Sunday, 4 February 2018



तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-27
सुबह जल्दी नित्यकर्म निपटके श्रीरामजीकी काकडआरतीमे सहभागी हो गए।बादमे चायपान करके गोडबोले फॅमिलीको नर्मदे हर करके हमारी विनोबा एक्सप्रेस आगे चल पडे तब पांच बजे थे।
कडोला(उबारी),पलासनेर,मसनगांव पहुँचे तब साडेसात बजे थे।पोहे-चायका नास्ता किया।आगे कांकरिया,बारंगीमे श्री.विजय मीना के यहॉं जलपान करके आगे चल दिये।नागपुर रेल्वेमार्गके गेटपर चाय लिया।आगे चल रहे थे तब एक मोटरसायकल हमारे पास आके रूक गयी,मुकेश टेलरने नर्मदे हर किया और बोले,आगे मांदला गांव है मेनरोडपरही हमारा दुकान-घर है,बोर्ड लगा हुआ है।आप आज हमारे घर भोजन ग्रहण किजियेगा।आप पहुँचो तबतक मै काम निपटाके आपकी सेवामें हाजिर होता हूँ।नर्मदे हर!परिक्रमावासीओंके प्रति कितना आदरयुक्त सेवाभाव है रेवाखंडके हरएक व्यक्तिमे।
मांदला पहुँच ही रहे थे की मुकेशजी आ भी गये।तीन भाईयोंका एकत्रित कुटुंब है।माताजी स्वयं हमारे पास बैठकर भोजनमे हमे क्या चाहिये ये देख रही थी,बहुओंको सुचना दे रही थी।स्वादिष्ट भोजनप्रसाद मिला।विश्रांती के बाद चायके साथ गुजिया,नमकीन लेनाही पडा।नर्मदे हर!चलो आगे।मुहाल,चल रहे थे तो दैनिक भास्करके वार्ताहर मिले,उन्होने हमारा इंटरव्ह्यू लिया फोटोभी खिंचा बोले,कल के पेपरमे छपेगा।नर्मदे हर!छिपावड,अपना भोजनालय के संदीप राठौरने नर्मदे हर करके लिमका दिया।शामके साडेपांच बजे थे आजका चलनेका कोटाभी पुरा हो गया था,हमें शंकर राजपूतके घर जाना था।एक दुकानमे पुछा तो वो बोले,हमारे घर पधारोना हमे सेवाका मौका दे दो।नर्मदे हर!मैयाने आज हमारे लिये श्री.दुर्गाप्रसाद राजपूत का घर तय किया था,हमारे इन्कारका सवालही नही हो सकता था।नर्मदे हर!चायपान के बाद स्नान-कपडे धोनेका कार्यक्रम किया,आरतीमें घरके सारे सदस्य शामिल हो गये।सुंदर भोजनप्रसादके बाद अब विश्राम नर्मदे हर!
. क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-28
नित्यकर्म,चायपान के बाद राजपूत फॅमिलीको अलविदा किया।5-15बजे थे सुबहके।पोखरनीमे तुकाराम भैसोरजीने चायपान कराया।आगे धनोरा,करूना,चीचमे ढाबेपे चाय लिया,रास्तेपर पेड नही है धूप तेज हो गयी है पानी पितेही पसिना बनके बहे जा रहा है।दगडखेडी,बोथियाखुर्द पहुँचे तब 10-15 बज गये थे मगर कड़ी धूपसे लग रहा था,गुस्सेसे लाल-पिले हुए सुरजचाचू हमे जलाके राख कर देंगे।गांव अंदर था इसलिये यात्री प्रतिक्षालयमे थोडी साफसफाई करके बैठ गये।
22/09/16, 7:57:49 PM: ‪+91 94236 38659: 1-30बजेतक बैठे रहे,हमे धारूखेडीमे महेश शर्माजी के घर जाना था।कोई बताता था की पासही है धारूखेडी तो कोई कहता था आठ-दस कि.मि.है,कितना दूर है क्या पता?
बसस्टॉपके सामने एक टायरवाला था उसके पाससे पानी लिया नर्मदे हर! पैदल धीरे धीरे चलो,मुखसे जय मैया बोलो ! ॐ नमो नर्मदा माई रेवा,पार्वतीवल्लभ सदाशिवा! कहते मार्गक्रमण करते रहे।एक छोटीसी नदीमैया ब्रिजसे पार करके धारूखेडीके यात्रीप्रतिक्षालय तक पहुँचे तब तीन बज चुके थे।गांव थोडा अंदर था,बहुत थक चुके थे।एक आदमी को महेश शर्माजीके बारेमे पुछा और उसके पिछे चलते उनके घर पहुँचे।हमारा परिचय दिया,बडे प्रेमसे हमारा स्वागत हुआ।
महेशजीकी धर्मपत्नी सौ.मीना,बेटा धीरज और दो बेटियॉं रक्षा,शीतल।माता-पिता श्री.रामाधार शर्मा,सौ.यमुना शर्मा।बडा प्यारा परिवार है।आंगनमेही हॅण्डपंप है,कपडे धोनेका बडा कार्यक्रम निपटाया।शाम होतेही रक्षाने तुलसीवृंदावनके पास,भगवानजीके सामने स्तोत्र बोलते दीपक लगाया,हमारे पुजा आरतीके लिये निरांजन-बाती,प्रसाद लाके दिया।सब आरतीमे सहभागी हुए।बच्चोंने हमारे साथही दादा-दादी,माता-पिताके चरणस्पर्श करके प्रणाम किया।बडे संस्कारी है बच्चे।
चुल्हेपे बनाया बिना प्याज-लहसून का स्वादिष्ट भोजनप्रसाद पाया।शीतलको एक कहानी सुनायि अब निद्रादेवीकी आराधना।नर्मदे हर!
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-29
सुबह 4-30 बजे शर्मा फॅमिली को अलविदा करके हमारी दो डिब्बोंकी विनोबा एक्सप्रेसने धारूखेडी स्टेशन छोडा।दो कि.मि.पर अन्नपुर्णा ढाबेपर चाय लेके आगे चल दिये।निशानिया,खेरखेडा,बेडियाखाल,साढियापानी केशवके ढाबेपर चाय पिनेके बहाने बैठ गये,दस कि.मि.से ज्यादा चलना हो गया था।दस-पंधरा मिनिट बाद आगे चलना शुरू।नया हरसूद,हरसूद गांव पुनासा डॅममे डूब गया,गांवको यहॉं पुनर्वसित किया है इसलिये ये नया हरसूद।रेल्वे लाइन क्रॉस करके छनेरा गांवमे प्रवेश कर रहे थे,रिकी मालवीयने पुकारा नर्मदे हर!आईये मैयाजी कुछ नास्ता-पानी किजियेगा,नर्मदे हर!
रिकी टेलरमास्टर है।सुट स्पेशॅलिस्ट है।बहू अर्चना लेडीज टेलर है।सुंदर पोहे,चाय भरपेट नास्ता हो गया तबतक रिकी केले लेके आ गया बोला,साथमे लेके जाना।नर्मदे हर!आगे चले तब सुबहके 8-30बजे थे।बाजारपेठमेसे चलते चलते महांकाल चौराहापर आ गये।छनेरा बडा गांव है।मुकेशकुमार संकरे के ढाबेपर बैठे।सुर्यदेवता आग बबुला होने लगे थे।अब आगेकी सफर कठीण होनेवाली थी।
सुरक्तपुर,एक घरके आंगन क्षणिक ठहरे,उधर रहनेवाले युवककी बाईस सालकी पत्नी एक छोटा बालक पिछे छोडके ब्रेन हॅमरेज होके चल बसी,बहुत बुरा हुआ मैया।
चारखेडा मनरंगीबाबा समाधी स्थल आश्रम पहुँचे तब ग्यारह बजे थे।बडे बडे पेड अपनी छत्रछाया दे रहे थे,बड़ा सुख मिला।यहॉं श्री.रामेश्वर यादव,सौ.उमाबाई व्यवस्था देखते है।माताजीने गरम गरम रोटी-सब्जी का भोजनप्रसाद दिया।
यादवजीने मनरंगीबाबा की एक कहानी सुनायी,बाबा के पास दो भैंसे थे।बाबा उनके गलेमे सामानकी लिस्टका कागज़ बांध देते थे और वो भैंसे दुकान जाते थे,दुकानदार उनके गलेमे सामानकी गठडी बांध देता था,वे सामान लेके बाबाके पास आ जाते थे।मनरंगीबाबाजीने समाधी लेते ही दोनो भैंसोंनेभी अपने प्राण त्याग दिये।उनकी समाधी बाबाजीके समाधीके सामने है।
चारखेडा गांवके बाहर तवामैयापर रेल्वेका ब्रिज है उससे तवा मैया पार करनेका दिव्य करना था।नर्मदे हर!जा रहे थे तब मोटरसायकलसे जानेवाले एक पंडीतजी मिले,नर्मदे हर!आपका फोटो और मुलाखत छपी है आजके पेपरमे,उन्होने बताया।परसो छिपावड के रास्तेमे दैनिक भास्करके वार्ताहारने हमारी मुलाखत और फोटो लिया था।नर्मदे हर!
रेल्वेब्रिजपर पहुँचे।बाप रे!निचे पानीका अफाट दरिया दिख रहा था,आधा पाऊण कि.मि. का अंतर होगा ब्रिजका।चलो बोलो नर्मदामैया की जय!तवामैया की जय!पटरी देखके,कोई गाडी तो नही आ रही इसका ध्यान रखते,पीठपरकी सॅक संभलते,नर्मदे हर नर्मदे हर,मैयाजी आपकी जय हो,तवामैया आपकी जय हो कहते कहते ब्रिज क्रॉस हो गया।हम तो पैदल थे मगर उन मोटरसायकल स्वारोंकी सचमे कमाल थी जो ये ब्रिज क्रॉस करके आ जा रहे थे।एक दिन नही,सालोंसे हररोज।नर्मदे हर!
दुसरी परिक्रमामे ये दिव्य नही करना पडा।अब तवामैयापर मोटररोड बन गया है।
पांच बजे सेल्दा पहुँचे।श्री.संतोष गवळीने अपने घर बुलाया।तीन भाई है।बडा घर,खेत-खलियान,गाय-भैंसे,ट्रॅक्टर ऐसा बारदाना है।सहर्ष स्वागत,उत्तम भोजनप्रसाद।
आज 35कि.मि.चलना हुआ था।अब निंदिया रानीके आगमन की प्रतिक्षा थी।नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-30
सुबह 5-30बजे चाय लेके गवळी परिवारको नर्मदे हर कहके आगे प्रस्थान किया।रास्ता अच्छा है,दोनो तरफ घना जंगल है।साधारण तीन कि.मि.पर बांए तरफ जंगलमे थोडा अंदर एक आश्रम है,वहॉंके बाबा पिछले कुछ सालोंसे खडे रहकर तपस्या कर रहे है।उनका नाम मालूम नही सब उनको खडेबाबाही कहते है।
आगे मांडला गांवमे राधाकृष्ण,शिवजी,नर्मदामैया,हनुमानजी का मंदीर है।मंदिरके आंगनमे कुआ है।श्री सितारामबाबा बडे बुजुर्ग महात्मा वहॉ रहते है।दर्शन करके हम बैठे,बाबाजीने चायपान करवाया।
बाबाजी गांववालोंपर गुस्सा हो गये थे,गांवमे कल किसीके घरमे पुजा-हवन हुआ था और उसका निर्माल्य,हवन की रक्षासामग्री उन लोगोने कुंवेमे डाल दी थी,सारा पानी गंदा हो गया था इसलिये बाबाजी को गुस्सा आया था।बाबाजीने गांववालोंको एक अच्छी बात कही,निर्माल्य,हवन सामग्री पानीमें डालने बजाय पेड पौधोंके पास जमीनमे गाड देनेसे उनको खाद मिलेगी और किसीके पैरतलेभी नही आएगी,पानी भी गंदा नही होगा।कितना सही विचार है बाबाजीका।नर्मदे हर!
