तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा - 51 - 100
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-51
नित्यकर्म,स्नान,आरती सब तैयारी होही रही थी,रहासे साहेब चाय लेके आ गये।चायपान करके सबको नर्मदे हर अलविदा करके विनोबा एक्सप्रेसको हरी झंडी दिखायी तब सुबह के सव्वापांच बजे थे।आज भी पीठपर सॅक नही थी।एक जगह रास्तेपर बहुतसारे व्हिलवाली ट्रॉली खडी थी उसपर बहुत बडे बडे मशिन्स रखे थे,पंधरा दिन हो गये थे आगे जानेके लिये सरकार की अनुमती नही मिल रही थी।नर्मदे हर!
टॉर्च के प्रकाशमे थंडी हवा के चलते घाट कब उतर गये समझाही नही।कवलामहू,कौलि के बाद आया खापर।नगमा ढाबा बोर्ड देखतेही सुहास लिमयेजी की याद आयी उन्होने इसी ढाबेमे नास्ता किया था।हमने चाय-बिस्किटे ली।नर्मदे हर!
उदेपुर,अंबिका स्टोन क्रशर की जगह जलपान करके आगे चलने लगे सुबह के सिर्फ साडेआठ बजे थे मगर धूप अभीसे लगने लगी थी।डोंगरीपाडा के बाद पेचरीदेवगांवमे गणेश हॉटेलमे नास्ता करके आगे बढ़े तब दस बजे थे।बारा-पंधरा कि.मि.तो आयेही होंगे।नर्मदे हर!
उमरकुवा पार करके गव्हाळी चेकपोस्ट पहुँचे तब 11बजे थे।हमारा सामान पहलेही पहुँचा था।रहासे साबने सामान पहुँचा दिया इसलिये हम पांच घंटेमे 18कि.मि.आ सके थे।नर्मदे हर! गव्हाळीमे पांडुरंगशास्त्री आठवलेजी के स्वाध्यायी परिवारका लोकनाथ अमृतालयम है।घनदाट वृक्षराजी और सुंदर बगिचाके बिचमे बांबू और लकडीसे बना योगेश्वर कृष्ण प्रार्थना मंदिर है,आंगनवाडी,स्कूल सारी व्यवस्था आदिवासी बांधव करते है।नानाजी एक वृद्ध बुजुर्ग व्यवस्थापक है।स्वाध्यायी परिवारका वृक्षमंदिर,योगेश्वर कृषि,भक्तिफेरी ऐसे बहुतसे काम देशभरमे चालू है।नर्मदे हर!
दो दिन बाद पीठपर सॅक लेके चलते कठीण लग रहा था।मनुष्य आराम का आदि कितना जल्दी हो जाता है न?दो दिन आराम क्या मिला पीठ की सॅक उठानेमे कुरकुर शुरू।
जिरामैया पूलपरसे पार करके दाहिने ओर सुनिल चौधरी और राजेंद्र चौधरीका स्वागत हॉटेल है।यहॉ परिक्रमावासीओंके लिये भोजनप्रसादकी व्यवस्था करते है।हॉटेलके पिछे बगिचेमे सिमेंटकॉंक्रीटका ओटा बनाया है।WCभी है।पुरूष परिक्रमावासी मुक्काम कर सकते है।
हम पहले परिक्रमामे यहॉं आये थे,राजेंद्रजीने मुझे पहचाना।नर्मदे हर!भोजनप्रसादमे दाल-रोटी,सॅलड,जीरा राइस मिला।विश्रांतीकेबाद तीन बजे चाय लेके राजेंद्रको नर्मदे हर करके आगे निकले।दस मिनीटमेही गुजरातमे हमारा प्रवेश हो गया।अब संगम पार करके उत्तरतटके रेंधवा छकतालतक गुजरातमेही चलना है।नर्मदे हर!
गुजरात का पहला गांव चिकाली के बाद धनशेरामे गुजरातका चेकपोस्ट है।पांच बजे सागबारागांवमे प्रवेश करतेही प्रथम ढाबेपर चाय लिया।साडेपांच बजे शिव-अंबिका,श्रीराम,जलाराम बाप्पा मंदिरमें आ गये।लक्ष्मीविलास हॉटेलके पिछेसे पगदंडीसे मंदिरमे जानेका रास्ता है।हॉटेल मालिक श्री.विजयभाई पटेल रातका भोजनप्रसाद देनेवाले है।
मंदिर स्वच्छ और सुंदर है।हॅण्डपंपपर फ्रेश हो गये तबतक विजयभाईने चाय-बिस्किट भेजे।तब बाबाके मित्र श्री.मांडके,श्री.अभ्यंकर आ गये।मित्रभेटसे आनंद हुआ।आरती प्रार्थना के बाद गपशप कर रहे थे,विजयभाईने डबा भेजा।सबका भोजन हुआ।आज तीस कि.मि.चलना हुआ था,बहुत थक गये है।अब निंदियारानी जल्दी आ जा।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-52
सुविधा न होनेसे कैसे तो नित्यकर्म करके मंदिरमे दर्शन करके निकल गये।कल हमे भोजनप्रसाद देनेवाले विजयभाई पटेलके हॉटेल लक्ष्मीविलासमे उनका डबा वापस देने गये।उन्होने चाय और बिस्कीट,मुंगदालके पॅकेट्सभी दिये।नर्मदे हर!चलो आगे।कोडबा,नयी फाली,अमियारमे ढाबेपर दूध लेके विनोबा एक्सप्रेस आगे चल पड़ी तब साडेसात बजे थे।चोपडाके बाद मॉं चौकडी को नास्ता करके साडेनऊ बजे आगे चलने लगे।आजसे संतोषमहाराज हमारे साथ नही है।सागबारासे भादलका उसका आश्रम पास था,पहाड जंगलके रास्तेसे वो चला गया।नर्मदे हर!
देवमोगरा फाटा-12कि.मि.हो गये थे।कणगीपिठा के बाद गंगापुरमे शांतिनिकेतन गर्ल स्कूलके प्रांगणमे दो बजेतक विश्राम किया।क्योंकी कड़ी धूप रास्तेके दोनो तरफ जंगल होते भी परेशान कर रही थी।
काल्बी के बाद देडियापाडा दस कि.मि.रहा था,एक जगह बैठे और जलजिरा,ऑंवलारस प्राशन किया थोडा तकवा आया।
मेडियासाग गांव आया।सुहास लिमयेजीके पुस्तकमे इसका उल्लेख है,याद आया।थोडे आगे जातेही मेकलसुता आश्रम आ गया।राजन्यूज के हेमंत शर्माने सदानंद महाराजके बारेमे बताया था।3-45बजे थे सुंदर बगिचेसे होते आश्रममे गये।महाराज झुलेपर बैठे थे।प्रसन्न व्यक्तिमत्व है।उमर ज्यादा नही है।नर्मदे हर!
महाराज बोले,चार बज रहे है अब आज यही आसन लगा लो।सही कह रहे थे,देडियापाडा 10कि.मि.दूर था इतना जाना आज मुश्कील था,आजका मुक्काम मेकलसुता आश्रम-मेडिया साग।नर्मदे हर!
फ्रेश होके खिचडीका प्रसाद पाया।आश्रमके पिछवाडे पानीके नल,लॅट्रीन,बाथरूम,गरमपानीके जलती लकडीपर चलनेवाले गीझर है।सब सुविधा बढ़िया है।
स्नान कपडे काम निपटाके मैयाकी आरती प्रार्थना कर ली।आश्रममे कुछ लोग सेवाकार्य हेतू आये थे।स्वादिष्ट भोजनप्रसाद मिला।महाराजके साथ सत्संग हुआ।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-53
स्नान-पुजाके बाद पोहे-चाय का नास्ता करके सदानंदबाबाजींको प्रणाम करके आगे प्रस्थान किया।कंकाळागांव पार करके आगे निकले थोडी देरके बाद सिताराम आश्रम श्री भीडभंजन हनुमान मंदिर आया,महंत भगवानदास महाराजजीने बुलाया।नर्मदे हर!छोटासा आश्रम है,कुछ विद्यार्थी यहॉं रहके शिक्षा ले रहे है।वैदिक शिक्षाके साथ स्कूल-कॉलेजमेभी पढ़ते है ये आदिवासी बच्चे।खोखरा उमर गांवमे है ये आश्रम।
साडेनऊ बजे डेडियापाडाके जलाराम आश्रममे पहुँचे।थोडे उपरकी तरफ नर्मदाधाम ये परिक्रमावासीओंकेलिये बांधा हुआ बडा हॉल है।पिछे लॅट्रीन,बाथरूम है।सुंदर बगिचा है,निवासी वसतिगृह है।आश्रम बहुत सुंदर है।कपडे धोके सुखाने डाल दिये।कुछ बच्चे बॅटमिंटन खेल रहे थे,हमने भी थोडीदेर खेलने का लुफ्त उठाया।मुख्य महाराज कही बाहरगांव गये थे फिरभी आश्रमकी शिस्त व्यवस्था उत्तम थी।भोजनप्रसाद परोसनेवाले हरएक पदार्थके आगे राम शब्दका प्रयोग कर रहे थे जैसे चावलराम रोटीराम और दाल को वैकुंठराम।नर्मदे हर!
दो बजे आगे चलने लगे।धूप इतनी कड़ी थी मानो शरीरसे सारा पानी खिंचके ले रही है।बाजारपेठमे एक जगह नारियलपानी लिया उतनीही थोडी थंडक।नर्मदे हर!
टिंबापाडा,राखसकोंडी,झापा आदि गांव पिछे छोडे थे।आज ज्यादा चलना नही हुआ था,बारा-पंधरा कि.मि.ही हुए थे मगर आज बहुत थक गये थे।रास्तेमे एक मोटरसायकलसे जा रहे भाईसाबने नर्मदे हर बोला।स्नेहलने उनसे गुजरातीमें बात करके निवासभिक्षा मांगी।उन्होने बडे आनंदसे घर आनोको कहा।थोडा आगे उनका घांटोली गांव है।रमेश वसावा नाम है,शिक्षक है।नर्मदे हर!गुरूजी आगे चले गये और हमभी।
घाट उतरकर निचे आ गये।गुरूजीने सोमू नामके लडकेको रास्तेपर खडा किया था।उसने शॉर्टकटके रास्तेसे घांटोलीगांवमे स्कूलके पास पहुँचाया।गुरूजी खेतमें गये थे वो आनेके बाद घर जाना था।स्कुलके बरामदेमे बैठे।सुकांता और विलासने जलपान करवाया।नर्मदे हर!थोडीही देर बाद गुरूजी आ गये और हम उनके घर गये।
गुरूजीके पिताजी श्री.धवलसिंग,पत्नी मधुबेन,बेटी दिप्ती,बेटा हेमन्त सारे बहुतही प्यारे है।चायके बाद स्नान आरती कपडे धोना सब आरामसे हुआ।भोजनके लिये कोदुधानके घावन(चिले या डोसा) खेतसे लाये ताजे बैंगनका भरता,दाल चावल।बहुत बढ़िया।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-54
आज तड़के पांच बजे कालि महारानी चाय लेके विनोबा एक्सप्रेसने घांटोली स्टेशन छोडा।रमेश गुरूजी शॉर्टकटसे हायवेपर छोडने आये थे।
गाजरगोटाके बाद बाद आया वैदेही कन्या आश्रम,आदिवासी कन्याओंकी निवासी शैक्षणिक संस्था है।सुंदर निसर्गरम्य परिसर है।आगे वन विभाग कुटी है टेकरीपर सामने बहती करझनमैया।परिक्रमावासी निवासायोग्य स्थान है।
कोलिवाडा गांव करझनमैया ब्रिजसे क्रॉस कर ली तब आठ बजे थे।टपरीपर फलाहारी चिवडा,गुजरात स्पेशल भावनगरी गाठी ले ली।चलो आगे।
यालगांवके बाद नेत्रांगफाटा आया।यहॉंसे बांए तरफ का रास्ता राजपारडी हो कर अंकलेश्वर जा सकते है।राजपिपला जानेकी जरूरत नही होती मगर ये रास्ता घने जंगलसे गुजरता है और सुरक्षित है?की नही?नर्मदे हर!
नेत्रांग फाटा ढाबेपर गोटाभजी(पकोडे)-चाय नास्ता करके आगे चल दिये।मोवीगांवके बाद साडेदस बजे खुंटाअंबा।रास्तेके बायी तरफ हनुमान मंदिर है।सुहास लिमयेजी इसी मंदिरमे रहे थे।उन्होने लिखा है वैसा निचे हॅण्डपंपभी है।अब मंदिर बडा करनेका काम चल रहा है,दो-चार दुकानेभी है।परिक्रमावासी रहतेभी है।मंदिरके सभामंडपमे चुला बना है,बर्तन है।एक टोकरीमे बैंगन आलू मिरची रामरस(नमक)रखा मिला हमारे पास दाल-चावल थे काम बन गया।प्रशांतने चुल्हा जलाया तबतक अंजूताई,स्नेहल स्नान करके आ गयी और मैने सब्ज़ी काटके रख दी और स्नान करने गयी।मेरा होतेही बाबा और प्रशांत का स्नान हुआ,हमने सबके कपडे धोके सुखाने डाल दिये।तबतक खिचडीभी तैयार हो गयी थी।आरती करके मैया और हनुमानजीको भोग लगाया।भोजनप्रसाद लेही रहे थे तो पुणेकर कुलकर्णी और एक भाऊ आये,उनकोभी प्रसाद मिला।सच है दाने दाने पर लिखा है खानेवालेका नाम।
पुणेकर बंधुको त्रंबकेश्वरके वही महाराज मिले थे और कुछ बुजुर्ग परिक्रमावासी इनके साथ देके खुद बहाना बनाके निकल गये थे।कुलकर्णी बहुत कुछ बोल रहे थे।नर्मदे हर!
दो बजे टपरीमे चाय पिके चलने लगे।सारा घाटरास्ता है।एक जगह बडे जामुनके पेडमेसे आमका पेड आया था।फुलोराभी आया था।
इको टुरिझम सेंटर विसलरवाडी,आमली यहॉं छोटासा बाजार लगा था।प्रशांतने तुवरकी फली(तुरीच्या शेंगा)खरीद ली।
गाडीदमे आश्रम है ऐसा मालूम पडा इसलिये घाट उतरके गाडीद गांवमे गये मगर वहॉं आश्रम नही था,आश्रमशाला थी।रहनेकी सुविधा नही थी,आगे जाना जरूरी था।
एक बताना तो भूलही गयी थी,हनुमान मंदिरमे कुछ लोग आये थे।लकडीके घोडे लेके नाच-गाना कर रहे थे।
खेतके पगदंडीसे वापस हायवेपर आ गये।बहुत थक गये थे।माडनगांव पहुँचे।बीस कि.मि.आ गये थे।रास्तेपर एक बंद टपरीके बाकडेपर बैठ गये।गांव पासही था,स्कुल दिख रहा था।एक माताजी आ गयी,बोली स्कूलमे जाके देखो।स्नेहल गुजराती बोलती है इसलिये वो और प्रशांत गये।मगर मुख्याध्यापक न होनेके कारण व्यवस्था न हो सकी।मगर बाजुमेही एक झोपडी थी।रमणीबेन वसावाने पुछा,आपको मेरी इस झोपडीमे चलेगा?आप बडे लोग हो मेरी गरीबकी झोपडी।बहन ये क्या कहती हो?आपकी झोपडी नही मानवताका महल है।हमें खुशी होगी,स्नेहल प्रशांतने कहा और हमें बुलाने आ गये।नर्मदे हर!
श्री.कांजिभाई वसावा,रमणीबेन और बेटा राजेश।बडे दिलवाले लोग।चाय लेके बाजुके हॅण्डपंपपर स्नान-कपडे धोना किया।हमने लायी तुवरकी फली रमणीबेनने उबालकर बहुत टेस्टी बनायि और बादमे खिचडीभी बहुत बढ़िया भोजनप्रसाद आरतीके बाद पाया।
एकही रूम थी,कांजिभाई खेतपर सोने जानेवाले थे।रमणीबेन बोली,हम जल्दी नही सोते आप थके हो सो जाओ।उनके लिये जगह छोडके हम सो गये।नर्मदे हर!
गरीब बडे दिलवाले आतिथ्यशिल होते है।जंगलप्रांत था,बहुत थंड थी।हमे अंदर सुलाके वह मॉं बेटा बाहर आंगनमे सो गये।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-55
रमणीबेन और राजेश को नर्मदे हर बोलके हायवेपर आये तब सुबहके पांच बजे थे।आज राजेश अंबाजीको पैदल जानेवाला था।गुजरातमे बहुत लोग पैदल अंबाजीके दर्शन करने जाते है।अंबाजी एक शक्तिपीठ है,माऊंट अबू के पास है।
अभी अंधेराही था,टॉर्चके प्रकाशमे,थंडी हवाके साथ घाट चढ़ना शुरू हुआ।साडे छे बजे बोरिद्रागांव आया।थंडी हवा चल रही थी इसलिये खड़ा घाट चढते भी तकलीफ नही हो रही थी।टॉर्च सॅकमे डाल दिये।चाय चाहिये था मगर कही दुकान या ढाबा खुला नही था।नर्मदे हर!और थोडा घाट चढनेके बाद तीव्र उतारही था।
बहुत बडा खामरघाट उतरनेको एक घंटा लगा।साडेसात बजे घाट समाप्त हुआ।वहॉं ढाबेपर बैठे।अचानक एक गाडी आके रूक गयी,उसमेसे उतरे शहादाके एकनाथ पाटील।उनके बच्चे पैदल अंबाजी गये थे और पाटील फॅमिलीके साथ उनको मिलने जा रहे थे।पुनर्भेटसे सब आनंदीत हुए।भाभिजीने खानदेश स्पेशल भडंगके बडे पॅकेट दिये।सबने चाय पिया।बिल पाटीलभाऊने दिया,नर्मदे हर!वो चले गये।
हमने भडंग,बिस्किट,दूध नास्ता करके सव्वा आठ बजे आगे चलने लगे।खामरगांवके बाद रायपुरा,बस स्टॅण्डमे बैठकर कलकी बची उबली तुवरफली खायी।सव्वानऊही बजे थे मगर धूप बारा बजे जैसी लगने लगी थी।नर्मदे हर!
मोटा लोमटवाडा,छोटा लोमटवाडा के बाद करझनमैया ब्रिजसे क्रॉस करके एक पेडके निचे थककर बैठ गये।बाप रे!डिसेंबरका महिना है मगर धूप मे महिने जैसी बदनको जला रही थी।बारा बजे थे राजपिपला पहुँचे।दाहिने तरफ का रास्ता गोराग्राम जा रहा था,बाए तरफका राजपिपला शहरमे।गोराग्राम पचीस कि.मि.दूर था और हरसिद्धीमाता मंदिर एक कि.मि.हम आज बहुत थक गये थे,हरसिद्धीमाता मंदिरमे माताकी चरणोंमे आज पनाह लेनाही उचित होता।नर्मदे हर!
काठियावाड हॉटेलमे अच्छा काठियावाडी भोजन किया।एक बजे हरसिद्धीमाता मंदिरके भक्तनिवासमे तीन रूम्समे आसन लगा लिया।नर्मदे हर!
थोडा विश्राम करके स्नान-कपडे धोनेका बडा कार्यक्रम करके आरती करके हरसिद्धीमाता,गायत्रीमाता,नवग्रह दर्शन करके बाजारमे गये।कुछ मेडिसीन,फलहारी चिवडा,केलेके वेफर्स वगैरे खरीदकर सुहास लिमयेजी के पुस्तकमे लिखे पुरोहित भोजनालयमे स्वादिष्ट राजस्थानी थाली का आस्वाद लिया।नर्मदे हर!
हरसिद्धीमाता मंदिरमे बहुत सारे मुर्गा-मुर्गियॉं छोडे हुए है।मन्नतमे छोडते है।पहले बलि चढ़ाते थे अब छोडते है।
एक शंका मनमे थी की गोराग्राम जाते वक्त मैया अपने बांयी तरफ तो नही हो जाएगी?पंडीतजीको पुछा,वो बोले,मैया पुरबसे पश्चिमकी तरफ बहती है।आप अभी दक्षिण दिशामे हो और गोराग्राम उत्तर दिशामे है,तो सवालही पैदा नही होता आप गोराग्राम जाके ही आगे बढ़ो।शूलपाणेश्वरका दर्शन लेना चाहिये।नर्मदे हर!
सुबह खडा और लंबाचौडा घाट होतेभी जंगल,थंडी हवा के चलते थकान बिलकुल नही थी मगर घाट समाप्त होतेही धूपने बेहाल कर दिया था।अब निंदियारानी की आराधना।कल दस-बारा दिनके बाद मैयाके दर्शन होनेवाले है।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-56
कल पुजारी पंडीतजी को बिनती की थी इसलिये आज तड़के साडेचार बजे नित्यकर्म,स्नान आरती करके निचे आकर वॉचमन अंकुरको पुकारा तुरंत उठकर उसने गेट खोल दिया।विनोबा एक्सप्रेसने प्रस्थान रखा।नर्मदे हर!
संतोष चौकडीपे टपरीमे चाय लेके आगे चलना शुरू हुआ।साडे छे बजे वाडोलीगांव आया छे कि.मि.चलना हुआ।आठ बजे झंडा हनुमान मंदिर गोपालपुरा,नवा वाघपुरा,चाय लेके अपने पासके पदार्थ नास्तेको लिये।नौ बजे आगे।
हिरापुरा,समारिया,फुलवाडी,भाणाद्रा,बोरिया,मोटा पिपरिया फाटा सारा प्रवास अच्छा रास्ता दुतर्फा बडे बडे वृक्ष शीतल छाया देते,दोपहर एक बजे पच्चीस कि.मि.गोराग्रामके हरिधाम आश्रमे पुरा हुआ।नर्मदे हर!
भारती माताजीने हँसके स्वागत किया।और भोजनप्रसाद लेनेको कहा।बादमे सुंदर बंगलेमे रूम्स दिलवा दी।नर्मदे हर!
बंगलेके सामने सुंदर मैया दर्शन हो रहे थे।बरामदेमे एक झुला भी है।इसी बंगलेका मैने पहिली परिक्रमामे बाहरसे फोटो खिंचा था।नर्मदे हर!
शामको टेकरीपर जाके नुतन शुलपाणेश्वर दर्शन करके आ गये।सुंदर बगिचा,सुंदर मंदिर,सुंदर परिसर।नर्मदे हर!
संध्यारती के बाद भोजनप्रसाद होने के बाद भारतीमाताजीके सत्संगा लाभ हुआ।उन्होने हर किसीको अपने कर्मभोग भुगतने पडतेही है ये बताते भीष्म पितामह की कहानी सुनायी।उन्होने भगवान कृष्ण को पुछा,मुझे मेरे पिछले सोलह जनम याद है मैने कोई पाप नही किया फिर भी मुझे ये शरशय्या क्यो?भगवान बोले,पंधरहवे जनमके बचपनमे आपने एक तितली को कांटा चुभाया था इसलिये ये सजा है।पुर्वकर्म,पुर्वसंचितसे कोई नही बच सकता।ईश्वरी अवतार भी नही।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-57
आज हम फिर एक बार मारू की चिंचलीसे आगे चलेंगे।
स्नान पुजा करके चायपान किया और कारोले परिवारका नर्मदे हर से शुक्रिया अदा करके आगे निकल पडे।गांवके बाहर आतेही हमारी परीक्षा शुरू हो गयी।इस बार हम रास्ता भटक गये,अनेक छोटी मोटी टेकरी,खाई,नाले,किचडभरी पगदंडीओंसे गुजरते पावणेदस बजे हम लोहारा पहुँचे।रामदुलारीमाता आश्रमकी माताजीने सबको बिस्किट दिये।एक सह परिक्रमा बंधु श्री बिडवेजीने सबको चाय दिया।
ग्यारह बजे आगे चलना शुरू किया।साडेग्यारह बजे किरमोही गांवके शिवमंदिरमे पहुँचे,वहॉं कोई नही था मगर स्वच्छ पानीसे भरी टंकी,बकेट और कपडे धोने के लिये बडा अच्छा पत्थर था।हमने धोबीघाट खोल दिया और वस्त्र प्रक्षालन का कार्यक्रम पुरा किया।भोजनका कोई प्रबंध नही हो सका तो अपने पास जो कुछ था उससे पेटपुजा कर ली।और दो बजे आगे चल पडे।
अब सुहाना सफर था।मैयाने किनारेपर मखमली हरियाली की कालिन बिछायि थी।दाहिने तरफसे खुद अपना सुंदर नीलश्यामल जलरूप दर्शाती हमारे साथ चल रही थी।सुंदर पंछी आकाशमे उडते मधुर गीत गाते गाते एकदम पानीमें छलांग लगाकर मछली की शिकार करके थोडी देर शांत होकर पुनः शुरू।बडा नेत्रसुख पाकर हम धन्य हो रहे थे।नर्मदे हर!
नर्मदामैयामे विलीन होकर धन्य हो रही रूपामैया पार करनेमे हमे कोई कठीनाई नही आयी।किनारेपर कपडे धो रही महिलाए,खेलनेवाले बच्चोंके मार्गदर्शन तले हम सहजतासे रूपामैया पार कर सके।नर्मदे हर!
दोपहर के तीन बजे थे।आगे का रास्ता कच्चा मगर अच्छा था।केसरपुरा होके मोहिपुरा पहुँचे तब शामके पांच बजनेवाले थे।मॉं रेवा आश्रमके संचालक श्री.खडकसिंगजी खलखुर्द गांवके हमारे आश्रयदाता बंधु श्री.रेवाशंकर पटेलजीके रिश्तेदार है और हमारे आनेके बारेमें पटेलजीने उन्हे बताया था।हमारी व्यवस्था स्वतंत्र रूममे कर दी क्यों की हम तीन महिला थी।यहॉं स्वामी अमृतानंद पुरी है मगर वो नही थे।श्री.देवकरणजी भंडारी है और शंकरजी सेवक है।
यहॉं अहमदनगर के रहनेवाले श्री.इथापे परिक्रमाबंधुसे भेंट हो गयी।नाशिकके रहनेवाले दो बंधु भी मिलें।बहुत आनंद हुआ,घरके लोगोंसे मिलके।नर्मदे हर!
आरती पुजा के बाद खिचडीका भोजनप्रसाद मिला।अब विश्रांती।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-58
सुबह नित्यकर्म निपटाके मैयाकी पुजा आरती के बाद चाय लेके विनोबा एक्सप्रेसको हरी झंडी दिखायी।नर्मदे हर!
सात बजे दत्तबाडामे मैया किनारे चंगाबाबा आश्रमका प्रसिद्ध पत्थर खोदके बनाया हुआ घाट देखके माधवदास महाराजजी का दर्शन लेके चायपान करके वापस उपर आके रास्तेसे आगे चलने लगे।गोलाटागांव पांच मिनिट विश्राम करके आगे,छोटा बडदामे रणछोडदास पाटिदारजी के घर गये।बडा सेवाभावी परिवार है।उनका बेटा लोकेश सेवा तत्पर है।सारा परिवार सुश्री मेधा पाटकरजी के साथ नर्मदा बचाव आंदोलन से जुडा हुआ है।रहने के लिये आग्रहसे बोल रहे थे मगर आज ज्यादा चलना नही हुआ था इसलिये विनम्रतासे ना कहना पडा।खीर-पुड़ी,चुरमा लड्डू से नानाविध पदार्थ भोजनप्रसादमें बनाए थे।बडा संतोषभरा भोजनप्रसाद पाके थोडा विश्राम करके विनोबा एक्सप्रेस आगे निकली।नर्मदे हर!
आवली,शेगांवा,दही बहेडा आते आते कड़ी धूपसे हम बेहाल हो गये थे।उपर टेकरीपर नाखूनवाले बाबाजीका आश्रम था,सुबह वजनसे हलकी लगनेवाली सॅक अब पीठपर भारी लदी हुई लगने लगी थी,मैया!कैसे जाए उपर बाबाजीके दर्शनको?हमारा मैयासे पुछा सवाल पुरा भी नही हुआ था,तुरंत एक मोटरसायकल आ गयी और उसपर सवार दो बेटोंने हम सबकी सॅक्स लेके जानेकी इच्छा जतायी,और सॅक ले भी गये।नर्मदे हर!
टेकरीपर नाखूनवाले बाबाजीका आश्रम है।उनका नाम मालूम नही,उनकके हाथके नाखून बहुत बढे हुए है।फोटो को मना कर दिया।दर्शनके बाद चायपान करके तीन बजे आगे निकले।
चार बजे पिपलूदमे लोकेशके मौसीजी के घर,श्री.देवराम यादवजीके घर आके आसन लगाया।नर्मदे हर!
बडे प्यारसे स्वागत हुआ।सेवाभावी परिवार,सुश्री मेधा पाटकरजी का सहकारी परिवार है।घरकी सब कन्याए बडी संस्कारी है।गीता,भजन वगैरे मुखोद्गत है।ऐसी सुसंस्कारी कन्याओंका पुजन करके बहुत संतोष हुआ।
भोजनका बडा थाट था,इतना बताना काफि है।आज बस् इतनाही।
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-59
नित्यकर्म,आरतीके बाद चाय लेके निकल रहे थे,बहूने बहुत सारी चिजे बांधके दे दी रास्तेमे खाने के लिये।बहुत प्यार करते है यहॉंके लोग सगे रिश्तेदारोंकी तरह।उनको भुल पाना मुश्कील ही नही नामुमकीन है।नर्मदे हर!
विनोबा एक्सप्रेस आगे निकल पडी।शिव हमे छोडने साथमे आया था।रास्तेमे विठ्ठल यादवजीने चाय के लिये बुलाया,कल भी आते समय बुलाया था।बडा आदरातिथ्य हुआ।नर्मदे हर! आगे चलने लगे,खेतपर गये देवरामजी मिले,बहुत दूर तक हमारे साथ आये।नर्मदे हर!
