Sunday, 4 February 2018

।।तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा।। भाग-1
आज दशहरा है।मेरी गाडी विलासपुर स्टेशनपर राइटटाइम पहुँची।कटनी पॅसिंजर सुबह छे बजे थी,वेटिंग रूममे बैठ गयी।वहॉ गोंदियामे बॅंकमे काम करनेवाला,अमरकंटकका रहनेवाला राम नामका लडका मिला,अच्छी सोबत मिल गयी।उसने मेरा भी पेड्रारोडका तिकीट लिया।
गाडी पहाडी जंगलसे गुजर रही थी।बहुत सुंदर घना जंगल है।थंडी हवा चल रही थी।पहाड के पिछेसे पेडोंकी आडसे सुरजचाचू आ गये।मैया!कितना प्यारा है देश तुम्हारा।
सुबह 9बजे गाडी पेड्रारोड पहुँची। बोलेरो खडी थी।मै और राम बैठ गये।गाडीवाले भाईसाब को कल्याण आश्रम के सामनेके निवासी स्कूलमे जाना था,उधरतक छोडुंगा ठीक है।
सुंदर निसर्ग दर्शन कराती घाटोंसे गुजरती बोलेरो मुझे मेरी मैयाके पास ले जा रही थी।ज्वालेश्वर,अमरेश्वर,दुर्गाधारा होते हुए अमरकंटक पहुँची।राम का घर बसस्टॅंडके पास था,वो उतर गया।मुझे कल्याण आश्रमके सामने उतार दिया।हडबडीमे मेरी काठी गाडीमें रह गयी।
मृत्युंजय आश्रममे रूम ले ली।स्नान पुजापाठ करके महाराजके दर्शन किये।भोजनप्रसाद ग्रहण करके थोडा आराम किया।
शामको मंदिर समुह,नर्मदाकुंडके दर्शन करने गयी।पुजारी धर्मेंद्र द्विवेदीसे मिलके कल मैयाकी परिक्रमा के बारेमे पुछा,उन्होने संकल्पपुजा और कढाईके 351रू.बताये नाम,पता,गोत्र,फोन नंबर,आश्रमका रूम नंबर सब लिख लिया और सुबह 8-30बजे आनेको बोला। पैसे देके,पुनः दर्शन करके मै वापस आश्रम आ गयी।
शामको मैयाके घाटपर रावणदहन का कार्यक्रम हुआ। मैने पहिली बार ऐसा कार्यक्रम प्रत्यक्ष देखा।
कलसे मैयाके साथसाथ परिक्रमामे चलना है।मगर मेरे पास तो काठी नही है कठीण रास्तेपे कैसे चलूँ?आश्रमके एक बंधुको पुछा,उन्होने एक बडा दंडा दिया बहूत भारी था कैसे चलुंगी?नर्मदे हर!मैया देख लेगी।
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-2
सुबह जल्दी स्नान पुजापाठ करके (आजसे थंडे पानीसे नहानेकी आदत डालनी है)आश्रममे चायप्रसाद लेके,महाराजको प्रणाम करके रूम छोडके मंदिर मे गयी। आज एकादशी दर्शनकेलिये भीड होने लगी थी।पुजारीजी श्री.धर्मेंद्र द्विवेजीसे मिली तो उन्होने मुझे पहचानाही नही,संकल्पका बताने के बाद एक दुसरे गुरूजी को बताया,वो गुरूजीने कुण्डसे नर्मदाजल लानेको कहा,कुण्डका जल बहुतही प्रदुषित था मगर क्या करती इस मानवी अपराध के लिए मैयासे क्षमा याचना करके जल कुपीमे भरके मंदिरमे आ गयी,शिवजीके मंदिरमे वो गुरूजी बहुतही अशुद्ध मंत्र बोलते संकल्प बताने लगे जो संकल्पमंत्र न होके शिव पंचाक्षरी स्तोत्र था।उनको लगा इसको क्या समझेगा,मै पंडीत की बेटी हूँ बचपनसे स्तोत्र मंत्र पठण करती आयी हूँ।ऐसे खडे खडे संकल्प नही किया जाता।मगर क्या करती ये परिस्थिती भारतके हर बडे तीर्थक्षेत्रकी है।पंडे भक्तोंको ठगाते है।मैयासे क्षमा याचना करके खुदने संकल्पमंत्र बोले और गुरूजीके हाथमे 101रू.दक्षिणा देके उनको प्रणाम किया।पंडीतजी मेरी तरफ देखते रह गये।वापस द्विवेदीके पास आकर कढाईप्रसाद के बारेमे पुछा,वो बोले हम करेंगे कढाई।क्या बोलती?मैयाको चढानेके लिए लायी साडी भगवान आषुतोषजी की शाल-धोती उनके हाथमे दे दी।वो देखने के बाद गुरूजी एकदमसे बदल गये।फिर उस गुरूजीको बुलाकर मुझे ऑफिससे परिक्रमा प्रमाणपत्र दिलवाकर दक्षिणद्वारसे विदा करवानेको कहा।नर्मदे हर!