सेजला गांवमेसे सिंगाजी जानेका रास्ता है मगर जंगलसे जाना पडता है,श्री.गंगारामबाबा बडे बुजुर्ग हमे रास्ता दिखाने आए इसलिये हमे दर्शन हो सका।बहुत सुंदर पवित्र स्थान है।
भैंसावांमे चाय-बिस्किटका नास्ता किया।सावनेर रेल्वेक्रॉसिंग के बाद बाजारपेठमे एक हॉटेलमे भोजनके लिये जिलबी(जलेबी?)और कचोरी खायी।नर्मदे हर!आगे जाके दुर्गामंदिरमे माताजी के समीप विश्रामके लिये बैठे।
कड़ी धूप है।हमे मुंदी जाना है और कमसे कम छे-सात कि.मि.जाना है।विश्राम करना बहुत जरूरी था।1-30 बजे आगे चलने लगे।मोहद,मंडी और मुंदी।पहुँच गये।हमारे पास असोक राठोड ये नाम था मगर मुंदीमे तीन असोक राठोड थे।पता नही मिला,बाजारमें चौराहेके मध्यमे दुर्गामंदीर है मगर खुला,वहॉं रहना शक्य न था।नर्मदे हर!
मेरी नजर एक डिस्पेंसरीके बोर्डपर गयी,डॉक्टर अत्रे।नामसे महाराष्ट्रीय लगे,गये अंदर अपना परिचय दिया।डॉक्टर मुंदीमे नही रहते मगर हमारी व्यवस्था करनेवाले है।प्रथम चाय देके उन्होने एक आदमी को हमे नर्मदा धर्मशाला पहुँचानेको बोला और मै दवाखाना बंद होतेही आता हूँ ऐसा कहा,नर्मदे हर!
नर्मदा धर्मशाला ब्राह्मण समाजकी है,दिलीप सोहनी इस मुल महाराष्ट्रीय पर पिढ़ियोंसे मध्यप्रदेशमे रहनेवाले युवकने अपनी दादा-दादीके स्मृति प्रित्यर्थ रूम बांधी है,दुसरे समाज बांधवोंने भी रूम खुला बडा बरांमदा बांधा है,स्वच्छता है।
मेरी भाभी मायकेसे सोहनी है,ये मैने बताया तो हमारी व्यवस्था दिलीपके घरमेंही हो गयी।दिलीप बोला आपकी भाभी सोहनी की बेटी मतलब मेरी बहन,और अपने बहनकी ननद को बाहर कैसे रख सकता हूँ।ऐसे है मेरे मध्यप्रदेशी बांधव बडे दिलवाले।नर्मदे हर!
मेरा गुरूबंधू संजय जोशी जो खांडवा कृषिविस्तार आधिकारी है,मैने उसे आज मुंदी पहुँचने वाली हूँ ऐसे बताया था,शामको हमे मिलने आ गया।डॉक्टर अत्रे भी आ गये।सबको मिलके बड़ा आनंद मिला।दिलीपकी पत्नी गौरी,बच्चे दुर्गा और कृष्णा बहुत प्यारा परिवार है।
आरती,भोजनके बाद थोडीदेर टीव्ही देखा बादमे बच्चोंको कहानी सुनायी।अब नर्मदे हर!
क्रमशः

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-31
स्नान आरती होनेतक गौरीने सुंदर अदरकवाली चाय बनायी।हम जानेवाले थे इसलिये बच्चेभी जल्दी उठे थे,आज नही जाना दो-तीन दिन रहो बादमे जाना उनका हठ चल रहा था।मुझे गाडासराईके डॉक्टर चौरासियाजीके पोते पोती की याद आ गयी वो भी ऐसाही हठ कर रहे थे,और मेरे पिछे गाडी लेकर नवीनको बच्चोंको लेके आना पडा था,बहुत समझानेके बादही वो वापस गये थे।ऐसे प्यारे बच्चोंकी वजहसे ही ये खडतर परिक्रमा करना आसान हो जाता है।ऐसा प्यार मिलता है इसलिये घरसे दूर होना भी दूर न होनेका एहसास दिलाता है।मेरे प्यारे बच्चे!नर्मदे हर!
दुर्गा और कृष्णा को फिर आनेका वादा करके उनका तथा गौरी दिलीप का प्रणाम स्वीकारते हम आगे बढ़े।नर्मदे हर!
केनुद,भमौरी,जलवा बुजुर्ग पहुँचे,हनुमानमंदिर के पास मांगिलाल छबुलाल यादवजीने भोजनप्रसादके लिये बुलाया।दसही बजे थे मगर ना कहना ठीक नही होता इसका अनुभव पहले ले चुके थे और धूप भी तेज होने लगी थी,रूक गये।नर्मदे हर!
बडे आदर श्रद्धासे दिया भोजनप्रसाद ग्रहण करके थोडा विश्राम करके देढ़ बजे आगे चल दिये अर्थात यादव परिवार को नर्मदे हर करके।देवला,डूडगांव,खुटला,अटूट,बखरगांव,गुजलीमे श्रीराम मंदिरमे दर्शन करके चायपान करके(जिन्होने चाय दिया उनका नाम मै भुल गयी इसलिये क्षमाप्रार्थी हूँ)आगे कडौली,नेसन हथिया बाबा आश्रममे पहुँचे तब शामके सात बज चुके थे।आज करीब करीब चालीस कि.मि.चलना हो गया था।बहुत थक गये थे।बरगदवृक्ष तले आसन जमाया।नर्मदे हर!
आश्रममे सत्संगकेलिये आये गांववालोंने कॅनॉलके बाजूसे ओंकारेश्वरको जानेवाला शॉर्टकट बताया और ओंकारेश्वर सिर्फ बारा कि.मि.है ऐसा कहा।नर्मदे हर!बडी तेज हवा चल रही थी,शायद ज्यादा थकनेसे निंद नही आ रही थी।
पहिली परिक्रमामे हमको बससे ओंकारेश्वर जाना पडा था,मेरी तबियत खराब थी।नर्मदे हर!
सुबह जल्दी नित्यकर्म निपटाके प्रार्थना करके साडेपांच बजे चलने लगे।आज बहुत दिनोंबाद नर्मदामैयाके दर्शन होनेवाले थे।मनमोर खुशीसे नाच रहा था।आश्रमसे एक कि.मि.आगे जानेके बाद कनॉलके बाजुसे कच्चा रास्ता शुरू हो गया।बहुत दिनसे,होशंगाबाद के पहले पिपरियासेही हम हायवेसे चल रहे थे,कच्चे रास्तेपर चलना थोडा कठीण हो रहा था,पैरोंके ब्लिस्टर पुरे ठीक नही हुए थे।मगर आज मैया मिलनेवाली थी।पैरोंको बोला थोडा सबर करो।नर्मदे हर!
साधारण आठ नौ कि.मि.बाद कॅनॉलका रास्ता छोडके कच्चे रास्तेसे खगवाडा,अंजरूद,धावडी,कोठी गांवके बाहर पक्के रास्तेपर आ गये तो ओंकारेश्वर पांच कि.मि.लिखा पत्थर दिखा,अबतक हम पंधरा कि.मि.चल चुके थे,मतलब हथियाबाबा आश्रमसे ओंकारेश्वर बारा नही बीस कि.मि.था।नर्मदे हर!
एक-देढ घंटेमे ओंकारेश्वरमे गजानन महाराज भक्तनिवासमें पहुँच गये।नर्मदे हर! चार नंबर बिल्डींग मे रूम मिल गयी।स्नान,कपडे धोना वगैरे काम निपटाके गजानन महाराजके दर्शन करके मैयादर्शन करने चले गये।
नर्मदे हर!आंखोंसे आंसूओंकी बरसात हो रही थी,खुशी के आंसू थे।अमरकंटकमे अच्छा शास्त्रोक्त संकल्प नही हुआ था इसलिये मै कल पुनःह संकल्प करनेवाली थी।जितेंद्र शास्त्रीजीको फोन करके हम आ गये है बता दिया।नर्मदे हर!
भक्तनिवासमे आकर मैयाकी शामकी आरती की।प्रसादालयमे जाके भोजनप्रसाद पा लिया। जितेंद्रशास्त्रीजीका भाई देवेन्द्र मिलने आ गया।कल संकल्प पुजा सुबह आठ बजे करनी है।अब विश्रांती।नर्मदे हर!

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-32
सुबह काकड आरती के लिये जल्दी उठके मैया स्नान करके तैयार होके मंदिर गये। गजानन महाराजकी मराठी काकडआरती सुननेमे बहुत मधुर थी।झांज,चिपळ्या,टाळ,मृदुंग सारे एक लयमे बज रहे थे,सारा वातावरण पवित्र,शांत,सुरमयी हो गया था।नर्मदे हर!
काकडआरती के बाद चायप्रसाद लेके कपडे धोके टेरेसपर सुखाने डाल दिये ताकी थोडेबहुत सुखे तो भी वजन कम होगा।संकल्प के जाते समय रूम छोडके सॅक लेकेही जाना था,क्योकी परिक्रमामे गोमुखका उल्लंघन नही कर सकते इसलिये पिछे वापस नही आ सकते थे।
आज हमारे साथ श्री.संतराम जाधव,मोरे,कुलकर्णी,गोगटे भी संकल्प विधीमें सहभागी थे।आठ बजे गोमुख घाट पहुँचे।यथावकाश देवेंद्रगुरूजी आ गये।उन्होने कन्या पुजन के लिये हलवा बनाके लाया था,बाकी संकल्पविधीकी सामग्री भी लायी थी।योग्य मंत्रोच्चारसे यथाविधी संकल्प पुजा हमारे हाथों करवायी,मैयाके प्रतिनिधी स्वरूप और गुरू के नाते आशिर्वाद देके हमे परिक्रमा के लिये प्रस्थान करने की आज्ञा दे दी।नर्मदे हर!
पचीस-तीस सिढियोंका घाट चढ़के हम नगरपालिका के ऑफिसमे गये,हमारा पहचानपत्र दिखाने के बाद हमे परिक्रमावासी के तौरपर नगरपालिका का स्टॅम्प हमारे डायरी पर लगाया।अब हम अधिकृत परिक्रमावासी हो गये।नर्मदे हर!
एक हॉटेलमे नास्ता चायपानी करके चलना शुरू किया तब सुबह के साडे दस बजे थे।हमने किनारेसे जाना मुनासिफ नही समझा क्योकी वह मार्ग बहुत कठीण है।हम रोडसेही चलने लगे।एकदम शांतिसे आहिस्ता आहिस्ता चल रहे थे।रास्तेके दोनो तरफ बडेबडे पेड है इसलिये धूप परेशान नही कर रही थी मगर गरम बहुत हो रहा था।
दोपहरके1-15 बजे एक जगह पेड के निचे बैठकर प्रसादका हलवा खाया।थोडा विश्राम करके आगे चल दिये।
रास्तेमे मारूकी चिंचलीका रहनेवाला विजय बिहारीलाल कारोळे मिला उसने उसके घर मुक्काम करनेका आमंत्रण दिया।आगे अंजड के पांडु कदम मिले वो आवली घाट पर हमारी व्यवस्था करनेवाले है।
शाम चार बजे मोरटक्कामे भक्तराज आश्रममे पहुँचे।श्री.नाना घळसासी,सौ.नानीजीं ने बडे प्रेमसे स्वागत किया।एक रूममे आसन लगाया।
आज आश्रममे तुलसी विवाह संपन्न हुआ।मंगलाष्टक,सनई चौघडा,विवाह के बाद मिष्टान्न भोजन सारा महाराष्ट्रीय तामझाम था।बड़ा मजा आया।अब विश्रांती नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-33
सुबह चार बजे उठ गये,नित्यकर्म करके मैयाके घाटपर गये।दूरसे देखके ऐसा लग रहा था,मानो पिघली हुई चांदीका प्रवाह बह रहा है।आकाशमें चंद्रप्रकाश का चांदीका प्रवाह और धरतीपर अपनी नर्मदामैया वही रूपेरी साडी पहनके इठलाती लहरोंरूपी हसीं के फूल खिलखिलाती जा रही है।
हलकी गुलाबी थंड थी।मैयाजल हाथमे लेकर प्रथम उसको प्रणाम किया।पाद स्पर्शम क्षमस्वमे।क्षमा प्रार्थना करके सिढीपे बैठतेही एक थंड शिरशिरी सारे शरीरमे दौडती चली गयी।बाप रे!कितना थंडा पानी,फिर एक दुसरीपर लोटेसे पानी डालतेही थंडी भाग गयी।सचैल स्नान करने लगे,तबतक पुरबसे उषादेवीने दस्तक दे दी,अरूणोदय हो रहा है।महाराजा भास्कर पधार रहे है।फिर उनके सन्मानमे अर्घ्य देके प्रणाम स्वरूप गायत्रीमंत्रपठण करके हम आश्रम वापस आ गये।
पुजा आरती करके श्रीसाईश तथा भक्तराज महाराज का दर्शन लिया।नानीजीने दिया चाय लेके नाना-नानी को नमस्कार करके उन्होने दिया हुआ आशिर्वाद दिलमे संभलके रखा और साश्रू नयनोंसे नर्मदे हर करके हमारी विनोबा एक्सप्रेस परिक्रमाकेलिये चल पडी।नर्मदे हर!