आठ बजे बजे बगुद गांव आ गया।यहॉंसे बायी तरफ का रास्ता कुंडिया,कालिबेडी होके सिधा बडवानी जाता है।जिनको राजघाट नही जाना वो इधरसे सिधे बडवानी जा सकते है।कुंडियामे सुश्री मेधा पाटकरजीका सह कार्यकर्ता किरण पाटिदार रहता है।पिछली बार जब मिला था तब उसने निमंत्रणभी दिया था।मगर उसके घर जानेके लिये अंदर जाना पडता,और आज उसके घर किसीकी शादी है ये समाचार कल देवरामजीसे मिला था,जाते तो हमे वहॉं रूकना पडता,वह आगे जानेही नही देता इसलिये हमने आगे जानाही उचित समझा।
आगे आया कसरावद,राजघाट।टेंबे स्वामी स्थापित एकमुखी दत्तमहाराजका दर्शन करके बहूने दिया लड्डू वगैरेका नास्ता करके हम बडवानी के लिये चलने लगे।बडवानीमे श्री.रत्नाकर परांजपे मेरे पती आनेवाले थे।नर्मदे हर!
क्रमश:
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-60
बडवानीमे हम नार्मदीय ब्राह्मण समाज धर्मशाला रेवांचल परिसरमे रूके थे।भा.ज.प.उपाध्यक्ष-बडवानी,श्रीयुत सुनिल पाटिदारजी के घरसे बोरलायसे हमारे लिये मकईकी रोटी,साग,दालका भोजनप्रसाद आया था,भाभीजी खुद परोस रही थी,स्वादिष्ट भोजन पाकर अंतरात्मा तृप्त हुआ।नर्मदे हर!
सुबह साडे छे बजे शुलपाणि झाडी सर करनेके मुहीमपर हमारी मैयाके शुरवीर कन्यापुत्रोंकी सेना लेके विनोबा एक्सप्रेस चल पड़ी।
पाटीगांवकी तरफ जानेवाला रास्ता छोड हम बायी तरफ चलने लगे।भीलखेडी फाटा,कल्याणपुरा,नंदगांव पिछे छोड बैडीपुरामे सिताराम बडोलेजीके आंगनमें जलपान करके आगे चलना शुरू किया।
पिछौडी,सिरसानी,झकासपुरा,कटोरा,गणेशपुरा,सोंदुल,पालिया के बाद भामटा में मोहन पाटिदार के घर थंडगार जलपान करके आगे निकले।धूप कड़ी हो गयी चलना मुश्कील हो रहा था,भवती के बाद अमलालीमे शेरसिंग और अनिताके बडे घरके बरामदेमे आके बैठे प्रथम थंडगार जलपान और थोडी देर बाद चायपान।बडा सुंदर घर है निवास व्यवस्था हो सकती है।आगे बिजासनमे हनुमान मंदिरमे विश्राम।मन्साराम दावर सब के लिये चाय लेके आये।
किंग ऑफ शुलपाणि श्रीयुत हिरालाल रावत का भांजा साईसिंग परिक्रमा कर रहा है,हमारे साथही चल रहा है।मोरकट्टामे उसके बुआ,मौसी जैसे बहुत रिश्तेदार है।यहॉं सर्व शिक्षा अभियान स्कूलमे परिक्रमावासिओंकी निवास व्यवस्था होती है।श्रीमती चमेली अवास्या प्रमुख शिक्षिका है।जलपान करके मोरकट्टा तिठा आ गये।बायी तरफ का रास्ता बोरखेडी की तरफ और दायी तरफका मैया किनारे हिरणफाल की तरफ जाता है।कुछ साल पहले हम यही हमारी गाडी पार्क करके बोटसे घोंगसामे लखनगिरी बाबाजीके आश्रममें गये थे।तब ये रास्ता कच्चा धुलभरा था और अब पक्का डांबररोड है।प्रगती हो रही है।नर्मदे हर!
शाम के छे बजे बोरखेडीमे एक नाला पार करके श्रीयुत हिरालाल रावत के घर आगमन।हिरालालजी के बडे भाई,साईसिंग के बडे मामाजीके घर मिलिंदजी शिरगोपिकर,संजय और सरोज मालानि,मै वंदना परांजपे और नर्मदा परिक्रमा की डॉक्युमेंटरी फिल्म करते करते परिक्रमा करनेवाले एपिक चॅनल वाले श्री.देवा(नयी दिल्ली),श्री.कुणाल पाटील(पनवेल) आसन जमाया।नर्मदे हर!
साईसिंगके बडे मामाजीका ये परिवार बडा सेवाभावि है।मामीजीने बाजरी की रोटी,सेव की सब्जी का बडा स्वादिष्ट भोजन प्रसाद खिलाया।मैयाकी बड़ी कृपा है।
कलसे मुख्य झाडीमेंसे प्रवास करना है।हमारे साथ हमारी सॅक लेके आने के लिये कुछ लडकोंकी व्यवस्था हिरालालजी करनेवाले है।अर्थात इसके लिये हमें पैसे देने है।कठीण सफर के लिये ये मदत जरूरीभी है।बहुत थक गये है,अब निद्रादेवी की आराधना।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-61
नर्मदे हर!नोट बंदी के चलते किसी के पास भी ज्यादा पैसे नही थे,तो अकाउंट से अकाउंट पैसे ट्रांसफर करके हमारी विनोबा एक्सप्रेस आगे जाने के लिये तैयार हो गयी।
मेरे साथ रावतजी का भतिजा राजमल,संजय मालानि के साथ पिपलू,सरोज के साथ कान्हा,मिलींद शिरगोपिकर के साथ प्रकाश,और कस्तुरी थत्ते के साथ मांगिलाल।कुछ लोगोंने मदत नही ली।पुणेकी रहनेवाली वर्षा मुजुमदार वैयक्तिक प्रॉब्लेम के कारण घर चली गयी।नर्मदे हर!
चायपान के बाद हमारी पांच डिब्बोंकी गाडीको लगेज के पांच डिब्बे जोडके हमारी विनोबा एक्सप्रेस शुलपाणिकी मुहीमपर चल पड़ी।कुछ लोग आगे चले गये थे।डॉक्युमेंटरीवाले थोडा शुटींग करके बादमे निकलेंगे।नर्मदे हर।
कच्चे रास्तेसे चलने लगे।बिजली के खंबे लगानेका काम चल रहा है,रास्ता बनानेका भी काम चल रहा है।दो-तीन सालके भीतरही इस विभागका विकास निःसंशय हो जाएगा।केंद्र सरकारके रास्ते और सार्वजनिक बांधकाम विभाग (नितिन गडकरी) ये काम कर रहा है।प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना,अटल ज्योति योजना जैसी योजनाओंका काम संतोषजनक चल रहा है।नर्मदे हर!
रोहन्या गांव के बाद आया कुप्रसिद्धी वलयांकित गांव "कुली"।हमारे साथ हिरालाल रावतजी के मार्गदर्शक थे इसलिये हम तो सुरक्षित थे ही मगर दुसरे लोगोंको भी कुछ भी तक़लीफ नही हुई।ऐसे लगता है की विनाकारन ही गरीब आदिवासीओंको बदनाम करके छोडा है,सारे नर्मदे हर बोलके हसकर स्वागत कर रहे थे।कुली मे कामतादास बाबाजी के कुटियामे चायप्रसाद लेके थोडे विश्राम के बाद विनोबा एक्सप्रेसको ग्रीन सिग्नल दिया।कुटी के पाससे बहनेवाले नालेपर ब्रिज बांधनेका काम चल रहा है वो होतेही आगेभी रास्ता बनेगा।फिलहाल हमें तो नाला पार करके पहाडकी पगदंडीसे चढाई चढके उतरके जाना है।नर्मदे हर!
सव्वा बारा बजे पंधरा कि.मि.चलके थकानभरी मुस्कान लेके हम घोंगसा के लखनगिरीबाबाजी के आश्रम पहुँचे।नर्मदे हर!
लखनगिरीबाबाजी जब परिक्रमा कर रहे थे तब उनको आदिवासीओंने उनको पुरा लूट लिया था,तब उन्होने प्रण किया की,परिक्रमामे आगे न जाते यही रहकर इनके लिये काम करके ये लुटमार बंद करवाके आदिवासीओंकी प्रगती केलिये प्रयत्न करता रहुंगा।और उन्होने करके दिखाया।आप यू ट्यूब पर व्हिडीओ देख सकते हो।नर्मदे हर!2011 मे बाबाजी समाधिस्त हो गये। अब नर्मदागिरीबाबाजी उनका कार्य आगे ले जा रहे है।नर्मदे हर!इसलियेही अब लुटमार नही होती।
हम आश्रम गये तब नर्मदागिरीबाबाजी नही थे बाहरगांव गये थे।भंडारीबाबा थे।
कार्तिकस्नान का मौका था,मैया किनारे जाके स्नान किया,कपडे धो डाले।यहॉं जल ऍमब्युलन्स के जरिए दवाखाना मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सरकारकी तरफसे चलाया जाता है।बहुत दूरतक चलती रहती है ये आरोग्यसेवा।नर्मदे हर!
आश्रमके आंगनमें आसन लगाया।दोपहर को खिचडीका भोजनप्रसाद मिला।शामको चायपान के बाद लखनगिरीबाबाजीं के समाधीके दर्शन करके परिसर दर्शनभी कर लिया।नर्मदे हर!
रातमें टिक्कड और दाल का भोजनप्रसाद मिला,बडा स्वादिष्ट।अब चांदनीभरे नीले गगन के तले,मैया के सानिध्यमे उसकी लहरोंसे गुंजती लोरी का श्रवणसुख पाते पाते निद्रादेवी की आराधना।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-62
सुबह सात बजे विनोबा एक्सप्रेसने घोंगसा स्टेशन छोड दिया।उत्तरवाहिनी हुई रेवामैया के दर्शनसुख का लाभ उठाते किनारेसे एक देढ़ कि.मि.चलने के बाद पहाड चढना उतरना शुरू हुआ।दो नाले पार करके एक टेकरी चढने के बाद एक वाडी के पास कच्चा रास्ता शुरू हुआ।बिजली लानेकी तैयारी हो रही है।मध्यप्रदेश का ये आदिवासी इलाका प्रगतीपथ की ओर अग्रेसर हो रहा है।नर्मदे हर!
थोडी देर बाद रस्ता समाप्त हुआ और एक सुखे नालेमेसे चलने लगे,कुछही मिनिटोंमे पुनः चढाई शुरू।दो छोटे पहाड चढके उतरकर छांवमें बैठे।पानी पिके थोडा विश्राम किया और फिर सागवृक्ष के घनदाट जंगलसे व्याप्त पहाड चढने लगे,थंडी थंडी छांवमे चलते चढाई के श्रम लगेही नही।पहाड चढतेही बडवानी से सेमलेट जानेवाला पक्का डांबर रोड मिल गया तब सुबह के साडेदस बजे थे।अब घाट उतरना था और माईल स्टोन बता रहा था की सेमलेट तीन कि.मि.है।
झट झट चलते आधे घंटेमेही सेमलेट पहुँचे।बडे बरगद के पेडतले बैठ गये।सरपंच उमरावजीने चायपान का सदाव्रत दिया,मांगिलाल,प्रकाशने चुल्हेपर बढ़िया चाय बनाया।चाय-बिस्किट का नास्ता कर लिया।
भोजनप्रसाद तयार करने के लिये सदाव्रत मिल रहा था मगर अभी बडा पल्ला तय करना था भोजन तैयार करनेमे बहुत समय लग जाता,हमने आगे जानाही उचीत समझा।नर्मदे हर!
थोडी देर सिधी पगदंडी थी।रास्तेमे एक आठ सालका अपने दादाजी के साथ नंगे पैर परिक्रमा कर रहा कुमार अरविंद मिल गया।बडा हिम्मत बहाद्दर लडका।नर्मदे हर!
अब धूप बोलने लगी थी,एक कुंवे के पास रूक गये,जलपान कर लिया।पुनः खडी चढाई चढने के लिये तैयार हुए।नर्मदे हर!
कड़ी धूपसे मुकाबला करते करते पहाड सर कर लिया।ये है मध्यप्रदेश का आखरी गांव खारा भादल (बडा भादल)।एक झोपडी थी कनिका और पिंट्या की।जलपान करके थोडा विश्राम किया।नर्मदे हर!
अब शुरू हो गयी तीव्र उतार न गिरते,न फिसलते उतरने की कड़ी परीक्षा।आधार के लिये मेरा हाथ पिपलूने,सरोज का हाथ कान्हाने और कस्तुरी का हाथ मांगिलालने पकडके बहुत सम्हलके हमें उतारने लगे।मुखसे सिर्फ मैया मैया,मोरया,मोरया का जाप,नज़र पैरोंपर रखकर धीरे धीरे उतर रहे थे।सिरपर धूप मैं मैं बोल रही थी,अखेर उतर गये।नर्मदे हर!सामने बह रही थी शीतल झरकन नदीमैया।
मैया! पादस्पर्शम क्षमस्व मे,जलमे पैर डालने के पहले उसकी क्षमा मांगते जलसे नेत्र स्पर्श किया।झरकन मैया पार करते ही हम अपने महाराष्ट्रमे आ गये।
पुरूषमंडली स्नान करनेमे व्यस्त हो गये हमने मुखप्रक्षालन करके हाथ-पैर धो लिये।थकी-मांदी तनु मैया स्पर्श पा कर सारी थकान भूल गयी।नर्मदे हर!साडेतीन से चार आधा घंटा रिलॅक्स होकर हम पुनः महाराष्ट्र के पर्वतारोहणको तैयार हुए।पहाड चढकर माथेपर महाराष्ट्रके भादलमे श्री कालुराम वर्मा के चंद्रमौली घर पहुँचे।सहर्ष स्वागत हुआ।आंगनमे आसन लगाया।शुलपाणिकी झाडी ये क्या चीज है इसकी जाणीव हो रही है।कल का दिन और भी कठीण रहनेवाला है,मगर इस दर्शन अनुभव के लिये ही तो ये सारा अट्टाहास किया है।नर्मदे हर!
काळुराम वर्मा यहॉं ऐसे दुर्गम स्थानपर रहकर,बडे कष्टमय जीवन बिताते भी वो और उनका परिवार हसते हसते प्रत्येक परिक्रमावासीकी सेवा करनेमे जुटा रहता है।एखाद परिक्रमावासी अगर बिमार हो गया या जख़मी हुआ तो हो सके उतनी सेवा करके उसको अपने सुलक्षणी चेतक जैसे सफेद घोडेपरसे इतनी कठीण पहाडोंको लांध के सेमलेट जैसे सुरक्षित स्थानपर पहुँचाते है।नर्मदे हर!
देने विश्राम थकेमांदे जीवोंको बनायि तुमने ये रात प्रतापी थोर मैया! खिचडी का स्वादिष्ट भोजनप्रसाद इतने थकने के बावजूद हमारे बच्चोने बनायि,वो प्रसाद ग्रहण करके अब निंदियारानी की आराधना।नर्मदे हर! नर्मदे हर! नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-63
चहारूपी इंधन भरून सकाळी सात वाजता विनोबा एक्सप्रेस पुढे निघाली.आज श्री व सौ करनाटकीनीही मदतनीस घेतले.भादलचा डोंगर उतरून झरकन मैया वळणा वळणाने तीन वेळा पार करून भाबरी येथे पोहोचलो तेव्हा सव्वा आठ वाजले होते.
पुन्हा डोंगर चढणे उतरणे सुरू.दहा वाजता धावडी येथे दिपक मालवीय यांच्या घरी चहाप्रसाद घेऊन खापरमाळचा कठीण माथा सर करायला सिद्ध झालो.नर्मदे हर!
कठीण चढाई उतराई केवळ पिपलूच्या मदतीमुळेच मला शक्य होत होती.फक्त सोळा वर्षांचा हा मुलगा माझा मोठा भाऊ किंवा वडील असल्या सारखा मला सांभाळून नेत होता.मोरया मोरया!मैया मैया! चा जप करत जीव मुठीत धरून आमची वाटचाल सुरू होती.
खापरमाळच्या माथ्यावर उन्नती नावांच्या मुलीने जलपान करवले,घरी चला रोटी खा असा आग्रह करत होती.किती दुरून पाण्याचा भरून घेऊन आली होती कोण जाणे.अगदी हसतमुखाने घरी बोलवत होती.माझ्या नातीचे नांव उन्नती आहे,आदिवासी पोषाख केला तर अगदी हिच्या सारखीच दिसेल नातीची फार आठवण आली हिला बघून.नर्मदे हर! तिथे जवळच एका ठिकाणी पैसे देऊन सदाव्रत मिळत होते पण स्वयंपाक करण्यात वेळ मोडला असता आणि अजून भमानाची मुख्य खतरनाक चढण-उतरण बाकी होती त्यामुळे भोजन न करता पुढे जाण्याचे ठरवले.
पुढे जाऊन पुन्हा एका टेकडीच्या माथ्यावर सौ पावराबाईंच्या घरी जलपान करून थोडी विश्रांती घेतली.आता मराठी भाषा सुरू झाली होती.खापरमाळचा उतार उतरून दोन वाजता खाकरीबाईंच्या घरी पुन्हा जलपान थोडी विश्रांती घेऊन सज्ज झालो सर्वात कठीण भमानाच्या चढाई उतराईला.नर्मदे हर!नर्मदामैया की जय!
जेमतेम एक माणूस चालू शकेल अशा मुरबाड पायवाटेवर पिपलू माझा हात धरून पुढे पाऊल टाकत होता आणि मी त्याच्या मागुन अगदी जपून पाऊल टाकत होते पिपलूत मला साक्षात मैयाच दिसत होती,मला धीर देत सावकाश चालवत होती.
आणि आला तो भमानाचा प्रसिद्ध भयंकर तीव्र उतार.आमचे सर्व साथी पुढे गेले होते,मागे होते श्री व सौ जोशी,श्री व सौ कर्नाटकी,श्रीयुत फडणीस.खालच्या बाजुला संजयभाऊ हाताने काही खाणाखुणा करताना दिसले,वंदनाताई अगदी हळू खाली बसून घसरत घसरत उतर असे सांगत होते.कोणीतरी पडले होते,काही समजत नव्हते मला चक्कर आल्या सारखे होत होते,भयंकर तहान लागून घसा कोरडा पडला होता.पिपलू म्हणाला,बहुतेक सरोज माताजी पडल्या आहेत.बाप रे!मैया!पहाडाच्या टोकावर माझे पाय जणू एकाच ठिकाणी रूतले आहेत असे वाटले.खाली सरोज बसली होती आणखी एक बाबा बसले होते.संजयभाऊ उभे होते हातानी खाणाखुणा करून हळू उतरायला सांगत होते.कान्हा आणि राजमलही बसलेले होते.मिलिंद,कस्तुरी,प्रकाश,मांगिलाल कुठेही दिसत नव्हते.काय झालं आहे हेच समजत नव्हतं.साईसिंग पुन्हा चढून वर येत होता आम्हाला आधार द्यायला.नर्मदे हर!
मावळत्या दिनकराचे सोनेरी किरण पडून तो भयंकर उतार वणवा लागलेल्या जंगला सारखा भासत होता पिवळा धमक केशरी.इतका भयानक सूर्य यापुर्वी कधिही वाटला नव्हता.डोंगराच्या त्या टोकावर मी मटकन खाली बसले नर्मदे हर!
माताजी माताजी!पिपलू आणि साई मला हाक मारीत होते.दोघानी दोन्ही कडून मला धरले होते.थोडे बसून घसरत घसरत काही पावले टाकत आम्ही खाली उतरलो.सरोजला काहीही झाले नव्हते ती पडली नव्हती नर्मदे हर!पण खामगांवचे रत्नाकर श्रीराम बाहेकर हे पडले होते,त्यांचे दोन्ही पाय सोलवटून निघाले होते.राजमलच्या रूपाने मैया धावली होती आणि तिने दरीत कोसळण्या आधीच धरून सावरले होते,वाचवले होते नर्मदे हर! राजमलला ही त्या गडबडीत लागले होते.माझ्या जवळ ड्रेसिंगचे सामान होते थरथरत्या हाताने ते सॅकमधून काढून मी त्यांच्या जखमा स्वच्छ करून औषध लावले.मैयाची मोठीच कृपा कुठेही फ्रॅक्चर नव्हते.नर्मदे हर!
थोडावेळ सगळेच शांत बसलो घोट घोट पाणी प्यायलो.मागुन आलेल्या कर्नाटकी,फडणीस यांनाही बसून घसरत उतरायला सांगितलं ते सुखरूप उतरले.जोशीही आले त्यांना त्यांच्या सॅक आधी खाली फेकून मग बसत बसत घसरत उतरायला सांगितलं त्यानीही तसच केलं.अशा प्रकारे सर्वजण भयंकर दिव्यातून मैया कृपेने सुखरूप बाहेर पडलो.नर्मदे हर! नर्मदे हर!
अजून थोडे उतरले की भमाना हे मुक्कामाचे ठिकाण येणार होते.हत्ती गेला होता फक्त शेपूट राहिले होते.पुन्हा चालायला सुरवात केली बाहेकर काकाही न घाबरता न बाऊ करता चालू लागले.नर्मदे हर!
तहानेने जीव व्याकुळ झाला होता.खाली एक नदी मैया झुळ झुळ वाहत असलेली दिसली,म्हणत होती,ये ग माझी बाय ती!पाणी पी,शांत हो.केलेत तुम्ही मोठे दिव्य पार माझ्या लेकरांनो.आलंच तुमचं मुक्कामाचं ठिकाण.मनोमन तिला वंदन करून ती अखेरची उतरण उतरलो.नदीमैयाच्या किनारी आलो जलस्पर्श करून तिला नमस्कार केला.ती होती दोन दिवसा पासून मधे मधे भेटत असलेली झरकनमैया.अगदी मनसोक्त जलामृत प्राशन केलं,ताजेतवाने झालो.नर्मदे हर!मिलिंदजी कस्तुरीताई मांगिलाल प्रकाश यांची भेट झाली ते वाटच बघत होते.झाला प्रकार त्यांना सांगितला.नर्मदे हर!
दरड चढून वर आलो थोडे चालल्यावर एक झोपडी आली पण तिथे निवास व्यवस्था होऊ शकली नाही पुढे जाणे भाग होते.तुरीच्या शेतातून वाट काढत चाललो होतो आणि एकदम युरेका!युरेका!असे ओरडावेसे वाटले,समोर चक्क रस्ता होता.आले भमाना.पायाना एकदम डेक्कनक्वीनचा वेग आला पाचच मिनिटात पोहोचलो मुक्कामाच्या ठिकाणी श्री देवला पावरा यांच्या घरी नर्मदे हर!
सुंदर चंद्रमौळी घर.आजुबाजुला तुरीचे,मक्याचे शेत.पिवळ्या फुलानी बहरलेल्या तुरीच्या मधे मधे राणी कलरची नीळसर जांभळी अंबाडीची बोंडे,सोनेरी मक्याचे तुरे,पार्श्वभागी डोंगर उतारावर हिरवेगार घनदाट सागाचे जंगल.भगवंताचीच चित्रकारी ती,तिच्या सौंदर्याला तोड नाही.नर्मदे हर!
देवलाचे आई वडील हजार वीरसेन पावरा आणि सौ सुमली हजार पावरा म्हणजे मुर्तिमंत सेवाभाव.रात्री सुंदर ओल्या चवळी तुरीच्या दाण्यांची उसळ आणि बाजरीची भाकरी.वा!वा! क्या बात है!नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-64
सुबह चाय लेके साडेसात बजे आगे चलने लगे।कच्चा ही सही मगर अच्छा रास्ता होने से चलनेमे आसानि थी।घाट था इसलिये चढाई-उतराई थी मगर दमछाक नही थी।दूरवर मैया सरदार सरोवर के बॅकवॉटरसे दर्शन दे रही थी बिच बिचमे।वह घनश्यामल रूप जैसे बता रहे हो की जीवनप्रवाहको बंधन तो होंगे ही,कुछ रूकावटे तो आएंगी ही मगर हमने रूकना नही है,परोपकार करते रहना है।परोपकारार्थ सतां विभूतयः।
सव्वा नौ बजे आया सावरियागांव,गांव के बच्चोंने दिया थंड जलामृत प्राशन करके बिस्किट,वेफर्स ऐसा कुछ खाकर आगे बढ़े।बहुत बडा घाट सहजतासे उतरकर आ गये उदय नदी मैया के किनारे।पाद स्पर्शम क्षमस्व मे कहकर उसकी क्षमा मांगकर आंखोंको जलस्पर्श करके मैया पार कर ली।मनमें विचार आया,अभी तक इस रास्तेपर छोटे से छोटे नालेपर भी पुल बांधे मिले फिर इतनी बडी नदीमैयापर पुल कैसे नही? फिर थोडी देर चलने के बाद एक मोडपर मुडतेही पुनः उदय मैया सामने आ गयी।वहॉं उसपर बहुत बडा ऊंचा पुल बांधनेका काम चल रहा है।पीलर खडे हो गये है।सरदार सरोवरका काम पुर्ण होकर दरवाजे लगने के बाद इस पुल के नीचे सिर्फ पांच मीटरपर पानी रहनेवाला है।नर्मदे हर!
उदयमैया पार करके बूट पहनने बैठे थे तब वहॉ ये रास्ता बनानेवाले कॉंट्रॅक्टर,हमारे नाशिकके श्री बाबुलाल पवार मिले।उन्होने बताया की रास्ता नंदुरबार,धडगांव से भादल तक महाराष्ट्र सरकार और मध्यप्रदेश के बडवानी से भादलतक मध्यप्रदेश सरकार केंद्रीय रस्ता बांधणी विभागतर्फे जयस्वाल कंपनी बांध रही है।कठीण परिस्थिती मे जीवन बसर करनेवाले आदिवासीओंकी प्रगती के लिये यह काम प्रधानमंत्री ग्रामसडक योजना के सहकार्यसे ये काम हो रहा है।इस तरह महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश इस दुर्गम विभागसे भी एक दुसरेसे जुड़ जाएंगे।परिक्रमावासी आसानीसे शुलपाणि की झाडी पार कर सकेंगे।सर्व प्रभाग प्रगत हो जाएगा।आदिवासी प्रगत तो देश प्रगत।सिर्फ साल देढ साल दूर है प्रगतीसे ये सब शुलपाणिका परिसर।नर्मदे हर!
बहुत बडा घाट पार करके हम बिलगांव पहुँचे।उदय मैयापर का पुल पार करके आश्रमशालामे गये तब बारा बजे थे।आज रविवार है स्कूलको छुट्टी होने के कारण भोजन दस बजेही हो गया था,बची हुई सारी रोटी हमारे पहले पहुँचे मध्यप्रदेशी परिक्रमावासी ले गये थे।हमारे लिये कुछ नही बचा था।नर्मदे हर!
वेफर्स,बिस्किट खाकर आगे चल पडे।बिलगांव के लोगोंमे परिक्रमावासीओं प्रति आस्था नही है ऐसे ध्यानमें आया।सरपंच के घर तो पानी देनेसे भी इन्कार आया।नर्मदे हर!
चिखली के बाद बोरी गांवमे साईसिंग पावराजी के आंगनमे बैठे।जलपान किया।बाहेकर काकाजी के पास चिनी-चायपत्ती थी,चाय बनवा लिया।नर्मदे हर!
गुडानसापडा के बाद पुनः घाट शुरू हो गया।दो बजे थे,धूप कड़ी हो गयी थी।धडगांव से बिलगांव जानेवाली बस हमे देखकर रूकी।कंडक्टर राजेंद्र पवार(शहादा) और ड्रायव्हर दिपक चरजे(यवतमाळ) ने हमारी पुछताछ की,अपने पासके जारसे थंडा पानी पिलाया।बोले आपको देखके हमे भी लगने लगा है की नर्मदा परिक्रमा करें।नर्मदे हर!
घाट चढने के बाद आया खर्डीगांव।चलते हम देख रहे थे,टेम्पो ट्रॅक्समे ठुस ठुस कर भरकर,टॉप पर बैठकर,दरवाजेसे लटक कर जान जोखिम मे डालकर लोग सफर करते है और आरामदायि सरकारी बस बहुतांशी खाली दौडती है।क्युं?
खर्डीसे बहुत बडे माळरान(पठार)से रास्ता जा रहा था।कल था खप्परमाळ आज है टप्परमाळ।अब घाट उतरना शुरू हुआ।दाहिनी ओर उदयमैया साथ दे रही थी,स्वच्छ प्रदुषण विरहीत जलप्रवाह।नर्मदे हर!
अखेर ठिकाणा आ गया,राजबर्डी।आश्रमशालामे आसन लगाया।आज दो तीन दिन बाद डॉक्युमेंटरी करनेवाले देवा और कुणाल पाटील मिलें खप्परमाळ और भमानामे शुटींग करना उनको भी मुमकीन न हो सका था।
आश्रमशाला के मुख्याध्यापक श्री के एन पटेलजीने अच्छी व्यवस्था कर दी।स्नान कपडे भोजनपानी सब बढ़िया तरीकेसे हुआ।नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-65
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा शुलपाणि झाडी के बाद राजबर्डी के आगे-भाग-65-सुबह सव्वा छे बजे राजबर्डीकी आश्रमशालासे आगे प्रस्थान किया.शेलकुवाँ,तेलखेडी,चिखलीफाटा के आगे श्री.धनाजी मीरसिंग पावराजीने नर्मदे हर कहके घर बुलाया,सुंदर स्वच्छ आंगनमें बैठक बिछायी,हम सब लोग बैठे.प्रथम जलपान और बादमें चायपान करवाया.सुंदर खेती,पेडपौधे,गायबैल और प्यारे बच्चे ऐसा बडा प्यारा परिवार है धनाजी पावराजी का सेवाभावी परिवार.आठ बजे आगे चल दिये.अब धडगांव पासही था.एक नदीमैया के किनारे मंदिर और आश्रम था वहॉं परिक्रमावासी रूक सकते है.हम लोग पुलसे धडगांवमें पहुँचे.बसस्टॅन्डमे हॉटेलमे नास्ता करके हमारे झाडीमे मददगार बच्चे मांगिलाल,प्रकाश,कान्हा,पिपलू और राजमल को अलविदा कर दिया.अब वे बससे शहादा खेतिया होते बोरखेडी जाएंगे.उनका शुक्रिया कैसे अदा करे?वो नही होते तो शुलपाणिकी झाडीका कठीणतम सफर तय करना हमारेलिये नामुमकीन था.मैया!खुश रखना सबको.