सील लेके गुरूजीको नर्मदेहर किया और आगे चल पडी।
बाहर आके चाय पिया वही मैयाका प्रसाद समझा। 1,2कि.मि.कच्चे जंगल रास्तेसे चलकर हायवेपर आ गयी तब घडीमे सुबह के दस बज रहे थे।
सात कि.मि.कबीरचबुतरा पहुँचकर टपरीपर चाय लिया खानेकेलिए वहॉं समोसे,चिप्स वगैरे था,वो मै नही खा सकती थी।आगे चली रास्ता अच्छा था,दोनो तरफ घना जंगल,सुंदर पंछी,खेलते कुदते बंदर और मनमे ॐनमो नर्मदा माई रेवा पार्वतीवल्लभ सदाशिवा धूनमें दंग मै।बहुत अच्छा लग रहा था।
हाथमे लीहुयी काठी भारी थी,मेरे हाथमे नही समा रही थी।मगर क्या करती?अपनी बेटीकी तकलीफ मैया कैसी देख सकती?उन्होने रूंजा नामके आदिवासी बंधूको भेजा,वो मेरे पास आकर बोले मैया इतनी मोटी लाठी लेके कैसे चलोगी?थक जाओगी,ये मेरी लाठी आप लेओ और आपकी मुझे दे दो।नर्मदे हर!
जगतपुर आ गया उधरके सुंदरलाल बघेल का नाम मेरे पास था मगर उनका घर बंद था।फिर वही आंगनबाडीके बरामदेमे बैठी।राय नामकी आंगनबाडी सेविका थी,उन्होने पानी दिया बच्चोंका भोजन हो गया था इसलिए वो भोजन देनेको असमर्थ थी,इसलिये वो बारबार खेद जता रही थी।वो करंजिया की रहनेवाली थी उन्होने उनके घर बुलाया और वो बससे आगे गयी। एक घंटा आराम करके मेरी विनोबा भावे एक्सप्रेस आगे चली।बोंदर के बाद करमंडलमे एक टपरीपर चाय लिया।
रास्तेमे एक कार रूक गयी मेरी पुछताछ करके मै पैदल परिक्रमा कर रही हूँ ये देखकर अचंबित होकर आदरसे मेरे पैर छुने लगे।मेरे समझमे नही आ रहा था की मै क्या करूँ?नर्मदे हर।
शामके पांच बजे मै करंजिया पहुंची।कोई आश्रम या राय मॅडमका घर पुछनेही वाली थी,एक थ्री व्हिलर मे बैठे भाईसाबने नर्मदे हर किया और उनके घर आनेका आमंत्रण दिया।वो थे रिटायर मलेरिया इंस्पेक्टर श्रीयुत प्रेमकुमार बुनकर।बुनकर भाईसाब एक पैरसे दिव्यांग है फिर भी ये मेरे हिम्मतबहाद्दर भैयाने पत्नीके साथ इस थ्रीव्हिलरसे पाटी-बोखराटा के कठीण कच्चे जंगलमार्गसे परिक्रमा की है।
घर फोन करना था मगर मेरे फोन को रेंज नही थी,शिफा मेडिकलके नसीम भाईने उनके फोनसे मेरी घर बात करवायी और मैयाके प्रति श्रद्धा रखनेमे धर्म आडे नही आता इसकी प्रचिती दे दी।
बुनकर भैयाके घर मुझे मायके जैसा ही लगा ।
क्रमश:

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-3
स्नान पुजाआरती के बाद भाभीने दिया चाय लेकर आगे प्रस्थान किया।तरेरा,रामनगरमे एक नालेके पास ब्रिजके पास श्री.लल्लूदास सौ.चंपाबाई ने अपने वानप्रस्थ कुटी मे बुलाया,तुलसीके पत्ते,गुड डाला हुआ काला चाय दिया।मैने ऐसा चाय इसके पहिले कभी पिया नही था इसलिए वो काला चाय पिनेकेलिये थोडा हिचकिचाई,थोडाही देनेको बोला।डर डर के एक घुंट पिया,और बहुत बढिया लगा,और थोडा दे दू?माताजीने पुछा।जी,चलेगा और चाय पिया,एकदम रिफ्रेश हो गयी।चलो आगे।