सुबहके सात बजे थे।मैया किनारेसे चलना शुरू किया मगर कल ओंकारेश्वर डॅमसे पानी छोडनेके वजहसे किनारेपर दलदल हुई थी किचडमे चलना कठीण था बूट परदूसरे किचडके बूट तैयार हो गये।इसलिये रेल्वे ब्रिजके पास उपर चढ गये,कच्चे रास्तेसे एक दो बार रास्ता चुक गये आखिर एक छोटीसी चढाई चढके कटारा गांवमें पहुँचे तब साडेआठ बजे थे।श्री.शोभाराम पटेलजीने बुलाया,नर्मदे हर!
चायराम(हर पदार्थ के आगे राम लगाके बोलने की प्रथा है रेवाखंडकी)लेके आगे चले,आशाताई के पास काठीमैया नही थी,पटेलभाईसाबने दे दी,चलनेमे आसानी होती है।
कटारासे एक खाई उतरके अलीबुजुर्ग जाते समय पुनःरास्ता भूल गये,एखाद कि.मि.पिछे आके चलना पडा,रास्ता कठीण था एक दो छोटेखानी खाई,नाले क्रॉस करके अलीबुजुर्ग,टोकसर होते हुए गोमुख आश्रम पहुँचे तब दोपहरके 12-30 बजे थे। आतेही महाराज बोले हाथपैर धोके प्रथम भोजनप्रसाद पावो बादमे बाकी काम।नर्मदे हर!
दाल-बाटीराम,कढ़ी-चावलराम,टोमॅटोराम सुंदर भोजन।यहॉं एक गंमत हो गयी,परोसने वाले महाराज परोसते बोले महापुरण,मुझे लगा पुरणपोळी वाला पुरण बनाया है,मैने मांगा मुझे चाहिये महापुरण।आश्रमवासी महाराज हसने लगे बोले,मैया!महापुरण मतलब आपका मराठी पुरण नही,महापुरण मतलब अब भोजन पुरा हो गया अब और कुछ नही मिलेगा।नर्मदे हर!परिक्रमामे कितना कुछ सिखनेको मिलता है।
एक रूम मिल गयी,आसन लगाके विश्राम किया।शामको मैयाके घाटपर गये।यहॉं मैया विशालस्वरूप है।मंदिर परिसरमे एक कुण्डमे गोदावरी प्रकट है।घरसे इतनी दूर हमारी नाशिक त्र्यंबकेश्वरकी गंगागोदावरीके दर्शन हुए।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-34
सुबह छे बजे आगे चलना शुरू किया।पीतनगर,कांकरिया,जंगल,खेत पार करते रावेर पहुँचे।यहॉं भारतवर्षका एक धारातीर्थ है।यहॉ पहिले बाजिराव पेशवाजी का उत्तरकी मुहिम पर जाते समय लू लगनेसे देहांत हुआ था।The great maratha Shrimant Bajirav Balaji Bhat प॑तप्रधान पेशवा,बीस सालकी उमरमे पेशवा बने,बीस साल पेशवाई निभायी,36लढाईयां लढी सारी जिती,एकभी हार नही,दिल्लीके तख्ततक अपना धाक जमाया।त्रिवार वंदन।
रावेरमे नर्मदातट पर समाधी है।दर्शन करके थोडी देर बैठे राऊजी(पेशवा को सारे राऊ पुकारते थे)को याद करते,सबकी ऑंखे नम हो गयी थी।भगवानने उनको थोडा और समय दिया होता तो भारत का भविष्य उज्वल होता मगर....हम कम नसीबवाले।नर्मदे हर!
आगे खडकमैयामे पानी ज्यादा था इसलिये थोडा दूरसे जाना पडा।खेडी पहुँचते पहुँचते एक बज गया था।भूक बहुत लगी थी।मैया कहॉं किया है भोजनप्रबंध?मनका विचार पुराभी नही हुआ तो कवडाजी पवॉंर की माताजीने पुकारा,नर्मदे हर!आओ मैया,तनीक बैठो कुछ भोजनपानी पाओ,धूप तेज है,विश्राम करो फिर जाना आगे।मैया तेरी लिला अगाध है।एक क्षणभी आप अपने बच्चोंको तकलीफ होने नही देती हो।नर्मदे हर!
भोजनप्रसाद पाके विश्राम किया,दो बजे थंडगार मलईलस्सी पिके पवॉंर परिवार को नर्मदे हर करके आगे चल दिये।
खेडीमे खडकमैयापर छोटा ब्रिज है,पार करके किनारेके शॉर्टकटसे पगदंडीसे चलके सांगवी के बाद एक पेड के निचे बैठे थे।खेतसे काम करके वापस जानेवाली संजूबाई लेवा और उसकी सहेलियां मिली,संजूबाईने बकावॉंमे उसके घर आज रहनेकेलिये बुलाया।नर्मदे हर!आज बहुत सारे परिक्रमावासी बकावॉंमे रूकेंगे,मैया किनारेके सिताराम आश्रममे भीड होगी।मैया ये जानती है इसलिये हमारेलिये उन्होंने संजूबाई को भेजा था।नर्मदे हर!
संजूबाईका बडा परिवार है।बडे प्रेमसे स्वागत हुआ।स्नान,कपडे काम हुआ,आरती के बाद दाल-बाटी का स्वादिष्ट भोजन हुआ।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-35
बकावॉं गावमे नर्मदामैयाके प्रवाहमे मिलनेवाली छोटी बड़ी शिलाओंसे शिवलिंग बनाए जाते है।भारतभरमे शिवमंदिरमे स्थापना केलिये यहींसे शिवलिंग लेके जाते है।इस शिवलिंगकी स्थापना करनेकेलिये विधीविधान की आवश्यकता नही होती क्योंकी भगवानजी स्वयं नर्मदाके हर कंकरमे वास करते है ऐसी मान्यता है।नर्मदे हर!
सुबह नित्यकर्म करके स्नानके लिये मैया घाटपर गये।संजूबाईके घरसे बहुत निचे उतरनेके बाद सिताराम आश्रम,उससेही आगे निचे मैया है।स्नान,अर्घ्यदान करके वापस आकर आरती करके चाय लिया और पुनः पधारनेका आश्वासन देके संजूबाई के परिवार को नर्मदे हर किया।मैने आश्वासन पुराभी किया दुसरी परिक्रमामे मेरी सात सहेलियोंके साथ उनके घर रूकी।सेवाभावी परिवार है।नर्मदे हर!चार कि.मि.आगे मर्दानागांव है।ये ऐतिहासिक मोरध्वज राजाकी राजधानी थी,घरोंके दरवाजे खिडकीयोंपर किया सुंदर नक्षीकाम इतिहासकी धरोहर होनेकी निशानी दर्शाती है।
मर्दानामे रेवाराम मंडलोई दुकानदारने जलपान करवाया और सबको कुछ लिमलेटकी गोली,टॉफी,दी।नर्मदे हर!
यहॉ मेरे भैया(बाबा)को उनके व्होल्टास कंपनीके सहकारी श्री.ओक,श्री.व सौ.वझे मिल गये।मित्रभेट सबको आनंद दे गयी।नर्मदे हर!
मर्दानामे मैया किनारे एक टेकरीपर आश्रम है।शिवजीका छोटासा मंदीर,परिक्रमावासीओं केलिये ठहरनेकी भोजनकी व्यवस्था है।
नगांव के बाद आया भट्यानबुजुर्ग वा तेलिभट्यान।मैया किनारे सियारामबाबा रहते है।बडे बुजुर्ग संतमहात्मा है।उमर सौसाल के उपर होगी,किसीको मालूम नही।सिर्फ एक लंगोटी बांधते है,बारा महिने हर मौसममे ऐसेही रहते है।सारा शरीर विभूतिचर्चित रहता है।त्रिकाल मैयास्नान करते है।स्नान करके जैसे सिढ़ियॉं चढने लगते है अपनेआप शरीर विभूतिचर्चित हो जाता है।अपने कमंडलूसे पिपलसे लेकर सारे पेडपौधोंको पानी देते आते है फिर भी कमंडलू जलसे भराही रहता है।आश्रममे एक बातीवाले बहुत पुराने स्टोव्हपर एक बर्तनमे चाय होती है,जितनेभी परिक्रमावासी हो सबको उनका जो पेला होगा वो भरके चाय खुद अपने हाथोंसे देते है मगर स्टोव्हपरके बर्तनमेकी चाय खतम नही होती।ये दोनो चमत्कार मैने मेरी प्रत्येक परिक्रमामे देखे है।बाबा हरएक परिक्रमावासीको खिचडीकी सामग्री,चिनी,बिस्कीट,असली गायके घीसे भरी एक डिब्बी,अगरबत्ती,माचिस देते है।दक्षिणा के तौर पर किसीने पैसे दिये तो सिर्फ दस रूपयेही लेते है।उनके रजिस्टरमे सबके नामपता लिख लेते है।और एक हमारा अनुभव।हम स्नान करके कपडे सुखाने डालके बाबाजीके पास बैठे थे,आज बहुतसारे फल जमा हुए थे बाबाजीने खद सारे फल काटके एक बडे पाटीमें एकत्र करके सबको भरपूर दिये हमने खा लिये,बाबाजीने वापस सबको दिये हमने एक प्लास्टिक थैलीमे रख दिये बादमे खानेकेलिये।यथावकाश हम आगे चल दिये।3-4कि.मि.जानेके बाद धूपकी वजह पेडके बैठे मुझे फलोंकी याद आयी लगा,केले,पपिता अमरूद वगैरे फल अबतक खराब हो गये होगे।थैली खोलके देखा,सारे कटे फलके टूकडे जैसे के तैसे मानो अभी अभी काटे है ऐसे थे।न केले के टूकडे काले पडे थे न पपितेके टूकडे खराब हुए थे।संत महात्माका हाथ जो लगा था,उनके प्रेमरसमे लिपटे टूकडे थे वो।बडी श्रद्धा खुशीसे हमने वो प्रसाद पा लिया।नर्मदे हर!
2011मे मैयामे बड़ी बाढ़का खतरा था,सायरन बजा था,सबको गांव छोडनेकी चेतावनी मिली थी,लोगोने बहुत कहा बाबा चलो,मगर बाबा नही गये सारा गांव खाली हो गया,बाबा वही पिपल तले रामायणका पाठ करते रहे।सुबह पानी उतरनेके बाद गांववाले वापस आ गये डरते डरते की बाबाजी का क्या हुआ होगा?देखा,बाबा वही खडे पाठ कर रहे थे।हर्षोल्लाससे सारे दौडके बाबाजीके पास पहुँचे।बाबा बोले,मैया आयी रामजीके दर्शन किये और चली गयी।नर्मदे हर!सियावर रामचंद्र की जय!