धडगांव तालुका है महाराष्ट्रके नंदुरबार डिस्ट्रीकका.बडी बाजारपेठ है.बाजारसे गुजर रहे थे,एक दुकानदार मैयाने तौरबाई देविदास नवेजने पुकारा,नर्मदे हर!उन्होने भाजीवडा और चायपान करवाया.और उनके घर लेके गयी.कबीरपंथी लोग है.थोडी देर विश्राम करके हम आगे निकल पडे.मगर कड़ी धूप के कारण चलना मुश्कील था,वैसे भी शुलपाणिके सारे दिन बडेही कठीण गुजरे थे इसलिये आज धडगांवमेंही रहनेका तय किया.बाजारसे आतेहुए नर्मदा कोल्ड्रींक वाले सोनावणेजीने बताया था की पाटीलबाबा चौकमें श्री.सोमनाथ परमारजीकी मसालोंकी दुकान है वह परिक्रमावासीं को सेवा देते है.नर्मदे हर! गये उनके दुकानमे.सहर्ष स्वागत हुआ.चायपान हुआ.थोडी देर बाद उन्होने एक लडका हमारे साथ भेजा और हम उनके घर पहुँचे.बडा प्रशस्त घर है.स्नान कपडे धोना किया.शामकी पुजा आरतीमें घरके सदस्यभी शामील हुए.बादमे खीरपुरी,दालचावल,पापड अचार स्वादिष्ट भोजनप्रसाद घरमेही भोजन कर रहे है ऐसा लग रहा था,महाराष्ट्रीय भोजनका स्वादही अनोखा.नर्मदे हर!अब निद्रादेवी की आराधना.जय हो मैयाकी. सौ.वंदना परांजपे. क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 66
आज एकादशी है.स्नान पुजा आरती के बाद चाय लेके सोमनाथ परमार परिवारको नर्मदे हर करके विनोबा एक्सप्रेस को ग्रीन सिग्नल दिया.हरणखोरी,भुजगांव के बाद सुरवाणी गांवमें श्री.मोतीराम छगन गौडजीने घर बुलाया और चलते चलते प्रथम किसीने बुलाया तो ना नही कहते,अगर ना बोला तो समझ लेना मैया आपकी कड़ी परिक्षा लेगी ही लेगी तरस जाओगे चायपानी खानेको मिलना मुश्कील.नर्मदे हर! मोतीरामभाऊ के घर चायपान करके आगे चल दिये.मोतीरामभाऊ के घर परिक्रमावासीओं के लिये निवासव्यवस्था है.मोठी(बडी)सुरवाणी,खांडबारा,कुंडला,खुंटामोडी श्री.बामण्याने जलपान करवाया.साडेबारा बजे थे धूप बहुत कड़ी हो गयी थी भांग्रापाणी गांव,एक घरके आंगनके छॉंवमें बैठने गये,घर था भांग्राबाबा और दुर्वीबाईका.फरियाली चिवडा खाया माईने थंडापानी दिया.एक घंटा विश्राम करके आगे निकले.काठी गांवमें सौ.विमलाबाई अंतरसिंग पाडवीके घरमे चाय लेके आगे.धूप इतनी थी मानो सुरज आग उगल रहा है,खानदेशमेंसे जो चल रहे थे.रास्तेमें वीरसिंगने थंडा पानी देके प्याससे राहत दे दी.आगे मालपाडा के बाद निंबीपाडामें रतन टाटा काजू प्रक्रिया केंद्र और रोषा एक सुगंधी घाससे तेल निकालनेका कारखाना है,ये तेल वेदनाशामक होता है,व्हेरीकोझ व्हेन की बिमारीमें काम आता है.बहुत मेहंगा है 200रू.1ml इतना मेहंगा.नर्मदे हर!मोलगी चौरस्ता से मोलगी.पिछली परिक्रमामें हम अक्कलकुवामें फॉरेस्ट रेस्टहाऊसमे रूके थे वहॉके फॉरेस्ट ऑफिसर श्री.रहासे साहेब थे उनका घर मोलगीमें था और आज हम वही जानेवाले थे.मोलगीमे रहासेभाभी हमको लेने नाकेपर आयी थी हम उनके घर गये.बरामदेमें बैठे,भाभी चार ग्लासमें पानी लेके आयी हम तीन बहने देखके बोली,आपके साथकी चौथी मैया कहॉं गयी?चौथी मैया?हम तीनही है तो बोली,नही ना मैने नाकेपर देखा आपके साथ सफेद साडी पहनी मैया थी.हम तो साडी नही पहनते.अब क्या बोले?नर्मदे हर! रातको मोलगी नर्मदा सेवा समिती के कार्यकर्ता श्री.भिला भगवान ढोले और मित्र मिलने आए.ये समिती गांवके हनुमान मंदिरमें परिक्रमावासीओंको सेवा देती है.नर्मदे हर!
आज रास्ता अच्छा था,घाट नही था मगर कड़ी धूप और तीस किमि चलनेसे बहुत थक गये थे.सायं प्रार्थना,भोजनप्रसाद के बाद विश्राम.नर्मदे हर!
सौ.वंदना परांजपे.
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 67
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-मोलगी से वडफळी-भाग67-
रहासेसाब ने खुद चुल्हा जलाके स्नान केलिये पानी गरम कर दिया.स्नान पुजाआरती करके भाभीजीने दिया गरम गरम चायका पेट्रोल भरके हमारी पैरगाडी सुबह छे बजे आगे चलनेको तैयार हो गयी.नर्मदे हर! मोलगी चौरस्ता आके बांए तरफके रास्तेसे चलने लगे.रेटंबापाडा,बिजरीगव्हाण,एक नदीमैया पार करके शॉर्टकटसे सुरगसमें साईसिंगजीने चाय दिया.नर्मदे हर!सारा मार्ग घाटका है चढाई उतराई.पिंपळखुंटा ये गांव तंटामुक्त राज्यपाल पारितोषिक प्राप्त गांव है,सरपंच निर्मला राऊत है.विश्रामकेलिये रूके थे तब चार मराठी परिक्रमावासी आ गये,एक भाऊके पैरमें बडी मोच आयी थी और नीजॉइंटमे बहुत सुजन थी,किसीने उनको मेरे बारेमें बताया था,हमको बैठा देखकर उन्होने हमसेही मेरे बारेमें पुछा.मैने पैर देखा मेरी राय थी उन्होने इस हालतमें चलना नही चाहिये रेस्ट जरूरी है.मेरे पास ज्यादा कुछ दवा नही थी इसलिये उनको गांवके प्राथमिक आरोग्यकेंद्रमे भेजा.और हम आगे चलने लगे.नर्मदे हर!केलिपाडा गांवके पहले उस गांवके स्कूलटीचर श्री.आदम शेख मिले,उन्होने कहा हमारे स्कूलके बाजूसे वडफळी जानेका शॉर्टकट है,आप स्कूलमे भोजन करो विश्राम करके आगे जाना.भोजनका समय था,आज हमने नास्ताभी नही किया था भूकभी लगी थी,तो हम उनके पिछे घाट उतरकर स्कूलमें गये.आसपास जंगल और बिचमें छोटासा स्कूल था.वहॉं श्री.कैलास टेकाटे हेडमास्टर थे.वह शेगांव भंडारा डिस्ट्रीक के रहनेवाले थे तो आदम शेख सोलापुर डिस्ट्रीकके.किसीने सच कहा है पेट केलिये घुमते घुमते घोर जंगलमेभी जाना पडता है.नर्मदे हर.प्रथम पानी,चायबिस्किट बादमे दालचावलका भोजनप्रसाद लेकर दो बजे हम बडे बडे पत्थर पेडके सुखे पत्तोंसे भरे उस शॉर्टकटसे आगे चल पडे.रास्ता भयानक था,मैया!कुछ करो!पुकारा मैया को.वह तो हमेशा तैयारही रहती है अपने साथ बस,पुकारनेकी देरी है,मदत हाजीर.सामने एक टेकरीपरसे किसनने पुकारा मैयाजी उपर आओ मै रास्ता दिखाता हूँ.नर्मदे हर!जय हो मैयाकी!गये उसके पास उसने दुसरी पगदंडीसे एक नदीमैया पार करके दुसरी टेकरी एकेकका हाथ पकडके चढनेमें मदत करके बडे रास्तेपे पहुँचा दिया.नर्मदे हर! मोकस,जांभापाणी के बाद पांढरीमाती गांवके स्कूलमे आके बैठे.अब वडफळी चारपांच किमि रहा था.मै पहलीबार इस रास्तेसे आयी थी रहनेकी सुविधा क्या होगी मालूम नही था,मेरे पास मिलिंद शिरगोपिकरजीका मार्गदर्शक पत्रक था उसमें देखा तो डॉक्टर बि-हाडेजीका नाम मिल गया.नर्मदे हर! पांच बजे हम वडफळी पहुँचे. डॉक्टरसाबका घर नजदीकही था.नर्मदे हर!सहर्ष स्वागत किया डॉक्टरसाब और बहूने.छोटी आस्थाको तो तीन तीन आजी(नानी)मिलनेकी बहुत खुशी हो गयी.पानी भरपूर था अच्छेसे स्नान कपडेधोना हुआ.संध्यारतीके समय आस्थाका कन्या पुजन किया.बहूने घरके बैंगनसे भरवाँ बैगन,दाल चावल रोटी और खीर ऐसा स्वादिष्ट भोजनप्रसाद बनाया था.अंतरात्मा संतुष्ट हो गया.आजभी तीस किमि चलना हुआ है.अब निंदिया रानी जल्दी आ जाओ.नर्मदे हर!
वंदना परांजपे. क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 68
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-वडफळी से झरवानी-भाग 68-
स्नान पुजारती के बाद चाय लेके डॉक्टर बि-हाडे,बहू और बेबी आस्थाको नर्मदे हर करके हमारी विनोबा एक्सप्रेस गुजराथ की तरफ चल पडी. थोडा आगे जानेके बाद दाहिनी तरफ एक आश्रम था बाहर आंगनमे परिक्रमावासी सोये थे इतनी थंडीमें बाहर सोना बहुत कठीण है.मैयाकी बड़ी कृपा है की हमको डॉ.बि-हाडेभाईसाब के घर आसन लगानेको मिला.नर्मदे हर!बायीं तरफ देवगंगामैया बह रही थी,स्वच्छ सुंदर निलजलधारा.अब दाहिनी तरफसे नये बन रहे कच्चे रास्तेसे चलना था.थोडी चढाई उतराईवाला जंगलसे गुजरता रास्ता एक किसानके चंद्रमौली घरके पास ले आया.खेतके बांधकी पगदंडीका रास्ता शॉर्टकट था इसलिये चलो पगदंडीसे.नर्मदे हर!देवगंगामैया के किनारे खडे रह गये.कलकल करती हसते नाचते गाते बहते जानेवाली मैया दोनो किनारोंपे घना जंगल थोडी दुरीपर दिखनेवाला माथासर पहाड किसी चित्रकारकी चित्रकृतिही लग रही थी.सिमेंटसे बने बंधारे जैसे रास्तेपर सॅक उतारके बैठे.जलस्पर्श करके देवगंगामैयाको नमन करके पादस्पर्शम क्षमस्व मे बोलते क्षमा याचना करके पैर पानीमें डालके बैठ गये.मुंह धोया पानी पिया,जलामृत था.और बैठनेका बहुत मन कर रहा था मगर आजका पल्लाभी बडा था इसलिये उठ खडे हुए.देवगंगामैया पार करके पिछे मुडके देखा अब उसपार था हमारा महाराष्ट्र और इसपार था गुजरात.कणजी,गुजरातराज्यका पहला गांव.सुबह के आठ बजे थे.चले चलो आगे रास्ता कच्चाही था.एक आश्रम था मगर दूर था इसलिये एक घरके आंगनमें बैठकर नास्ता किया पानी पिके आगे चलने लगे.बहुत खराब रास्तेसे एक छोटी चढाई पार करके एक नदीमैयाके किनारे पहुँचे शायद यह देवगंगामैयाही थी.उसपार दिख रही थी प्रसिद्ध माथासरकी खडी चढाई,सातपुडापर्वत.मैयाको प्रणाम करके पैर पानीमे डाले.फिसलनभरे पत्थरों परसे बांए हाथमें बूट,दाहिने हाथमे मुझे भक्कम आधार देनेवाली काठीमैया लेके खुदको संभलते मैया क्रॉस करके एक बडे पत्थरपर बैठ गये.बहुत सुंदर परिसर है.शहरकी दिखावटी सुंदरता नही,सृष्टीदेवताकी सच्ची सुंदरता.अब दस बज चुके थे,आगे चलना जरूरी था.धूप चढने लगी थी और चढाई आगे थी.चलो नर्मदे हर! थोडासा चढतेही थोडा रूको फिर आगे ऐसा करते करते माथासरमें विनू के घर आ गये,थंड जलपान करके उसको नर्मदे हर करके आगे चलना शुरू किया.इतने बडे बडे पत्थर देखके समझमें नही आ रहा था की रास्तेमें पत्थर है या पत्थरोंमे रास्ता?नरेंद्र मोदीजीं के विकसित गुजरात का विकास इस दुर्गम पहाडी इलाकेसे कोसों दूर था.नर्मदे हर! एक बहुत बड़ी चढाई चढके कपिलाबेन के चंद्रमौली घर आये तब दोपहरका एक बजा था.कपडे सुखाने डालके आरामसे बैठे,जलपान किया.कपिलाबेन टोकरीमें एक भाकरी लेके आयी और बोली,एकही रोटी है आपका पेट तो नही भरेगा मगर थोडासा आधार मिलेगा.बच्चोने खाया?मैने पुछा,तो बोली रोज स्कूलमें मिलता है मगर आज गुरूजी नही आये इसलिये नही मिला.कपिलाबेन हमने थोडीदेर पहलेही खाया था अब भूक नही है आप ये बच्चोंको देना.हमारे पास बिस्किट थे वो भी दिये.मैया! कितने बडे दिलवाले है आपके बच्चे अपनी गरिबीमें भी अतिथी देवो भव ये अपना भारतीय संस्कृतिका अनमोल उपहार देनेमें पिछे नही हटते.नर्मदे हर!कपिलाबेन और बच्चोंको टाटा बाय बाय करके पुनः चढाई करने चल पडे.हमारे पिछेसे कुछ मराठी परिक्रमाबंधू आ गये,श्री.अरविंद चव्हाण,श्री.इथापे और दुसरे दो तीन थे.आगे एक जगह नया मंदिर और आश्रम बन रहा था,वहॉंके महाराजने सब केलिये कालीमहारानी मतलब काली चाय बनायी.कडक मिठी चाय जिसकी हमको बहुत जरूरत थी,बहुत थक गये थे.तीन बजे थे.जलपान चायपान विश्राम करके आगे.नर्मदे हर!चार बजे एक जगह छगनने थंड जलपान करवाया.आगे बैठते उठते पांच बजे झरवाणीके स्कूलमें पहुँचे.सहपरिक्रमाबंधू पहलेही पहुंचकर भोजन प्रबंध करनेमें जुट गये थे.बोले,मैयाजी आप आराम करो हम बनाते है कुछ.नर्मदे हर! सामने पानीके नल थे हाथपैर धोके नित्यपाठ किया.खिचडी और हलवा भोजनप्रसाद लिया.आज थका देनेवाली तीस किमि चाल हो गयी थी.अब विश्रांति.नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 69
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-झरवाणी से गोराग्राम-भाग-69-यहॉं फोन को रेंज नही थी,रावसाहेब {मेरे पती} गोराग्राम आनेकेलिये कल रातको बसमें बैठे होंगे और सुबह आठ बजेतक गोराग्राममे हरिधाम आश्रम पहुचेंगे उनको फोन करना जरूरी था,और स्नान करनेकी कोई सुविधाभी नही थी इसलिये सुबह छे बजेही चलने लगे गांवमें पहुँचे तब भी अंधेराही था रास्ताभी ठीक नही था अंधेरेमें चलना मुश्कील हो रहा था.एक घरके आंगनमें थोडी देर रूक गये,नर्मदाष्टक वगैरे नित्यपाठ खडे खडे ही बोला और थोडा झुंजूमुंजू हो गया थोडा दिखने लगा तब आगे चलने लगे.सव्वासात बजे झरवाणी गांवके ग्रामपंचायत स्कूल वगैरेपास आये,श्री.सुखरामभाईजी ने चायपान करवाया,उन्होने अपने फोनसे फोन लगाया मगर नही लगा तो उनको नर्मदे हर करके हम आगे चलने लगे.थोडा आगे जानेके बाद रेंज मिली फोन किया रावसाहेब राजपिपला आकर अब गोराग्रामके बसमें बैठे थे.नर्मदे हर!सव्वाआठ बजे एक जगह बैठकर खाकरा खाया.आज डांबररोड है मगर सातपुडा पर्वतकी चढाई तो थी ही.हम सरदार सरोवरके परिसरमेंसे चल रहे थे,मैया हमारे दाहिनी ओर थोडी दुरीपरही थी मगर हमारी नजरोंसे ओझल.दो नदीमैया पुलसे पार करके दस बजे हम गोरा गांव कॉलनी पहुँचे,आज रास्ता अच्छा तो सिर्फ चार घंटेमें हम बीस किमि आ गये थे.नवीन शुलपाणेश्वर मंदिरका बाहरसे दर्शन लेके आगे निकले क्योंकी स्नान नही हुआ था.नर्मदे हर! हरीधाम आश्रममें रूम लेके स्वच्छता करके स्नान कपडे वगैरे खुदका सारा काम निपटाके रावसाहेब हमको लेने आये थे.टपरीपर चाय लेके हम आश्रममें आ गये.पिछली परिक्रमामेंभी हम यही रूके थे इसलिये पहचान थी.स्नान कपडे नित्यपाठ करके श्रीरामजीके दर्शन करके भारतीमाताजी को प्रणाम किया.भंडारीभाईजींकोभी मिलकर आ गये.हमारी रूमके बरामदेमें झुला था और सामने सुंदरमैयाके सुंदर दर्शन हो रहे थे.भोजनप्रसादके बाद विश्राम करके शामको शुलपाणेश्वरके दर्शन करने गये.एक टेकरीपर वृक्षराजी बागबगिचा और सुंदर संगमरवरी मंदिर बनाया है.कहते है पुराने मंदिरसे शिवपिंडी निकालकर लानेकी कोशीश की थी मगर नाकाम रहे इसलिये यहॉं नयीशिवपिंडी स्थापन की है.नर्मदे हर! सायंआरती के बाद हमने हमारा नित्यपाठ किया और भोजनकेबाद भारतीमाताजीने कुछ धार्मिक बाते बतायी सत्संगमे.उन्होने बताया,कर्मगती गहन होती है,जैसी करनी वैसी भरनी.उदाहरणार्थ एक कहानी बतायी भीष्मपितामहकी.जब वो शरशय्यापर पडे थे तब उन्होने भगवान कृष्णको पुछा,मुझे मेरे पिछले कुछ जनम याद है मैने कोई पाप नही कियाफिरभी मुझे ये शरशय्या क्यू?भगवान बोले,आपने आपके पंधरवे जनमके बचपनमें एक किडेको कांटा चुभाया था इसलिये आपको ये सजा मिली है.नर्मदे हर!पुर्वसंचित किसीको नही छोडता सबको भुगतनाही पडता है.अब कलसे मैयाके किनारेसे चलनेका आनंद मिलनेवाला है इसलिये अब विश्रांति.नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 70
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-गोराग्राम से गुवार-भाग-70-
मैया स्नान पुजारती के बाद चायपान के बाद रावसाहेब नाशिक केलिये रवाना हो गये और हम मैयाकिनारेसे चलने लगे.आनंद आश्रयमें स्फटीक शिवलिंग श्रीचंद्रमौलेश्वर के दर्शन किये और बडी बडी खाई उतरने चढने की मानसिक तैयारी करके आगे चलने लगे मगर अहो आश्चर्यम! कच्चा रस्ता था पिछली परिक्रमामे यहॉं बडी बडी खाई थी बारिशके दिनोंमे मैयाका बाढ गुस्सा इतना भयंकर था की सिमेंटका बना घाट तक उसने उखाड फेंके थे और रास्ताभी बहाके ले गयी थी मगर इस वर्ष कच्चाही सही मगर रास्ता तो था.नर्मदे हर! इंद्रवरणमे सौएक सिढियां चढके इंद्रेश्वरमहादेवजीके दर्शन किये.वहॉं आश्रमसदृश बिल्डींग थी पानीका पंपभी चल रहा था मगर कोई आदमी नही था.हमारे पास वेफर्स थे नास्ता करके पाईपसे मैयाजल प्राशन करके तरोताजा होकर नऊ बजे हम वापस वही सिढियां उतरकर मैया किनारेसे आगे चलने लगे.सामने उत्तरतटपर गरूडेश्वरका घाट और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महाराजजीके समाधीमंदिरके शिखर दर्शन हो रहे थे.नानीरावल-गरूडेश्वर जोडनेवाले पुलके पाससे वॉंसला गांवके सुर्यमुखी हनुमान विश्वनाथ मंदिरमें दर्शन करके आश्रममें चायपान करके एक अवघड पगदंडीसी उतरण उतरके वापस मैयाकिनारे आ गये.नर्मदे हर!छोटी पगदंडी थोडी दलदल पार करते करते फुलवाडी कब पिछे छुट गया समझाही नही.और फिर शुरू हो गयी हमारी परिक्षा.थोडी देर फलीकी बेलोंसे,मकईके खेतोंसे चलते चलते एक जगह ऐसी आयी की कहॉंसे जाए समझ नही आ रहा था,मैया एकदम पाससे बह रही थी और बायी तरफ पानीसे भरा खेत चले तो कैसे?उपर एक छोटीसी मैयारानी बैठी थी,उसको बुलाया मगर आयी नही. आ जाओ,चॉकलेट दुंगी,नही?अच्छा दोचार चॉकलेट दुंगी,आओ ना मैया रूठो ना,ऐसी बहुत बिनती करनेके बाद वह दुडू दुडू आ गयी और मेरा हाथ पकडके बोली चलो,सिधा तो है रास्ता डरनेकी क्या बात है?और क्या कहूँ?वही थी पगदंडी हम देख नही सके थे.नर्मदे हर!अब सिधे चले जाना रास्ता मिल जाएगा मेरा हाथ छोडके मैया बोली.मैने उसकी एक मिठी पप्पी लेली और उसके हाथमे चॉकलेटस देके नाम पुछा,संगिता!बताके वो एकही क्षणमें भागके नजरोंसे कहॉं ओझल हो गयी समझाही नही.नर्मदे हर!
बाप रे!कितने बडे बडे पत्थर बीचमें छोटी पगदंडी दाहिनी ओर थोडी निचेसे बहती सुंदर निलश्यामल मैया,उसका संथ शांत गहरा रूप,उडते असंख्य रंगीबिरंगी छोटेबडे पंछी हमारी साथ कर रहे थे.नर्मदामें जितने कंकर उतने सब शंकर ऐसा कहते है और हमको उनपर पैर रखकर चलना पड रहा था.मन ही मन उनकी क्षमा मांगते नजर पैरोंतले रखते हम बहुत सावधानीसे चल रहे थे मगर मनमें लवमात्रभी भय नही था. एक जगह तो ऐसा लगा की आगे रास्ताही नही है.मगर एक मोडपर मुडने के बाद देखा,सामने हरियालीका कालिन बिछाया है और बिचमेंसे लाल पगदंडी.सारे श्रम एकही क्षणमें छुमंतर हो गये.आगे गुलाबी बनफुलोंकी क्यारियाँ और उनमेंसे जाती पगदंडी.निचे एक नदीमैया नर्मदामैयामें विलिन हो रही थी.और अहो भाग्यम!किनारेपर बैठी मगर मैने देखी,मैयाका वाहन भूरे रंगकी मगर थी,मैने सबको बुलाया,सबने देखा प्रणाम किया.वह चलके मैयामें गयी और वापस उपर आयी,फिर अंदर गयी.संगमके पास हमने उस नदीमैयाको प्रणाम करके पदस्पर्श केलिये उसकी क्षमा मांग ली और जलमें पैर डाले,रेतका स्पर्श अलगही था एकदम सॉफ्ट मिट्टी थी.नर्मदे हर!पानी बहुत कम था सहज पार करके हम घाटके सिढियोंके पास आये.पचासएक सिढी चढके हम योगानंद आश्रममें पहुँचे.व्यवस्थापक श्री.हसमुखभाई म्हैसुरीलालजीने सहर्ष स्वागत किया.रसोईघरमें हमारे लिये पाकसिद्धी शुरू हो गयी.हसमुखभाईजी को राजपिपला जाना था इसलिये उन्होने प्रथम हमारे डायरीमें सील लगवाया रजिस्टरमें हमारे आनेकी नोंद कर दी.फिर हमको उत्तरेश्वर महादेवजीके दर्शन करवाये.यहॉंसे कुंभेश्वर तक मैया उत्तरवाहिनी है.हमने अभी जो मैया पार की थी उसका नाम है अनड या किडीमकौडी.इस संगमके पास पांडवोंने यज्ञ किया था,उसके जलमें अभिभी यज्ञरक्षा है इसलियेही हमको उसका स्पर्श अलग लगा था.उस रक्षाको शरीरपर लगाके स्नान करनेसे त्वचारोग ठीक होते है. क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 71
योगानंदआश्रम से गुवार-उत्तरेश्वर मंदिरमें सुंदर फुलोंसे सजायी शिवपिंडी,पार्वतीमाताके दर्शन हुए.वहॉं ॐपर्वत,कैलासपर्वत के फोटो है.और एक अज्ञात महात्माका फोटो है उनके मस्तकमेंसे एक प्रकाश शलाका निकल रही थी.एक हजारवर्षसेभी ज्यादा आयुवाले ये महात्मा हिमालयके दुर्गम प्रदेशमें आजभी बैठे हुए है,एक व्यावसायिक फोटोग्राफरने बडे झूमवाले कॅमेरेसे ये फोटो खिंचा है.ॐका और कैलासका फोटो हसमुखभाईजींने खिचे है.उन्होने बहुतेक सारा हिमालय देखा है.हर श्रावणमासमें वह केदारनाथमें रहते है.उन्होने बताया गुवारके तपोवन आश्रमके खिडकीके देव मतलब पुर्णानंदस्वामी सिर्फ गुरूवार और पुर्णिमाके दिन अपने रूमसे बाहर आते है.बाकी दिन रातको अपने रूमके खिडकीसे दर्शन देते है और लोगोंसे बोलते है.अहो भाग्य हमारे आज गुरूवार है.नर्मदे हर!भोजनप्रसादके बाद विश्राम करके चाय लेके हम चार बजे आगे निकल पडे.अब मैयाकिनारा नही था रास्तेसे जाना है.मांगरोल के बाद पांच बजे गुवारगांवमें तपोवन आश्रम पहुँचे.नर्मदे हर!
तपोवन आश्रम बहुत सुंदर वृक्षराजी बागबगिचासे सुशोभित है.आसन लगाया.
आजके गुरूवारकी पालखी केलिये महाराष्ट्रके औरंगाबाद,परभणी,हिंगोली डिस्ट्रिकसे बहुत भक्त आये थे.स्वामी पुर्णानंद महाराजजींने एक ज्योतिर्लिंग औंढ्या नागनाथ क्षेत्रमें तपश्चर्या की है.बादमें वह नर्मदा परिक्रमा करते इस स्थानपर आये तब यहॉं उनको बरगद नीम और पिपल ये तीन वृक्ष एकही जगह मिले और बाजूमेंही मूलसेही तीन टहनीवाला औदुंबरवृक्षभी है जिसके तले दत्तभगवानका निवास होता है.परिक्रमा पुर्तिके बाद महाराज इस स्थानपर आके पर्णकुटी बनाके निवास करने लगे.अब उस जगहही आजका भव्य तपोवन आश्रम है.नर्मदे हर!