अमलदिह,बरबजपुर,रूसा गांव आया।स्कुलके सामने राय भोजनालयमे गयी।भुक लगी थी मगर वहॉं सिर्फ समोसे थे,मुझे समोसा बिलकुल पसंद नही क्या करू सोचमे पड गयी।सौ.कमलेश दिनेश राय आयी,भोजनालय उन्हीकाही है।मै परिक्रमा वासी हूँ ये जानने के बाद मुझे घरमे लेके गयी और पुरा भोजन करवाया,रहनेका बहुत आग्रह किया,बहुत अच्छे सेवाभावी लोग है,एक कुटुंब मेरे रिश्तेदार बन गया। विश्रांति लेके आगे चल पडी।
पाटणगड मे सिवनीमैया ब्रिजपरसे क्रॉस की।शाम को पाच बजे गोरखपुर पहुँची।मेरे पास सिर्फ एक नाम था जिनके घर मेरी सहेलियाँ परिक्रमामे रही थी।एक दुकानमे पुछा,सतीश शर्मा कहाँ रहते है?वो दुकान उन्हीकी थी।भारती ठाकुर का संदर्भ दिया,बहुत सहर्ष स्वागत हुआ।सतीश,पत्नी सतकिर्ति,माताजी,बेटा हम ऐसे घुलमिल गये मानो एकही घरके सदस्य है।
सुबह गरम पानीसे स्नान,पुजाके बाद चाय-नास्ता करके माताजी का आशिर्वाद लेके आगे चली सतीश सतकिर्ति दो-तीन कि.मि.मेरे साथ आए।हनुमान मंदिर मे दर्शन करके वो घर गये और एक रिश्तेदारी झोलीमे समेटे मै आगे बढ गयी।
चंदना,मोहतरा,पिंजराहटोला,डोंगरीटोला,रामनगर,कनकधारा यहॉं सुरेंद्र चायकी दुकानमे चाय लेके आगे चली।मोहतरा रत्ना यहॉ एक सिद्ध बाबा मंदिर है,देखा तो महाराष्ट्रके शेगाव के संत गजाननमहाराज का मंदिर था।उनको इधर सिद्धबाबा कहते है।आज गाडासराईमे सतीश शर्माने बताए डॉक्टर विजय चौरासिया के घर जाना था।
गाडासराईका घाट पार करके फॉरेस्ट ऑफिसके प्रांगणमे थोडी देर विश्रांती लेके आगे चली।कुकडाटोला के बाद आया गाडासराई। एक भाईसाबको डॉक्टर चौरासिया के बारेमें पुछा तो वो मुझे बडी अदबसे उनके हॉस्पिटल ले गया।
डॉक्टरसाब बाहरही खडे थे कही बाहर जानेकी तैयारीमे लग रहे थे।मैने मेरा परिचय दिया।बोले मै और आपकी भाभी जबलपुर जा रहे है रातको वापस आएंगे।आप आज यही अपने घर रहना,मेरा बेटा नवीन,बहू सविता है।पोता अर्पित और पोति अंशिका भी है ।विना संकोच रहो।
नवीनने मेरी बॅग उपर घरमे भिजवायी।बच्चे दौडके मुझे लेने निचे आ गये।और फिर ऐसे चिपक गये जैसे मानो हमारा जनम जनम का रिश्ता है।
क्रमशः

तीर्थ जननी नर्मदा परिक्रमा भाग4