रामायण रखे झुलेकी दोनो तरफसे पानी ऊपरतक चढ़के उतर गया था घाटकी सिढ़िया दोनो तरफ गिली थी।ये सियारामबाबाजी की तपस्या थी।नर्मदे हर!
हम ससाबड पहुँचे।रहननेका ठिकाना चाहिये था।हमारे नाशिककी एक साध्वी भारती ठाकूर यही आजुबाजुके गांवोंमे सेवाकार्य करती है,उन्होने परिक्रमा की है,उनको फोन लगाया।उनकी एक सहकारी सौ.आरती चौहान ससाबडमे रहती है,उसके घर गये।आरतीका मायका महाराष्ट्र के दिग्रजका है।आरती बहुत खुश हो गयी,उसके मायकेवाले जो आए थे।सहर्ष स्वागत हुआ।
कल रात तेलीभट्यान के आगे गोधारी आश्रममे एक परांजपे नामकेही बुजुर्ग परिक्रमावासी को देवाज्ञा हुई थी,भारती उधर गयी थी।नर्मदे हर!परांजपेजी कैलासवासी हो गये,पुण्यवान आत्मा।वो परांजपे थे रिश्तेदार नही थे मगर सगोत्र थे,मैने आरती के घरके बाहर उनके नामसे स्नान किया।नर्मदे हर!

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-36
सौ.आरतीको नर्मदे हर किया और आगे चलना प्रारंभ किया।आरतीके ससुरजी श्री.अमरसिंग चौहान बहुत दूरतक हमारे साथ आये,एक शॉर्टकटके रास्तेसे हमे ले गए,ताप्तीनाला पार करनेमे मदत करके वापस चले गए।नर्मदे हर!
सात बजे अमलाथामे श्रीराम मंदिरमे दर्शन करके पुजारी श्री.संतोष जोशीजीके घर चाय लेके आगे चले।साडेआठ बजे लेपागांवमे दूध लिया।भारती ठाकुरजी इसी गांवमे स्कूल चलाती है,उसके आश्रमका नाम है,रामकृष्ण शारदा मिशन।भारतीजी की यहॉं भेट हो गयी।बड़ा शैक्षणिक,पुनर्वसन कार्य चल रहा है।नर्मदे हर!
मरकटी संगम,वेदासंगम वेदामैयापर बडा ब्रिज है।हायवे पर आनेके बाद आदर्श हॉटेलमे पोहे और मही(गोड ताजे ताक)नास्ता किया,नारायणजीने सिर्फ पोहेके पैसे लिये।उनका बेटा शिवम के साथ कॅरम खेलनेका आनंदभी लिया।
माकडखेडामे घाटकी सिढ़ियोंपर संतश्री डोंगरेमहाराज ट्रस्टकी तरफसे परिक्रमावासीयोंको सदाव्रत दिया जाता है।मैया किनारे खेतोंको पानी देनेवाली मोटरे,वायर्स,पाईप्स की वजहसे किचडमे चलना त्रासदायक रहता है।
नागेश्वर मंदिर कठोरामे दर्शन करके बैठे।यहॉं पुणेमे रहनेवाला सॉफ्टवेअर इंजिनियर लडका गणेश भोकरे और महाराष्ट्रीय संन्यासी संतोषगिरी महाराज मिले संतोषगिरी पुर्वाश्रमी का दादर मुंबईमे रहनेवाला संतोष पवार था।उसने बिनादुधका जिसे वह कालीमहारानी कहते है,दिया।मैयाजलमे थोडी देर खेले।एक घंटा रूककर आगे चलना शुरू किया।माकडखेडासेही मैयाके उत्तरतटपर मंडलेश्वर,राजराजेश्वर,महेश्वर आदि दिखते है।इस सारे परिसरमे मैयाका शांत विशाल नीलश्यामल सुंदर स्वरूप आंखोंको दर्शनसुख देता रहता है।नर्मदे हर!
आगे एक छोटी पगदंडीसे चलके छोटी चढाई चढके तुवरके खेतसे निचे उतरे,वहॉं एक किचडभरा नाला एक दुसरेको सहारा देते कैसा तो पार किया,थोडा पानी था नालेमे उसीसे पैर धोके बुट पहन लिये।चढाई चढी मगर सारा बबूलका जंगल रास्ता क्या पगदंडी भी नही थी।इधरउधर ढुंड़ते रहे।दुसरी ओरसे संतोषमहाराजने हमारी आवाज सुनी और वो आ गया,फिर उसके पिछे पिछे चलते हम बडगांव पहुँचे।श्री.राधेश्याम पाटिदारजी के घर फ्रेश होकर आदरातिथ्य स्वीकार करके आगे चले।बडगांव एकदम स्वच्छ गांव है,गांवकी गलियॉं सिमेंटकॉंक्रीटसे बांधीहुई,नाली एकदम स्वच्छ।वापस मैयाकिनारे आकर हरियालीके गालिचा कालीनपरसे चलनेका लुफ्त उठाते शालिवाहन आश्रमके घाटपर पहुँचे।
सुर्यास्तकी लालिमासे नीलश्यामल मैयाका रूप औरभी निखर रहा था।मानो मैया सुनहरी साडीका पल्लू संवर रही है।उधरसे उठके आश्रममे जानेका मनही नही कर रहा था।आखिर उसको समझाबुझाकर उठ गये।
शालिवाहन आश्रममे आकर बरामदा सदृश हॉलमे आसन लगाया।नर्मदे हर!

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-36
परिक्रमा उठानेके बाद आज पहिलीबार बरामदेमें बहुतसारे लोगोंके बिचमे सो रहे थे।सारेही बहुत थकेमांदे थे।और कुछ लोगोंका खर्राटे लेना शुरू हो गया।इतने जोरसे की वहॉं निंद आना तो छोडो लेटना मुश्कील?नामुमकीन था।हमने अपने आसन उठाये और दूर मैयाकिनारे के पास पिपलवृक्षतले बिछाए।नर्मदे हर!
कार्तिक महिना,शरद ऋतु,मौसम बड़ा सुहाना था।हवा शुद्ध सात्विक,सारी सृष्टि हरीभरी प्रसन्न चैतन्यमयी सुंदर थी।
आसनपर लेटे लेटे मेरी नजर उपरकी तरफ गयी।पिपलवृक्ष मुझे उर्ध्वमूल अधःशाखा ऐसा लगा।उसकी ज़डे अनंतमे पसरी पडी है,मेरी दृष्टिक्षेपमे वो नही आ रही।मै इधरसे उधर तक देखने लगी और ऐसे लगा की हरएक शाखापर बहार आयी है।पकके तेजस्वी हुए छोटे छोटे खिरनीके फल सारे आकाशभरमे बिखरे है।आश्चर्यसे भरी दृष्टिसे देखते देखते मेरी नजर निचे आयी तो अहो आश्चर्यम!लगा,निचेभी वैसाही आकाश है।हजारो तारे यहॉंभी चमक रहे थे।अरे!ये तो मैयाका जलदर्पण है।ऐसा दर्पण मैने कभी देखाही नही था।आकाशके तारकापुंज अपना प्रतिबिंब इस जलदर्पणमे निहार रहे थे।पवनका झोंका आतेही जलपर शिरशिरी आ रही थी और वो प्रतिबिंबभी थंडसे थरथरा रहे थे।अप्रतिम प्रभुदर्शन था।
अरूणोदय होने लगा,पुर्वा उषाके स्वागत के लिये सुनहरा केशरी रंग बिखेरने लगी।तब तारकाओंको लगा की सूरजचाचू पुछेंगे,अभीतक यहॉं क्या कर रही हो?इसलिये एकएक चांदनी गायब होने लगी।मुझे पताभी लगने न देते सब प्रकाशके परदे के पिछे चली गयी।
मेरे सामने बह रही थी नर्मदामैया।रातके अंधेरेमे ढ़का हुआ वो अद्भुत रूप सुर्यप्रकाशने सोनेरी भरजरी साडीकी घडी खोलने जैसा खोलके मेरे सामने किया।अब कैसे वर्णन करूं उस रूपका?योग्य शब्द नही सुझ रहे।परंतु इतना समझमे आ रहा था की इस दृश्यका कण कण जाग रहा है।मेरे आजुबाजू के सारे वृक्ष सो के उठकर ताजा हो गये है।उनका हर पत्ता हवामे उड रहा है।हर एक शाखामें नया जीवन पनपने लगा है।
मैयाके अति शुद्ध जलको भी स्फुरण चढा है।प्रत्येक लहर दुसरीको धक्का देते गीत गाते आगे जा रही है।मछलीओंको भी किसीने बताया की सुर्योदय हुआ है,तो वो भी क्षणिक उपर आके देखके वापस मैयाकी गोदीमें छिप रही है।
मुझे लगा,मैयाकिनारेकी रेत का हर एक कण जिवित हो उठा है।अगर मै उनसे बात करूं तो वो भी मुझसे बात करेंगे।शालिवाहन राजाका पराक्रम,उसने मिट्टीके सैनिक पुतलोंमे कैसी जान डाल दी और शक हुणोंका पराभव करके शालिवाहन शक शुरू किया,ये इतिहास बताएंगे।
यहॉंके तपस्वी लोगोंके बारेमे,उनकी तपस्या के बारेमे बताएंगे।साधुमुनियोंके चलनेसे पवित्र हुई ये रेत मुझे उन पवित्र पुण्यात्मा ऋषिओंका नर्मदा पर्यटन वर्णन करके बताएगी।ये मंदिरकी दिवार भी बोलेगी,ये शिखर परिक्रमावासी तापसोंका गीत गाने लगेगा।
ये चैतन्य कैसे निर्माण हुआ?की प्रारंभसेही है?और एकदम संस्कृतके पढ़ाईके वक्त पाठ किया सुभाषित याद आया।
यच्च किश्चित जगत सर्वम दृश्यते श्रूयतेऽपिवा अन्तर्बहिश्यच तत्सर्वम व्याप्य नारायणःस्थितः।हरिरेव जगत।
जो भी अंदर-बाहर दिखता है,सुननेमे आता है वो सब नारायणसे व्याप्त है।हरिसेही सर्व जग भरा है!

तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-37
आज आगे जानेवाले नही थे।नित्यकर्म,चायपानी के बाद घाटपर स्नान करने चले गए।यहॉं मैया विशाल और स्वच्छ है।सामने महेश्वर दिखता है।वहॉं पहुँचनेमे और एक-देढ महिना तो लगेगाही।सचैल स्नान करके आनेके बाद आज धोबीघाट खोला,सारे कपडे शाल चद्दरेभी धो डाली।आश्रममे काम करनेवाली माताजी को भोजनप्रसाद बनानेमे मदत की।भंडारी भाईसाब मराठी है।सारी बातचित मराठीमे हो रही थी।हसते खेलते भोजन हुआ।विश्राम के बाद आजुबाजुके बच्चोंके साथ लगोरी खेलते बचपन की यादे ताजा हो गयी,बडा मजा आया।बच्चेभी बहुत खुश हुए,कभी कोई बडे,परिक्रमावासी ऐसे उनके साथ खेले नही थे।
शामको मैयामे दिप प्रदान करनेमेभी बच्चोने हिस्सा लिया रातके अंधेरेमे मैया दिपोंकी सोनेरी किनारवाली काली चंद्रकला पहनके ठुमकत चलनेवाली नवयौवना जैसी लग रही थी।नर्मदे हर!
