझे मराठी दुर्गा सप्तशती पुस्तक दिया।नर्मदे हर!
आश्रमके गॅलरीमेसे सामने मैया दिखती है।निले निले अंबर तले नीलश्यामल नर्मदा,विशाल जलस्वरूप।वर्णनातीत सौंदर्यशालिनी।नर्मदे हर!
सुबह जल्दी नित्यकर्म स्नान आरती करके बाहर आ गये,पुर्वा लालगुलाबी सुनहरे रंग बिखरती सबको कह रही थी,उठो!देखो!निराशाकी काली अंधियारी रात अस्त हो गयी,आशाकी किरने बिखेरती नयी चेतना देने उषा दस्तक दे रही है।
लोकनाथतीर्थस्वामी,सद्गुरू नारायणकाका ढेकणे गुरूजीका दर्शन करके चाय लेके घोसपुरकर दादा-वहिनी को नर्मदे हर कहा और आगे परिक्रमा शुरू की।
गांवके रास्ते खैराघाट पहुँचे।शिवमंदिर है,दर्शन किया।सामने बुधनीघाट दिख रहा था।यहॉं महाराष्ट्रीय संत गुळवणी महाराज स्थापित आश्रम है।गर्द वृक्षराजि मंडीत शांत स्थान है।अभी श्री.स्वामी नर्मदामणी और दत्तानंदस्वामी यहॉकी व्यवस्था देखते है।चायपानके बाद दत्तानंदस्वामी हमारे साथ आये और दत्तमंदिर,गुळवणीमहाराजका स्थानके दर्शन करवाये।सफरचंदप्रसाद दिया।और आगे थोडी दुरीपर मैयाकिनारेसे आगेका शॉर्टकट दिखाया नर्मदे हर!
मैया किनारे रेतमे चलना मुश्कील था,कांटे भी बहुत थे।इसलिये रेल्वेब्रिजके पाससे उपर चढ़े,रेल्वेकी जगहमे हिंगलाजमाता मंदिर है।सुंदर वृक्षराजि,बगिचा,निसर्गरम्य स्थान है।दर्शन करके कच्चेरास्तेसे रेल्वेगेट पार करके कच्चे रास्तेसे भोपाल हायवेपर आ गये।एक रास्ता मैयाकिनारेसे रंढाल होते हुए कोकसर जाता है।मगर चलनेमे परेशानि होती है इसलिये हमने हायवेसे जानाही मुनासिफ समझा और चल दिये।रेल्वे ब्रिजके पास सिढ़ियॉं उतरके हरदा रोडपर आ गये।इस सबमे छे-सात कि.मि.का चक्कर पडा था।थक चुके वो अलग।नर्मदे हर!
प्रथम हॉटेलमे पोहे-चाय नास्ता किया,फिर आगे चल दिये।धूपने परेशान करना शुरू कर दिया था।फेफरताल,वटकेश्वर महादेव,खेडला बसस्टॉप के पास टपरीपर दूध लिया।रोहना,यहॉंसे कोकसर गौरीशंकर महाराज समाधिस्थल जा सकते है।हम अभी नही गये।मगर बादमे गाडीसे परिक्रमा करते समय हम गये। रोहनामे अविनाश यादव के आंगनमे जलपान करके थोडा विश्राम किया।आगे रोहनागांवमे एक हॉटेलमे बैठे,आज भोजन मिलनेवाला नही ऐसा लगता है।कचोरी मंगवायी जो मुझे बिलकुल पसंद नही।वहॉं समोसेका नया प्रकार देखा,मिठा समोसा।मंगवाया,अच्छा लगा।नर्मदे हर!
शाम होनेको है,पांच बजे है।पच्चीस कि.मि.से ज्यादाही चलना हो गया है।सॉंवलखेडागांव आ गया,यहॉंके देवीसिंग पटेल का नाम हमारे पास था,गये उनके घर।नर्मदे हर!