डॉक्टर साब बडे भाग्यशाली है,इतना प्यारा परिवार है।बहू ने बहुत बढिया भोजन प्रसाद खिलाया।नवीन भी बार बार दुकानसे फुरसत निकालकर ऊपर आकर मेरी पुछताछ करता रहा।बच्चे तो इतने घुलमिल गये थे,उनके दादाजी ने लिखी पुस्तके ,उनको मिले प्राइज सब मुझे दिखाया,अपने स्कूलके बारेमे,दोस्तोंके बारेमे बताते रहे,शामको टेरेसपे जाके हम तिनो खेल भी खेले।बच्चोंको ये महाराष्ट्रीय दादी बहुत पसंद आयी,रातको कहानी सुनते सुनते मेरेपासही सो गये।
डॉक्टरभाईसाब और भाभि बहुत देर रात वापस आए।
सुबह जल्दी ही मैने सब को अलविदा किया क्योकी बच्चे उठ जाते तो मेरा निकलना असंभव हो जाता।नर्मदे हर!
सुबह का सुहाना मौसम था,रास्तेके दोनो तरफ के खेत लहराती हसी के साथ मेरे चलनेका हौसला बढा रहे थे।जैसे कह रहे थे,पैदल धीरे धीरे चलो मुखसे जय मैया बोलो।
तीनएक कि.मि.सागरटोला गांव तक आयी थी,पिछेसे गाडीका हॉर्न बजा एक गाडी मेरे पास रूक गयी और दरवाजा खोलके अंशिका अर्पित दोनो बच्चे मुझसे ऐसे लिपट गये मानो जैसे मै उनको छोडके कही भाग रही थी।मुखसे रट लगा रखी थी,घर वापस चलो आपने कही नही जाना हमारे साथही रहना।
बच्चोंका प्यार देखकर मेरे ऑंखोंसे बहते आंसू थमने नाम नही ले रहे थे,मैया किस जनम का नाता है हमारा?एकही दिनमें इतना प्यारा लगाव हुआ।
नवीन बोला,निंद खुलतेही मेरे बारेमे पुछा और मै चली गयी ये समझने पर रो रो के हंगामा खडा कर दिया आखिर ज्यादा दूर नही गयी होगी ऐसा सोचकर बच्चोंको लेकर आ गया था।
परिक्रमामे वापस पिछे नही जा सकते,परिक्रमा पुरी होनेके बाद आऊंगी,बर्थ डे को आऊंगी गॉड प्रॉमिस पक्का आऊंगी ऐसा वैसा बहुत समझाने के बाद रोते रोते कैसे तो गाडीमे बैठ गये।मै भी आंखोंमे आंसू लिये नर्मदे हर करते आगे चल पडी।
आगे सिद्धार्थ यादव की टपरी पर चाय लिया उसने पैसे नही लिये।बोंदर हर्रा के बाद कारोपानि यहॉं से थोडी दुरीपर कृष्णमृग अभयारण्य है।वहॉं जाना मुमकिन नही था सो आगे निकली,डॉक्टर भाईसाबने स॑जीव मरकाम का नाम बताया था गिधागाव के बॉर्डरपर उनका बंगला है।अंदर गयी मगर वो कही गाव जानेवाले थे।चाय पिके आगे नर्मदे हर'
गोमती मैया के किनारे महेंद्रसिंग का हॉटेल है।उनके बेटे को बचपनमे मॅनेनजायटीस हुआ था।नानीने बच्चा ठीक होने दो उसको लेके परिक्रमा करूंगी ऐसी मैयासे मन्नत मांगी,बेटा ठीक हुआ तो दस सालके बेटेको लेके नानीने पैदल परिक्रमा की।नर्मदे हर। शाम को गिधा गांव मे श्री.फुलसिंग राठौर के घर आसन लगाया।बहुत सेवाव्रती परिवार है।पुजा पाठ भोजनप्रसाद लेके अब विश्रांती ।
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-5
आज सुबह पाच बजे फुलसिंग राठौरजी को नर्मदे हर करके निकल पडे,गोमतीके किनारे स्नान करके महेंद्रसिंग के ढाबेमे बैठकर मैयाकी आराधना पुजा आरती की,महेंद्रजीने पोहे-चाय नास्ता दिया।नर्मदे हर!