रातको सिर्फ हम लोगही थे।कोई नया परिक्रमावासी नही आया था।तो दोपहरमे बची रोटीके घी और गुड डालके लड्डू बनाए साथमे थोडी खिचडी,हो गया काम।
भोजनके बाद आश्रमकी माताजी शांताबाईने सुंदर नेमाडी लोकगीत गाये,अंजूवहिनी(मेरी भाभी)और स्नेहलने मराठी भजन,गीत सुनाए।ऐसे सुंदर दिनक्रम की सांगता हो गयी।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-38
सुबह 6-30 को सबको नर्मदे हर बोलके आगे चलना शुरू किया।बोथुगांवमे भीमसिंग चौहान के घर चाय-बिस्कीट लिये,उनका बेटा कृष्णसिंग सिव्हील इंजिनिअर हुआ ये समाचार उन्होने बड़ी खुशीसे दिया।नर्मदे हर! भीलगांवमे करणसिंगने खेतमे जलपान करवाया,आगे परिक्रमा पथसे आगे जाके ढालखेडा गांवमे पहुँचे। एक पेड के निचे विश्राम करने बैठे थे वहॉं दिनेश ताटलेजीने चाय लाके दिया।सहस्त्रधारा जानेकेलिये पुछा तो बोले,अभी खेतोंमे पानी भरा होता है रास्ता नही है और उत्तरतटके जलकोटीसे दर्शन अच्छे होते है।इसलिये आगे प्रस्थान किया।साडेदस बजे बलगांवमे भुतेश्वरनाथ मौनिबापू आश्रम पहुँचे।
बापू यहॉं आनेके पहले ये जगह विरान थी।लोग यहॉं आनेसे डरते थे,क्योंकी यहॉं भूत-पिशाच्य है ऐसा लोकापवाद था।
मौनिबापू गुजरातके नवेगांवके बड़े ज़मींदार थे,मगर एक दिन सारा दान करके साधु बनकर यहॉं आ गये।मैया किनारे ये भूतेश्वरनाथका पुराना मंदिर है।बाजूमे एक जगह चार खंबे गाडकर चारपाई जैसा आसन बनाकर बापू उसपर रहने लगे।आजभी वही रहते है,धूप हो या बारिश या थंडी बारा महिने वही रहते है।आ
मैयापर घाट बंधा हुआ है।आश्रमकी गोशाला है,भोजनगृह है,परिक्रमावासी,साधुसंतोंके लिये हॉल,रूम बांधे है।बडे बडे पेड,बाग-बगिचा है।बहुत अच्छी व्यवस्था है।नर्मदे हर!
हमने घाटपर जाके स्नान किया,अर्घ्य देनेकेलिये मैने हाथमे जल लिया तब मेरे हाथमे एक छोटासा लालरंगका कंकर आया,दिखनेमे बैठे हुए हनुमान जैसा है,आज शनिवार है,मारूतीका दिन।मैने ये मैयाका प्रसाद मेरे देवघरमे रखा है।
भोजनप्रसादका समय हो रहा था,एकदमसे बापू कहीसे आ गये,हमे देखकर बोले आज जाना नही यही रहना,अभी भोजनप्रसाद पालो,विश्राम करो शामको आरतीके बाद बोलेंगे।और जैसे आए वैसे झटसे गये भी।हम हक्केबक्के रह गये।एक काली घुटनोंतक लुंगी पहने दाढ़ी जटाभार,तेजस्वी पिंगट नेत्र,हाथमे लंबा मोटा दंडा स्वरूप स्मशानवासी सदाशिव जैसा।प्रणाम करना भी हम भूल गये।जैसे के वैसे खडे रह गये वो गये उस तरफ देखते।नर्मदे हर!क्या दर्शन था!
हम तो भोजनके बाद आगे जानेवाले थे मगर इस आज्ञा का उल्लंघन करना हमारे बस की बात न थी।
आश्रममे एक गाणगापुरके साधु जयंतगिरी महाराज ठहरे हुए थे।गाणगापुर महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमापरका दत्तक्षेत्र है।भोजन प्रसादके बाद जयंतगिरी महाराजके साथ थोडा सत्संग हुआ।उन्होने उनके परिक्रमाके अनुभव बताए।
हमने हमारा सामान एक शेडमे रखा था।एक आदमी आया और बोला आपको बापूने खोलीमे रहनेको बोला है,आप चलो।हम सॅक उठाने लगे तो बोला मै आपका सामान उठाता हूँ,आप उठाएंगे तो बापू मुझे डाटेंगे।नर्मदे हर!आज पुनः प्रत्यय आया,आपका जैसा जीवनमान है(लाइफ स्टाइल)वैसाही मैया आपको परिक्रमामे रखती है।मैया तेरी लिला अगाध है।नर्मदे हर!
शामको गोशाला देखी।एकदम स्वच्छ,हवादार,हरएक गायकेलिये पर्याप्त जगह।घासभी साफसुथरी बारीक कटी हुई।पानी पिनेकी टंकीभी स्वच्छ धुली,स्वच्छ जलसे भरी थी।बाग-बगिचा सुंदर।
आरती भोजनके बाद बापूने सबको बुलाया।एक अकबर-बिरबल की कहानी सुनायी,है है है,है है नही,नही नही है और नही नही नही।इस प्रश्न का उत्तर दो।नर्मदे हर!कौन देगा उत्तर?मै तो कल बताऊंगी ये पुरी कहानी।नर्मदे हर!
. क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-39
बलगांवसे सुबह चलना प्रारंभ किया,साथके कुछ लोग आगे चले गये कौनसे रास्तेसे गए समझमे नही आया।एक गांववालेने बताया,मैया किनारेसे शॉर्टकट है,इसलिये हम तुवरके खेतसे जाके मिट्टीके खदानमेसे धूल मिट्टीका स्नान करते करते मैया किनारे पहुँचे।बडे बडे पत्थरोंका खडकाळ किनारा,बबुलका जंगल,उसमेसे एक नाला मैयामे समां रहा था।दोनो तरफ पत्थर थे मुझे लगा मै आसानीसे छलांग मारके पार करूंगी।और जो होना था वही हो गया,मै फिसलकर धडामसे गिर गयी अच्छा हुआ पिठपर सॅक थी नही तो फ्रॅक्चर होना निश्चित था।नर्मदे हर!कपडे सॅक किचडमय हो गये।सम्हलकर थोडे आगे जाके मैयाजलसे सफाई अभियान चलाया।वहॉ एक मराठी हमारे नाशिक त्र्यंबकेश्वरके रहनेवाले बहुतबार परिक्रमा किये हुए महाराज मिले,थोडीदेर हमारी खटपट देखकर आगे निकल गए।मुझे मेरे साथीओंपर बहुत गुस्सा आया था।भला ऐसे कोई जाता है क्या आगे?नर्मदे हर!फिर मनको समझाया,खुदका रास्ता खुदकोही चलना होगा,दुसरोंसे अपेक्षा नही करनी चाहिये।नर्मदे हर!
आगे जाके किनारा छोड उपर खेतमेसे पगदंडीसे चलकर अकबरपुरा गांवसे साटक मैया किनारे पहुँचे।पानी ज्यादा नही था,फिरभी बूट तो निकालने पड़े।पार होके खलघाट(खलबुजुर्ग)गांवके राममंदिर पहुँचे।सॅक रखकर मैया घाटपर जाके प्रणाम करके हाथ-पैर धोतेही सारी थकान भाग गयी।नर्मदे हर!श्रीरामजी के दर्शन करके भोजनप्रसाद पाया।यहॉं सबकी भेंट हो गयी।सचमुच हम आए वह शॉर्टकट था,इतना होकेभी हम सबके पहले पहुँचे थे।थोडा विश्राम करके आगे चल पडे।नर्मदे हर!
गावसे मुंबई-आग्रा हायवेपर आ गये।रास्तेकी दुसरी तरफ बालाजी मंदिर है।सुंदर निसर्गरम्य स्थान है।दर्शन करके जलपान करके आगे चले।बालाजी मंदिरमे धर्मशाला है,भोजनप्रसादकीभी व्यवस्था है।मगर हम नही रूके।खलटाका गांवमेसे चल रहे थे एक छोटीसी घाटी चढके गांवके उपरके भागमे आ गये।रेवाशंकर पटेलके घरके ओटेपर बैठे,उन्होने सहर्ष स्वागत किया,मिठी छाछ पिलायी।
शामके चार बजे थे हम बहुत थक गये थे।पटेलजी बोले,आगे जंगल है कठीण रास्ता है,चिंचली पहुँचते रात हो जाएगी बेहतर होगा आज आप यही हमारे घर रहो हमेभी मैयाकी सेवाका अवसर मिलेगा।हमनेभी मान लिया।आज आसन खलटाकाके रेवाशंकर पटेलजीके घर।नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-40
पटेलजी आंगनमे हॅण्डपंप था,स्नान पुजा होने तक भाभीजीने पोहे-चाय नास्ता तैयार किया।कल रातको भी खीर पुरी सह बहुत सारे पदार्थ भोजन केलिये बनाए थे।मैयाकी ऐसी सेवाभावी संतानोंप्रति आदर बढ़ता है।नर्मदे हर!
विनोबा एक्सप्रेस आगे निकली।दो कि.मि.के बाद एक टिलेपर एक बाबाजीने बुलाया,नर्मदे हर!आओ मैया तनीक बैठो,कुछ सेवाका मौका दो।नर्मदे हर!गये,एक चारोंतरफसे खुला आश्रम था,धुनी जल रही थी।आजुबाजूमे सुंदर बगिचा था,तुलसीबन था।नीचे बहती सुंदर नीलश्यामल मैयाका दर्शन हो रहा था।महाराजने एक पेय सबको दिया,बोले ये कालिचाय नही है।पिके बताना कैसा है।सचमे अदरक तुलसीके स्वादका अदभूत एनर्जी ड्रिंक था।नर्मदे हर!
अब शुरू हो गयी हमारी परिक्षा।बबुलके जंगलसे रास्ता धुंडते चल रहे थे।अच्छा हुआ कल शामको नही आये।एक खैरा नामका आदिवासी बंधू मिल गया,लकडी लेने आया था।उसको रास्ता दिखानेकी बिनती की और फिर उसके पिछे दो तीन रूंगलिंग टॉप,एक बुधी टॉप(कैलास यात्रामे चलते इस नामके पहाड चढने उतरने पडते है)चढकर उतरे,एक किचडभरा नाला क्रॉस करनेकी कसरत बादमे एक और थोडा ठीक नाला क्रॉस करके हम मिट्टीके खदानमेसे निकलनेवाले कच्चे रास्तेपर आ गये।नर्मदे हर!खैराभाईको नर्मदे हर कहके आगे बढ़े।नर्मदे हर!
चिंचली पहुँचे तब दस बज रहे थे।शिव,हनुमान,नर्मदा मंदिरमे दर्शन करके बैठे।यहॉं परिक्रमावासी रह सकते है,सदाव्रत मिलता है।एक गांववाले बंधूने चाय बनाके दिया।नर्मदे हर!
आगे अदलपुरमे पुराणकालिन शिवमंदिरमे दर्शन करके बैठे।वहॉं एक बुढ़ि 108साल उमरकी अम्माजी रहती है।शिवजीके दर्शन करने रोज एक नाग आता है,अम्माजीके साथ बातचित करता है,ऐसा लोगोंने बताया।नर्मदे हर!