रातको सब लोग इकठ्ठा हो गये.यथावकाश पहले चांदीकी पालखी और पिछेसे स्वयं श्रीश्री पुर्णानंदस्वामीजी बाहर आ गये.प्रसन्न तेजस्वी वृद्धमुर्ती है स्वामीजी.प्रथम साईनाथ पुजन,देववृक्ष पुजन,औदुंबर पुजन करके स्वामीजी अपने निवासस्थानमें गये.सब लोग हॉलमें बैठे.भजनगान होने केबाद स्वामीजी बाहर आके आसनस्थ हो गये.एकेक जाके प्रणाम करता स्वामी उसको प्रसाद देते.हमारे पुर्वपुण्यसे ये नयन मनोहर कार्यक्रम हमें देखनेका सौभाग्य प्राप्त हुआ.आजका गुरूवार हमारे जीवनमें सुवर्ण अक्षरोंसे लिखने जैसाही है.नर्मदे हर! वंदना परांजपे. क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-72
॥नर्मदे हर॥ नर्मदा परिक्रमा-कुंभेश्वर से नरखेडी-भाग-72-
रामपरा अनड+मैया संगम उत्तरेश्वर योगानंद आश्रमसे यहॉं कुंभेश्वर तक नर्मदामैया उत्तरवाहिनी है,कुंभेश्वर क्षेत्रमें ब्रम्हदेव,विष्णू,इंद्र,कुबेर,वरूण,यमराज,शनिमहाराज,मार्कंडेयऋषि इत्यादि देवऋषिओंने तपस्या की है.ये स्थान सात कल्पवर्ष पुर्वसे विद्यमान है.कुंभेश्वरलिंग ज्योतिर्लिंग समक्ष है.काशीक्षेत्रमें एक लाख वर्ष वास्तव्य और कुंभेश्वरमें एकबार नर्मदास्नान एक समान है.यहॉं शनिमहाराज का अपनी दो रानी मोटी पनोती और छोटी पनोती के साथ वास्तव्य है.आज शनिवार है इसलिये अरूणोदय होतेही हम मैया स्नान करने गये.घाटकी पचीचतीस सिढ़िया उतरने के बाद और थोडा आगे जाके स्नान करना पडता है.कुछ लोग स्नान के बाद अपने पहने गिले कपडे यही छोड जाते है उनका मानना है की ऐसे करनेसे अपने पिछे लगी पनवती यही छूट जाती है.मगर इस अंधविश्वासी गंदी प्रथासे यहॉं गंदे कपडोंके मानो छोटे छोटे पहाडसे बन गये है,जलप्रदूषण हो रहा है.रवि उसकी पत्नी जागृति और अन्य गांववाले इस प्रथाको मिटाने केलिये जी तोड मेहनत कर रहे है पानीसे कपडे अन्य गंदगी बाहर निकालनेकी कोशीश जारी है मगर अंध विश्वासी लोगोंके आगे उनकी मेहनत कम पडती है.इसके लिये सरकारकोभी उपाय योजना करनी चाहिये.नर्मदे हर! स्नान के बाट घाटपर मैयाकी पुजारती करके भगवान कुंभेश्वर,शनिमहाराज,देवी मोटी छोटी पनोती,कालभैरव,श्रीयंत्र दर्शन करके जागृतिने दिया चाय लेके आगे प्रस्थान किया.नर्मदे हर!
निचे आतेही दाहिने बाजुके नर्मदा आश्रमके महाराजने पुकारा और रहनेका आग्रह करने लगे,माताजी बोली,मराठी लोग परिक्रमा नही करते सिर्फ दौडते दौडते परिभ्रमण करते है,शनिवारको कुंभेश्वरमें रहना चाहिये.नर्मदे हर!हमने चायपान केबाद आगे जानाही उचित समझा और हमारी विनोबा एक्सप्रेसको हरी झंडी दिखायि.नर्मदे हर!
साडेनऊ बजे जिओरपाटीसे केलेके बगिचे,कपास,तुवर के खेतोंमेसे शॉर्टकटसे कोठारा वहॉंसेभी ऐसेही शॉर्टकटसे साडेग्यारह बजे कंचनबन आश्रम पहुँचे.स्थानिक लोग इसे दिल्लीवालेका आश्रम बोलते है.बहुत सुंदर आश्रम है.विद्यासागर महाराज उच्च विद्याविभूषित तरूण है.
स्वच्छ बाथरूम सोलरका गरम पानी देखकर फिरसे सचैल स्नान किया,अच्छेसे साबून लगाकर कपडे धोकर नील-टिनोपॉलमे डालके कपडोंको चकाचक करके धूपमे सुखाने डाल दिये.तबतक भोजनप्रसादका समय हो गया.स्वादिष्ट भोजनके साथ देशी गायके दूधसे बने दही और छास भरपूर मज़ा आया.नर्मदे हर! तीन बजे आगे प्रस्थान.हनुमंतेश्वर दर्शन.सुंदर मंदिर,मोरल+मैया संगम सुंदर घाट है.यहॉं हनुमानजींने तपस्या की है.सामनेका रास्ता अक्षरधाम मंदिर जाता है मगर हमने घाट उतरके मैया किनारेसे जाना पसंद किया.संगमके बाद थोडी देर चलने के बाद मैया बहुत दूर कुबेर भंडारी चांदोद ओरसंग+मैया+गुप्त सरस्वती त्रिवेणी संगम दिखती है मगर इधर दक्षिण तटपर बिलकूलही पानी नही है.रेतमे रास्ता बनाया है जीप गाडी चलती है पोयचा से चांदोद.साडेचार बजे पोईचा पहुँचे मगर न रूकते आगे चलने लगे.चलते चलते बडे बडे ऍपलबेर के पेड दिखे सुंदर हरे छोटे सेब इतने बडे ताजे मिठे बेर बहुत अच्छे थे.नर्मदे हर!राजपिपला से चांदोद को जोडनेवाले पुलके पाससे नरखेडी जानेवाले कच्चे रास्तेके पास एक फॉर्म हाऊसमें फ्रीजका थंडा पानी पिया और उधर जानेवाली कुछ महिलाओंके साथ शामके साडे छे बजे रामदेवबाबाधाम आश्रम पहुँचे.फ्रेश होके नित्यपाठ के बाद रोटीसब्जी का भोजनप्रसाद लेके अब विश्राम.नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-73
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-नरखेडी से कांदरोज-भाग-73-स्नान नित्यपाठ करके हमने आज साडेपांच बजे आगे चलने लगे.आश्रमके बांईतरफसे जाना है ये कलही मालूम कर लिया था.नर्मदे हर!रूंडगांव के बाद आयी करझन मैया.आज चलते चलते महाराष्ट्रके परिक्रमावासी मिल गये मध्यप्रदेशके भी मिले थे.हम पंधराबीस लोग करझनमैया कैसे,कहॉंसे पार करें सोच रहे थे.एक भाईसाब आगे गये पैर डाला और वो एकदमसे क़िचडमें घुटनेके उपरतक ध़स गया,मैया!डर गये.फिर काठीका आधार देके बाहर खिंच लिया.सब बैठ गये.कोई दिखायी नही दे रहा था.नर्मदे हर!नर्मदे हर!नर्मदे हर!मैया!किसीको तो भेजो रास्ता दिखाने,कैसे पार करे ये करझन मैया? और एक कुत्ता आया.हमारे सामने खडा रहा टुकूर टुकूर देखता,और फिर थोडा आगे जाके मुडके हमारी तरफ देखके करझनमैया पार करके उपर जाके बैठ गया नर्मदे हर!सबने जयजयकार किया और उठ खडे हो गये.जहॉंसे कुत्तेने पार किया वहीसे एक के पिछे एक पार होते गये मध्यप्रदेशवाले तो आगे निकलभी गये.हमको फिरभी डर लग रहा था और चार बच्चे आ गये.माताजी बाबाजी आपकी बॅग दे दो और हमारा हाथ पकडो हम लेके चलते है आपको,मैया!कितना करती हो अपने बच्चों केलिये.एकेकने हम चारोंके बॅग्ज लेके हमारा हाथ पकडा.चलो माताजी डरनेकी कुछ बातही नही.एक हाथमें बूट और काठी दुसरा हाथ अनिलके हाथमें पानी गहरा नही था घुटनेतकही था पैरोंके निचे कुछ पत्थर घास पेडकी टहनियां डालके बनाया मार्गथा.हो गये पार.नर्मदे हर!अनिल,सतीश,राजू और मंगेश नाम थे बच्चोंके.करझनमैया पार बैठ गये.बच्चोंके साथ बिस्कीट फरसाण का बालभोग लिया बाकी परिक्रमावासी निकल गये मगर हमारा मार्गदर्शक कुत्ता हमारेलिये रूका था.उसको बिस्किट खिलाये.और फिर बच्चोंको नर्मदे हर करके आगे चलने लगे.पाटणा में शिवलाल वसावाजीने जलपान करवाया.के बाद ओरी गांवमें केलेके बागमेंसे चलके कोटेश्वर मंदिर पहुँचे तब दोपहरके साडेबारा बजे थे.सुंदर मंदिर आश्रम है वहॉंकी माताजीनने भोजनप्रसादमे रोटी सब्जी और मिरचीका अचार परोसा मैने बोला अचार नही चाहिये मिरची तिखी होगी.माताजीने कहा,बिलकुल तिखी नही खाके देखो.सचमे बिलकुलही तिखा नही बहुतही स्वादिष्ट अचार था.विश्राम लेके दो बजे आगे चलना शुरू किया.सिसोदरा,भव्य प्रवेशद्वार है,सुंदर डेरेदार वृक्षतले बैठ गये क़ड़ी धूपसे राहत मिली.नर्मदे हर!किर्तनभाई पटेलजीने कैलासकी टपरीपर चाय दिया.भुपेंद्रभाई पटेल मुकुटेश्वर मंदिर लेकर गये.पुरातन मंदिर है.दर्शन लेके कांदरोज केलिये चलने लगे.अब सिर्फ चार किमि चलना था मगर धूप इतनी थी की लग रहा था चालीस किमि जाना है.एक छोटी नदीमैया पार करनेके बाद दाहिनी ओर कार्तिकेश्वर मंदिर और आश्रम था.आधा किमि चलतेही आगया मंदिर आश्रम.सेवेकरी लडकेने धर्मशाला दिखायी,वहॉं मध्यप्रदेशके बंधूलोगोंने आसन जमाया था और उनका धुम्रपानका साथ साथ जोरजोरसे बातोंका कार्यक्रम चल रहा था.वहॉं बैठनाभी हमारेलिये नामुमकीन था.हमने पेडके निचे बैठना पसंद किया,देखेंगे महाराजके दर्शनके बाद.नर्मदे हर!
आश्रमके महाराज कृष्णानंदजीके दर्शन हुए,उन्होने हमने मांगनेके पहलेही सेवकको हमारा सामान रूममें रखनेकी आज्ञा दे दी.नर्मदे हर.आश्रममें मामाजी पुजारी है,और भरतभाई व्यवस्थापक है.सुंदर पुरातन मंदिर निसर्गसंपन्न आश्रम परिसर है.सामने केलेका बड़ा बाग है.उत्तरतटपर सिनोर दिख रहा था.सोलर सिस्टिमसह सर्व सुविधायुक्त आश्रम है.संध्यारती नित्यपाठ भोजनप्रसादके बाद विश्राम.नर्मदे हर! वंदना परांजपे.
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 74
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-कांदरोज से भावपुरा-भाग-74-
महाराजने कल कहा था बालभोग लेके जाना,हमने जल्दी जाना है बोला था.आज स्नान नित्यपाठ करके दर्शन लेने मंदिर जाते देखा,महाराज स्वतः बालभोग की तैयारी कर रहे थे,हमको देखके बोले आपको जल्दी जाना है इसलिये जल्दी बालभोग.आप दर्शन लेकर आओ तबतक तैयार हो जाएगा.मैया! ऐसे सेवाभाव के आगे नतमस्तक होना इतनाही कर सकते है हम.नर्मदे हर!
लो आपके मराठी बटाटेपोहे,हसते हसते महाराजजीने खुद बडी प्लेट भरके आलू डालके बनाये पोहे हम सबके हाथमे दिये.प्लेट लेके बाजुमें रखके प्रथम उनको प्रणाम किया फिर खाने लगे बहुतही बढ़िया पोहे मॉं की याद आ गयी,परफेक्ट महाराष्ट्रीय जायका था.चाय के बाद महाराज बोले,फिर आना परिक्रमामेंही आना ऐसे नही कभीभी आना आपहीका आश्रम है.कितनी विनम्रता,कितना अपनापन.ऎसा प्यार यही तो रेवाखंडकी खासियत है.नर्मदे हर! विनोबा एक्सप्रेसको ग्रिन सिग्नल दिया तब सुबहके सात बजे थे.कांदरोज गांवके बाद आया रामपुरा.हमारे साथ एक महात्मा चल रहे थे उन्होने एक दुधवालेसे दूध लिया और बोले माताजी आपको चाय पिलानेका मन करता है तनिक रूको.अब क्या बोले?रूक गये.एक घरमें दूध शक्कर चायपत्ती देकर उन्होने चाय बनवा ली और हमको दे दी नर्मदे हर! परिक्रमा एक अलग अनुभवोंका भंडार है.चलो आगे.नावरा,वराछाफाटा,वाडियातलाव,यहॉं आशा जयश्री गोप आश्रम है.अब सुरजचाचूका पारा चढने लगा था,टपरीपरसे थंडे पानीके पाऊच लिये पानी पीकर थोडा आगे गये बायींतरफ का रास्ता वेलूग्राम और दाहिनी तरफका असा जा रहा था हमको दोनोही जगह जाना था कैसे करे?एक आदमीको पुछा उसने कहा असामें दगडूबापूजीका आश्रम है,भोजन निवास सब व्यवस्था है और वहीसे वेलूग्राम भावपुरा जा सकते है.नर्मदे हर!दगडूबापूजी महाराष्ट्रके नंदुरबार डिस्ट्रीकमे चोपडा गांवके संत है.असा व्यतिरिक्त उनके मध्यप्रदेशमें कोटेश्वर तथा नावघाटखेडी{बडवाह}में मोरल संगमके पासभी आश्रम है.तो उनके दर्शन करनेही चाहिये चलो असा.मैया किनारे थोडा उपर निसर्गसुंदर आश्रम है.शिवमंदिर,बापुजींकी गादी,अन्नपुर्णाभवन,निवासीभवन,वृद्धाश्रम सर्वसुविधायुक्त है.नर्मदे हर!
दर्शन भोजनप्रसाद लेकर आगे निकले.मेरी तबियत कुछ ठीक नही थी बुखार आया था.अब हायवेसे चल रहे थे पाणेथाके बाद वेलूग्राम मुझे चलना कठीण हो रहा था मणिनागेश्वर कैसे पहुँचेंगे?मैया!नर्मदे हर! एक स्विफ्ट कार आके हमारेपास रूक गयी.ड्रायव्हिंग सिटपर एक तेजस्वी महाराज बैठे थे.कहॉं जा रहे हो?मणीनागेश्वर.परिक्रमावासी?हां.आज आप नही पहुँच पावोगे थोडा आगे भावपुरामे विजयकृष्णकुटी है आज वही आसन लगाओ कल आगे जाना बैठो गाडीमें.नही,पैदल परिक्रमा है.ठीक है सॅक गाडीमें रखो मै लेके जाता हूँ.नर्मदे हर!स्वामीजी गाडीसे उतरकर डिकीमें हमारी सॅक्स रखके सामान लेके आगे चले गये.नर्मदे हर!भावपुरा का आश्रम बंगालीबाबाजींका है.स्वामी अभिन्नात्मानंद हिमालयमें रहते है कुछ समयकेलिये आश्रममें आते है.मैया के पास एक टेकरीपर छोटासा दो तीन रूमवाला निसर्गरम्य आश्रम है.शामका नित्यपाठ भोजनप्रसाद केबाद स्वामीजींने वेदांत,योगसूत्रपर बताया नर्मदे हर!मैने कुछ दवा लेली की नही ये बडी आस्थासे पुछा.मैया तेरी लिला अगाध है.अब विश्राम.नर्मदे हर! वंदना परांजपे.
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-74
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-74-भावपुरा से भालोद-चाय लेकर सुबह सात बजे विनोबा एक्सप्रेसने आगे प्रस्थान रखा.थोडा निचे उतरकर मैया किनारेसे चलने लगे.थोडा गिला थोडा सुखा,थोडी हरियाली थोडी पथरिली पगदंडीसे चलते एक मैयाके गले मिलनेवाली नदीमैयाके किनारे पहुँचे,बूट निकाल लेनेका काम करते करते एक लडकेसे उस मैयाका नाम पुछा,गोदावरीखाडी!उसने नाम बताया.गोदावरी?मेरे नाशिकमे है गोदावरी,त्र्यंबकेश्वरक्षेत्रमे ब्रम्हगिरी पहाडपर गौतमऋषि को गोहत्याके पातकसे मुक्ति देने गंगामाता यहॉं पृथ्वीपर अवतरीत हो गयी.गोदावरीमैया भागिरथीगंगासे पहले आयी है पृथ्वीपर.मगर यहॉं गुजरातमें गोदावरी?नर्मदे हर!गोदावरीमैया पार करके सरसाडगांव आ गये नर्मदा महांकालेश्वरके दर्शन किये वहॉं गांववालोंने बताया गुप्त गोदावरी और भगवान त्र्यंबकेश्वर के स्थान के बारेमें.इस वर्ष सिंहस्थपर्व चल रहा है त्र्यंबकेश्वर नाशिकमें हर बारासाल बाद जब सुर्य सिंहराशीमेंसे भ्रमण करता है तब पुरा एकसाल कुंभमेला होता है नाशिक त्र्यंबकेश्वरमें.और यहॉं गोदावरीमाताभी गंगामैयाकी तरह खुदको पवित्र करने नर्मदामैयाके पास आती है इस क्षेत्रमें,हमारे अहोभाग्य दर्शन लाभ हो रहा है.रास्ता पुछते पुछते आ गये उस पवित्र स्थानपर.गोमुखसे गोदावरीकी जलधारा निकल रही थी.सामने भगवान त्र्यंबकेश्वरका छोटासा मंदिर है.साथवाले बंधूलोगोंने गोदास्नान किया हमने हस्तपाद प्रक्षालन किया नेत्रस्पर्श करके प्रणाम किया त्र्यंबकेश्वरभगवानके दर्शन किये.नर्मदे हर! वापस सरसाड गांवमें गये.फिर थोडी देर अच्छे रास्तेसे चलने केबाद बायी तरफके कच्चे रास्तेसे पगदंडीसे वठवाडामें खोडियामाता,क्षत्रीय माथीज महाराज मंदिरमें पहुँचे तब सुबहके साडेआठ बजे थे.दर्शन लेकर बैठेही थे श्री.हरेंद्र मकवानाजी चाय बटर बिस्किट लेके आये.मैयाकी भक्ति और परिक्रमावासीओं प्रतिका सेवाभाव काबिले तारीफ है.नर्मदे हर!आगे आया मणीनागेश्वर.सुंदर तीर्थक्षेत्र है.पचाससेभी ज्यादा सिढ़ियोंवाला घाट है.मणीनागेश्वरभगवान के साथही वैदेहीनंदन{हनुमानजी},पार्वतीनंदन{गणेशजी} के दर्शन हो गये.निवास भोजन व्यवस्था अच्छी है.बालभोगमें उबले चने और चाय मिला.बडी कमानवाले गेटसे निकलकर थोडीदेर डांबररोडसे चलने केबाद एक बडे पेडके पाससे दाहिने तरफसे खेतोंमेंसे केलेके बागमेंसे नर्मदाकुटीया दक्षिणतट.वहॉंसे पगदंडीसे निचे उतरकर पहले कच्चे रास्तेसे बादमें डांबररोडसे भालोद पहुँचे.रास्तेमें कुछ मराठी परिक्रमावासीं की भेंट हो गयी वे कल भालोदमें रहकर आज आगे जा रहे थे.नर्मदे हर!आत्रेय दत्तमंदिर पहुँचे.शरदचंद्र प्रतापेमहाराज हमारे स्वागत केलिये खडेही थे.भालोद दत्तमंदिर हमारा मायका है जैसे.इतना प्यार दुलार मिलता है,बहुत सुखद शांति सुकून मिलता है.नर्मदे हर!श्रीगुरूदेव दत्त. घाटपर जाकर स्नान किया.दत्तदर्शनके बाद प्रतापेमहाराजको प्रणाम करके नित्यपाठ करके अन्नपुर्णागृहमें थोडी मदत करने गये.मुझे कलसे बुखार आया है.महाराज बोले,तुम विश्राम करो.नर्मदे हर!
भोजनकेबाद कुछ लोग आगे निकल गये मगर महाराजके कहनेपर हम रूके.नर्मदे हर! दत्तमंदिरमें शामको मोर आते है उनको महाराज स्वयं दाने डालते है.शामको आरती के बाद कढ़ी खिचडी पापड अचार ऐसा भोजनप्रसाद लिया अब दवा लेके विश्राम.नर्मदे हर! वंदना परांजपे.
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 75
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-75-भालोद से जगदीशमढी-दो दिन बुखार की वजह विश्राम करके आज बालभोग लेकर सुबह सातबजे कुछ नये डिब्बे जोडकर हमारी विनोबा एक्सप्रेस निकल पडी.नर्मदे हर!छोटीसी मधुमतीमैया पार करके सौ.मंजुळा और हरीशभाई वसावाजीके आंगनमें बुट पहनने बैठ गये.मंजुळाबेनने मुझे पहचाना और बडी खुशीसे मुझे नर्मदे हर करके बोली,मैया आप इसबारभी महाराजके पासही रूकी हमारे यहॉं रूकनेका वादा किया था नं?मैने बुखारका बताया तो अब रूको कहने लगी.मैया !ऐसा भावभरा प्यार सिर्फ आपके रेवाखंडमेंही मिलता है.नर्मदे हर!उसको समझाके चायपान करके बच्चोंको चॉकलेट देकर आगे चले.गुजरात गॅस स्टेशन केपाससे केलेके बागमेंसे पगदंडीसे अविधागांवके रामेश्वर मंदिर पहुँचे.दर्शन लिया.दुध संकलन करनेवाला टेम्पो आया था,उन्होने सबको दूध दिया.मंदिरके व्यवस्थापक श्री.चुनिलाल भाटिया,रिटायर्ड मलेरिया इन्स्पेक्टर अन्नपुर्णागृह खोलके दूध गरम करके दिया.यहॉं रामेश्वर मंदिरमें परिक्रमावासींको निवासव्यवस्था है और सदाव्रत लेकर भोजन बनानेकी भी सुविधा है.नर्मदे हर!चलो आगे.गांवके बाहर आतेही तरईमढी बोर्ड के बाजुसे दाहिनी ओर पगदंडीसे चलते मधुमतीमैयाके किनारे पहुँचे.चप्पल पहने एकदो भाईसाब पार कर गये हम बूट निकालही रहे थे एकदम एक बुजुर्ग बाबाजी जमीनपर अस्ताव्यस्त लेट गये और रोते रोते मै आगे नही जा सकता मेरा बीपी बढ़ा है मुझे ऍटॅक आया होगा मेरे पैर दक्षिणकी तरफ कर दो ऐसा वैसा,मैया! ये क्या हो रहा है?मै उनके पास गयी,पल्स देखी बिलकुल नॉर्मल थी.फिर सब उनको समझाने लगे.हुआ ये था की आगे गये एक भाईसाब उनको लेके नही गये और अविधामेंभी उन्होने बिस्किट लेनेसेभी इन्कार किया था उनसे बातभी नही की थी.इतनी छोटीसी बात.नर्मदे हर!पार हुए भाईसाब वापस आये उनको बुखार आया था कुछ खानेकी इच्छा नही थी तो बिस्किट नही लिया थकानकी वजह बात नही कर रहे वगैरे वगैरे.समझाबुझाकर सब पार हो गये.नर्मदे हर! जंगलके पगदंडीसे चलके लाडवावड जगन्नाथ मंदिर पहुँचे तब दोपहरके बारा कबके बज चुके थे अब भोजनप्रसादके समय जगदीशमढी पहुँचना ना मुमकीन था.मैया इच्छा सरआंखोपर.नर्मदे हर! दर्शन लेकर शेडमें बैठ गये.बुजुर्ग बाबाजी और बुखारवाले भाईसाब दोनोही ठीक नही थे दोनोने कुछ खानेसे मना किया.नर्मदे हर!बाकी हम लोगोने जो कुछ हमारेपास था मिल बाटकर पा लिया.थोडा विश्रामके बाद बाबाजी के लिये एक मोटरसायकल वाले लडकेको बिनती करके उनको जगदीशमढी भेज दिया.बुखारवाले भाईसाब हमारे साथही चलनेवाले थे.नर्मदे हर!तीन बजे आगे चलने लगे.अब कच्चा रास्ता था.दोनो तरफ केले के बाग,सुखद चलती हवा,धूप कम हो रही थी.पांच बजे जगदीशमढी पहुँचे.प्रथम बाहरकी शेडमें बैठे मगर जगदीशमहाराजजींने हम सबको उपर हॉलमें आसन लगानेको कहा.नर्मदे हर!फ्रेश होकर चाय लेने गये.महाराजजीने बताया हमारे साथवाले बाबाजी उनके रिश्तेदार के साथ गये और अब वह घरही जानेवाले है.नर्मदे हर!भोजनप्रसाद के बाद महाराज खुद हमारेपास आकर बैठे.महाराज अखिल भारतीय पंचश्री रामानंदी निर्मोही आखाडा चित्रकूट बैठक के श्री श्री १००८ महामंडलेश्वर है.उनके श्री सद्गुरू महंत प्रेमपुजारीनगर है.इतने महान संत हमारे सामने जमीनपर बैठे थे.नर्मदे हर!महाराजजींने सत्संगमे बताया,भगवानके चार पहरेदार होते है आशिर्वाद,शाप,पाप,पुण्य.इनके दायरेमें रहनेवाले मानव और बाहर जानेवाले दानव होते है.आशिर्वाद देनेकी किसीकी पात्रता नही होती,मांगनेकी होती है.नर्मदे हर! महाराज बोले रहो एक दो दिन हमने विनम्रतासे कल आगे जानेकी अनुमती मांगी तो बोले बालभोग लेके जाना हम जल्दी जानेवाले है कहनेपर बोले अगर सुबह सव्वा छे बजे उकाळा {हर्बल टी} लेने हाजीर रहोगे तो जाने दुंगा नही तो दस बजे भोजनप्रसाद लेकेही जाना पडेगा.जय श्रीराम.नर्मदे हर!भाईसाब को दवा दी.अब विश्राम.यहॉ अखंड रामायण पाठ चलता है. सौ.वंदना परांजपे.
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 76
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-76-जगदीशमढी झगडिया से सारंगपुर-स्नान नित्यपाठ करके अन्नपुर्णाभवन उपस्थित हुए तब सुबहके छे बजे थे.अंदर कुछ काम चल रहा था शायद चाय बन रहा था हम पेडके निचे बैठकर महाराजजींका इंतजार करने लगे नर्मदे हर!सव्वा छे बजे महाराज आये पिछेसे उकाळा भरा बडा थर्मास.जय श्रीराम!आप आ गये,आज तक इतनी जल्दी तैयार होके आनेवाले पैदल परिक्रमावासी हमने नही देखे.चलो उकाळा ले लो सेहत केलिये अच्छा होता है.हमने उनको प्रणाम किया.उकाळा,शहरी भाषामें हर्बल टी.बहुतही अच्छा टेस्ट एकदम तरोताजा हो गये.नर्मदे हर!साडे छे बजे आगे निकले महाराज हमारेसाथ चलने लगे.मुझे उनके बारेमें पढी एक बात याद आयी,मैने पुछा तब बोले सही है आश्रमको सरकारी अनुदान नही मिलता सबको देनेवाले रामजी है,और राष्ट्रगुरू समर्थ रामदासस्वामीजींका अभंग सुनाया आम्ही काय कुणाचे खातो रे तो राम आम्हाला देतो रे.नर्मदे हर! मतलब हम किसीका क्या खाते है?वह राम हमको देता है.महाराज हमारे साथ दो किमि आये फिर कैसे जाना है इसका मार्गदर्शन करके वापस गये और हम आगे चलने लगे.मोटासांझा,रानीपुरा के बाद हायवे के पाससे दाहिनी ओर मुडके रेल्वेलाइनमेंसे चलने लगे मजा आ रहा था चलनेको,कोई ट्रॅफिक नही हॉर्नके आवाजका ध्वनि प्रदुषण नही.लाइनके दोनो तरफ हरीभरी खेत बागोंका सुंदर सृष्टीका खजिना खुला हुआ था आखोंमे भरके लुट लो जितना लुट सकते हो.पंछी गा रहे है कुदरतका संगीत मधुर मधुर.वा वा!नर्मदे हर! गुमानदेव रेल्वेस्टेशन कब आया पताही नही चला.स्टेशन के बाहर गुमानदेव मंदिरका भव्य कमानवाला गेट था.रास्ता क्रॉस करके गेटसे अंदर पहुँचे तब सुबहके दस बजे थे.नर्मदे हर! भक्तनिवासके हॉलमे सामान रखकर फ्रेश होने चले गये सब बडे तीर्थक्षेत्र जैसाही हाल यहॉंभी था स्वच्छतागृहोंका.बाहरके नलपर कैसे तो हाथपैर धोके दर्शन करने गये लेटे हुए बडे हनुमानजी के दर्शन लिये.नर्मदे हर! बहुत बडा मंदिर आश्रम है.अनुदानकी कुछ कमी नही मगर संपत्ती के साथ आनेवाले दुराभिमानकीभी कमी नही थी,भोजनप्रसाद लेने आये भक्तों परिक्रमावासी लोगोंसे सेवेकरी जैसा बर्ताव कर रहे थे उसमेंसे वो दुराभिमानसे ओतप्रोत भरा था.ए!इधर मत बैठो,समझता नही क्या?कहॉं कहॉंसे चले आते है भीकमंगे.नर्मदे हर!आज बहुत शरम महसूस हो रही थी.कैसे तो पहले जो परोसा गया वही पानीके साथ कैसे तो निगल लिया और उठ गये.नर्मदे हर! हॉलमें आके सॅक उठाकर आगे जाने के लिये बडी श्रीमान कमानके बाहर आये तब दोपहरका देढ बजा था.मनमें विचार आया कहॉं बिना अनुदान वृद्ध अनाथ लोगोंकी सेवा करनेवाले सिधेसाधे तेजस्वी जगदीशमहाराज और कहॉं इधरके पगारदार सेवेकरी.नर्मदे हर!चलो आगे.अब हायवेसे चलना था,कड़ीधूपमें चलना बहुत कठीण हो रहा था.गुजरात बोरोसिल कंपनीके सामने की हरियालीपर पेडकी थंडी छांवमें बैठ गये.एक घंटा विश्राम किया.नर्मदे हर! साडेतीन बजे थे,हेवी ट्रॅफिकवाला रास्ता कड़ी धूप बहुत थक गये थे.जोरिद्रा,गुवालीफाटा मंगेश ओझा एक मैयाभक्त मिलें उन्होने दक्षिणा दे दी. क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 77
नर्मदे हर!अब शाम हो गयी थी और अंकलेश्वर छे सात किमि दूर था इतना चलना असंभव लग रहा था,एक गौशाला थी वहॉं पुछा मगर मालिक के न होनेसे सेवक असमर्थ थे,एक मंदिर था मगर बहुत छोटा.नर्मदे हर!मैया कहॉं की है आपने हमारी निवास व्यवस्था?अब बहुत थक गये है.अगलेही क्षण एक बडीसी गाडी आके हमारे पास खडी हो गयी.नर्मदे हर!माताजी बैठो गाडीमें हमारे यहॉं चलो आज कल चाहिये तो आगे जाना.वह थे श्री.प्रमोद पटेल-भाग्यलक्ष्मी सिमेंट प्रॉडक्टस् सारंगपुर के मालिक.हम गाडीमें नही बैठते इसलिये उन्होने सबकी सॅक्स गाडीमें रख दी और हमको पता समझाकर वे आगे निकल गये.नर्मदे हर!दो किमिपर सारंगपुरमें हमारा ठिकाना आ गया.ऑफिसका फर्निचर बाजू करके हमारेलिये जगह बनायी थी.फ्रेश होने के बाद प्रमोदभाई हम लोगोंको लेके भोजनप्रसाद केलिये एक रेस्टॉरंटमें गये.सबको स्पेशल थाली ऑर्डर की.भोजन प्रसाद अच्छा था.नर्मदे हर!अब निद्रादेवी की आराधना.नर्मदे हर!