कुडा,बिछिया,महावीर टोला,सिमरिया फाटा,घानाघाट पार करके दिंडोरी पहुंचे।अमरकंटक के बाद मैयाका दर्शन नही हुआ था इसलिए मैयाके घाटपर गये।मगर अफसोस!सारा परिसर गंदगीसे भरा पडा था।मन बहुत नाराज हुआ।किनारेसे नही जा सकते ऐसा लोगोने बताया इसलिए वापस मंडला रोडसेही जाना ठीक समझा।
मेरे पैरोंमे ब्लिस्टर आये है,मडिकल स्टोअर से बॅण्डेड और कुछ ऍन्टिबायोटीक खरीदे,मुझे डायबेटीस है प्रिकॉशन लेना जरूरी है।
किरहाटोला,जमुनिया,रहंगी,रयपुरा पिछे छोडके इमलयको स्कूलके आगे पिपलका पेड है वहॉ बैठे।स्कुलके सर बोले बच्चोंका भोजन होने बाद आपको भोजन कराएंगे।नर्मदे हर!दो बजे दाल-चावलका भोजनप्रसाद लेके विनोबा एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायी।
दिंडोरी डिस्ट्रिक ये सारा प्रदेश रूक्ष है।पेडपौधे बिलकूल नही।दिंडोरी शहरका शायद कचराडंपिंग झोन है,कचरेके पहाड बन गये है।मैया इधरसे पाच कि.मि.दूरीपर है फिरभी सारा प्रांत उजडा हुआ क्युं है पता नही। कडी धूप थी,घाटका रास्ता था पानी पानी हो रहा था प्याससे,अपने पासका पानी खतम?सॉरी एक महाराजने बोला था,खतम नही बोलना पुरा हो गया बोलनेका,तो हमारा पानी पुरा हुआ था।रैपुरा पिछे छोडके हम छपरी आगये थे।रास्तेपास एक घर था।नर्मदे हर।मैया!पानी मिलेगा? जरूर मिलेगा।मैयाने बैठक बिछायी,थंडगार पानी कांसेके लोटेमे दिया साथमे एक प्लेटमे गुडभी दिया बोली सिर्फ पानी नही पिना पहले गुड खाओ बादमे पानी पिना।नर्मदे हर मैया!कितने आतित्थ्यशील है आपके बच्चे।माताजी का नाम था रनियाबाई।जुल्दानिया फाटा,तलैया तक घाट चढाई थी बादमे उतरना था।तलैयामे चायटपरीमे चाय लिया।पासमे एक मंदिर था मगर रहने सुविधा नही थी।आगे जानाही पडेगा।वापस एक छोटा घाट चढके किसलपुरी गांव आया।एक स्कूल,हॅण्डपंप के पास सौ.भानुमती थानिलाल गर्ग का घर था।शामके छे बजनेवाले थे आज गिधा से किसलपुरीतक 25-30कि.मि.चले थे,बहुत थक गये थे इसलिये माताजी के पास निवासभिक्षा मांगी,वो उन्होने सहर्ष दे दी।घरमे एक नया कमरा बनाया था उसमे हमे ठहराया।
22/09/16, 7:38:18 PM: ‪+91 94236 38659: भानुमतीजीके पुत्र प्रमोद गर्ग बहू कामिनी,बच्चे प्रिया,प्रफुल्ल,दुसरा पुत्र विरेंद्र बहू अल्पना बच्चे हर्षिता,सत्यम तिसरा पुत्र राघवेंद्र।पिंजराटोलामे जिस हरीप्रसाद तिवारी और गयाप्रसाद तिवारी के यहॉ हमने चायपान किया था,अल्पना उन्ही की बेटी है।परिक्रमावासियोंके प्रति इतना आदर,अपनेपास जो सर्वोत्तम है वह उनको देनेकी आस ये देखके मन भर आता है।मैया ये आपका प्यार।बोलनेको शब्द नही है।
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-6