कठोरामे शांतानंद परमहंस अर्थात भिकारीबाबाजीके आश्रम गये।बाबाजी 1980मे महाराष्ट्रमे कल्याणके पास हाजिमलंगमे रहते थे।उनके गुरू स्वामी लक्ष्मणानंद मराठी थे।बाबाजीने हमसे मराठीमे बातचित की।उनकी शिष्या साध्वी अविधानंदजी ग्रॅज्युएट है।चायपान करके थोडा आगे मैया किनारे नर्मदेहर आश्रम गये।यहॉं मैयाके प्रवाहमे ग्यारह स्वयंभू शिवलिंग है इसलिये इस स्थानको ग्यारहलिंगी कहते है।यहॉंके महाराज नर्मदेहर बाबा खलघाटमे बडा मल्टिस्पेशॅलिटी हॉस्पिटल बांध रहे है।गरिबोंकेलिये मुफ्त इलाज होगा।आगे घाटवडियामे बुराडमैया पार करने बडेबडे पत्थरोंपरसे गुजरना पडा।ये विष्णुनदी है,ब्रम्हाजीकी तपस्थली है।आगे नंदगांवके बाद ब्राह्मणगांवमे मनोज राठोडजीके घर भोजनप्रसाद मिला।यहॉं ब्राह्मणगांवका मावा बहुत प्रसिद्ध है।गरम गरम ताजा स्वादिष्ट मावा खानेको मिला।आगे शॉर्टकटके चक्करमे रास्ता भूल गये।अनेक उजाड टेकरीयोंमे भटकते विश्वनाथखेडा पहुँचे।पुरातन शिवमंदिरमे धीरेंद्र कुमावतने जलपान करवाया,भरपूर प्रसाद दिया।कड़ी धूपसे थकेमांदे हम कैसे तो आगे बढ़े क्योंकी विश्वनाथखेडा डुबक्षेत्रमे आनेसे दुसरी जगह पुनर्वसित हुआ है।
चैनपुरा से मारूकी चिंचलीतक दोनो तरफ गन्ना,केले विविध प्रकारकी फसल खडी थी।खेतोंमे दिये हुए पानीसे हवा थंडी होनेसे थोडा आरामसे चल रहे थे।नर्मदे हर!
मारूकी चिंचलीके विजय बिहारीलाल कातोरे ने ॐकारेश्वर से मोरटक्का चलते समय उसका फोन नंबर दिया था मगर आज क्यो मालूम नही फोन नही लग रहा था।ब्राम्हणगांवके मनोज राठोड ने जयंत पटेल का नाम बताया था।मारूकी चिंचली पहुँचे।प्रथम जयंत पटेल का घर मिला,सहर्ष स्वागत हुआ।फ्रेश होनेके लिये गरम पानी,चाय बिस्किट।इतना होनेतक किसीने विजयको हमारे आनेका समाचार दिया,वो आ गया।फिर कल सुबह उसके घर नास्ता करके आगे जाना तय हुआ।
श्रीराममंदिरमे रामायण पाठ चल रहा था,दर्शन करने गये।वहॉं ताटंबरी बाबाके दर्शन हुए।कल पुर्णाहुति है,भंडारा है,प्रसाद लेके आगे जाना ऐसा बाबाजीका आदेश हुआ।नर्मदे हर!
सुर्यास्तके समय मैयामे दिपदान का कार्यक्रम हुआ।नांवमे बैठकर इस किनारेसे उस किनारेतक दिये छोडे जा रहे थे।बडी सुंदर लग रही थी मैया!सुनहरी किनारी भरजरी साडी पहनके इठलाती मैया आगे जा रही है ऐसा लग रहा था।नर्मदे हर!
रातको भोजनप्रसादमे दाल-बाटी,भरपूर असली घी,खीर,मालपुवे बडे थाट थे हमारे।रातको सोनेकेलिये नये गद्दे,रजई।आराम ही आराम था।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-41
जयंत पटेलजीके घर मैयाने हमारी राजेशाही बडदास्त रखी थी।आज थंड बहुत है।इसलिये गरमपानी की व्यवस्था थी।स्नान होतेही गरमगरम चाय बिस्किट मिले।आरतीके बाद मंदिरमे दर्शन करने गये।इस मंदिरमे अपने चारों वेद,उपनिषद रखे है।
दर्शन करके विजय कातोरे के घर गये।बडे प्यार आदरसे स्वागत हुआ।नास्तेके लिये हलवा,पुरी सब्जी,पकोडे और गरम दूध।ये तो भोजनही हो गया।उपरसे दक्षिणा भी दे दी।नर्मदे हर!
मंदिरमे हो रहे हवनमे हमेभी आहुति अर्पण करनेका मौका मिला।ताटंबरीबाबाजींके सत्संगकाभी लाभ मिला।भोजनप्रसाद लेनेका बहुत आग्रह हो रहा था,मगर सुबह इतना नास्ता करनेके बाद भोजन?हमने नाममात्र प्रसाद ग्रहण किया।नर्मदे हर!
जयंत पटेल,विजय कातोरे और कुटुंबिय,तथा सब गांवलोंको अलविदा नर्मदे हर करके भरे मनसे आगे चलने लगे।
खेडी के बाद डेल(देव)मैया पार करके जाते समय रास्ता भूल गये,अनेक टेकरीओंको चढते उतरते कैसे तो नवलाई पहुँचे।वहॉंसे रास्ता मिल गया और लोहारा पहुँचे तब दोपहरके तीन बजे थे।नर्मदे हर!
रामदुलारी आश्रमके बरामदेमे सिर्फ स्री परिक्रमावासी आसन लगा सकती है।नर्मदे हर!हम सब भगिनीमंडल बरामदेमे और बंधूजन आंगनमे ऐसी व्यवस्था हो गयी।
यहॉं कपिला-नर्मदासंगम है।कपीलमुनिजी की तपःस्थली है।बाजुमे एक और आश्रम है।चारबजे खिचडीका भोजनप्रसाद उस आश्रममे मिला।
घाटपर कपडे धोनेका कार्यक्रम किया। रामदुलारी आश्रममे कुछ तरूण साधिकाँए थी।पढ़ी-लिखी,ग्रॅज्युएट।बातचित के बाद उन्होने बडा सहकार्य किया।उनकी खाजगी जगहमे कपडे सुखाने दिये।नर्मदे हर!
रातमे बाजुके आश्रममे लाऊडस्पीकरपर भजन चलता रहा,निंद आनेसे रही।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-42
लोहारासे दो मार्ग है,हम दोनो मार्गोंसे गये है।प्रथम मै झाडीके बाहरसे जानेवाले मार्गसे आपके साथ चलूंगी।बादमे झाडीसे जाएंगे।नर्मदे हर!
सुबह नर्मदास्नान करके पुजाआरती करके विनोबा एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखा दी।आश्रमसे गांवमे जातेही दांए तरफका रास्ता मोहिपूरा,दत्तबाडा होते जाताहै।मगर अभी हम बांए तरफसे पुनर्वसित नया लोहारासे आगे जाएंगे।तीन कि.मि.पर बावडियामे राममंदिरके पास पुजारी राजेश बैरागी हमे जगदीश पाटिदारजी के घर लेके गए।हम छे लोग थे मगर घरकी माताजी सात ग्लास पानी लेके आयी,सबको देके बोली आपके साथकी एक माताजी किधर गयी?आगे गयी कया?माताजी?हम तो तीनही है,चौथी कोई नही।अरे!क्या बोलती हो?अभी आप अंदर आए तब थी आपके पिछेही खडी थी।सफेद साडी,सरपर पल्लू ओढके थोडी बुढ़ी थी,हमने देखा।अब इसे क्या कहे?घरकी बुजुर्ग माताजी बोली,आपके साथ मैया चल चल रही है,हमारे बहूको दर्शन हो गये।नर्मदे हर!चायपानके बाद आगे चले।
फत्यापुरमे हायवेपर आ गये। तक्यापुर के बाद मंडवाडामे अनिल हॉटेलमे दिलीप धाडिवालने नास्ता-दूध के पैसे नही लिये,बहुत कहने के बाद सिर्फ ग्यारह रूपये लिये।
मंडवाडासे बांए तरफसे जाना है।निहाली और कुंडी दो नदियोंके बिचमे एक सुंदर शिवमंदिर है।दोनो नदियोंमे पानी बिलकूल नही था।नर्मदे हर!
मुंडियापुरा,सुराना ये गांव स्वाध्यायी है।योगेश्वर कृषि करनेवाले,पांडुरंगशास्त्री आठवलेजींके अनुयायी है।
हरीबड के बाद बहुत धूप होनेसे थक गये थे।एक पेडके निचे बैठे,प्रशांतके पास आंवलारस और शहद था सबने पानीके साथ थोडा थोडा लिया,एक गांववाले बंधूने खेतमे जानेवाला पाइपसे सबको पानी दिया।कड़ी धूपसे परेशान हम जलामृत पाके शांत हो गये।आगे सिवई गांवके आंगनवाडीके बरामदेमें विश्राम करने बैठे।वहॉं एक बोर्ड था,उसपर परिक्रमावासीओंको सदाव्रत,भोजन मिलेगा ऐसे लिखा था,मगर आसपास कोई घर वा अन्य व्यवस्था नही थी।नर्मदे हर!
तीन बजे आगे चलने लगे।दमदमी के बाद पांच बजे राजपुर पहुँचे।बाजारपेठमे त्रिवेणीमंदिरमे दुसरे दिन एक शादी होनेवाली थी,सजावटका काम चल रहा था इसलिये वहॉं रहना मुमकीन नही था।इसलिये पवनभाई कुशवाहने श्री.पंडीत राजेंद्र व्यासजीके घर हमारी व्यवस्था कर दी।नर्मदे हर!
व्यास कुटुंब आतिथ्यशील है,सुरेश व्यास,माया व्यास सब बहुत अच्छे है।राजामहाराजाओं जैसी बड़दास्त रखी थी।लड्डू भोजनका पकवान था।मैया जो साथमे चल रही थी,थाट होनाही था।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-43
नित्यकर्म,चायपान के बाद आजकी परिक्रमा शुरू हो गयी। नरावला के बाद शहीद भीमा नायक सागर परियोजना के तहत नहरका काम चल रहा था।दानोदमे उप सरपंच सालकराम धनगरके माताजीने बलाया,नर्मदे हर!बहू धनकुंवर इनको 9बेटियॉं और एक बेटा है। क्या बोल सकते है?नर्मदे हर!सबको ताजा दूध दिया।बडे दिलवाले लोग है।
आगे घाट शुरू होनेवाला था,निचे सुंदर वन नर्सरी है।बडा कुंआ था,बारकू जमरे और उनके दामाद शिवा सोळंकी भारेलाने पानी निकालके दिया,मधुर थंड जलामृत,बहुत बहुत अच्छा लगा।उन्होने प्रशांत और स्नेहलको बांबूकी काठी दे दी।घाट कठीण नही था।प्रथम भैरवनाथजीके दर्शन हुए आगे चुनरीवाली दुर्गामाताके दर्शन हुए।जंगलमे ये छोटासा सुंदर मंदीर है।थोडी देर माताके सानिध्यमे बैठे बहुत शांति महसूस हो रही थी।घाट उतरनेके बाद बाटलीफाटा,उपळामे जयेश गुप्ताजी के दुकानमे रूके,साडेबारा बजे थे।भुक भी लगी थी।दुकानके पिछे हॅण्डपंप था,फ्रेश हो गये।तब तक जयेशभाईसाबने कुकरमे खिचडी बनायी,भोजनप्रसाद पाया।विश्राम करके आगे निकले।जयेश गुप्ताजीने पलसुदके वसंत वर्माका फोन नंबर दिया था।धूप बहुत क़डी हो गयी थी।बिच बिचमे बैठते विश्राम करते चल रहे थे।एकलबारा,सिदडी के बाद शॉर्टकटसे फत्यासिदडी आ गए।गोईमैया ब्रिजपरसे क्रॉस कर दी।यही गोईमैया बावनगजासे पाटी जाते समय मिलती है,आगे उसपर एक डॅमभी है।नर्मदे हर!
साडेपांच बजे पलसुद पहुँचे।वसंत वर्माजीको फोन किया और जैसे बताया वैसे बाजारपेठमेसे श्रीराम मंदिरके पास उनके घर पहुँचे।
आशाताई और अंजूभाभी पिछे रह गयी थी मेरी सॅक रखकर मै एक एक करके उनकी भी सॅक लेकर आ गयी,दोनो आज बहुतही थकी थी।नर्मदे हर!
प्रवेश द्वारसेही सामने दिवारपर फोटोसे मेरे सद्गुरू श्रीनारायणकाका ढेकणे महाराजके दर्शन हुए,अहो धन्यभाग मेरे।हमारी प्रथम परिक्रमा उनका आशिर्वाद लेके हमने प्रारंभ की थी 2011मे।आज नही थे,ब्रम्हलीन हुए थे।मगर ऐसे लगा,हमारा स्वागत कर रहे है।जय गुरूदेव!नर्मदे हर!