सारंगपुर से उतराज-सुबह सात बजे विनोबा एक्सप्रेसको ग्रिन सिग्नल दिया.तीन किमि चलनेके बाद फ्लायओव्हर ब्रिजके निचेसे अंकलेश्वर शहरमें प्रवेश किया और हासोट रोडसे चलने लगे एक जगह टपरीपर चाय लिया फिर आगे रामकुंड गये बाहर पेडोंके निचे बहुतसे परिक्रमावासी ठहरे हुए थे.अंदर धर्मशाला वगैरे है की नही ये पता नही.रामजीके दर्शन लेकर वहॉं एक महाराज थे उनको प्रणाम करके आगे चलने लगे.बलबलाकुंड अच्छी जगह धर्मशाला बगिचा है.एक कुंड है पानीमें बुलबुले आ रहे थे पानी थंड था.वहॉं कोई महाराज नही थे इसलिये चलो आगे.संजोदमें .सिद्धनाथ सिद्धेश्वर दत्त नर्मदामंदिरमें दर्शन अब दोपहर हो गयी थी बसस्टॉपके पास एक हॉटेलमें कुछ खाया और आगे बढ़े मगर धूप बहुत थी रास्तेके बाजुमें एक तुटी झोपडी जैसा था अंदर कोई नही था बैठे थोडी देर तीन बजे आगे निकले हमारे साथकी एक दिदी चलनेको असमर्थ हो गयी इसलिये उसको बससे आगे भेजकर हासोटमें आश्रम वगैरे देखनेको बोला.नर्मदे हर.हम चल रहे थे हासोट पांच किमि था तब दिदीका फोन आया,हासोटमे आश्रम अच्छा नही है इसलिये वह पंचायतसमितीके ऑफिसमें गयी वहॉंके स्टाफसे बातचित करके हासोटके पहले दो किमि पर उतराज गांवमें निवासव्यवस्था कर ली थी और वह उधर आ रही थी.नर्मदे हर!उतराजगांव आया हम रास्तेपर दिदीकी राह देखने लगे.श्री.रमेशभाई पटेल मोटरसायकलसे आये पिछेसे दिदीभी रिक्षासे आ गयी.ग्रामपंचायतके रेस्टहाऊसमें हमारी निवासव्यवस्था कर दी थी.सरपंच अश्विनभाई आये.हमारा नित्यपाठ होनेतक सरपंचजी के घरसे भोजनप्रसाद लेकर भाभीजी और बच्चे आ गये.दालचावल सब्जी पुरी खिर अचार पापड साग्रसंगीत भोजनप्रसाद.साथमें कलके लिये फाफडा,फरसाण लड्डू वगैरे भरपूर पदार्थोंसे भरी थैलियाॉं.नर्मदे हर!मैया तेरी कृपा अगाध है.
वंदना परांजपे.
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 78
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग 78-उतराज से सागरसंगमपार अंभेठा-
स्नान नित्यपाठ करके सात बजे आगे चलना शुरू किया.आठ बजे हासोट पहुँचे.चायनास्ता करके आगे चलनेको तैयार हुए,दिदी इतना चल नही सकती इसलिये वह बादमें कोई वाहनसे हनुमानटेकरी आएगी.नर्मदे हर! हम आगे चलने लगे.रोडके दोनो तरफ वृक्षराजी है रास्ताभी अच्छा है.चलते चलते विश्वमंगलम् आश्रम आया जिसका जिक्र सुहास लिमयेजीके पुस्तक नर्मदे हर हर नर्मदेमें है.गेट बंद था इसलिये हम आगे निकले.अब धूप और सागर समीप होनेसे हवा उमसभरी,चिपचिपा पसीना उठते बैठते पानी पिते पिते हनुमान टेकरी पहुँचे तब बारा बजे थे.दिदी हमारे पहलेही आयी थी.सॅक रखकर फ्रेश होकर हनुमानजी और शनिमहाराज के दर्शन लिया.मुख्य महाराज नही थे,पिछली परिक्रमामें उस बहुत बुजुर्ग शांत हसतमुख महाराजजीके दर्शन हुआ था.नर्मदे हर!भोजन विश्रामके बाद तीन बजे कोटेश्वर जाने केलिये निकल पड़े.मेरा एक परिक्रमाबंधू बदलापुरका रहनेवाला श्री.प्रशांत कुलकर्णी आज इधरसे हमारे साथ चलनेवाला है.नर्मदे हर! आश्रमसे थोडा आगे जाने केबाद दाहिनी ओरसे कच्चे रास्तेसे चलकर चार बजे कोटेश्वर पहुँचे.सुंदर मंदिर,सामने कमल के फुलोंसे भरा पुष्करणी तालाब,बगिचा धर्मशाला,गोपालमहाराज का आसन अखंड धुनि.निसर्गरम्य परिसर है.कोटेश्वर तीर्थमे तेहेतीस कोटी देवोंने तपस्या की है और अमरकंटकसे मैयाके दोनो तिरोंपर हजारों संतमहात्माओंने तप किया है अभी भी कर रहे है,उनके तप स्नानसे पवित्र होता हुआ और स्वयं मैया शिवसुता होनेसे तीर्थजननी है इसलिये प्रवाहके साथ आयी पुर्ण पवित्रता यहॉं एकत्रित हो गयी है.नर्मदे हर!गोपालदासमहाराजजी को प्रणाम करके बैठे.हर साल इतने परिक्रमावासी आते है सबको ध्यानमें रखना कितना मुश्कील हमको तो आजकल मिले इन्सानको पहचानना कठीण होता है,और यहॉं मुझे महाराजजीने नामसे पहचाना,आवजो वंदना केम छो?नर्मदे हर!आज रातको बारा बजे के बाद बोट छुटेगी और अगले हप्तेभी रातमेंही छुटनेवाली है.मैया!दिनमें बोटमें चढना चारपांच घंटेका सफर और फिर बोटसे उतरकर चलना इतना भयंकर होता है तो रातमें?सिर्फ विचारसेही हम पानी पानी हो गये.मगर....मराठीमें एक वाक् प्रचार है आलिया भोगासी असावे सादर.मतलब,जैसाभी समय आए हमें उसका स्विकार करनाही चाहिये.महाराजजीको एकबार फिर प्रणाम करके कोटेश्वर भगवानकी सुखरूप प्रवास हो ऐसी प्रार्थना करके हम कठपोर धर्मशाला की ओर चल पड़े.नर्मदे हर! साडे छे बजे कठपोर गांवसे होकर धर्मशाला पहुँचे.गुमानभाईको फोन किया वह रातको जेटी के पास आनेवाले है.उन्होने मुझे आश्वस्त किया.प्रशांत आ गया.सब का नाम रजिस्टर कर दिया.भंडारीबाबाने भी मुझे पहचान लिया.भोजनप्रसाद केबाद दस बजे बॅटरीकी रोशनीमें चलते बोटस्टॅण्डपर आ गये.दो तीन बसवाले परिक्रमावासी और बाकी पैदल परिक्रमावासी मिलके 100/150 लोग होंगे.एक बस मराठी लोगोंकी है.नर्मदे हर!एक दुसरेसे जानपहचान कर ली,फिर भजन गाने शुरू किये.प्रकाश व्यवस्था छोटे दो बल्ब लगाये थे उससे तो अंधेरा औरही गडद काला लग रहा था.भंडारी बाबा बारा बजे आये और सबके गृप बनाने लगे,गुमानभाई आये मै उनसे मिलकर हमारे गृपकी पहचान करवायी.गुमानभाईने भंडारीबाबाको बताया,वंदनाबेन और उनके साथवाले हमारे बोटमें जाएंगे.नर्मदे हर! एक बजे पानी भरना शुरू हुआ.सारी बोट निचे पानी डाल डालके किचड बनाके उसपरसे ढकेलते पानीमें उतार दी.फिर शुरू हो गयी बोटमें चढनेकी कसरत.हमने सबके बुट एक बोरीमें भरे थे,शबनम थैलीमें स्वेटर पानी मैयाजलकी कुपी वगैरे रखकर प्लास्टीक के थैलीमें पॅक करके गलेमें डाल ली,सॅकभी बडी प्लास्टीक थैलीमें पॅक कर दी थी.अंधेरेमे किचडमेंसे चलकर बोटमें जाते जाते पैर बहुत फिसल रहे थे कुछ लोग गिर गये उनको उठाके खड़ा करना बोटवाले लडकोंको बहुत मुश्कील हो रहा फिर भी वह बडे प्यारसे माताजी बाबाजी कहते मदत कर रहे थे.गुमानभाईने अपने लडकोंको बताकर हम सबकी सॅक बुट रखी बोरी प्रथम बोटमे रखकर हमारा हाथ पकडकर बोटके पास लेकर गये,इतनी सहायता होकर भी बोटमें चढना बहुत मुश्कील था.एक बडा टायर सिढ़ी की तरह बोटपर बांधा हुआ था.उसपर चढनेको एक पैर उठाओ तो दुसरा किचडमें फिसल जाता था टायर इतना उपर था की हमारा पैर तो उधरतक पहुँचही नही रहा था.लडकोंने बडी मशक्कतसे थोडा उठाके थोडा खिंचके बोटमें बिठाया.मैया!सब सेवाव्रती बच्चोंको स्वस्थ और सुखी रखो.नर्मदे हर!दो बजे थे,बोटका मशीन शुरू हुआ,एकसाथ गजर किया नर्मदे हर!नर्मदे हर हर!नर्मदे हर हर हर!जय हो रेवा मैयाकी!हर हर महादेव!और हमारी मराठी गणपती बाप्पा मोरया! थोडी देर तो सब ठीक था.बादमें थंड बढ़ने लगी हवा बहुत चलने लगी.डर लग रहा था.मैया,नर्मदे हर जाप चल रहा था.मगर आकाशमें चमकता चांद और चांदनी और निचे उनके प्रतिबिंबीत प्रकाश शलाकोंसे चमकता मैयाजल.लग रहा था,चंदेरी रूपेरी साडी पहनी मैया अपना लहरोंवाला पल्लू लहराती हमारी बोटको आधार देती हमारी बोटके साथ तैरती चली आ रही थी.नर्मदे हर! नाविक लडकोंने बताया,संगम आया है बॉटल दे दो हम जलबदल कर वापस देंगे कोईभी खुद नही करना जलमें हाथ नही डालना पुजाका सामान दक्षिणा हमको देना.सबने वैसाही किया क्योंकी मैयापर पुर्ण भरवसा विश्वास होने के बावजुद अंधेरा होनेसे डर लगही रहा था.क्योकी संगम आतेही लहरोंकी ऊंचाई बढ़ गयी थी और बोट जोर जोरसे हिलती उपरनिचे हो रही थी.दिन के समय कमसे कम सभोवार दिखता है मगर रात के अंधेरेमें कुछ भी दिखाई नही देता.डर तो लगेगाही.और तो और हमको तैरनाभी नही आता.नर्मदे हर! समुद्रमें डुबता सुरज तो बहुतबार देखते है.मगर आज हमने चंद्रास्त देखा.पश्चिमा रूपेरी चंदेरी आभासे चमक रही थी उसीसमय पुर्वा भगवाकेशरी रंग बिखेरती अरूणोदय हो रहा है ऐसा ऐलान कर रही थी.हमने चांदसुरज दोनोंको प्रणाम किया.नर्मदे हर!बोटका इंजिन बंद हुआ आहिस्ता आहिस्ता बोट रूक गयी.एक दुसरेकी मदत करते सब निचे उतर गये.पानी घुटनोंके उपर था मगर रेत होनेसे फिसलन नही थी.सॅक पीठपर लेके एक दुसरेको पकडकर चलने लगे.बुट रखी बोरी बंधुलोगोंने उठायी.एक देढ़ किमि चलके जमीनपर आ गये.और थोडा चलके बुट पहन लिये.रिलायन्स कंपनी के पास आकर टपरीपर चायपान करके मिठीतलाईके आश्रममें आकर बावडीके पानीसे स्नान करके आगे अंभेठाके कृष्णानंद आश्रममें आये तब दस बजे थे.भोजनप्रसाद होने तक कपडे धो डाले.आज इधरही रहना है बहुत थके है.नर्मदे हर!
वंदना परांजपे.
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 79
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-79-
स्नान नित्यपाठ करके सुबह साडे छे बजे हमारी विनोबा एक्सप्रेस उत्तरतटकी परिक्रमा मार्गपर चल पड़ी.गांवमें प्रवीणभाई सोलंकीने नर्मदे हर करके घरमें बुलाया और चायपान कराया.उनके कहनेपर हम रास्तेसे आगे चलने लगे.हायवेसे चलना है,इतनी सुबहमेंभी ट्रॅफिक बहुत है.एक कंपनीके बाहर चायनास्तेकी टपरी चलानेवाले चित्रकूट के रहनेवाले दिनेशसिंग ठाकूर हमें देखकर दौडके हमारेपास आया और हमारे पैर छुकर प्रणाम करते हॉटेलमें आनेका आमंत्रण दिया.नर्मदे हर!नास्ता आग्रह कर करके खिलाया चाय पिने केबाद आगे चलने लगे.अब धूप सर चढ़कर बोलने लगी थी,ट्रॅफिकभी ज्यादा थी.सव्वा बारा बजे आटोली के आश्रमशालामें पहुँचे. वहॉं पाटील नामके शिक्षक थे.उन्होने भोजनप्रसाद लेकरही आगे जानेको कहा.नर्मदे हर! बरामदेमें आरामसे बैठ गये.भैसलीके अजितभाई पटेलजीका फोन आया कहॉंतक पहुँचे,अंकलेश्वरमे मैने उनको फोन किया था तबसे रोज दिनमें दो बार तो फोन करतेही है घर आनेका निमंत्रण देने.पिछली परिक्रमामें हम उनके घर रूके थे.सरपंच है भैसलीके.उनके दादाजीके समयसे परिक्रमावासीओंकी सेवा करते है.ऐसे सेवाभावी बांधवोंकी सेवासेही परिक्रमा करना मुमकीन होता है.नर्मदे हर!दालचावलका भोजनप्रसाद मिला.सेवाकार्यमें आश्रमशाला,पाठशालाभी कतई पिछे नही है समस्त रेवाखंडकी.नर्मदे हर!विश्राम केबाद 2/45pm को पाटील सर उनके सहकारी और बच्चोंको नर्मदे हर करके आगे चलना शुरू.साडेतीन बजे हायवे केबिचमें रहे दयालूबाबाके मंदिर पहुँचे.वहॉंके सेवक बाबाजींने भी मुझे पहचान लिया.कैसे ध्यानमें रखते है ये लोग?मटकेका थंडा जलपान करके पंधरा मिनिट वहॉं शांत बैठकर आगे चलने लगे.पांच बजे भैसलीमें अजितभाई पटेलजी के घर पहुँचे.सौ.नयनाने सहर्ष स्वागत किया.फ्रेश होकर चायपान के बाद कपडे धोनेका कार्यक्रम किया.चि.अक्षय अब दसवींमे है और उसका छोटा भाई जलू{जलाराम} अब स्कूल जाने लगा है.अजितभाई आने केबाद दालचावल,खीरपुरी,पकोडे,आलूमटरकी सब्जी ऐसा स्वादिष्ट भोजनप्रसाद लिया.भोजनप्रसादके पहले संध्यारतीमें घरके सभी सदस्य भी सामिल हुए थे.अब विश्राम.नर्मदे हर!
वंदना परांजपे.
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 80
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-80-
भैसली से कुकरवाडा-स्नान नित्यपाठ करके चायपान के बाद विनोबा एक्सप्रेसने भैसली स्टेशन छोडा तब सुबहके साडे छे बजे थे.केसरोल के बाद नवेठासे दाहिनी ओर के रास्तेसे भाडभूत पहुँचे.श्रीदत्तगुरू रंगावधूतस्वामी दर्शन लिया.बडा परिसर रहनेकी सुविधा है मगर......भाडभुतेश्वरके पुरातन मंदिरके पुजारी वा व्यवस्थापक जो भी थे उन्होने तो हमें दर्शन केलिये भी अंदर आने नही दिया.नर्मदे हर!वही आगे जाने लगे तो श्रीमती बालीबेन ठाकुर,उनके पुत्र श्री.रोहीतभाई ठाकुरजीने बडे आदरसन्मान के साथ घर बुलाया.नर्मदे हर!बोले,दोनो मंदिरोंकी व्यवस्था अब बदल गयी है अब उनको सेवा करनेकी आवश्यकता नही है.मगर हमको बहुत है,मैयाकाही सहारा है हमको.भाडभूतमें मैयापर बांध होनेवाला है ताकी सागरका खारा जल मैयाके प्रवाहमें न आ सके और मैयाजलका उपयोग भरूच अंकलेश्वर को पिने और उद्योग केलिये हो सके.बांधपरसे बडा हायवे जाएगा.परिक्रमावासी उसपर बननेवाले फूटपाथसे ही दक्षिणतटसे उत्तरतटपर आएंगे.बोट के लियेभी ज्वारभाटाका समय देखनेकी जरूरत नही रहेगी.उतराजके सरपंचजीनेभी हमें यही बताया था.बांध होतेही भाडभुतेश्वर मंदिर नही रहेगा.नर्मदे हर! {मध्यंतरी इस बांधका भूमिपूजन होनेकी खबर पढ़ी}नर्मदे हर! बालीबेन ठाकुरजी के घर परिक्रमावासीओंकी बहुत अच्छी सेवा होती है. मंगलेश्वर के ज्योतिबेनकी तरह ये भी बेनतीर्थही है.स्वादिष्ट भोजनप्रसाद पाकर अंतरात्मा संतुष्ट हुआ.नर्मदे हर!एक बजे मैयाकिनारेसे मगर थोडे उपरके पगदंडीसे आगे चलने लगे.सुंदर हवा चल रही थी खेत बागानोंसेही चल रहे थे मगर खारी हवा और धूपसे चिपचिपा पसीना आ रहा था.वडवा के बाद दसानमें बिपिनभाई पटेल के यहॉं जलपान किया.दसानमें मंदिर और मशिदमें एकही कॉमन दिवार है.एकोपा रखते आरती और नमाज़ होते है.हमने दोनो जगह जलपान किया और थोडी थोडी देर विश्राम किया.सब एकही मैयाकी संतान है.दोनों जगह एकही सन्मान मिला.नर्मदे हर!वेरवाडा के बाद आया कुकरवाडागांव.सौ.विद्याबेन उत्तमभाई पटेलजीने बिस्किट और चाय दिया.त्रिगुणातीतधाम जहॉं हमें जाना था वह अभी और दो किमि दूर था.हमारी साथवाली दिदी कलही उधर गयी थी.सात बजे आश्रम पहुँचे.रूममें आसन लगाकर फ्रेश होकर नित्यपाठ किया और फिर शिवजी और स्वामी लोकेशानंदजीके दर्शन करने गये.मंदिरमें मंदार गणेश है.स्वामीजीके एक मुस्लीम भक्त को जंगलमें प्रथम दर्शन हुआ उन्होने महाराजको बताया तब महाराज उसके साथ गये और लेके आए.भोजनप्रसादमें दिदीने पुरणपोळी बनायी थी.स्वामीजी हमारेसाथही भोजनप्रसाद लेने बैठे.भोजनके साथ साथ सत्संगभी हुआ.स्वामी बोले,हर कोई जोभी करता है वह स्वानंद केलिये करता है.मै मेरा काम स्वानंद केलिये करता हूँ,माताजींने पुरणपोळी बनायी क्योंकी उनको उसमें आनंद मिला,आप परिक्रमा कर रहे हो स्वानंद केलिये.नर्मदे हर.अब विश्रांतिका समय.
वंदना परांजपे.
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 81
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-81-
कुकरवाडा से भरूच,झाडेश्वर-निलकंठेश्वर मैया का दिव्यदर्शन-स्नान नित्यपाठ करके शिव मंदारगणेश दर्शनके बाद स्वामी लोकेशानंद महाराज को प्रणाम करने गये.महाराज बोले,हर एक व्यक्तिको शांति आनंद मिलना चाहिये सब ईश्वरी अंश होते है.ईश्वर केपास जाओ शांति आनंद मिलेगा.नर्मदा परिक्रमा ईश्वर केपास जानेका योग्य मार्ग है,एक तपस्या है.नर्मदे हर!बालभोग और दूध लेकर विनोबा एक्सप्रेसने कुकरवाडा स्टेशन छोडा तब सुबहके साडेआठ बजे थे.तीन किमि चले और भरूच शहरमें हमारा प्रवेश हो गया.दिदी ऑटो रिक्षासे निलकंठेश्वर गयी आज वहॉं हम रहनेवाले है.नर्मदे हर!भरूच शहरका बाजार देखते देखते जा रहे थे.बहुत बड़ा शहर है.एक मेडिकल स्टोअरसे कुछ मेडिसिन लेने गये वह दुकान श्री.सय्यदजीकी है.उन्होने चाय बिस्किट दियाही उपरसे मेडिसिनके पैसेभी नही लिये.नर्मदे हर! पुछते पुछते शंकराचार्य मठ नर्मदा मंदिर पहुँचे तब बारा बजनेवाले थे.दर्शन लेकर धर्मशाला के लिये पुछा तब वहॉ कोई सुविधा नही ऐसा मालूम हुआ.नर्मदे हर!सिढ़ियां उतरकर मैया किनारेसुे जाने लगे मगर बडा रेतीला मैदान था मैयाका प्रवाहभी बहुत दूर था.मैदानमें बहुत गंदगी थी चलना बहुत मुश्कील था.मुझे बहुत सरदर्द हो रहा था धूप बहुतही कड़ी हो गयी थी हम वापस रोडपर आ गये.मुझे चलना कठीण हो गया.इसलिये मैने ऑटोरिक्षासे निलकंठेश्वर जानेका निर्णय लिया साथके बंधुभगिनीओंके सॅकभी रिक्षामें रखकर मै निलकंठेश्वर पहुँची.नर्मदे हर.एक बडे पेडके निचे सबका सामान रखकर देखा तो ऑफिस बंद था.दिदीने रूम लेली होगी इसलिये उसको देखने मै अन्नपुर्णागृहमें जाकर पुछनेहीवाली थी इतनेमें भंडारीजी आये और एकदमसे मुझपर जोरसे चिल्लाये,खाना बिना कुछ नही मिलेगा कभिभी आओगे हम क्या परोसनेही बैठे है?मैने कहा,भोजन नही चाहिये मेरी परिक्रमावासी दिदी आयी है वो कहॉं है? कोई नही आया चलो निकलो बाहर.भाईसाब!आज हम यहॉं रहनेवाले है दिदीने रूम लेली होगी ऑफिस बंद है इसलिये पुछ रही हूँ मेरी दिदी?हां हां आयी थी,नारेश्वर चली गयी.रूम वगैरे नही मिलेगी पेडके निचे रहो जाओ.बाप रे!एक नौकर तो एकदमसे दंडा लेके मुझे मारनेही आया.नर्मदे हर!मै सामानके पास आके बैठ गयी.संतापसे मुझे रोना आने लगा,सर दर्दसे फटने लगा.दिदी ऐसे कैसे चली गयी होगी?एक फोनभी नही किया.अब मै क्या करूँ?बैठी रही.मैया!मै रिक्षामें बैठकर इधरतक आ गयी गलती हो गयी माफ करो.नर्मदे हर!और अन्नपुर्णागृहसे दिदी बाहर आ गयी.मैने उसको सब बताया.मुझे बहुत रोना आ रहा था.मैया!पहले परिक्रमामें हमने आपको पुकारकर मदत मांगी तो आप तुरंत किसीको भेजकर मदत करती थी,तब मेरे साथ पुण्यवान लोग थे इसलिये?मेरा कुछ नही है क्या?इतना अपमान हुआ मेरा,आप कहॉं हो?मैया!नर्मदे हर!और एक सफेद ऍक्टिव्हा आके एकदम मेरे पास आकर खड़ी हो गयी.एक शुभ्र सफारीसूट पहने माथेपर केशरी तिलक सजाये गोरेपान तेजस्वी व्यक्ति बैठे थे उसपर.मैने प्रणाम किया और फिर दिदीसे बात करने लगी.उन्होने पुछा क्या हुआ?मैने कहा रूम चाहिये मगर नही बोलते है.क्यों पैसे भरके रूम मिलती है.रूको बोलकर वह ऑफिसमें गये.थोडी देर बाद मुझे बुलाया और खुद रूमके पैसे देने लगे मैने कहा पैसे है हमारेपास मैयाकी कृपासे पैसोंकी कुछ कमी नही.तो वह बोले रूमके पैसे मै देता हूँ आप सौ रूपये देना डिपॉझिटके और कल ये वापस लिये बगैर आगे जाना नही.रूम नंबर पांचकी चावी लेकर हम बाहर आ गये.दंडा दिखानेवाले नौकरको चावी देकर उन्होंने सामान उठाकर रूम खोलनेको कहा मगर उसने सामान उठानेसे मना किया और रूम खोलने जाने लगा.अब इन लोगोंका समय आया है ऐसे कहकर हमारे समझमें कुछ आनेसे पहलेही उन्होने एक हाथमें दो और दुसरे हाथमें दो सॅक्स उठायी और तेजीसे रूमकी तरफ बढ़े हम अपनी सॅक उठाकर उनके पिछे दौडे.रूम खुली,उन्होने सामान दिवारकेपास रखा और कोई औरत की तरह बोले,अब मै थोडा बैठती हूँ.हां हां बैठो मैने कहा और पंखा चलाया तब भी मेरे ध्यानमें नही आया था बैठती हूँ का मतलब.उनका चेहरा लाल लाल हुआ था,आंखे नासाग्री स्थिर हो गयी थी और वह कैसे तो कर रहे थे हम डर गये मुझे लगा इतना भारी बोझ उठानेसे उनको ऍटॅक तो नही आया?पसिना पसिना हुए थे.उनको हिलाकर मै झुककर पुछने लगी क्या हो रहा है आपको?तो मेरे सरपर हाथ फेरते बोले,डरो नही मैया हूँ!हम अवाक् हो गये झटसे पैर छुए.मैया? मेरी आंखे बंद होगयी शुभ्रवस्त्रांवृता मैया हस रहीथी.क्षणैक दर्शन.बोली,तीन बार पुकारो आ जाऊंगी.तेरी परिक्रमा पुरी हो गयी.मेरी आंखे खुल गयी.मैया जल पिओगी?दिदीने बॉटल उनके हाथमें दी,बॉटलमें मैयाजलही था आज.मैने कहा,आपही का जल आपही पी रही हो मैया,तब मेरी तरफ देखकर ऐसी मिठी हसी,अपने छोटे बच्चेको देखकर मॉं कैसी हसती है?वैसी सुंदर हसी मै एक क्षणभरभी नही भुल सकती.पॉकेटसे पांच सौ की नयी कोरी नोट मुझे देकर बोली लेलो प्रसाद दर्शन नाम है मेरा.नर्मदे हर!आंखे बंद करके बैठे रहे पांच दस मिनिट और हम उनको हाथ जोडकर उनको देख रहे थे.नर्मदे हर!थोडी देर बाद उठ खडे हो गये.बोले,मुझे एक छोटीसी थैली भी उठाने की आदत नही मुझे नही मालूम मैने इतना बोझ कैसे उठाया? नर्मदे हर!अब वह हमारे पैर छुने लगे हमारे मना करनेपर बोले तब मैया थी अब मै हूँ.और आप परिक्रमावासी माताजी हो,बोलकर हमको प्रणाम किया.नर्मदे हर!चले गये दर्शनका वह रत्नजडीत सुवर्णक्षण मेरे ह्रदय संपुटमें बंद करके.नर्मदे हर!नर्मदे हर हर!नर्मदे हर हर हर! यथावकाश साथी बंधुभगिनी आ गये.संध्यासमयी हम पुजारती साहित्य लेकर घाटपर गये.सुर्यास्त हो रहा था लाल गुलाबी केसरिया रंगोंसे आकाश चमक रहा था और मैया उस रंगोंमे नहा रही थी.अर्घ्य देने हमने कमंडलूमें जल भर लिया और पश्चिमाभिमुख होकर अर्घ्य देने लगे तो उस देखा उस जलधारामेंसे वही शुभ्रवस्त्रांवृता मैया मुस्कुराती दाहिना हाथ उठाकर प्रकाश शलाकारूप आशिर्वाद दे रही थी.नर्मदे हर! यह मेरा वैयक्तिक अनुभव है.