भोर समयी पाच बजे गर्ग फॅमिली को अलविदा करके हमारी विनोबा एक्सप्रेस छुटी।सक्का,कचनारी,बरगा घाट चढाई शुरू।रास्तेके दुतर्फा पहाडपर घनदाट जंगल है फिरभी चलनेवाले को छांव नही मिलती क्योंकी जंगल पर्वतीय ढलानपर है।राई गांव आया दुर्गामंदिर के सामने अनिलसाहू के हॉटेलमे नास्ता किया उन्होने चायके पैसे नही लिये।अब घाट उतरना था।
मुझे बुखार आया है,पैरके ब्लिस्टर चलने नही दे रहे।एक जगह मॉं वनदेवी मंदिर है,वहॉके महाराजने हलवाप्रसाद दिया। 2014मे यहॉ एक जलस्त्रोत का उद्गम हुआ,एक पंचमुखी नागदेवताने दर्शन दिया ऐसा महाराजने बताया।वो बोले नर्मदामैया प्रकट हो गयी है कुण्ड भी बनाया है।
हर्राटोला के बाद हर्रा गांव आया स्कूलके शिक्षक श्री सारदा गोप आये हमे बुलाया,बोले आज उनके पत्नीने ज्यादा डबा दिया था और बोली आज आपको माताजींको खिलाना है।नर्मदे हर!मैया तेरी लिला अगाध है।
थोडी चढाई के बाद अब घाट उतरना था।गिधलौंडी,एक नदी किनारे गर्द झाडीमें एक हनुमानमंदिर और एक कुटी थी काशिगिरी महाराजने बगिचासे तोडके अमरूद दिये मधुर अमरूद।अंतरात्मा तृप्त हुआ।
कोयलीघॉंस,अंडियामाल के बाद चाबी गाव आ गया मेरे पास रूसा के कमलेश रायने बताया माया बघेल शिक्षिका ये एक सिर्फ नाम था।बुखार से बेहाल हो गयी थी।आगे चल पडे ।एक माताजी अपने घरके बाहर बैठी थी जोरजोरसे मुँहसे आवाज करते हातोंसे इशारा करके हमको बुलाने लगी पास जातेही मेरा हाथ पकडके अपने पासकी खुर्सीपर बिठाया,मेरे सरपर,गलेपर हाथ लगाकर इशारेसे बुखार आया है,पैर दुख रहा है,आज इधर हमारे घरही रहो ऐसा कहती रही। उनके घरके सदस्य भी आ गये और बडा आग्रह करने लगे हम मान गये।मैयाने आज अपने इस पुत्रके घर हमारी व्यवस्था तय की थी।ये घर था गप्पू खडगडे का।
खडगडे कुटुंब बैतुल जिल्हा आमला जो मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र सीमापर है वहॉंके रहनेवाले है।बहूँए महाराष्ट्रके छिंदवाडा की है।फिर क्या हम उनके मायकेवाले,मराठीमें बाते,महाराष्ट्रीय भोजन।गरमपानीमे नमक डालके पैर सेंकना।बहुत आराम मिला।
तबियत ठीक नही मगर चलना तो पडेगाही।साडेपांच बजे विनोबाएक्सप्रेस को ग्रिन सिग्नल दिया।खैरी के बाद गिठौरीमे श्री शर्मणकुमार झारिया के चायटपरीपर चाय लिया उन्होने पैसे नही लिये मैया कितने सेवाव्रती है आपके बच्चे।नर्मदे हर।
खाल्हेगिठौरी,अंडियादर,मोहगांव रैयत,मोहगांव नाकेपर गोविंद बैरागी के हॉटेलमे उडददालके वडे-चाय नास्ता किया,दवा कॅप्सुल लेली।बैरागीजीने पैसे लेनेसे इन्कार कियाउपरसे तबियत ठीक नही इसलिए आज यही रहो कहने लगे।आगे जाना जरूरी था इसलिए नर्मदे हर।