वसंतभाऊ खुशीसे फुला नही समा रहे थे,मै उनकी गुरू भगिनी जो आयी थी।
बडे हर्षोल्लाससे स्वागत हुआ।वसंतभाऊ की फॅमिली सौ.जयमाला,विकास,तृप्ति सारे बहुत खुश हुए।
स्नान,कपडे सारा काम निपटाके आरतीमे सारे सहभागी हो गये।वसंतभाऊके बडे भाईसाब रतनलालजी के दुकानसे सनकोट आदि आवश्यक चीजे रास्त दरसे खरेदी की।उनका भतिजा मनोजने अंजूभाभीको एक कुडता भी सिलके दिया।बडे थाटका भोजनप्रसाद मिला।नर्मदे हर!
वसंतभाऊने हमारे आगेके मुक्काम की व्यवस्था कर दी,सारे मेरे गुरूबंधू है।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-44
सुबह छे बजे आगे चलना शुरू किया।वसंतभाऊ हमारे साथ दूरतक आये थे।गांवके बाहर हायवे पर आ गये,चल रहे थे पिछेसे आके एक गाडी हमारे पास रूक गयी,हमभी रूक गये।गाडीका दरवाजा खोलके बाहर आयी मेधा पाटकरजी।नर्मदे हर! वो बडवानीसे नंदुरबार जा रही थी।बडी आस्थासे हमारी पुछताछ की,हमे किसी चीज़की जरूरत है क्या,शाल-ब्लॅंकेट कुछ चाहिये? धन्यवाद!नर्मदामैयाके बच्चे इतने प्यारे आतित्थ्यशील है की सब मांगनेके पहलेही मिल जाता है।उनसेही हमारी परिक्रमा निर्घोर,बिनधास्त चल रही है।नर्मदे हर!
मेधाजी चली गयी।वसंतभाऊ भी घरकी तरफ मुड गये और हम आगे चल दिये।बोराली,उमडदा,वझरफाटा ढाबेपर नास्ता-चाय करके आगे चलने लगे।वझरगांवमे एक नदीमैया किनारे मंदिरके पास धर्मशाला बांधनेका काम चल रहा था,परिक्रमावासी ठहर सकेंगे।गांवके बाहर एक खेतके बांधपर बैठे थोडा विश्राम करके आगे चलना शुरू किया।झाकरगांवमे सुश्री कांताबेन त्यागी समाधी मंदीर और विकलांग सेवा ट्रस्ट है।आगे थोडी दुरीपर एक घरमे शेवंतीबाई राठौरने चाय दिया।नर्मदे हर!
निवाली पहुँचे तब दो बजे थे।आज भोजनका कुछ प्रबंध नही हो सका था।बस स्टॅण्ड के पास नारियलपानी,केले,अमरूदसे आजकी पेटपुजा हो गयी।नर्मदे हर! आगे राजा एक्सप्रेस न्युज के हेमंत शर्मा मिले,पहली परिक्रमाके समय वो हमे बडवानीमे मिले थे,उन्होने मुझे पहचाना और रूक गये।उनके साथ ब्युरो चीफ श्री.दीपक जोशी और मार्केटींग चीफ श्री.दीपक जेमनभी थे।उन्होने हमारा गृप फोटो लिया।और आगे मेडियासागमे सदानंदबाबाके मेकलसुता धाम का नाम बताया वहॉं परिक्रमावासी ठहरते है।नर्मदे हर! धूप कड़ी हो गयी थी।बडी मुश्कीलसे चल रहे थे।तलाव गांव जाना था।रास्तेमे शायद हायवेके टोलनाकेका काम चल रहा था।चार बजे तलावगांवमें सरपंच श्री.गंगाराम मंत्रीजीके घर पहुँचे।हमारा भोजन नही हुआ ये समझतेही सौ.पार्वतीने खिचडी बनाके परोसी।नर्मदे हर!
स्नान कपडे आदि काम निपटाके मैयाकी पुजाआरती कर ली।बच्चे जागृति,अनिल,अश्विन बहुत खुश हुए थे,हमसे घुलमिल गये थे।रातको दाल-बाटी का भोजनप्रसाद पाके अंतरात्मा तृप्त हुआ।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-45
. सुबह साडेपांच बजे पार्वतीभाभीजी को अलविदा करके अंधेरेमेंही विनोबा एक्सप्रेस को ग्रीन सिग्नल दे दिया।रास्ता अच्छा था इसलिये टॉर्चके प्रकाशमे चलते दिक्कत नही हो रही थी। खडीखाम घाट प्रारंभ हुआ,सिमेंट कॉंक्रीट का बना रास्ता था।घाट उतरना था,जल्दी जल्दी उतरनेमे बड़ा मजा आ रहा था।घाट समाप्त होतेही एक हनुमान मंदीर और फॉरेस्ट चेकपोस्ट था।आज शनिवार था,मंदिरके महाराज हनुमानजीको शेंदूर(सिंदूर?)का लेपन कर रहे थे इसलिये दूरसेही दर्शन करके आगे चलने लगे।नर्मदे हर!
खडीखामगांवमे प्रवेश किया तब साडेआठ बजे थे।दयालूबाबा नामके साधुमहात्माने नर्मदे हर कहा और चायपानके लिये बुलाया।श्री.बन्सी छिंगोलियाजी के घर ताजा दूध का गरम गरम चाय जिसकी हमे सक्त जरूरत थी।अमृततुल्य चाय!नर्मदे हर!
मोयदामे श्री.दिलीप जाधव-फुलमाळी मराठी बंधूके हॉटेलमे नास्ता किया।वह पैसे नही ले रहा था,हमारे बहुतबार कहने पर थोडे पैसे लेनेको तैयार हुआ मगर वो बिल भी श्री.अरविंद शर्माजीने दिया।नर्मदे हर!
मोयदा-डोंडवाडा बॉर्डरपर फल्यामावलीमे जंतरभाईने जलपान करवाया।रास्तेमे शहादाके रहनेवाले श्रीकांत चौधरी मिले,दक्षिणा देके शहादामे व्यवस्था करनेका आश्वासन दिया।नर्मदे हर!
बारा बजे डोंडवाडामे ग्रामपंचायत कार्यालयमे खेतियाके कृषिविस्तार आधिकारी श्री.संजय जोशी मेरे गुरूबंधूने प्रथम चाय-नास्ता और बादमे रोटी-सब्जीका भोजनप्रसाद दिलाया।दरम्यान पानसेमलके रहनेवाले मेरे और एक गुरूबंधू श्री.वीरेंद्र शुक्लभी केले,अमरूद,शेवफरसाण ऐसा बहुतसारा लेके आ गए।वसंतभाऊने सबको फोन करके हमारे आगमनकी सुचना दे दी थी।गुरूकृपाका ये असर था।सद्गुरू नारायणकाका ढेकणे महाराज मेरी इन सब गुरूबंधुओंसे भेंट करवाना चाहते थे इसलिये हमे मंडवाडा राजपुर पलसुद मार्गे आनेकी बुद्धि हुई थी।नर्मदे हर!
वीरेंद्रभाऊने हम सबकी सॅक्स टेम्पोसे मेलदानाके वृंदावनवालेबाबाजीके राधाकृष्णधाममे पहुँचा दी।सिर्फ पानीकी बॉटल लेके हम आगे चलने लगे।चार बजे पानसेमलमे वीरेंद्र शुक्लाजी के घर पहुँचे।चायपानी लेके आगे चल दिये।साडेपांच बजे मेन्द्राणामे राधाकृष्णधाम पहुँचे।
राजाराम महाराज नागपुरके रहनेवाले है।हमसे मराठीमे बात करने लगे।खेतियाके शहर भाजप अध्यक्ष श्री.लोकेश शुक्ला मिलने आ गए।नर्मदे हर!
स्नान कपडे पुजा आरती के बाद भोजनके लिये महाराजने श्रीखंड मंगाया था।और क्या चाहिये पुछनेपर स्नेहल मजाक मजाकमे बोली,आइस्क्रिम चाहिये।और फिर रातको सत्संगके बाद आइस्क्रिम।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-46
आज तीन बजे उठकर गरमपानीसे स्नान करके तैयार हो गये।आज राजाराममहाराज हमारे हाथों राधाकृष्ण,रंगनाथ,दुर्गामाता,शिवपिंडी और हम सब की नर्मदामैया सबको एक बडी थालीमे रखवाके पंचामृती पुजा करवायी।हरएक को बडी बडी कटोरीयोंमे दूध,दही,शहद,घी,शक्कर(चीनी),केले,अन्य चार फल,चंदन धूप दीप ऐसी परिपूर्ण तैयारी करके दी थी।विविध फूल,बेलपत्र,तुलसीपत्र बहुत बढ़िया। वेदोक्त मंत्रोच्चारोंसे पुजा आरती हो गयी।बहुत प्रसन्न लग रहा था।नुतन वस्त्रांकित रंगी-बिरंगी पुष्प बेल तुलसीसे सुशोभित देव सुंदर लग रहे थे।नर्मदे हर!
पुजाका पंचामृत फल मिक्स करके बडे बडे ग्लास भरके सबको दिया।मधुर प्रसादामृत पाके अंतरात्मा तृप्त हुआ।
पोहे-चाय का नास्ता करके महाराजको प्रणाम करके विनोबा एक्सप्रेस आगे निकली।महाराजभी आज पैदल शिर्डी जानेवाले थे।नर्मदे हर!
गोकुळग्राम,टेमला,मेलन-नीसरपुर पहुँचे।नदीके एक तरफ मेलन और दुसरी तरफ नीसरपुर है।यहॉं झॉंवरी-उमरी-बडगोनी नदियोंका त्रिवेणी संगम है,और बादमे तापीमैयासे प्रकाशामे संगम होता है। यहॉं दो पुराणकालीन शिवमंदिर है।
ब्रिजके पार एक दुकानमे बैठे थोडा विश्राम करने,दुकानदार नर्मदाभक्तने इलायचीके स्वादवाला गरम दूध दिया।नर्मदे हर!आगे चल रहे थे तो दो बैलगाडीवाले भाईलोगोने हम सबकी सॅक्स अपने गाडीओंमे डालके खेतियातक लेके गये,इसलिये हम जल्दी गायत्रीमंदिरमे पहुँचे।गुरूबंधू संजय जोशी आ गए।मंदिरके एक बाजूके रूम्समे स्कूल चलता है,छुट्टी होनेके बाद हमने उधर अपने आसन लगाए।कपडे धो डाले।
दोपहरको गुरूबंधू श्री.दिलीप आरंभीके घर भोजनप्रसाद लिया।दो दिन पहले आशाताईको उनके घर भेजा था,दिलीपभाऊने उनको डॉक्टरको दिखाके ट्रीटमेंट करवायी नये सॅन्डलभी दिलवाये थे।नर्मदे हर!
शामको संजयभाऊके घर जानेसे पहले बाजारमे जाके मेरे बूट दुरूस्त कर लिये,एव्हररेडीकी अच्छी टॉर्च खरीदली।कल महाराष्ट्रमे प्रवेश करना है,रास्ता देखा।
संजयभाऊके पडोसमे नर्मदाष्टक पठण करके संजयके घर भोजनप्रसाद लिया।नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-47
सुबह साडेपांच बजे आगे परिक्रमा चालू हो गयी। पासमेही एक नाला है उसके उपरका ब्रिज क्रॉस करतेही मध्यप्रदेश से हम महाराष्ट्रमे प्रवेश कर गये। कितना अच्छा होगा जब हम इसी तरह एक दुसरेके देशमे जा सकेंगे?हां हम नेपालमे ऐसे जा सकते है।नर्मदे हर!
प्रथम दिलीपजीके रिश्तेदारके घर गये।चायपान हुआ,हमने इतनी जल्दी नास्ता नही करेंगे इसलिये उन्होने बहुत सारे लड्डू,वेफर्स थैलीमे भरके दे दिये।नर्मदे हर!