वंदना परांजपे.
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 82
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-82-
निलकंठेश्वर से मंगलेश्वरका बेनतीर्थ-सुबह स्नान पुजापाठ करके निलकंठेश्वर दर्शन लेकर कुछ लोग आगे चले गये हम चार लोग रूके क्योंकी कल मैयाने कहा था,डिपॉझिट के पैसे वापस लेकरही आगे जाना.नर्मदे हर!साडेआठ बजे अभीतक ऑफिस नही खुला था,नाईलाजसे डरते डरते अन्नपुर्णागृहमे जाकर सेवकको पुछा उसने कॉर्टरमें जाके पुछनेको बोला.जाके देखा.कल ऑफिसमें जो भाईसाब थे वही थे उनको नर्मदे हर किया उन्होने सौ रूपये दिये और कलके बर्ताव केलिये हमसे सॉरी कहा.नर्मदे हर!रूम की चावी वापस देकर हम बाहर आगये.टपरीपर चाय लेकर हमने प्रस्थान किया तब सव्वा नऊ बजे थे.तवरा,जुना तवरामें गणूमामाके आश्रममें चायपान के बाद आगे चलने लगे श्री.राजूभाई तनछावाला मिलें वह निकोरागांवमें रहते है कल उनके घर बुलाया है.नर्मदे हर! चल रहे थे धूप बोलने लगी थी.एक कार हमारेपास आकर रूकी एक भाईसाब उतरे,उन्होने सबको बिस्किट दिये नमस्कार किया नर्मदे हर.बापा सिताराम मंदिर मढुली दर्शन लेकर विश्राम करने बैठ गये.सफरचंद,बिस्किट वगैरे खाकर पेटपुजा कर ली.शुक्लतीर्थ पहुँचे.गुरूदत्त अमूल पार्लर से आइसक्रिम लिया बसस्टॉपमें बैठकर थंडगार आइसक्रिमका आस्वाद लिया बहुत थक गये थे थंडे आइसक्रिमने तरोताजा कर दिया.इंद्रसिंगजीने हम सबकी सॅक मंगलेश्वरमें ज्योतिबेन के घर पहुंचाने केलिये अपनी गाडीमें रख दी और हम शुक्लतीर्थ दर्शन करने चल दिये.नर्मदे हर!एकही जगह श्रीशुक्लेश्वर,श्रीसोमेश्वर,श्रीपट्टेश्वर तीन स्वयंभू शिवपिंडी है.श्रीशुक्लेश्वरकी पिंडीपर बाबा अमरनाथकी पिंडी अंकीत है,सोमेश्वरकी पिंडीपर ॐ है और पट्टेश्वरकी पिंडीपर त्रिपुड अंकीत है.पुरातन मंदिर है.दर्शन लेकर श्रीओंकारनाथजी के मंदिर गये.भगवान विष्णूको ओंकारनाथ कहते है.शंख चक्र गदा पद्म ब्रम्ह श्रीलांछन भृगुलांछन कमलपुष्प जयविजय इत्यादि श्रीचिन्हांकित भव्य संगमरवरी मुर्ति नर्मदामैयामें मिली है.अप्रतिम सुंदर दर्शन.नर्मदे हर!धीरे धीरे शामके साडे छे बजे मंगलेश्वरमें ज्योतिबेन बोनिबेन कमलाबेन इनके घर जिसको जेष्ठ मैयापुत्र नर्मदाप्रसाद जोशीजीने सार्थ नाम दिया है बेनतीर्थ पहुँचे.मुझे देखकर धनंजयभाईसह सारी बेनको बहुत खुशी हो गयी.सहर्ष स्वागत हुआ.नर्मदे हर!
ज्योतिबेन के घर पिछले पचाससाठ सालसे परिक्रमावासीओंकी सेवा हो रही है.शशीबेनजीने ये सेवाकार्य शुरू किया.सेवाकार्यमें बाधा न हो इसलिये ज्योतिबेन बोनीबेनने शादी नही की है.कमलाबेन आंखोंसे देख नही सकती मगर उनकी दृष्टीहिनतासे उनके किसीभी काममें कोई बाधा नही आती.सब काम सहजतासे करती है,घरमें झाडू लगाती है तो वहभी किसी अच्छी नजरवालेसे सौगुना बढ़िया.कचरेका एक तिनकाभी इधरउधर नही रहता.मैयाकृपा है.मुझे सिर्फ आवाजसे पहचाना मेरा नाम लेकर पुकारा आओ वंदनाबेन.यथावकाश नित्यपाठ भोजनप्रसाद हुआ.ज्योतिबेनने सबको सील दिया.अब विश्राम.नर्मदे हर!
वंदना परांजपे.
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 83
॥नर्मदे हर॥नर्मदा परिक्रमा-भाग-83-
मंगलेश्वर से नारेश्वर-सुबह पांच बजे बेनतीर्थको नर्मदे हर किया.भारद्वाज आश्रममें दर्शन लेकर कबीरवड को इसी किनारेसे नमन कर आगे बढ़े.निकोरामें श्री.राजूभाई तनछावाला के घर गये,कल उन्होंने बहुत आग्रह करके बुलाया था.नर्मदे हर!राजूभाईने शादीके तुरंत बाद मोटरसायकलसे परिक्रमा की थी.उनके घरसे मैया किनारेतक उनकी जमीन है बोले,बाबाजी!यही आपकेलिये कच्ची पक्की जैसी आप चाहो वैसी कुटिया बनवा देता हूँ परिक्रमा पुरी होने केबाद यही आकर रहो.नर्मदे हर!बाबा बस् इतनाही बोले.राजूभाईको एक फ्रेंच महात्मा शिवशंभू और सिल्वी माताजी परिक्रमामें मिली थी उन्होने कहा था,चलना है पहुँचना कही भी नही.sitting quietly,doing nathing when spring comes grass will grows it's self ये झेन पोएम बतायी चलते समय अपना ध्यान पैरोंके उंगलियोंकी तरफ रखोगे तो अवेअरनेस अपनेआप आ जाएगा.नर्मदे हर! बहुतसारा बालभोग और चाय लेनाही पड़ा.उन्होने सोमजके जगदीशभाई का फोन नंबर दिया और उनके घर जानेको कहा.नर्मदे हर! निकोरासे धर्मशिला मिनी शिर्डीधाम पहुँचे.पहली परिक्रमामें इधर हम रूके थे.आज प्रेमावतार साईकी भेंट हो गयी पिछली बार वो नही थे.ये बाबाजी उल्टे पांवसे चलते चलते शिर्डी जाते है.साईबाबा जैसी दाढी रखते है और पोषाखभी वैसाही करते है.सत्संगमे बाबाजी बोले,बडे बडे साधू गुरू महात्मा स्त्रीको पैरोंको स्पर्श करने नही देते,उनको कम समझते है मगर ऐसे गुरू होही नही सकते अगर स्त्री न होती तो अपना जन्म कैसे होता?स्त्रीको वर्ज्य करके आप गुरू नही हो सकते.स्त्री पुरूष दोनो ईश्वर निर्मित है.स्त्री देवीका अवतार है सच्ची त्याग मुर्ती है.अपने मातापिताको छोडकर पतीके घर आकर अपना अस्तित्वही भूल जाती है अपना सर्वस्व अर्पण करती है अपना नामतक भूलकर ससुराल वालोंने दिया नाम अपनाती है.पतीके लोगोंकेलिये अपना सारा जनम देती है ऐसे शक्तिरूप को आप तुच्छ समजते हो?महाराज बड़ी आंतरीक पीडासे बोल रहे थे.हमको बोले,माताजी! अन्नपुर्णा बनो लक्ष्मी बनो.माताजी,स्त्रीको गुरू करनेकी आवश्यकता नही वह तो साक्षात देवी है.गुरूतत्व परमात्म तत्व एकही है,अपने आपमें उसको खोजो.नर्मदे हर!माताजीने उपमा चायका बालभोग दिया.मैने उनके बच्चोंके बारेमें पुछा,बेटी LLM कम्प्लीट करके कलेक्टर होनेकी तैयारी कर रही है और बेटा इंजिनिअरिंग कर रहा है.नर्मदे हर.मिनी शिर्डीधाम बहुतही साधा है उपर पत्रेकी छत और निचे इटोंसे बनी जमीन है दरवाजे खिडकी कुछ नही.थोडा फलफुलोंका बगिचा है.नर्मदे हर!आगे झणोर.शॉर्टकटसे वाग्रा विलायत वॉटर सप्लाय NPTC,ONGC केंद्रसे होकर नांद पहुँचे.वहॉं विजयराज नामका युवक मिला और हमको उसके घर लेकर गया.उसने बोला इसलिये उसके घर स्नान करके नित्यपाठ किया भोजन केलिये तो सोमजमें जगदीशभाईके घरका आमंत्रण था इसलिये थोडे पोहे और चाय लेकर आगे निकले विजय शॉर्टकट दिखाकर ऑफिस चला गया मगर हम रास्ता भटक गये कुछ परिक्रमावासी मिल गये.बबूलके जंगलसे बिकट पगदंडी थी आगे एक जगह तो वहभी समाप्त हो गयी हम एक टेकरीपर खडे थे बिचमें छोटीसी खाई और सामने दुसरी टेकरी.वहॉं एक बर्मुडा पॅन्ट पहने महात्मा खडे थे वह बोले,अच्छाखासा रास्ता छोडकर इधरसे कैसे आ गये?फिर वो निचे उतरकर आये उनकी और दुसरे परिक्रमाबंधुओंकी मदतसे घासपरसे फिसलकर खाईमें उतरे.हमारा डर देखकर बोले,परिक्रमा करते हो और मरनेसे डरते हो?और हमको हाथ देकर वह दुसरी टेकरी चढनेमें मदत की.सब आनेके बाद देखा तो वह कही नही थे दो चार क्षणोंमें कहॉं गये होंगे?दूर दूर नजर डाली मगर वो नही दिखाई दिये.नर्मदे हर.फिर एक कठीण पगदंडीसे नालेमें उतरे पानी न के बराबर था पार करके फिर एक टेकरी चढकर उपर आ गये.एक बेर के पेडतले बैठे,बेर खानेसे खुदको रोक नही सके बहुत अच्छे खट्टेमिठे बेर थे.वापस एक टेकरी चढकर खेतकी पगदंडीपरसे चलने लगे तब बांयी ओर पिछली परिक्रमामें आये थे वह रास्ता दिखायी दिया.इस साल भटक गये ठीक है मैयाने थोडी परिक्षा लेली मगर उसीनेही सही मार्गपर लाया.नर्मदे हर!जगदीशभाईने उनके छोटेभाईको भेजा उसके पिछेसे उनके घर गये.बाकी परिक्रमावासी बंधू चाय लेकर आगे चले गये हम मोबाईल चार्जींग भोजनप्रसाद लेकर थोडा विश्राम करके फिर तीन बजे आगे चलने लगे.जगदीशभाई दिलवाडाके आगेतक हमारे साथ आये.नर्मदे हर!हायवेपर बसस्टॉपपर श्री.हनुमानदास-प्रेमकुटी वृंदावन आश्रम गोरे ताऊजी केपास रामानंदआश्रमका तरूण सुशिक्षित संन्यासी मिल गया वह नागालॅन्डका रहिवासी है.अब हायवेसे चलना था.अर्जुनपुरा,ओज मीराआश्रम यहॉं कुछभी सुविधा नही है.पुनीतपुरा,रारोद यहॉं मैया किनारे मार्कंडेयऋषि महाराजजी की तपस्यास्थली आश्रम है.मोटी कोरल पुनीत आश्रम नारेश्वररोड रेल्वे क्रॉसिंग गेटपर चाय लेकर नारेश्वर रंगावधूतस्वामी समाधीस्थल भक्तनिवासके ऑफिसमें आये.B2 में रूम मिल गयी तब साडेसात बजे थे.भोजनप्रसादका समय हो गया था इसलिये पहले भोजनप्रसाद लेकर बादमें रूममें आ गये.हनुमानदास कोभी बाजूकीही रूम मिली है.कल यही रहना है दर्शन के लिये अब विश्राम जरूरी है.नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग- 84
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-84-
नारेश्वर दर्शन-आज आगे जाना नही था इसलिये थोडी देरसे उठे.कल रातको कपडे भिगोकर रखे थे इसलिये पहले कपडे धोकर सुखाने डालकर फिर मैयास्नान करने गये.स्नान करके वही मैयाकी आरती उतारके हम घाटकी सिढ़ियां चढने लगे मुझे एकदमसे चक्कर आने लगी मै वैसेही चल रही थी सिढ़ियां खतम होनेही वाली थी,मुझे लगा सारा गरगर घुम रहा है मै गिरनेही वाली थी की एक सफेद बाल दाढीमुछ वाले घुटनेतक लुंगी पहने बाबाजीने मेरा हाथ पकडा और मुझे बेंचपर बिठाया.थोडीदेर मै आंख बंद करके बैठी रही,मुझे लग रहा था वह मेरे बाजुमें खडे है.थोडा ठीक लगतेही मैने उनको धन्यवाद कहने आंख खोलकर देखा तो वह नही थे,मैने इधरउधर देखा वह कही भी दिखायी नही दिये.इतनी जल्दी कहॉं गये होंगे? आस्ते आस्ते चलकर मै रूममें आ गयी मुझे अभिभी ठीक नही लग रहा था शायद शुगर डाऊन हो गयी होगी इसलिये निचे उतरकर नारेश्वर स्पेशल पापडीलोट और गोटेभजिया का नास्ता किया नास्ता करतेही मुझे ठीक लगा नर्मदे हर!फिर गये श्रीरंगावधूत महाराजजी का दर्शन करने एक नीमके वृक्ष तले बने स्मारकमें एक बडी तसवीर थी अरे!यही तो है वह बाबाजी जिन्होने मेरा हाथ पकडकर बिठाया था.नर्मदे हर! हम मंदिरमें गये दर्शन लिया महाराजके सामने माथा टेका और मेरे आंखोंसे आंसू बहने लगे बापजी!आपने मुझे सहारा दिया. सही कहते है सब लोग आपको बापजी,सबके पिताजी बापू हो आप.नर्मदे हर! माताजीका दर्शन लिया.सारा मंदिर परिसर देखा बहुत सुंदर है बडे बडे छायादार वृक्ष,छोटे छोटे ध्यानमंदिर,सुंदर बागबगिचा. कपर्दिकेश्वर मंदिर बहुतसाल पहलेकी बात है मैयाको आयी बाढ़में ये शिवपिंडी बाढ़की मलबेमें दबके रह गयी कुछ साल बाद मराठा सरदार नारोशंकरजीने इसको खोजा,पुनः स्थापित किया उनके नामसे ये पौराणिक कपर्दिकेश्वर हुआ नारेश्वर.फिर मराठा साम्राज्य गया अंग्रेज आये और कालाय तस्मै नमः यहॉं जंगल तयार हुआ बबूल की झाडी हो गयी थी.श्रीरंगावधूत महाराज यहॉं आकर जनसंपर्कसे दूर रहने लगे.इसी नीमके पेड के निचे रहते थे तब मध्यरात्री के बाद मंदिरमें अप्सरा नृत्य गायन करती थी जब बापजी लेटे रहते तब नृत्य गायन चलता था और उठके बैठतेही वह गायब हो जाता था.फिर बापजीकी माताजी उनके पास रहने आयी भक्तगण आने लगे और ये श्रीरंगावधूत का स्थान बनता गया.बापजी ब्रम्हलिन तो हरिद्वारमें हो गये मगर वहॉंसे उनका देह यहॉं लाया और समाधी बनायि गयी.नर्मदे हर!एक बुजुर्ग बाबाजींसे पुछकर परिक्रमा खंडीत नही होगी ये जान लेनेके बाद हम ऑटोसे मोटी कोरल पुनीत आश्रम देखकर आ गये.मुझे अभिभी थोडा अनईझी लग रहा था इसलिये संस्थानके हॉस्पिटल गये वहॉं माधुरी पटेल नामकी मिलिट्रीसे रिटायर सिस्टर थी उन्होने डॉक्टरसाब को कहा रियल परिक्रमावासी आये है.डॉक्टरसाबभी बहुत अच्छे थे,दवा लेकर वापस आ गये.संध्यारती के बाद भोजनप्रसाद लेकर रूमपर आकर दवा लेली.अब विश्राम.नर्मदे हर!
वंदना परांजपे.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-85-
॥नर्मदा हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-85
नारेश्वर से मालसर-सुबह पांच बजे श्रीबापजी रंगावधूतस्वामीं दर्शन लेकर आगे निकल पड़ी हमारी विनोबा एक्सप्रेस.गेटसे बाहर टपरीपर चाय लेकर आगे चलने लगे.लालोद,बकापुरा,हीरजीपुरा,कहोणा,यहॉं मैयाकिनारे रामानंद आश्रम है.फत्तेपुर पार करके डेरोली गांवमें सौ.जोत्स्नाबेन ठाकूरके घर गये नर्मदे हर! मुझे तुरंत पहचान लिया और सहर्ष स्वागत हुआ.सबने हमारे पैर छुकर प्रणाम किया.ज्योतिबेन अब सरपंच नही है ये सीट अब आदिवासी केलिये रिझर्व हो गयी है.गरम गरम पकोडे चाय लेकर हमने ठाकूर परिवार को नर्मदे हर किया तब आठ बजे थे.अब कच्चे रास्तेसे पगदंडीसे चलना है.रास्तेमें एक आश्रमका काम चल रहा था.आगे एक सुंदर बंगला है,निचे सुंदर नीलश्यामल मैयाप्रवाह,दक्षिणतटपर हरीभरी वृक्षराजी नितांतसुंदर परिसर है.कोठिया जाते पिछली परिक्रमामें जिनके घर चायपान किया था वह अशोकभाई पटेल मिले,नर्मदे हर घर जरूर जाना पिताजी है बोले.प्रथम इंदिरा आवास योजना के घर लगे गरीब लोगोंकी बस्ती है.बादमें कोठिया गांव हम रूके नही आगे वसुधा नामकी लडकी हमारी मराठी बात सुनकर बाहर आ गयी उसका मायका महाराष्ट्रके बुलढाणा का है.नर्मदे हर! गटर व्यवस्थापन गेटमेंसे बाहर आकर थोडीदेर पगदंडीसे चलकर फिर कच्चे रास्तेसे राणापुर पहुँचे.तब नौ बजे थे.रणछोडरायजी के मंदिर गये पहली परिक्रमामें यहॉं हमने सदाव्रत लेकर खिचडी बनायी थी.एक पंजाबी परिक्रमावासीभी मिले थे.आज मंदिर बंद था बाहरसे दर्शन लेकर चल पडे और श्री.भुपेंद्र दवे पंडीतजीके घर गये.उनके घरमें दोसौ सालसे सत्यनारायण मंदिर है वह दो बार मैयाके बाढ़में बह गया था मगर लक़डी के खंबे वगैरे खींच निकालकर फिर मंदिर बनवाया उसकेलिये उनके पिताजीने जमीन बेची थी.दर्शन लेकर गरम दूध पिया और चोळाफळी,शेव,चिवडा,मोरी पापडी खरीद ली.दस बजे आगे निकले.कच्चा रास्ता,थोडी कठीण चढाई उतराई पगदंडी कपास तूवरके खेत केले के बागमेंसे चलते ग्रामीण बंधुभगिनीओंकी मदत लेते दिवेरमें रोडपर आ गये और वालेश्वर हनुमान मंदिर आश्रम पहुँचे.स्नान करके कपडे धोकर सुखाने डाल दिये.निर्माणाधिन आश्रम है बहुत सुंदर बगिचा है.निचे थोडी दुरीपर मैया है.विजयमहाराज आश्रमका कारोबार देखते है.बैंगनकी सब्जी,तुवरके दानेकी सब्जी,दालचावल,भाकरी,चुरमाके लड्डू और छाछ बढ़िया भोजनप्रसाद विश्रांति केबाद 2-30 बजे आगे चलने लगे कभी गुलमर्ग जैसी हरियाली कभी कठीण पगदंडी कभी गरम रेतका वाळवंट कभी खेतमेंसे जाती पगदंडीसे मांडवा के पहले एक पीरबाबाके दर्गेकेपास चाय लेकर शॉर्टकटसे आगे निकले ऐसे करनेसे सुरसामल मांडवा एक बाजुही रह गया.अब मैयाने हमारे साथ थोडी मज़ाक किया.थोडी ही देरमें हम केले के बागानमें खो गये.शाम हो रही थी बागमें बंदरोंके झुंड चिल्लाते इधर उधर दौड रहे थे,किधरभी मुडो बबुलके कांटे लगे कंपाऊंड मिल रहा था रास्ताही नही मिल रहा था.मैयापर पुरा भरोसा होते हुए भी मन सोचे वो बैरी भी न सोचे आधा पाऊण घंटा हुआ होगा एक आदमीका गाना सुनायी दिया बाबा बोले,वंदना तुम दौड उसके पिछे और उससे बात करती चल हम तुम्हारे आवाजके अनुरोधसे पिछे पिछे आते है.नर्मदे हर!उस आदमी का नाम था मंगलसिंग.वह बहुत फास्ट चल रहा था और मै बाते करते उसके पिछे अक्षरशः दौड रही थी इतनी थकानमें मैयाका वह नीलश्यामल संध्यारानीनें बिखरे सुनहरी किरनोंसे सजाधजा सुंदर रूप हमारी थकान को थंडी हवाके झोकोंसे छुमंतर कर रहा था.मंगलसिंगने हमको योगानंद आश्रममें पहुँचा दिया.नर्मदे हर!डरे हुए हमको इस सुंदर आश्रममें लाकर मैयाने खुश कर दिया.रूम नंबर पांच मिली डनलप मॅट्रेस स्वच्छ बेडशिट स्वच्छ बाथरूम.एकदम व्हीआयपी.फ्रेश होकर योगेश्वर महादेवजीका दर्शन लेकर योगानंदमहाराजजी को प्रणाम करने गये.प्रसन्न शांतमुद्रा के महाराजजीने हमारी पुछताछ की,आशिर्वाद दिया.नर्मदे हर!गरम गरम खिचडी सब्जी रोटी भोजनप्रसाद लेकर हम रूममें आ गये,पिछेसे एक सेवक हम सबकेलिये नये ब्लॅंकेट लेकर आया.नर्मदे हर!मैया तेरी लिला अगाध है.
वंदना परांजपे.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-86
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-86-
मालसर से बद्रीनाथ आश्रम.स्नान आरती के बाद शिवदर्शन करके सॅक लेकर कल हमको ओढ़ने दिये नये ब्लॅकेट वापस करने महाराज के पास गये,नर्मदे हर!प्रणाम किया महाराजने बैठनेको कहा.ब्लॅकेट आपकोही दिये है अब आगे बहुत थंड रहेगी काम आएंगे.नर्मदे हर!महाराजने कहा शांतिसे चला करो हड़बड़ी गड़बड़ीसे चलना नही,नामस्मरण करते करते चला करो.मैया अपने साथ चलती है उसके साथ बाते किया करो कही बैठे तो उसको पुछा करो मैया!थक गयी हो,आराम करो थोडा.नर्मदे हर!चाय लेकर आगे चलने लगे.पंचमुखी हनुमान,श्रीरामजी,भगवान जगन्नाथ सुभद्रा बलभद्रजी के दर्शन लिये पिछली परिक्रमामें यही हम रहे थे नर्मदे हर! सत्यनारायण मंदिर जाकर भगवान सत्यनारायण और डोंगरेमहाराजके दर्शन करके सातबजे मालसरसे प्रस्थान किया.नर्मदे हर! हिरामोती फार्म,गुजरात वीज मंडळ कंपनी के सामनेसे सिनोरमें प्रवेश किया.एक दूधवाले लडकेने हम सबको ग्लास भरके दूध दिया नर्मदे हर! आगे बसस्टॅन्डमें चाय पिने बैठे वहॉं श्री.नारायण रबारी ग्वालाभानूजीने पैसे दिये.नर्मदे हर!बाजारपेठमें SBI ATMसे थोडे पैसे विड्रॉल किये फिर घाट उतरकर किनारेसे थोडा चलकर उपर चढकर कृष्णकांतमहाराजके नर्मदाआश्रम पहुँचे.उनको नेकफिमर फ्रॅक्चर हुआ है.मगर उन्होने ऑपरेशन नही करवाया वैसेही वॉकर लेकर चल रहे है.कृष्णकांतमहाराज बहुत पढ़ेलिखे है,रामकृष्णमिशनसे जुड़े है.नर्मदामंदिरमें दर्शन लिया इधर एक निंबूका पेड है नीचे गिरे हुए पककर पिले हुए निबू सबने लिये.चाय केबाद महाराजको नर्मदे हर बोलके प्रणाम करके कंजेठा केलिये आगे बढ़े.कंजेठामें सौभाग्यसुंदरीमाता के मंदिरमें दर्शन लेकर घाट उतरकर मैया किनारे आ गये.यहॉं मैयाका रूप बहुतही सुंदर है डार्क निला शांत गंभीर विस्तीर्ण.अनेको प्रकारके पंछी उडते उडते एकदमसे छलांग लगाकर पानीसे मछली पकडकर किनारेपर आकर पेडकी टहनीपर बैठते है तब उनके रंगीबिरंगी पंखोंका सौंदर्य बस् सिर्फ देखते रहो.आप यहॉं घंटो यूंही बैठे रह सकते हो इतना सुंदर.सौंदर्यशालिनी मनमोहिनी मैया उनसे बाते करने लगे और समय कैसे निकल गया समझ ही नही आया.आगे तो जानाही चाहिये.छोटीसी टेकरी चढकर बबूलकी झाडीसे बचते बचाते एरंडी+मैया संगमपर आ गये.पहली परिक्रमामें बहुत किचड था खाई उतरकर बडी मुश्कीलसे पार हुए थे.मगर इसवर्ष पानी किचड कुछ नही था सहजतासे पार हुए एरंडीमैयाको प्रणाम करके.देखा तो मैया मुस्कुरा रही थी.प्रणाम करके एरंडीकी थंडी बागसे पगदंडीसे चलकर एक खेतमेंसें अनुसयामाता मंदिरके मार्गपर बने नये शिवजी और नर्मदा मंदिरमें दर्शन लेकर क्षणभर विश्राम करके अनुसयामाता मंदिर पहुँचे.इसी स्थानपर माता अनसुयाने ब्रम्हा विष्णू महेश तिनों देवोंको अपनी पतिव्रताके पुण्याईसे बालक बनाया था और स्तनपान देकर उनकी माता हो गयी थी.धन्य है भारतीय पतिव्रता नारी.नर्मदे हर!दर्शन केबाद दत्ताश्रममें भगवान दत्तात्रय के दर्शन लेकर भोजनप्रसाद पाया नर्मदे हर! दो बजे आगे चलने लगे.रास्तेमें पुणेका रहनेवाला IT इंजिनियर लडका जिसने कठोरासे बलगांव होते शालिवाहन आश्रम जाते समय हमारी बहुत मदत की थी वह मिल गया.नर्मदे हर! जनकेश्वर फाटा,शेरवील शुगर फॅक्टरीसे आगे चलते चिनी बनाने केलिये गन्नेका रस निकालने के बाद गन्नेके छिलके कैसे पिसकर बारीक टूकडे करते है,गन्नेके रससे गंदगी निकालते समय उडनेवाले गरम पानीके फव्वारे देखनेको मिल गये.नर्मदे हर!बरकाल कॉलनी के बाद मोलेथामें सुरेशभाईने भेळ दे दी नर्मदे हर! आगे दो ट्युबवेल पंम्पींग स्टेशनके बाद दाहिनी ओरके बैलगाडीके कच्चे रास्तेसे पपिता,केले,कपासके दुतर्फा खेतोंमेसे जाकर आगे बायी तरफके जंगलकी पगदंडीसे चलकर हायवे पर प्रवेश किया मगर इस मार्गपर जो गुप्तेश्वर महादेव का स्थान जिस शिवपिंडीसे अविरत जलप्रवाह बहता है वह पौराणिक देवस्थान कहॉं था ये समझमें नही आया और दर्शन नही हो सका.हायवेपर श्रीरंगसेतू के पाससे बायी तरफ निचे उतरकर बद्रीकाश्रम पहुँचे तब शामके छे बजे थे.रूम मिल गयी.सामान रखकर करीब करीब सौ सिढ़ियां उतरकर मैया के पास जाकर प्रणाम करके हाथ मुंह पर जल प्रोक्षण किया तो तुरंत सारी थकान छुमंतर हो गयी.उपर आकर मंदिरमें दर्शन लिया और सायंनित्यपाठ के बाद भोजनप्रसाद.खिचडी और मख्खनसे भरपूर ताजा मिठा छाछ.वा!!अंतरात्मा तृप्त हुआ.महाराजजीने हमको हमारी थाली उठाने और साफ करने नही दी.नर्मदे हर!अब विश्राम.