धूप कड़ी हो रही थी,पैर बहुत दुख रहा था,बुखार बढ रहा था।इंद्रागाव आया,सोनादास माणिकपुरी इस कबीरपंथी गृहस्थके घर ॐभवति भिक्षां दे हि किया उन्होने सहर्ष घरमे बुलाया,भोजनप्रसादके बाद दवा लेके विश्राम किया।
दो बजे आगे चल पडे।बुखार है,सर भी फटा जा रहा था,पैर चलनेसे मना कर रहा था।देवगांव पहुँचे तब पाच बज चुके थे।सौ.लिलाबाई संतकुमार झारिया,उनकी बेटी श्रीमती लक्ष्मी के घर निवास भिक्षा मांगी,मैयाके बच्चे आतिथी देवो भव ये उनका परम धर्म है ना बोलने का सवालही नही था।झारियाजी के दो जवान बेटे किसी कारणवश भगवानको प्यारे हो गये थे ये क्या कम था लक्ष्मी के पतीको भी देवाज्ञा हो गयी थी।लक्ष्मी के दो बच्चे सोमनाथ और कविता बहुत स्कॉलर है।
एक छोटासा दुकान निर्वाहका साधन है।संतकुमार रोज सुबह-शाम मैया को दुध-अगरबत्ती चढाए बिना अन्न ग्रहण नही करते।नर्मदे हर!
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-7
लक्ष्मी के बच्चे स्कॉलर है,परिक्रमामे रहते उनके लिए ज्यादा कुछ करना संभव नही था इसलिए स्कूलको लगनेवाले मटेरिअल के लिए कुछ पैसे दे दिये वो नही ले रहे थे हमने कहा ये कन्या पुजन है तब जाके स्वीकार किया।परिक्रमा पुर्ति के बाद हमने उनके लिए और मदत भेज दी।
पावणे छे बजे प्रस्थान किया।नर्मदा-बुढनेर संगममे स्नान किया जल बहुत सुहाना गुनगुना था।बुखार होने के बावजूद स्नान के बाद मुझे बहुत बढ़िया महसूस हो रहा था।मंदीरमे दर्शन करके घाटपर बैठकर मैया की आरती करके बुढी माई पार करनी थी,पानी ज्यादा गहरा नही था मगर फिसलन का डर लग रहा था,मोहित नंद नामके छोटे नर्मदापुत्र ने मेरा हाथ पकडकर मुझे वो बडी चौडी बुढीमाई पार करवा दी।नर्मदे हर।
नदीकी दरड चढकर उपर आए,परिक्रमापथ ऐसा बोर्ड था थोडा तेढा था आगे चल पडे कुडोपानि गांवमे पहुँचे।गलती हुई थी,बोर्डके बाजूसे जाना चाहिए था अब सफर लंबा होना था।जंगलतक पहुँचते पहुँचते मेरी दमछाक हो गयी।घाट चढना मुझे नामुमकिन लग रहा था।मै वही बैठ गयी। वहॉ कुछ बच्चे जंगलमे महुआ के फूल इकठ्ठा कर रहे थे। उनको मदतके लिए बिनती की हिमांशु वरकडे नामके बच्चेने मेरी सॅक उठायी और हम घाट चढने लगे,घनदाट जंगल बडेबडे पत्थरोंके बिचमेसे चलते घाट चढके उतरकर रास्तेपर आ गये।थोडीदेर विश्राम करके सामनेही के खेतमेसे पगदंडी से बिलगांव पहुँचे।मुझे बुखार आया था पैर भी बहुत दुख रहा था।गावमे डॉक्टर विनोद शुक्ल,डॉक्टर अरविंद शुक्ल की डिस्पेंसरी थी,उधर गये मुझे 102बुखार था।डॉक्टर बोले रामनगर दूर है आज आप हमारे घरही रहो,मेडिसिन लेके आराम करना अगर ठीक लगा तो कल आगे बढ़ना नही तो दो-तीन दिन यही रहना।हम रूक गये।आज सिर्फ दस कि.मि.चलना हुआ था।