सहर्ष स्वागत हुआ।बडे जमीनदार है,आंगनमे तीन ट्रॅक्टर खडे थे,एक जीप,चार मोटर सायकल थी।देवीसिंगजी बुजुर्ग है।अच्छे लोग है।
स्नान कपडे धोना कार्यक्रम किया।आरतीमे माताजी सामिल हो गयी,लोकगीत भजन सुनाया।बहुत अच्छा लगा।गरम गरम चुल्हेपर बनायि भाकरी,बैंगनभरता,बटरा-तूर हुरडा सब्जी,पापड ऐसा सुंदर चविष्ट भोजनप्रसाद बडे आग्रहसे खिलाया।अब विश्राम,नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-24
नर्मदे हर!आज सुबह जल्दी 4-30को विनोबा एक्सप्रेस चल पड़ी।बमुरिया,मुंगवारा,आमपुरा 6-15को पहुँचे चाय लेके आगे चल दिये।मुसरोद फाटा,रतवाडा,सोनखेडी 8-45am पोहोपसिंग तोमरजीने चायपान करवाया,नर्मदे हर!बघवाडामे राज हॉटेलमे दिलीप और संदीप लहुवंशीने कचोरी नास्तेके लिये दिलवायि तो दिपक दुकानवालेने बिस्किट-चाय दिया।धूप बहुत है,चलनेमे बहुत परेशानि हो रही है।मैया!कड़ी परिक्षा ले रही हो।धर्मकुंडी,रेल्वेक्रॉसिंगपर अशोक यदुवंशी का ढाबा है,कचोरी,समोसे थे।मैने कहा,दाल-चावल मिल जाते तो अच्छा होता।अशोकजीने सिर्फ हमारेलिये दाल-चावल बनाए।नर्मदे हर!विश्राम करके आगे चल पडे।
भीलटदेव बहुत सुंदर मंदिर है।सामने मध्यप्रदेश इको टुरिझम सेंटर है,सुंदर रिसॉर्ट,बाग-बगिचा है।भीलटदेव के पास धर्मशाला है कुछ लोगोने बोला रूक जाओ,मगर हम नही रूके,और इसका भुगतान हमे आगे जाके करना पड़ा।सिवनी-मालवा पहुँचे तब शामके छे बजे थे,आज रहनेका कोई ठिकाना नही मिल रहा था,भीलटदेव मे हमने नही माना तो अब सजा मिलनीही थी।अखेर दुर्गा लॉज मे कमरे लिये,बस रात निकालनी थी,आप समझ लिजिये कैसे होगा वो लॉज।आज रातको पुरा थंडा फराळ,लॉजवाली बहनजीने पानीतक नही पुछा।नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-25
नर्मदे हर!रात कैसी तो कट गयी,4-15amनिकल पडे आगे।भरलाय,धामनियामे चाय-टोस्ट लेके आगे रावणपिपला,यहॉं गांवमे एक पिपलका पेड है उसके निचे बैठकर रावणने तपस्या की थी ऐसी कहानी सुननेको मिली।आगे बावडियाभाऊ,पगढाल,छिंदवाडामे शिवनारायण राजपुतजी के घर आगमन आज सिर्फ बीस कि.मि.चले है मगर थक गये इसलिये आज यही रहना चाहते थे,और शिवरामजीने सहर्ष स्वागत किया नर्मदे हर!
सुबह स्नान आरती करके चाय लेके राजपुत फॅमिली को नर्मदे हर किया।टीमरनी,यहॉं भुस्कुटे पेट्रोलपंप है।चाय लेके आगे चल दिये।चारखेडा,ऊॅदा,खिडकीवाडा,हरदा-यहॉं महाराष्ट्रीय संत गोंदोवलेकर महाराजजीने स्थापन किया हुआ पट्टाभिराम मंदिर है।आजका चलनेका कोटा पुरा हुआ था इसलिये मुक्काम।
यहॉं श्रीयुत गोडबोले व्यवस्थापक है।सारा वातावरण घर जैसा है।स्नान कपडे धोना सारे काम बढ़िया हो गये।सुंदर महाराष्ट्रीय भोजनप्रसाद मिला,अंतरात्मा तृप्त हुआ।सौ.अनिता गोडबोले मंडलेश्वरके श्रीराममंदिरके व्यवस्थापक श्री.मोडकजी की बेटी है।मै शादीके पहले गोडबोलेही थी इसलिये ये हरदामें मेरा मायकाही हुआ,अनिताभाभीने अपने इस ननदकी खातीरदारीमें कुछ कमी नही छोडी।जेष्ठ गोडबोले काका काकूभी बहुत अच्छे है।इतनी उमर होनेके बावजुद मंदिरके सारे कार्य करते है।नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-26
परिक्रमामे चलनेके लिये हम आधिकतर हायवेका उपयोग कर रहे है इसलिये हंडिया हमारे मार्गमे आनेवाला नही है और वो देखना था।गोडबोले काका बोले,आप बससे जाके दर्शन करके आना और कल आगे जाना,इसमे परिक्रमाके किसी नियमका उल्लंघन नही होता।तो स्नान आरतीके बाद नास्ता करके हम बससे हंडिया के लिये निकल पडे।आज अमावास्या है,अमरकंटक से खंबायत तक मैयाके दोनो किनारोंपर स्नान,दर्शनके लिये लोगोंका सैलाब उमडता है।
हंडिया पहुँचे,सुंदर मैया।किनारेपर है पुरातन रिद्धनाथ मंदिर,प्रवाहमे है नाभिकुंड।परिक्रमावासी वहॉ नही जा सकते।सामने दिखता है नेमावरका घाट,सिद्धनाथ मंदिर।हंडिया-नेमावर जोडनेवाला ब्रिज।सारा नज़ारा देखतेही बनता था। खुबसुरत नर्मदा।सुबह स्नान हुआ था फिरभी हमने स्नान किया क्योंकी आगे कब मैया दर्शन होगा मालूम नही था।रिद्धनाथ दर्शन करके,एक आश्रममे गये,महाराजको प्रणाम करके चायपान लेके वापस हरदा आ गये।