वंदना परांजपे.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-87
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-87-
बद्रिकाश्रम से कुबेर भंडारी-सुबह छे बजे विनोबा एक्सप्रेसको ग्रिन सिग्नल दिया.किनारेसे जानेका मार्ग नही है इसलिये सडकमार्गसे चलने लगे बिथली,नंदेरिया यहॉं नंदीने तप किया,किनारे मंदिर है दर्शन केबाद वापस सडकमार्गसे अंदर जाकर गंगनाथमहादेव दर्शन करके वापस,भीमपुरा,चांदोद.दो परिक्रमामें यहॉं गांवमें श्री.उमेशगिरीमहाराज के घर आसन लगाया था.यहॉं कुछ महाराष्ट्रीय रहते है.नर्मदे हर!ऋणमुक्तेश्वर महादेव दर्शन करके घाटपर आ गये.पहली परिक्रमामें मांडला गांवके राजवाडा के बाजूसे निचे उतरकर ओरसंगमैया पार करली थी,दुसरी परिक्रमामें इस घाटपर बहुत जलभराव था तब नावसे ओरसंगमैया पार हुए थे.आज घाटकी तेढीमेढी पहाडके मिट्टीसे बनी बहुतही संकरी सिढ़ियां पिठपर लदी वजनदार सॅक बाये हाथमें बूट दाहिने हाथमें हमारी आधारदेती काठीमैया लेकर जान हथेलीपर और होंठोपर दिलसे निकलता नर्मदे हर!मैया!जाप लेकर जैसे तैसे उतर गये.ओरसंगमैयामें जलस्तर घुटनोंके निचेही था मगर प्रवाह वेगवान था,मानो उसको मैयासे मिलनेकी बहुत जल्दी थी.एक शिक्षिका भगिनीकी सहायतासे पार हो गये.कर्नाली,महाराष्ट्रीय कोकणस्थ ब्राह्मण वस्तीसे कुबेरभंडारी तीर्थक्षेत्रमें शक्तिपीठ देवस्थानाश्रममें पहुँचे.आश्रमकी संचालिका मीरा पुरी माताजी पदवीधर है.छोटे बच्चोंका स्कूलभी चलाती है.स्वच्छ सुंदर आश्रम है.उपरकी मंज़िलपर रूम मिल गयी.नर्मदे हर!सामान रखकर स्नान करने गये.चालीसपचास सिढ़ियोंका पक्का कालेपत्थरोंसे बनाया सुंदर घाट है.यहॉं नर्मदा+ओरी+गुप्तसरस्वतीका त्रिवेणी संगम है.यह देवोंके भंडारी कुबेरजीने यहॉं तपश्चर्या की है.इस पुण्यस्थलमें पौर्णिमा अमावास्याके एकादशी पावनपर्वपर स्नानदानका महापुण्य है.और आज सफलाएकादशीके पर्वपर हमें स्नान करनेका योग आया ये मैयाकृपा.हमारी पुर्वपुण्याई.नर्मदे हर!कुबेरभंडारीजीके दर्शन लेकर महाकालि मंदिरमें दर्शन लिया.माता महाकालि मेरी कुलस्वामिनी है और आज मंगलवार माताजीका दिन दर्शनका अलभ्य लाभ हुआ.मैयाकृपा.नर्मदे हर!इधर जमीन के निचे एक गुंफा है.आधुनिक कालके योगि अरविंदजीकी तपस्यास्थली है.जिनका प्रसिद्ध आश्रम पद्दुचेरी{पॉंडेचरी}में है.मीरापुरीमाताजी अमेरिकासे भारतमें आकर कुछही महिने हुए थे और उनके पैरोंमें बहुत दर्द होने लगा,बहुत उपचार किये मुंबई जाकर स्कॅन वगैरे हो गये डॉक्टर बोले ये असाध्य व्याधी है,ठीक नही होगी.कर्मभोग मान्य करके माताजी आश्रममें वापस आ गयी और अपनी साधनामें मग्न रहने लगी.उनको शिर्डी चली जाओ,ऐसे आदेश आने लगे पहले तो उन्होंने हम तो दत्त उपासक कपिलाश्रमके चेले शिर्डी कैसे जाए?ऐसा सोचती रही मगर वारंवार आदेश आने लगे तब वह शिर्डी चली गयी.वहॉं साईबाबाके दर्शन लेकर वो बाबांके सामने बैठ गयी और दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा का जप करने लगी तब एक कुत्तेका बच्चा उनके गोदीमें आकर पैरोंपर खेलने लगा.जप पुर्ण होतेही बच्चा गायब हुआ और उनके पैर दुखना एकदमसे बंद हो गया.शिर्डीसे वापस आनेके बाद सारे रिपोर्ट नॉर्मल आ गये,डॉक्टरभी आश्चर्यचकीत हो गये.और किसीने उनके गुरूगद्दीपर बालदत्तका पालनेमें बैठा फोटो रखा था.कपिलमुनी और अनुसयामाता रिश्तेमें भाईबहन है इसलिये बालदत्त कपिलमुनिजींका भांजा हुआ इसलिये मीरामाताजी उनको पुत्रस्वरूप देखती है.अब बालदत्तही गुरूगादीपर विराजमान है.नर्मदे हर! शामको आश्रमसे थोडी दुरीपर एक जगह परमहंस परिव्राजकाचार्य सदगुरू वासुदेवानंद सरस्वती स्वामीमहाराजका साधनास्थान है एकदम मैयाके प्रवाहको सटके पुरानी इमारत है निचेका भाग मिट्टीमें दब गया है.उधर जानेको जगहही नही है.मै पिछेकी तरफसे सम्हल समल्हके थोडीसी निचे उतर गयी वहॉं एक खिडकी है उसमेंसे देखा निचे शिवपिंडी है.फोटो खींचना मुमकीन नही था.नमस्कार करके उपर आ गयी.वहॉं इतनी पवित्र जगहपर मन दुखी करनेवाली शर्मसार चीज़ देखनेको मिली बडे वृक्षतले दारूकी छोटी छोटी खाली थैलियोंका खच पडा था.नर्मदे हर! कल आगे जानेका शॉर्टकट देखकर आ गये. नित्यपाठ आरती के बाद आश्रमके सेवकका विपूलका बर्थ डे था इसलिये छोटीसी पार्टी थी उसके मित्रभी आये थे.पावभाजी मिठाई थी.अब आराम.
नर्मदे हर!
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-88
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-88-कुबेर भंडारी से तिलकवाडा-सुबह पांच बजे इंजिनमें चायका इंधन डालके हमारी विनोबा एक्सप्रेसने प्रस्थान किया.नर्मदे हर! कल जो शॉर्टकट देखा था उस कच्चे रास्तेसे टॉर्चके प्रकाशमें चलते चलते एक किमि जानेके बाद एक जगह एक बड़ा पेड गिरा था उसके बाजूसे आगे निकले दाहिनी तरफ चंद्रप्रकाशमें चमकती मैया बहुतही शांतस्वरूप दिख रही थी.हम बहुत खुशी खुशी मार्गक्रमण कर रहे थे और अचानक सामने एक खाई आ गयी वहॉं रास्ता समाप्त हो गया था.साडेपांच बजे थे मगर द्वादशीकी चंद्रकोर वह घना अंधेरा दूर करनेमें असमर्थ थी.हतबुद्ध होकर हम वही खडे रहे समझमें नही आ रहा था कहॉं जाए,कैसे जाए?भाभिजीने रास्ता ढुंडनेकी थोडी कोशिश करने लगी मगर आसपास खेत थे और अंधेरा मैने और बाबाने उनको रोका.वही बैठ गये.सामने मैयाका सुंदर स्वरूप था.नर्मदाष्टक,आरती प्रार्थना करके वही स्वस्थ बैठे रहे.मन थोडा शांत होने केबाद जिस मार्गसे आये उससे पिछे जाकर देखनेका निर्णय लिया.कपासके खेतसे जाने लगे मगर हमें आया रास्ता नही मिल रहा था.एक बडे पेडके निचे खडे हो गये.अभीभी अंधेरा था और एकदमसे थंडभी बढ़ गयी थी फिर वही पडी टहनिया सुके पत्ते छोटी लकडी जमा करके आरती की बाती और घी से आग (शेकोटी) जलायी और सेंकते सेंकते सोचने लगे.नर्मदे हर! अरूणोदय हुआ थोडा दिखने लग गया फिर मार्ग ढुंढने लगे वह गिरा हुआ पेड मिल गया वापस आये मार्गसे चलने लगे अब सवेरा हुआ था,छोटी छोटी टेकरीओंसे चढते उतरते सामने पक्का रास्ता दिखायी दिया उसपर पहुँचे तब सुबहके सव्वासात बजे थे और कर्नाली 1 किमि दिखाता पत्थर सामने था,नर्मदे हर.तिलकवाडाकी तरफ चलने लगे.साडेसात बजे पीपलिया गांव आ गया.कुछ खाना चाहिये इसलिये बसस्टॉपमें बैठ गये.एक होंडासिटी आकर हमारे पास खडी हो गयी,विपुल गाडी चला रहा था और अंदर बैठी थी शक्तिपीठ की माताजी स्वामिनी मीरा पुरीजी.शांत सुंदर तरूण प्रसन्नदर्शन.नर्मदे हर! पीपलियामें सलाह मिला की मोरया जाकर जाना ठीक रहेगा नर्मदे हर! आगे पुरूषोत्तम नारायण आश्रम बोर्डसे दाहिनी तरफ तनुभाई के घरकेपास आ गये.वह रास्ता दिखाने साथ आये,उन्होने दो खाई पार करनेमें मदत की इसलिये मोरयागांव जल्दी पहुँचे.नर्मदे हर! एक घरके आंगनमें बैठे,फरसाण बच्चोंको दिया हमनेभी खाया जलपान करके आगे चलकर बटुमहाराजजीके हनुमान मंदिरमें आ गये.फिर नको पुछके आगे चलने लगे.नडगांव,मोरागांवमें मेहरूनिस्साके आंगनमें बैठे जलपान किया,उनका बेटा बिमार है उन्होनेंकहा,आप मैयासे उसकेलिये दुवा मांगना.हां जरूर प्रार्थना करेंगे मैया जल्दही ठीक करेगी.नर्मदे हर!मेहरूनिस्साने हम सबको हमारे पैर छुकर नमस्कार किया और बोली नर्मदे हर.मैया सबकी है.गांव पार करके कच्चे रास्तेसे अश्विनीमैयाके किनारे पहुँचे.पादस्पर्शम् क्षमस्व मे बोल पार करके खडी चढाई चढकर मुस्तफा के आंगनमें बैठकर जलपान करके चुडेश्वरगांवके प्रायमरी स्कूलमें बैठे वहॉंके शिक्षक श्री.विनीत पटेल,अनिला पटेल,जयश्री पटेलने थंडगार जलपान करवाया.अब बारा बजे थे और धूप कड़ी हो गयी थी.आगे एक टेकरीपर एकही घरमेंसे श्री.झवेरभाई और सौ.काशीबेनने बुलाया पहले जलपान और बादमें अमृततुल्य चायपान.बढ़िया!वैसे आज सुबहसे वैसा कुछ खाया नही था इसलिये उस चाय की मिठास कुछ औरही थी.झवेरभाई पहले खा पिके दस रूपये मजदुरी केलिये पैदल बडोदा जाते थे.अब सरकारने आवास योजनाके अंतर्गत जमीन और घर दिया तो अब खेतीबाड़ी करते है.उन्होने बताया,इधर रातमें बाघ आता है गाय बैल बाड़ेमें बंद करके रखने पडते है.थोडीदेर पहले एक आदमीने पैरोंके निशान दिखायेभी थे.बाप रे!नर्मदे हर! साडेबारा बजे आगे चलने लगे.कड़ी धूपमें चलना बहुत कठीण हो रहा था.एक जगह कनात लगाकर बंदिस्त लाइट कनेक्शनवाला मंडप दिखायी दिया,अंदर गये.विश्राम करने बैठ गये.धूपसे राहत मिली.नर्मदे हर! दो आदमी पानी के दो कॅन लेकर आ गये,बोले,वहॉं उनका जुगार खेलनेका अड्डा है बडोदासे लोग आते है पत्ते खेलने,दोपहर दो बजेसे रातको बारा बजेतक चलता है.धन्य!मगर उनकी प्रामाणिकता अच्छी लगी झूट नही बोले वह.आगे चलकर जैसे तैसे दो बजे तिलकवाडा नर्मदेहर अन्नक्षेत्र पहुँचे.पहले कॉमन हॉलमें जगह दे दी दवेदादाजींने मगर हमारी स्वच्छता देखकर और हम पंडीत है इसलिये रसोईघर और सात नंबरका सेल्फ कन्टेंड वेल फर्निश हॉल हमारे सुपुर्द कर दिया.नर्मदे हर! पहले स्नान करके भाभी और स्नेहल रसोईमें गयी और मै और बाबा हमारा सामान हॉलमें रखना,कपडे धोना करके सबने भोजनप्रसाद लिया.आश्रमका भोजन तयार करनेवाले महाराज गांव गये थे इसलिये रातका भोजन अंजूभाभी और स्नेहलने बनाया.उन्नीस परिक्रमावासी थे भोजन केलिये.नर्मदे हर!आज मुलुंड मुंबईकी शोभाताई जोशी हमारे साथ है.स्वामी आत्मकृष्ण जिन्होने नर्मदा परिक्रमा मार्गदर्शिका लिखी है,स्वामी कृष्णानंद,दवेदादाजीसे वार्तालाप हुआ.नर्मदे हर!
वंदना परांजपे.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-89
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-89-
दवेदादाने बोला आज बालभोग और दोपहरका भोजनप्रसाद बनानेकी सेवा देदो शामको भंडारीबाबा आ जाएंगे इसलिये हम रूके.शोभाताई जोशी आगे चली गयी नर्मदे हर! बालभोग केलिये भाभिने पोहे बनाये.आत्मकृष्ण स्वामी कृष्णानंद स्वामी दवेदादाजी बहुत खुश हुए भाभिको बोले,इतने सुंदर पोहे इसके पहले कभी नही खाये थे.नर्मदे हर! स्नान नित्यपाठ करके भाभी स्नेहल भोजनप्रसादकी तैयारी करनेमें जुट गयी मै सब्जी काटने की मदत करके बाबा और मै हमारा कुछ सामान लाने और आगेका रास्ता देखकर आने केलिये बाजारमें गये.नर्मदे हर!भोजनप्रसादमें स्नेहलने सत्यनारायण की पुजा केलिये बनाते है वैसा गायके असली घी में ड्रायफ्रुट डालके सुजीका हलवा बनाया था,बहुत स्वादिष्ट भोग लगाने केबाद भगवानभी प्रसन्न हुए होंगे.सब बहुत खुश हो गये.नर्मदे हर! नर्मदे हर अनन्नक्षेत्रका सारा परिसर निसर्गरम्य है.फलफुलोंके पेडपौधे,ध्यानकुटीर,थोडी निचे बहती नीलश्यामल नर्मदामैया और उसके पाससे उडते चहकते रंगीबिरंगी छोटेबड़े पंछी.आदि शंकराचार्य रचित नर्मदाष्टक साक्षात सामने दिखता है.मै एक क्षुद्र स्त्री क्या बोलूं?शब्द नही मेरे पास.नर्मदे हर! स्वामी आत्मकृष्णजीने उनके परिक्रमाके अनुभव कथन किया.स्वामी कृष्णानंदजीने विपश्यना केबारेमें बताया.नर्मदे हर!संध्यारती के बाद हमारे नित्यपाठमें दोनो स्वामीभी सहभागी हुए.स्वच्छ स्पष्ट शब्दोच्चारवाला हमारा रामरक्षापठण उनको बहुत अच्छा लगा.नर्मदे हर! रातको नौ परिक्रमावासी थे भोजनप्रसाद लेने.स्वामीजींने दोपहरकी सब्जी और हलवा बचा है का पुछा और है कहनेपर बडे प्रेमसे खायाभी.नर्मदे हर! कल गरूडेश्वर केलिये प्रस्थान.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-90
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-90-
स्नान नित्यपाठ करके विनोबा एक्सप्रेसने गरूडेश्वर केलिये प्रस्थान किया तब सुबहके साडेपांच बजे थे.मेनरोडपर आकर पहले पैरगाडीके पेट्रोल टंकीमें पेटमें चायरूपी इंधन डाल दिया. आगे पोलिस स्टेशन केपिछे वासुदेव कुटीर ये परमहंस परिव्राजकाचार्य परम सद्गुरू वासुदेवानंद सरस्वती थोरले स्वामीमहाराजका चातुर्मास साधना स्थल है,वहॉं समर्थ रामदासस्वामी (शिवाजी महाराजके राष्ट्रगुरू) स्थापित हनुमानजीका छोटासा मंदिर है. श्री.विष्णुगिरीमहाराज वहॉंकी व्यवस्था देखते है.दर्शन लेकर गांवमेंसे चलकर मेणमैया पार करके उपर चढकर देखा मेणमैया नर्मदामैयाके गले लगती इतनी सुंदर दिख रही थी की वहॉं खडे रहकर देखते ही रह गये.नर्मदे हर.सात बजे मणीनागेश्वर मंदिर पहुँचे.सुंदर स्थान है.कश्यपमुनिकी कद्रु और विनिता ये दो पत्नीयॉं है.कद्रु के पुत्र नाग और विनिता का पुत्र गरूड.एकबार विनिता और कद्रुमे पैज लगी की इंद्रदेवका घोडा उच्चैश्रवाका रंग कैसा है?विनिता बोली,शुभ्र सफेद तो कद्रुका कहना था काला.जिसकी बात सच होगी दुसरीको उसकी दासी होना पडेगा ऐसा तय हुआ.दोनो घोडा देखने जानेवाली थी,कद्रुने अपने नाग बेटोंको कहा की वह सब घोडेकी शेपको ऐसे चिपके रहे की वो संपुर्ण काली दिखे.सब नागोंने वैसाही किया.दोनो घोडा देखने गयी तो घोडेका शरीर शुभ्रसफेद था मगर उसकी शेप काली थी.विनिता पैज हार गयी उसको कद्रुकी दासी होना पडा.कद्रुका एक बेटा मणीनागने अपनी मॉंका कहना नही माना था वह घोडे केपास नही गया था इसलिये मॉंने उसको घरसे बाहर निकाल दिया तो मणीनाग इस स्थानपर नर्मदातटपर तपस्या करने आया उसने स्थापित किया ये शिवस्थान मणीनागेश्वर नामसे प्रसिद्ध हुआ.नर्मदे हर! यहॉं महंत श्री.साहेबजी महाराज वृद्ध पॅरालेसिस हुए रूग्णोंकी सेवा करते है चिक्तित्सालय चलाते है.रूग्णसेवा ही ईश्वरसेवा मानते है.नर्मदे हर! मणीनागेश्वर दर्शन लेकर महंतजीको प्रणाम करके चाय लेकर आगे निकले.वाडिया,वीरपुर,रेंगण यहॉं गंगाबेन तडवीजी के आंगनमें बैठकर साथ लाया कलवाला हलवा खाकर जलपान किया.आगे वासणा,सांजरोली,अक्तेश्वर यहॉं अगस्तिऋषिने तपस्या की थी.आगे हायवे आ गया,वहॉं एक मंदिरके प्रांगणमें बैठे.दर्शन केबाद वही बैठकर टरबूज खाया.फिर एक शॉर्टकटके रास्तेसे दस बजे गरूडेश्वर पहुँचे.नर्मदे हर! क्रमशः
वंदना परांजपे.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-91
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-गरूडेश्वर- परम सद्गुरू वासुदेवानंद सरस्वतीमहाराज समाधीमंदिर ट्रस्टके ऑफिसमें गये वहॉं श्री.गोडबोलेजीसे बात करके परिक्रमावासी पहचानपत्र और अपना आय डी प्रुफ देकर भक्तनिवासमें रूम नं.7 मे आसन लगाया.और मैयाका साधारणतः तीस चालीस सिढ़ियोंवाला घाट उतरकर स्नान करने चले गये.आज मार्गशीर्ष अमावस के पर्वणीमें मैया स्नान करनेका पुण्यप्रद अवसर मिला था.नर्मदे हर! एक पत्थरपर बैठकर मै स्नान कर रही थी और एकदमसे एक भगिनीमंडल आया और मेरे सिरपर पानी डालकर मुझे नहलाने लगी,मैने पुछा तो बोली इस पर्वणीके शुभअवसरपर एक ब्राह्मण पंडीत सुवासिनीको स्नान करानेका पुण्य मिल रहा है.देखते देखते पचीस तीस महिलाओंने मुझपर पानी डाला और बादमें मुझे हरिद्रा कुमकुम लगाकर किसीने साडी किसीने ब्लाऊजपिस किसीने पैरकी उंगलीमें पहननेके चांदीके बिछुए और नारियल दक्षिणा देदी.इस आस्थाके आगे मै नतमस्तक हो गयी.नर्मदे हर! स्नान के बाद वही घाटपर बैठकर नित्यपाठ आरती करके हम समाधी मंदिरमें जाकर दर्शन लिया,थोडी देर नामस्मरण करके भगवान दत्तगुरू मंदिर जाकर दर्शन नामस्मरण किया.यहॉंकी दत्तमुर्ति बहुतही सुंदर है ऐसा लगता है अपनी ओर हसकर देखते कह रहे है,डरो नही हम है आपके पास.नर्मदे हर!
गरूडेश्वरमें गरूडने अपनी माता विनिता को सौतेली मॉं कद्रुकी दासीपनसे छुडाने केलिये स्वर्गसे अमृत लाने केलिये तपस्या की थी.उन्होने गरूडेश्वर महादेवकी स्थापना की है.एक टेकरीपर पुराना मंदिर है. लेकिन अब ये स्थान परमहंस परिव्राजकाचार्य वासुदेवानंद सरस्वती स्वामी महाराजजीके समाधीस्थान के तौरपर प्रसिद्ध है.नर्मदे हर! आज हमारा भाग्योदय दिन था,भालोदके शरदचंद्र प्रतापे महाराजजी आये थे दर्शन मिला,सत्संग हुआ.नर्मदे हर! दोपहरको भोजनप्रसाद मिला.थोडा विश्राम करके गरूडेश्वरमे इधर उधर घुमकर घाटके सिढ़ियोंपर बैठकर सुर्यास्तका नजारा देखा.लाल पिले केशरिया रंगोंकी चित्रकारी निले आकाशपर इतनी सुंदर की थी संध्यारानीने.गाना याद आ रहा था,ये कौन चित्रकार है?कौन चित्रकार?नर्मदे हर! दत्तगुरू,स्वामीमहाराजजी के सायं आरतीमें सहभागी होनेका सौभाग्य मिला.रातको अन्नपुर्णागृहमें भोजनप्रसाद नही होता इसलिये गांवमें जाकर कुछ हलका खाकर आ गये.अब निद्रादेवीकी आराधना.नर्मदे हर!
वंदना परांजपे.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-92
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-92-स्नान नित्यपाठ करके पावणेपांच बजे कानाबेडासे आगे चलना शुरू किया.देवत,मोतिशानबाग,माथाडुंगरी,चापडियामें जयस्वालजी का बेटा प्रवीण परिक्रमावासीओंकी सेवा करता है.चाय लेकर आगे चलने लगे.आठ बजे कवांट पहुँचे.बसस्टॅन्ड केपास नसवाडी चौकडीमें श्री.विनोदभाई डबगरजीने पोहे दूधका नास्ता दिलवाया,हमने जो मेडिसिन लिया उसके पैसेभी उन्होने दिये नर्मदे हर! कामनाथ महादेव मंदिरमें गये,दर्शन लेकर महाराजजीको प्रणाम किया.आशिर्वाद देकर वह बोले,आज रहो इधर.हमने कहा अभी तो नौ ही बजे है पुरा दिन क्या करेंगे?तो महाराज बोले हापेश्वर जाके दर्शन करके आना,पुरातन मंदिर तो डुब गया मगर नया मंदिर है एक अनोखा शिवदर्शन है देखके आओ.यहॉं आसन लगाकर दर्शन लेकर वापस यहॉंही आकर आगे जानेमें परिक्रमा खंडीत नही होती हम बता रहे है न?जाओ.नर्मदे हर!ये मैयाकी आज्ञा है.इसलिये सॅक वही मंदिरमें रखकर हम बसस्टॅन्डपर गये.वहॉं एक जीप मिल गयी और भी परिक्रमावासी थे हापेश्वर जानेवाले.नर्मदे हर! हमीरपुरा,वजेपुर,वाव,टीमडी,लीमडी,रायसिंगपुरा,झुंजर,मोडियावाली,कॉलनी,कडीपानी अब आगे कच्चारोड शुरू हुआ,हापेश्वर.मंदिर केपासही जीप रूकी.नर्मदे हर! गोराग्राममें बने नये शुलपाणेश्वर मंदिर जैसाही येभी मंदिर है.पुराने मंदिरसे शिवपिंडी तो निकालकर लानेमें सफलता मिली मगर वह नये गर्भगृह के दरवाजेसे अंदर लेके जानेमें असफल होना पडा,तब नयी शिवपिंडीकी गर्भगृहमें स्थापना कर दी.और पौराणिक शिवपिंडी बाहर सभामंडपमेंही विराजमान है.यहॉं एक शिवपिंडी और है उसमें एक बरगदका पेड बडा हो रहा है,देखके लगता है की मानो नागदेवताने शिवजीके गलेको लपेट लिया है.नर्मदे हर!भगवान आपकी लिला अगाध है.दर्शन लेकर वहॉंके महाराजजीको प्रणाम करके सरदार सरोवरका बॅकवॉटर देखने गये.मैया! कितना भव्यस्वरूप है!सुंदर नीलश्यामल,बीच बीचमें हरेभरे वृक्षराजीसे परिपुर्ण टापू है अभी कुछ आदिवासी वहॉं रहते है मगर बांधकी उंचाई बढ़तेही ये सब जलमग्न हो जाएंगे.इश्वरेच्छा बलियसी.नर्मदे हर!
मंदिरकेपास धर्मशाला है.भोजनप्रसादकी सुविधा है.परिक्रमावासी यहॉं रहकर कडीपानीसे आगे जाते है.मगर हमारा सामान कवांटमें है इसलिये हम भोजनप्रसाद लेकर उसी जीपसे कवांट वापस आ गये.नर्मदे हर!
कवांट बडा गांव है,बडी बाजारपेठ है.थोडा इधर उधर घुमकर कामनाथमंदिरमें वापस आ गये.फ्रेश होकर महाराजजी केपास बैठे.महाराजजी बहुत बुजुर्ग तपस्वी है.उन्होने बताया यहॉं कामदेवने तपस्या की है इसलिये कामनाथमहादेव.नर्मदे हर!
महाराजजी थोडे गुसैल स्वभावके है.मगर हमसे प्यारसे बात की.हमने सब्जी काटने?सॉरी सॉरी काटना नही बोलनेका सब्जीकी तैयारी करनेमें मदत की.शामकी आरती के बाद हमारा नित्यपाठ किया.रामरक्षा,भगवद्गीता पठण सुनकर महाराजजी बहुत प्रसन्न हुए.नर्मदे हर!टिक्कड सब्जी खिचडी कढ़ीका भोजनप्रसाद पाया.अब विश्राम.नर्मदे हर!
वंदना परांजपे.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-93
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-93-इस मंदिरके पास बिलकुल जगह नही है की सोय सुविधास्थान बना सके इसलिये उठकर ऐसेही चल पडे.कहामैया पुलसे क्रॉस करके आगे हमीरपुरफाटा,वजेपुरफाटा,आमसाटाफाटा,नवलजा पार करके चिचवा आनेतक हमारी दमछाक हो गयी.कल रात निंदियारानी हमसे रूठी थी और आज सुबह तीन बजे उठे थे क्योंकी प्रातर्विधी करने बहुत दूरतक जाना पडा था.कवांटमें एक कामनाथमहादेव मंदिर के सिवा परिक्रमावासीओं केलिये कुछ भी व्यवस्था नही है.नर्मदे हर! चिचवाकी आश्रमशालाकी कोकिलाबेनजीने पहली परिक्रमामें भोजनप्रसाद दिया था मगर आज मकरसंक्रांति की छुट्टी है.बारा बज चुके थे.सामने रहनेवाली नानकी राठवा,उर्मिला राठवा केघर ॐ भवति भिक्षां देहि किया.नर्मदे हर! बेनजीने दालचावल,छाछ ऐसा भोजन प्रसाद दिया.आज संक्राति है डीजे का हंगामा कान फट जानेवाला था मगर इतने थक गये थे की थोडा आराम जरूरी था.दो बजे आगे चलने लगे.कड़ी धूप हमको परेशान करनेसे पिछे हटनेको तैयार नही थी.रास्तेमें विनोद राठवाने पपिता दिया.मनमें विचार आया,आज संक्रांत है मगर बेर खानेको नही मिले और सामने बेर के पेड दिखायि दिये.भरपूर खट्टे मिठे बेर खाये.विचार आया और मांग तुरंत पुरी यही तो मैया की खासियत है.नर्मदे हर!सींगलदा पार करके चेकपोस्ट के बाद रेंणदामें हनुमानमंदिर नर्मदे हर अन्नकुटीर पहुँचे.महाराजजीने सहर्ष स्वागत किया.हॅन्डपंपपर स्नान किया कपडे धोकर सुखाने डाल दिये.यहॉं बंधोईमैया के किनारे एक सिद्धबाबा स्थान है,पत्थर की मुर्तिको हर सोमवारको ११ सिगरेटका भोग चढ़ाया जाता है,वह मुर्ति सिगरेट पिती है ऐसा महाराजजींने बताया.शामका नित्यपाठ होतेही महाराजजींने दाल रोटी और खिचडी का भोजनप्रसाद दिया वह खुद भी हमारे साथ प्रसाद पानेमें शामील हुए.नर्मदे हर!आश्रममें बिजली नही है मगर चांदनी रात है चंद्रमौली आश्रममें चंदामामा प्रकाश देने समर्थ है.बहुत थके है अब विश्रांति.नर्मदे हर!