दुसरे दिन सुबह छे बजे प्रस्थान किया।आजका रास्ता सिधा था।सालिवाडा,चंदवारा फाटा पिछे छोडके रेवाखण्डे सेकंडरी स्कूल पलेहरा बोर्ड पाससे दाहिने बाजूसे पलेहरा गांवमेसे सिमेंटका रास्ता खतम होतेही सामनेके पगदंडीसे खेतोंके बांधोंपरसे चलते झिना गांवमे आ गये।
अब डांबर रोड आ गया।चौगान गावमे मध्यप्रदेश सरकारका पर्यटन रेस्टहाऊस है।यहॉं रहके रामनगर किला,मोतिमहल,काला पहाड वगैरे पर्यटन स्थल देख सकते है।एक टपरीपर चाय लेके आगे चल पडे।
चौगान की मढ़िया ये एक ऐतिहासिक वास्तू देखनेको मिली।रामनगर बड़ा गांव है।ऐतिहासिक धरोहर है मध्यप्रदेश की।रामभक्तकी गढ़ी,राममंदिर,मोतीमहल,मैयाका घाट है।हमारेलिए अभिमानास्पद बाब,यहॉं बॅंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा है।नास्ता करके दवा लेके आगे चले।नर्मदे हर।
मुगली गाव,यहॉसे कालापहाड जा सकते है।काला पहाडमे नैसर्गिक बने अष्टकोनी,षटकोनी पिलर्स बने है।एक गुंफामे शिवपिंडी है,पहाडमे मिट्टी बिलकूलभी नही फिरभी बडे बडे वृक्ष है।ऐसा हमे बताया गया मगर समय नही था,फिर कभी आएंगे।अब चलो आगे।
कुरिया टोला का घाट चढके मधुपुरी पहुँचे।ॐशिवमंदिर,यहॉ परिक्रमावासीओंको भोजनप्रसादकी सुविधा मिलती है।नर्मदे हर!गीताबाई होलकर पटेल सेवाव्रती है।सहर्ष स्वागत हुआ।भोजनप्रसाद के बाद थोडा विश्राम करके आगे प्रस्थान।
घुघरागांवके बाद एक तलावके आगेसे दाहिने तरफ कॅनॉल रोडसे शॉर्टकटसे चल रहे थे।कड़ी धूप थी मगर कॅनॉलके पानीके उपरसे चलनीवाली थंडी हवा सुकून दे रही थी।आमगमा गांव पिछे छोडके खडदेवरा गांवके शासकीय प्रार्थमिक स्कूलके पाससे सुंदर मैया दर्शन हुआ।बहुत खुशी हुई।स्कूल शिक्षक श्री.मनोज तिवारी,जितेंद्र ठाकूर,चाय-पानी होनेके बाद नर्मदे हर।
खडदेवरीमे कॅनॉल क्रॉस करके स्कूलके पाससे पगदंडीसे आगे निकले थोडी दुरीपर रोड मिल गया।दाहिने बाजूसे सुरजकुण्ड के दर्शन करने गए।सुंदर मंदिर परिसर,मैया किनारे कुण्ड।कुछ लोग इधर रहो बोल रहे थे मगर हमने महाराजपुर जाना मुनासिफ समझा नर्मदे हर।
पुरवा चौराहा,चाय पिके बंजर-नर्मदा संगमपर आए।बंजरमैयापर कच्चा छोटा ब्रिज है मराठीमे हम उसको सांडूवा या सेतू कहते है।
बडे शहरोंमे नदियोंका जो हाल होता है वही हाल यहॉं भी था,सारे शहरका कुड़ा-कचरा शायद यहॉं लाकर पटक दिया था। उसी गंदगीमेसे आवागमन चल रहा था।हम भी गये महाराजपुर।कही रहनेका इंतजाम न हो सका तो गाडीसे परिक्रमा करनेवाले जिस रमा-रमण लॉज मे ठहरते है वहॉं जानेके लिए चले लॉज के बाजूमेही भा.ज.पा.पार्षद रितेश राय,सौ.प्रिती राय का घर था गये अंदरग,निवास भिक्षा मांगी,उन्होने सहर्ष दे दी।बहुत बढ़िया आदर सत्कार किया हमारा।नर्मदे हर।
क्रमशः

No comments:

Post a Comment