सुखद थंडी हवा चल रही थी,इसलिये चलनेमे मजा आ रहा था।जल्दी जल्दी चलते रायखेडमे ब्रिजसे सुखी नदी पार कर ली।सुखीनदी जैसा नाम वैसीही थी,पानीकी एक बुंदभी नही थी। सुलतानपुर फाटा के बाद ब्राह्मणपुरीमे एक ढाबेमे चाय दूध लिया साथमे लड्डू वेफर्सका नास्ता किया।
साडेआठ बजे आगे चलना शुरू किया।चाँदसैलीके बाद दर्रा फाटा आया।यहॉंसे दर्रा,धावलघाट,काकरदा,धडगांव मार्गेभी परिक्रमावासी जा सकते है।मगर ये मार्ग कठीण है।
कल मैने मेरे परिचित शहादामे रहनेवाले श्री.ब्रिजलाल पाटीलजीको फोन किया था।उनका फोन आया वो बोले,मै दो गाडियॉं लेके आता हूँ और आपको घर लेके जाके भोजन विश्रामके बाद शामको प्रकाशा पहुँचा दुंगा।मुझे प्रकाशा जल्दी पहुँचनेका मोह हुआ।प्रशांत,अंजूताई सबकोभी पसंद था।मगर संतोषमहाराज गाडीमे नही बैठता इसलिये वो आगे निकल गया।उसके जानेके बाद हमेभी लगा की अबतक गाडीमे कभी नही बैठे अब बैठना उचित नही,पैदलही जानेका तय हुआ।प्रशांत संतोषमहाराजको रोकने आगे गया।और मैयाने हमारी परिक्षा लेने जो प्रलोभन दिखाया उससे हम बाहर निकल आये।नर्मदे हर!
राधे नर्सरीमे गये औरं वॉचमनकी इजाजतसे सबका स्नान हो गया।पाटील भाऊको फोन करके निर्णय बताया,अब वो एक गाडी हमारा सामान ले जानेके लिये ला रहे है।नर्मदे हर!
दर्राफाटा पोलिस चौकीमे बैठे।पाटीलभाऊ आ गये,उन्होने सुत गिरणीके रेस्टहाऊसमे हमारी व्यवस्था की है।सबका सामान और आशाताईको लेके वो रेस्टहाऊस चले गये,और हम पैदल आगे बढ़े।नर्मदे हर!
शहादा शहर पांच कि.मि.दूर था तब रास्तेके दाहिने ओर सुतगिरणीका बोर्ड दिखा,पाटीलभाऊंका बेटा कुणाल हमारी राह देख रहा था।उसके साथ रेस्ट हाऊस गये।आशाताई अपने कपडे धोके आरामसे बैठी थी।एक बडा सूट था दो रूम्सका बडे आरामका।कुणाल वेफर्स,फल लेके आया।आज हमारा व्रत था।सबका कपडे धोनेका कार्यक्रम हो गया।चार बजे चाय,रातको भाऊंके घरसे आयी साबुदाना खिचडी,केले।मैया बहुत लाड करती है हमारे।नर्मदे हर!
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-48
सुबह साडेपांच बजे स्नान पुजा करके विनोबा एक्सप्रेस निकली,शहादा शहरमे जानेकी जरूरत नही थी,रेस्टहाऊसके गेट बाहर दांए ओरसे कच्चे रास्तेसे उंटावत,तिखोरेगांवमे श्री.मोहन पाटील मिल गये।परिक्रमावासी सुतगिरणीके पाससे उंटावतमार्गे तिखोरेगांवमे मोहन पाटीलजीके घर,मंदिरमे मुक्काम करें तो प्रकाशा 15कि.मि.पडता है मतलब 10कि.मि.कम।मोहन पाटीलजीने सबको दक्षिणा दे दी।नर्मदे हर!
साडेसात बजे भादे गांवमे सोशल वर्कर श्री.सुधाकर पाटीलजीने चाय-बिस्किट दिये।नर्मदे हर!साडेनऊ बजे मोठे काथर्देगांवमे सरपंच सौ.इंदुबाई उत्तम शंकरके घर जलपान करके थोडा विश्राम करके आगे चलना शुरू।अब रास्ता अच्छा है मगर कही भी एकभी पेड़ न होनेसे कड़ी धूपसे बहुत बहुत परेशान हो रहे है।प्याससे गला सुख रहा है,बॉटलका पानीभी गरम हुआ था।रास्तेके दोनो तरफ कम पानीपर होनेवाला दादरा(ज्वार)की खेती लहरा रही थी,उतनीही आंखोंको हरी हरी थंडक मिल रही थी।
बारा बजे प्रकाशागांवमे श्री.सुभाष शहा के घर पहुँचे।हार्दिक स्वागत हुआ।फ्रेश होके भोजनप्रसाद,खिचडी,फुलगोबीकी सब्जी,अमरूदका सांबार,जिलेबी बडा थाट था।
विश्राम करके धूप कम होनेके बाद चार बजे चाय लेके प्रकाशा तीर्थक्षेत्र केदारेश्वरके लिये चलने लगे।सुभाषजीने भक्तनिवासके दो रूम हमारेलिये आरक्षित किये थे।नर्मदे हर!
तापीमैयाके किनारे पुष्पदंतेश्वर मंदिरमे दर्शन करके शिवमहिन्म स्तोत्र पठण किया।पुष्पदंत नामके गंधर्वने इसी स्थानपर शिवमहिन्म स्तोत्रकी रचना की थी।ये स्वयंभू स्थान है।बादमे केदारेश्वर मंदिरमे दर्शन किये।प्रकाशा तीर्थक्षेत्रको दक्षिणकाशी कहते है।
रातको भक्तनिवासमे खिचडी और करेलीकी सब्जी भोजन प्रसाद था।आज सिर्फ बीस कि.मि.चलना हुआ था मगर कड़ी धूपके कारण बहुत थक गये थे।अब निद्रादेवी की आराधना।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-49
प्रकाशामे तापी-गोमती-पुलंदा नदियोंका त्रिवेणी संगम है।सुबह पांच बजे स्नान आरती करके आगे जाने केलिये भक्तनिवाससे निचे उतरे।एक मध्यप्रदेश की नर्मदापरिक्रमाबस खडी थी।बसके परिक्रमावासी होशंगाबादके डी.एस.राजपूत और कुसुमखेडाके संतोष पटेल से बातचित हो गयी,उनकी बसका चायपान चल रहा था,हमे भी चायप्रसादका लाभ मिला।दोनो भाईसाबने उनके गांव पहुँचते घर आनेका निमंत्रण दिया।नर्मदे हर!
आशाताई प्रकृतिके कारण ज्यादा चल नही सकती थी इसलिये उन्होने घर वापस जानेका निर्णय लिया।नर्मदे हर!
साडेपांच बजे हम आगे चलने लगे।हायवेपर एक ढाबेपर चाय लिया और आगे चले।नर्मदे हर!
पिसावर,उमद,सदगवाण,भमशाल पिछे छोडके प्रकाशासे 12.5 कि.मि.आगे गुजरात राज्यके निंभोरामे खांडसरी शुगरमिलके पास पहुँचे।9बजे थे,ढाबेपर भरपेट नास्ता करके दूध लिया।अब चलो आगे।नर्मदे हर!
अमलाडमे सुनंदा पाटीलके घर जलपान करके आगे निकलही रहे थे इतनेमे श्री.दिनेश राजभोज जो टीचर थे,उनके घर चाय-बिस्किट लेकर आगे चलने लगे।नर्मदे हर!अमलाडमे श्री.काशिनाथ पटेलजी के घर परिक्रमावासीओंके लिये सदाव्रत,निवास व्यवस्था होती है।पहली परिक्रमामे हमने उनके घर भोजनप्रसाद लिया था।नर्मदे हर!
आगे कनकेश्वर मंदिरमे दर्शन करके बैठे।गर्द वृक्षराजीमे सुंदर स्थान है कनकेश्वर।अमलाडके थोडा आगे एक पेट्रोलपंप है,मनोज शहाका उसके पिछे है कनकेश्वर मंदिर।आज तळोदामे योगेश वाणीजी के घर आज हमारा मुक्काम था।
तळोदाके बाजारसे होते उनके घर पहुँचे।सप्रेम हार्दिक स्वागत हुआ। उत्तम व्यवस्थामे स्नानादि करके,स्वादिष्ट भोजनप्रसाद,गादी गिर्दीके साथ अब निद्रादेवी की आराधना।मैयाकी इतनी कृपा है की सिर्फ चलनेके श्रम है बाकी आराम ही आराम।नर्मदे हर!
क्रमशः
तीर्थजननी नर्मदा परिक्रमा भाग-50
स्नान आरतीके बाद चाय लेके योगेश और राखीको नर्मदे हर अलविदा करके सिर्फ शबनमबॅग,काठीमैया हाथमे लेके टॉर्चके सहारे सुबह सव्वापांच बजे विनोबा एक्सप्रेसने प्रस्थान रखा।नर्मदे हर!
पांच कि.मि.पर मटावलको गुजरात शुरू हुआ वो अश्रावा,हथोडा,लोभाणिफाटा तक रहा।कलसे ऐसाही चल रहा है हर पांच-दस कि.मि.पर गुजरात फिर महाराष्ट्र फिर गुजरात।गव्हाणी फाटा महाराष्ट्र शुरू।सोमावल बुद्रुकगांवमे हॉटेल देवमोगरामे नास्ता किया।आगे कुकुरमुंडा फाटा,देववारील नदीमैया ब्रिजसे पार,नवलगव्हाण फाटा,शिर्वेफाटा,मेंढवड,मोदलवाडा अंदाजे पंधरा कि.मि.चलना हो गया था।अब धूप बोलने लगी थी।आमलपाडाके बाद आया वाण्याविहीरफाटा,दाहिने तरफ दीड दो कि.मि.पर ये वाण्याविहीरगांव है।उस गांवमे श्री.कन्हैयालाल परदेशी रहते है,वो परिक्रमावासी लोगोंकी सेवा करते है,उनके घर निवास-भोजनप्रसाद की व्यवस्था होती है।नर्मदे हर!
रास्तेमे अक्कलकुवाके फॉरेस्टरेंजर श्री.रहासेसाहेब मिले उनके रेस्टहाऊसमे आज हमारी निवास व्यवस्था वो करनेवाले है।योगेशभी हमारा सामान लेके जाते मिला।नर्मदे हर!
अक्कलकुवा शहर पार करके रेस्टहाऊस पहुँचते पहुँचते कड़ी धूपसे परेशान होनेवाले अपने बच्चोंको दाहिने ओरके शुलपाणि झाडीके पहाड साथ दे रहे थे और उनके पिछेसे मैया धीरज रखो कह रही थी।नर्मदे हर! रेस्ट हाऊस का इर्दगिर्द जंगलवाला परिसर देखतेही सारी थकान छुमंतर हो गयी।
फ्रेश होतेही व्यवस्थापक श्री.सुनिल पवारजीने भोजनप्रसादका इंतजाम किया।पुरी-सब्जी,जिलेबी,सुंदर भोजनके बाद थोडा विश्राम करके कपडे धोनेका कार्यक्रम होनेके बाद जंगल परिसरमे टहलने लगे।सुंदर शांत थंड वातावरण,अनेक रंगीबिरंगी पंछी,उनकी किलबिल,मन प्रसन्न हुआ।नर्मदे हर!
चार बजे चाय लेके रहासेसाहेब स्वतः आ गये।बातचित हो गयी।साहेब सुबह पांच बजे चाय लानेवाले है,और हमारा सामानभी गव्हाळी चेकपोस्टपर पहुँचानेवाले है।
आज दोपहरको देरसे भोजन हुआ था इसलिये रातको थंडा फराळ।मगर सुनीलजी गरम दूध लेके आये।नर्मदे हर!
क्रमशः
वंदना परांजपे.

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