वंदना परांजपे.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-94
नर्मदा परिक्रमा-भाग-94-स्नान नित्यपाठ के बाद हनुमानजी के दर्शन करके महाराजजी को प्रणाम करके कालीमहारानी{कालीचाय}पान करके सुबह छे बजे विनोबा एक्सप्रेसने गुजराथ राज्यका आखरी स्टेशन रेंणदा छोडकर मध्यप्रदेश की ओर प्रस्थान किया.महाराजजी बंधोईमैया के ब्रिजतक हमको विदा करने आये थे.नर्मदे हर! साडे छे बजे गुजराथको अलविदा करके मध्यप्रदेशके छकतालमें प्रवेश किया.अब यहॉंसे परिक्रमा पुर्तितक मध्यप्रदेशही होगा.बसस्टॅन्ड केपास चायकी दुकान थी,हम चाय पिने गये.श्री.योगेशभाई वाघेलाजीने चाय के पैसे दिये.नर्मदे हर!चलो आगे.रास्ता अच्छा है दोनो तरफ घना जंगल है.भुपालियामें श्री.कुंजू चौहानजीने बुलाया,नर्मदे हर! चौहानजी माध्यमिक शिक्षक है.उनकी बेटी दसवी और बेटा नववी कक्षामें है दोनो टॉपर है.चाय लेकर आगे चलने लगे.हल्की गुलाबी थंडीहवा,वृक्षराजीसे आती फुलोंकी सौंधी सौंधी खुशबू.घाटरास्ता है मगर चलते चलते पंछीओंकी मधुर किलबिल सुन रहे थे तो थकान मानो जैसे छुमंतर हो गयी थी.आगे कठवाड,मधुपल्लवीमें कमरू मोरीजी की दुकानमे गये कुछ वेफर्स खरीदकर नास्ता किया तबतक कमरूजी चाय लेकर आ गये और बोले चाय तो मैया केलिये है,उसने सेवाका मौका दिया.नर्मदे हर!पुवासा के आगे एक जगह छोटासा नाला और उसपर ब्रिज था.घनी वृक्षराजीसे परिसर बहुत शांत लग रहा था.ब्रिजके कठडेपर आंख मुंदकर बैठे रहे.बहुत शांति मिल रही थी.यही रहनेका मन कर रहा था मगर आगे जानाभी तो जरूरी था.नर्मदे हर! सिलोटा पहुँचे तब साडे ग्यारह बज चुके थे.रास्तेपरही शिलाईमशीन रखकर श्री.राजेशकुमार सोनी कपडे सिलाई कर रहे थे,उन्होने बुलाया नर्मदे हर! भोजनप्रसाद विश्राम के बाद सोंडवा पहुँच सकेंगे की नही इसका विचार कर रहे थे तभी आंगनबाडी जा रही कार्यकर्ता सौ.उमा वर्माजी आयी और बोली,दो बजे मै वापस आती हूँ आप आज हमारे घर रहिये.सोंडवा पंधरा किमि है,जंगलका रास्ता है जाना ठीक नही.नर्मदे हर! स्वादिष्ट भोजनप्रसाद मिला.स्नेहलकी कॅरीमॅटको कव्हर चाहिये था,सामने कपडेकी दुकान थी वहॉंसे कपडा लिया,राजेशकुमारजीने कव्हर सिलके दिया.नर्मदे हर!उमाजी आने केबाद उनके घर गये.सोंडवाके BEO परमानंद धाकडसाब को फोन करके हम कल सुबह आ रहे है ऐसा कह दिया.वह बोले,सहर्ष स्वागत है.शामको उमाजीने खिचडी का भोजनप्रसाद दिया.नर्मदे हर!कल रेंणदाके चंद्रमौली आश्रममें शांत निंद आयी थी और आज चलनाभी ज्यादा नही हुआ था,इसलिये आज थकान बिलकुलही नही.नर्मदे हर!
वंदना परांजपे.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-95
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग95-सुबह साडेपांच बजे उमा वर्माजीको अलविदा किया.रास्ता अच्छा था सव्वा छे बजे मोरजा फाटा आया.दाहिनी तरफसे चलना शुरू किया रास्ता अच्छा था आठ बजे मोरजा गांव आया अब कच्चा रास्ता शुरू हुआ पावणेनऊ बजे हायवेपर आ गये.खाखरिया,बथडिया के बाद साडेदस बजे सोंडवा पहुँचे.लक्ष्मीनारायण मंदिरमें दर्शन किया.पहली परिक्रमामें हमने यहॉं मुक्काम किया था मगर तब यहॉं कुछ सुविधा नही थी हम लक्ष्मीनारायणजीके अगलबगल और सामने सोये थे.मगर अब धर्मशाला बनायी है.पुजारीजी है उन्होने अच्छी साफसफाई रखी है.बोले रहो आज इधर मगर हमने BEO श्री.परमानंद धाकडजीको कलही फोन करके हमारे आनेकी सुचना दे रखी थी इसलिये नर्मदे हर.चाय लेकर उनके सरकारी क्वार्टरमें गये.उधर जाने केबाद मालुम हुआ की वह यहॉं अकेले रहते है परिवार मलसरमें है.नर्मदे हर!मगर हमारी व्यवस्था के लिये दो अटेंडंट देकर वह ऑफिस चले गये.रामसिंगजी और लालसिंगजीने बाहरसे पानी लाकर दिया हमारा सबका स्नान कपडे धोना होनेतक दोनोने भोजनप्रसाद तयार किया.नित्यपाठ करके भोजनप्रसाद पाया.दाल चावल रोटी सब्जी दही अचार सब बढ़िया.थोडा विश्राम करके तीन बजे दोनोंको नर्मदे हर करके आगे निकल पडे.रास्ता अच्छा था.खामटगांव केबाद साडेपांच बजे वालपुर पहुँचे.सुबह रास्तेमें इस गांवके श्री.अंबाराम पाटिदारजी मिले थे,उन्होने दक्षिणा देकर शिवमंदिरमें निवास व्यवस्था है ऐसा कहा था मगर देखा तो मंदिर छोटा था और बंदिस्तभी नही था.अंबाराम पाटिदार घरमें नही थे और उनकी अनुपस्थितीमें माताजी व्यवस्था करनेमें असमर्थ थी.नर्मदे हर!मैयाने हमारेलिये तय किया घर हमें ढुंडना था.और डॉक्टर अनिमेश विश्वासजी का घर देखा,सौ.वंदनाजीसे निवासभिक्षा मांगी और उन्होने सहर्ष स्वागत किया.नर्मदे हर!उपर प्रशस्त हॉलमें आसन लगाया.फ्रेश होकर प्रथम चायपान हुआ.वंदनाजीका मायका डहीमें है.वैद्य जितेंद्र चव्हाण मुल महाराष्ट्रीय परिवार है.वंदनाजीने उनको फोन करके हमारे आनेकी सुचना देदी.मैया तेरी लिला अगाध है.भोजन प्रसाद पाकर बैठेही थे की सोंडवासे धाकडसाब मालवीयजी को लेकर आ गये हमारा हाल पुछने.इतना बडा क्लासवन ऑफिसर अपनी बिझी शेड्युलसे समय निकालकर केवल हमारेलिये आये थे.डॉक्टर अनिमेश विश्वासभी बहुतही मिलनसार है.बहुत देरतक बाते करके भाईसाब सोंडवा वापस चले गये.नर्मदे हर!मैया!ऐसे प्यारे लोगोंसे हररोज हमको मिलवाकर आप मानवताका जो आविष्कार दिखाती हो.मोरया!तेरी दिदी ग्रेट है.जय हो मैया की!नर्मदे हर! अगली परिक्रमामेंभी हम तीन सहलियॉं वालपुरमें डॉक्टर अनिमेश और सौ.वंदना विश्वासजी के घरही ठहरे थे.अब सारा रेवाखंडही मायका है.बस् सॅक उठाओ और चल पडो.हरएक गांवमें मेरी मैया घरका द्वार खुला रखकर मेरा सहर्ष स्वागत करने तैयार है.नर्मदे हर!नर्मदे हर हर! मैया!!
वंदना परांजपे.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-96
नर्मदा परिक्रमा-भाग-96-
स्नान नित्यपाठ करके वंदनाजीने दिया चाय का इंधन पेटरूपी इंजिनमे डालकर हमारी विनोबा एक्सप्रेसने वालपुरसे प्रस्थान किया,डॉक्टर अनिमेश विश्वास और वंदनाजी हमे अलविदा करने दुरतक आये थे.नर्मदे हर! कुकलट गांव केबाद हथिनीमैया नये ब्रिजसे क्रॉस कर ली तब घड़ीमें सुबहके सात बजे थे.छोटी हथनी गांवमें श्री.मुकेश डोडवाजीने घर बुलाया.ये सैनिक छुट्टीपर आये थे,बकरीके दुधकी चाय पिलायी,हमने जिंदगीमें पहलीबार ये चाय पी,अच्छी लगी.इस छोटी हथनी गांवसे विंध्यपर्वत लांघकर महाराष्ट्रके नंदुरबारमें आदिवासी बांधव हररोज आते जाते रहते है.वो भी पैदल.नर्मदे हर!
आगे उन्हाला गांवके अंबामाता मंदिरमें एक मैया मधुर स्वरमें आरती गा रही थी मै मंत्रमुग्ध होकर सुनती वही खडी रही.बाकी साथी आने केबाद वही एक पेडके निचे बैठकर नास्ता किया और आगे चलने लगे.बोडगांवमें श्री.विजय मंडलोईजीने जलपान कराया.थोडा विश्राम करके आगे निकल पडे.ये सारी राह घने जंगलसे जाती है,उत्तरतटकी शुलपाणिकी झाडीमेंसे हम चल रहे है.सारे परिसरको निसर्गदेवताका बडा सुंदर वरदान मिला है.बडे बडे हरेभरे वृक्ष,रानफुलोंकी बहारसे प्रफुल्लीत लताबेल इन वृक्षोंको लिपटकर उपर उपर चढती आसमानको छुना चाहती बहुत सुंदर लग रही थी.सव्वा दस बजे टेमरिया पार करके आगे जा रहे थे तब एक वनसुंदरी कन्या मिली.मीना नामकी गांव की छोरी सुंदर पारंपारिक चांदीके गहने पहनकर डही के बाजार जा रही थी.उसका फोटो खिचे बगैर मुझसे रहा नही गया,उसको पुछकर मैने अलग अलग ऍंगलसे उसके फोटो खिंचे.ठुमक चलत रेवारानी देख मुक हुई मेरी बानी.नर्मदे हर!सारा परिसर सुंदर है मगर रास्ता बहुतही खराब.कितने पहाड चढे और उतरे,शुलपाणिकी झाडी जो पार कर रहे थे.खेडापुरा के बाद आ गया डही.आज बाजारका दिन है इसलिये बहुत भीड थी.जैसे निकलकर आ गये,कुछ फल खरीद लिये.थोडीही देरमें हम वंदना विश्वासके बडे भाई वैद्य जितेंद्रराव चव्हाणजी का घर-दवाखाना आ गया,वह मिल गये,वंदनाजीने उनको हमारे बारेमें बताया था.उन्होने हनुमान मंदिरमें सब व्यवस्था है मगर नही होगी तो मै डबा लेकर आता हूँ ऐसा कहा क्योंकी उनके घरके रिन्युएशनका काम चल रहा था.अगली परिक्रमामें हम उन्हीके घर रहे थे.नर्मदे हर! कोटेश्वरके संतमहात्मा कनकबिहारीदासजी का ये हनुमानमंदिर बहुत बडा है,धर्मशाला भी है.भोजनप्रसाद मिलता है मगर हम देरसे पहुँचे थे,मुख्य महाराजभी कुंभपर्व के लिये प्रयाग गये थे,सदाव्रत मिल रहा था मगर हम बहुत थक गये थे इसलिये हमने जितेंद्रभाईसाबको फोन करके बताया.उनके आनेतक हमने फलाहार लिया.दो बजे भाईसाब और भाभिजी भोजनप्रसाद लेकर आ गये.सब्जी रोटीका स्वादिष्ट प्रसाद पाकर अंतरात्मा तृप्त हो गयी.नर्मदे हर!सव्वातीन बजे आगे निकल पडे.रास्तेमें विश्व हिंदु परिषद के कार्यकर्ता श्री.निलेश राठोड मिल गये उन्होने जामदा के रामुसिंग मालवीयजी का नाम बताया और उनके यहॉं जानेको कहा बादमे आगे जानेपर मोटरसायकलसे आकर जामदा के स्कूलटीचर श्री.वर्मासर का फोन नंबरभी दिया.नर्मदे हर!पांच बजे ठेंगचा गांव आया,सब बहुत थक गये थे मगर जामदा सिर्फ दो किमि रह गया था इसलिये आगे चलते रहे.रास्तेमें दोनो तरफ खजुर के पेड फुलोंसे भरे दिखायी दिये.साडेपांच बजे जामदा पहुँचे.रास्तेपरही रामुसिंग मालवीयजी का घर-दुकान था मगर उनके रिश्तेदारीमें दुःखद घटना घटी थी इसलिये वह असमर्थ थे.हमने वर्मासर को फोन लगाया फिर उनके सुचनानुसार स्कूलकी एक रूम खोलकर दे दी.आसन लगाया.हॅन्डपंपपर स्नान कपडे वगैरे काम पुर्ण किया.नित्यपाठ कर रहे थे तब शेरला नामका स्कूल कर्मचारी खिचडी बनाकर लेकर आ गया.मैया पुत्रोंके इस सेवाभाव के आगे हम नतमस्तक हुए.नर्मदे हर!अब विश्राम.
वंदना परांजपे.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-97
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-97-हॅन्डपंप का पानी अच्छाखासा गरम था इसलिये स्नान किया.नित्यपाठ करके साडेपांच बजे आगे निकले.शेरलाजी का घर स्कूलके सामनेही था,उनको पुकारकर कलके बर्तन लौटा दिये और नर्मदे हर!बोलकर चलना शुरू किया.डाकनकुंडी के बाद कुऑं धरमराय गांवमें प्रवेश किया तब सुबहूके सात बजे थे.सुंदर हनुमान मंदिर है,प्रवेशद्वारपर गरूड विराजमान है.धरमराय और धर्मीकोट एकही है. यहॉं प्राचीन धर्मेश्वर महादेव मंदिर है.यहॉं अवधूतधाम आश्रम है वहॉं महाराष्ट्रीय महाराज है.आश्रम मैया किनारे है,मगर आगे जाने के लिये वापस पिछे आना पडता इसलिये हम गये नही.नर्मदे हर!एक दुकानसे पोहे मिक्स फरसाण खरीदकर नास्ता करके कच्चे रास्तेसे आगे चलने लगे.पुनर्वसित धरमराय,किकरवासगांवमें गुलाबसिंगजी बुलाया नर्मदे हर!चायपान करके आगे चलने लगे तब सुबहके साडेनऊ बजे थे.डेहेल केबाद पिपरीपुरामें दुर्गामंदिर है.सुंदर प्रशस्त परिसर है,परिक्रमावासी निवास करते है.बाजूमें सौ.पिराबाई सिताराम इस्केजीका घर और दुकान है वह सदाव्रत देती है मगर हम लोगोंको घर बुलाया और आलूमटर सब्जी,लच्छा पराठा और दाल,ये दाल हमारी स्नेहलने महाराष्ट्रीय पद्धतीसे बनायी हम उसको आमटी बोलते है.बढ़िया भोजनप्रसाद.नर्मदे हर! एक बजे आगे चलना शुरू.धूप बहुतही कड़ी हो गयी थी रास्ता भी कच्चा था.चंदनखेडी,नबाबपुरा फाटा,केबाद सव्वा तीन बजे नीसरपुरमें एक बडी नदीमैया तुटे फुटे बिना कठडेवाले हेवी ट्रॅफिकवाले ब्रिज क्रॉस करके प्रवेश किया.बहूत थक गये थे,कल यहीसे आगे जाना था इसलिये रूकना चाहते थे,मेरे पास पहली परिक्रमामें मिली सुशिलाजी का नाम था मगर मुझे उनका सरनेम ठीकसे याद नही आ रहा था,मुकाति या दुसरा कुछ?एक हॉटेलमें चायदूध लेकर अंजूभाभि केलिये मेडिसिन खरीदते समय उनका ध्यान मुकाति टेलर्स बोर्ड की तरफ गया,फिर उनसे सुशिलाजी के बारेमें पुछताछ कर ली.उन्होने बताया की शिवमंदिर के पास उनकी पुरानी हवेली है.नर्मदे हर!प्रथम मैने जाकर घरके बरामदेमें बैठी माताजी को मेरा परिचय देकर पिछले वर्ष सुशिलाजी मुझे बसमें मिली थी और घर आनेका निमंत्रण दिया था ये बताया.सुशिलाजी बाहर आयी उन्होने मुझे तुरंत पहचान लिया और सहर्ष स्वागत किया मैने बाबा,भाभी,स्नेहल को बुलाया और घरमें आसन लगाया.फ्रेश होकर चायपान कर रहे थे तब सुशिलाजीने कहा की आप गाडीसे कोटेश्वर जाकर स्नान दर्शन करके आना.हमें भी वो उचित लगा.हमने कपडे सर्फमें भिगोकर रखे ताकि वापस आकर धोनेमें आसानि होगी.गाडीसे कोटेश्वर पहुँचे.घाटपर मैयाकी लहरे ऐसे धडक रही थी जैसे की सागरकी लहरे.प्रचंड जलसाठा आंखोंमें नही समा रहा था.अस्ताचल जाते सुर्यप्रकाशसे मैया अप्रतिम सुंदर लग रही थी.श्री कोटेश्वर,पुराना कोटेश्वर,श्रीरामजी,संत दगडूबापूजी के दर्शन करके कमलदास बाबाजींको प्रणाम करके गोशाला,संस्कृतपाठशाला देखकर वापस नीसरपुर आ गये.घर आकर देखा तो सुशिलाजीके बहुने हमारे कपडे स्वच्छ धोकर नील लगाकर सुखाने डाल दिये थे.नर्मदे हर!क्या कह सकते है ऐसे सेवाभाव के बारेमें?पिछले साल बसमे हो गयी सिर्फ जानपहचानपर उन्होने किया हमारा शाही आगतस्वागत,ये सिर्फ मैया किनारे रहनेवाले उनके पुत्र और कन्याही कर सकते है.कितनी ये मैया प्रति श्रद्धा.नर्मदे हर!नर्मदे हर हर!नर्मदे हर हर हर!वन्दे नर्मदाम्.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-98
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-98-सुबह जल्दी उठकर बहूने स्नानका पानी गरम करके दिया.स्नान नित्यपाठ के बाद अदरक वाली मसालाचाय दो बार लेकर सुशिला मुकातिजी और फॅमिलीको अलविदा करके हमारी विनोबा एक्सप्रेसने नीसरपुर स्टेशन छोडा तब सुबह के सात बजे थे.नर्मदे हर! आगे पुनर्वसित नीसरपुर के आगे एक निर्माणाधीन साईमंदिर के बाद कडमाल,खापरखेडामें श्री.मोहन पाटिदारजीने बुलाया,नर्मदे हर! गाजरका स्वादिष्ट हलवा बडे बडे कटोरे भरके दिया,आग्रह इतना की ना नही बोल सके खानाही पडा.चाय लेकर आगे चलने लगे तब साडेआठ बजे थे.गेहेलगांव यहॉं संतगुरू कबीर सत्यनाम गुरू हरीदास भाथीजी आश्रम है,आश्रममें भोजन-निवास व्यवस्था है और राजघाटपर रखा सामान लानेकी भी व्यवस्था है.नर्मदे हर!एक नर्मदापुत्रने पपिता दिया.आगे आया चिखलदा.महाराष्ट्र के क्रांतिवीर दामोदर चाफेकरजी के वंशज परपोते यहॉं रहते है.उनके घर गये.नीलकंठेश्वर,हरिहरेश्वर,नर्मदामाताजी का दर्शन किया.यहॉं प.पुज्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीजीं ने चातुर्मास किया था.नर्मदे हर!आगे बसस्टॅन्ड के पाससे मोबाईल टॉवरके पाससे कच्चे रास्तेसे रेत के खदानसे मिट्टीभरे रास्तेसे चलना बहुतही मुश्कील हो रहा था हवासे उडती रेतमिट्टी नाक आंखमें जा रही थी उपरसे कड़ी धूप बहुतही परेशान करता ये रास्ता समाप्त हुआ तब दोपहरके साडेबारा बजे थे.हाय वे आ गया,सोडलबाबा शिव मंदिर है छोटासा.चाय की टपरी थी,बैठ गये बहुत थक गये थे.एक नर्मदापुत्रने बड़ा पपिता और अमरूद दिये.बहुत सुंदर मिठे फल पाकर आत्मसंतुष्टी मिली.चाय लेकर आगे चलने लगे.यहॉं एक पेड के निचे एक बाबाजी दो तीन सालोंसे खडे है.बाराही महिने खडेही है,एक लुंगी पहने और गलेमें थैली लटकाए खडे है.सिर्फ चाय और फरसाण लेते है.किसीने दिये तो पांचदस रूपये लेते है,ज्यादा दिये तो लेते नही.मौन रहते है.नर्मदे हर!मैया परिक्रमा करते वक्त कितनी महान विभूति,संतमहात्माओंके दर्शन होते है.पुर्वपुण्य मैयाकृपा है.मलवाडा-श्री गजानंदजी स्नानघाट बहुत सिढ़ियोंवाला है एक नये मंदिरमें दर्शन लेकर आगे जाने लगे.मंदिर के पास धर्मशाला है,भोजनप्रसादकी व्यवस्था है.कच्चे रास्तेसे बोधवाडामें शिवपंथलिंग तीर्थस्थान पहुँचे.यहॉं महाराष्ट्रके धुलियासे आये रमादास त्यागी ये महंतजी है.आसन लगाया.महाराष्ट्र के सेवाभावी प्रसिद्ध परिक्रमावासी श्री और सौ.पागेजी आजही आगे गये थे.भेंट का योग नही था.नर्मदे हर. शिवपंथलिंग बारवी शताब्दीका और अठारहवी शताब्दीमें जीर्णोद्धार हुआ पुरातन मंदिर है.मंदिरके तलहटीपर रूद्रयंत्र है और महादेव के गर्भगृह के छतपर श्रीयंत्र है.मंदिरके तलहटीपर चारों दिशाओंमें शिवपिंडी और माता पार्वतीके विग्रह है.मुख्य पिंडी की शाळुंका संगमरवरी है.इसी तीर्थस्थानसे सब तेहेतीस कोटी देवताओंने,यक्ष किन्नर सबने नर्मदा परिक्रमा प्रारंभ की थी ऐसी आख्यायिका है.सारा परिसर बड़ी वृक्षराजीसे व्याप्त है.यहॉं मैया शांत पर विशालस्वरूप है.आज महंतजी केसाथ हम याने सिर्फ महाराष्ट्र है.सबने मिलके मराठी भोजनप्रसाद बनाया नैवेद्य भगवान को अर्पण करके प्रसाद पा लिया.नर्मदे हर!अब विश्राम.
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-99
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-99-सुबह स्नान नित्यपाठ हुआ,महंतजीने यहॉं 2500 सालसे जल रही अखंड ज्योति के दर्शन करवाए.वहॉं मारूतिराय भी विराजमान है.शिवदर्शन लेकर सबने चाय लिया और महंतजीको प्रणाम करके विनोबा एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायी.नर्मदे हर! गोपालपुरा के बाद गांगलीफाटा आ गया वहॉंसे एकलबाडा के लिये शॉर्टकट था इसलिये गांगली न जाते आगे चलने लगे.श्री.मोहनलाल धनगर खेतमें काम कर रहे थे साथमें उनका पोता वेदांत भी था.नर्मदे हर! मैया पधारो गरीब के घर कुछ बालभोग पाओ.बडी विनम्रतासे प्यारसे बुलाने पर ना नही करते गये पोहे चाय लेकर आगे चलने लगे.नर्मदे हर! कच्चे रास्तेसे एक थोडे पानीवाली नदीमैया पार करके एकलबाडा गांवके श्रीराम मंदिरमें आ गये.दर्शन लिया.यहॉं परिक्रमावासी रह सकते है.ओंकार तोमरजी भोजनप्रसादकी व्यवस्था करते है.उनके घर एक परिक्रमामें हम रूके थे.बडा आगत्यशील परिवार है.इस गांवमें सुबह होने के पहले भोर समय राम फेरी आती है उनके स्वागतमें घर के दिंडीदरवाजेमें दिपक जलाते है और रामभक्तोंकी झोलीमें कुछ न कुछ जैसे धान आटा वगैरे डालते है.बहुत पवित्र वातावरण होता है.हमारे महाराष्ट्रके गांवोंमे भी आते है सफेद कपडे पहने गलेमें कवडीयोंकी माला सिरपर मोरपंखकी टोपी पहने आदमी रामनाम अंबामाता के गीत गाते है उनको वासुदेव भोपी कहते है.नर्मदे हर!निर्मलाताई के घर चाय लेकर आगे चलने लगे.कच्चे रास्तेसे नाला पार करके अछोदा के बाद सेमलदाके सदाव्रत आश्रम पहुँचे,आगे मॉ रेवा कुटी आश्रम नावघाट आ गये.यहॉं छोटा बडदासे लोकेश पाटिदार हमारे कुछ मेडिसिन बडवानीसे लाकर देनेवाले थे.आश्रम के जगबीरबाबाजीने एक पपिता प्लेट चाकू सब दिया और खुद मैया स्नान करने चल पडे.नर्मदे हर!थोडीही देरमें वह हमारा सामान लेकर वापस आ गये.लोकेशने नाविक के हाथों सिर्फ मेडिसिन ही नही भोजन भी भेजा था.नर्मदे हर! मैया,आपके बच्चोंके इस श्रद्धा भक्ति प्रेम के आगे हम सिर्फ नतमस्तक हो सकते है.आगे पेरखडमें सौ.सुमन धर्मेंद्र डोडवाजी के घरमें लोकेश पाटिदारने भेजा भोजनप्रसाद ग्रहण किया और थोडा विश्राम करके आगे निकल पडे.भगवा झंडा देखकर उसके अनुशंग से एक टेकरीपर भोगेश्वर महादेव मंदिरमें गये.छोटासा पुरातन मंदिर है.बहुत सारे साधू वहॉं भोलेबाबाकी स्पेशल आराधना करने बैठे थे कुछ गांववाले भी थे(आप समझे न स्पेशल आराधना)हम तुरंत निकल पडे.मिट्टी के खदानसे कच्चे रास्तेसे दो नदीमैया का संगम पुलसे क्रॉस करके उडदाना,शरीफपुरा के बाद बडा बडदा पहुँचे तब शामके छे बजनेवाले थे.कुलदेवी मंदिरमें गये मगर वहॉं सुविधा नही थी इसलिये गांवमें निवास भिक्षा करने जा रहे थे पहला घर था नर्मदा सदन.ॐ भवति भिक्षां देहि.नर्मदे हर!घर था श्री.छत्तरसिंग लक्ष्मणसिंग मंडलोई-तोमरजींका.सहर्ष स्वागत हुआ.स्नान हुआ कपडे धोनेहीवाले थे तो कामवाली बाईजी बोली मै धोऊंगी कपडे आप आराम करो मैया की सेवा होगी मेरे हाथोंसे कितना सेवाभाव नर्मदे हर!नित्यपाठ होने तक बहू शिवकन्याने दाल-बाटी,खीर सुंदर भोजन प्रसाद बनाया.तोमरभाईसाब का पोता राजबहाद्दुर राजा है.होशियार लडका है.नर्मदे हर!अब विश्राम.
नर्मदे हर!
नर्मदा परिक्रमापरिक्रमा-भाग-100
॥नर्मदे हर॥
नर्मदा परिक्रमा-भाग-100-स्नान नित्यपाठके बाद चायका इंधन विनोबा एक्सप्रेसके इंजिनमें डालकर आगे जाने को मंडलोईजी के घरके स्टेशनसे हमारी गाडीने बडा बडदा स्टेशन छोडा.तब सुबहके साडे छे बजे थे.नर्मदे हर!आधा किमि जाने के बाद तोमरजीने बताया शॉर्टकट आया.दाहिनी तरफका कच्चा रास्ता मिर्झापुर जानेका था.साडेसात बजे मिर्झापुरमें श्री.भरत पाटिदारजीने गरम गरम दूध दिया.नर्मदे हर!आगे चलो,जलखेडा गांवके बाहर थोडे पानीमेंसे मानमैया पार करके एक टेकरी चढके उपर आ गये.कच्चा गाडी रास्ता था,किस तरफ जाना है?अंजूताई बोली मांडवगड मैयासे दूर है इसलिये बायीं तरफसे जाना चाहिये मगर हम तीनोंको लगा मैया पुरबसे आती है इसलिये दाहिनी तरफ जाना चाहिये.हम पुरबकी तरफ चलने लगे और वह गलत था.एक विजय नामका लडका बोला आप बहुत दूर निकल आये मगर मै आपको हायवेपर छोडता हूँ.नर्मदे हर!एक टेकरी चढके उतरे,मंडवतीमैयामें पानी नही था,बडे बडे पत्थरों परसे पार करके किशनपुरखेडी गांवमें आ गये.श्री.शोभाराम छगन कनेलजीने वेफर्स और चाय दिया.ग्यारह बजे आगे चलने लगे.ठनगांव आ गया हमको तीन चार किमि ज्यादा चलना पडा था.बायखेडासे लुन्हेराके श्री.सुनील शर्माजीको फोन किया.सव्वा बजे लुन्हेरा बुजुर्ग आया.विशाल राठोडजीने बहुत आग्रह किया इसलिये सामान उनके घर रखकर भोजनप्रसाद के लिये सुनील शर्माजी के घर गये.दालबाटी का स्वादिष्ट भोजनप्रसाद ग्रहण करके चार बजे वापस विशाल के घर आ गये.नर्मदे हर!अल्पेश,रितेश,लोकेश सहर्ष स्वागत हुआ.बडे हॉलमें नये गद्दे,दुलई बडे थाट थे.नित्यपाठ के बाद भोजनप्रसाद.अब विश्राम.नर्मदे हर!
वंदना परांजपे.
No comments:
Post a Comment